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वसन्त भाग-1 — कविता (पाठ 1)

वह चिड़िया जो

केदारनाथ अग्रवाल | CBSE पाठ्यक्रम 2026-27 | संपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं भावार्थ

📜 मूल कविता

वह चिड़िया जो — चोंच मारकर दूध-भरे जुंडी के दाने रुचि से, रस से खा लेती है वह छोटी संतोषी चिड़िया नीले पंखोंवाली मैं हूँ मुझे अन्न से बहुत प्यार है। वह चिड़िया जो — कंठ खोलकर बूढ़े वन-बाबा की खातिर रस उँडेलकर गा लेती है वह छोटी मुँहबोली चिड़िया नीले पंखोंवाली मैं हूँ मुझे विजन से बहुत प्यार है। वह चिड़िया जो — चोंच मारकर चढ़ी नदी का दिल टटोलकर जल का मोती ले जाती है वह छोटी गर्बीली चिड़िया नीले पंखोंवाली मैं हूँ मुझे नदी से बहुत प्यार है।
— केदारनाथ अग्रवाल
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)

प्रस्तुत कविता में कवि केदारनाथ अग्रवाल ने एक नीले पंखों वाली छोटी चिड़िया के माध्यम से मानवीय स्वभाव के श्रेष्ठ गुणों को रेखांकित किया है। चिड़िया संतोषी है—वह दूध-भरे जुंडी के दानों में ही तृप्त हो जाती है। वह एकांत जंगल में बूढ़े वन-बाबा के लिए उन्मुक्त कंठ से मीठा गाती है। वह उफनती नदी की धारा से निडर होकर जल रूपी मोती चुनती है। उसे अपने आत्मसम्मान (स्वाभिमान) पर गर्व है। यह कविता हमें संतोष, प्रकृति-प्रेम, स्वतंत्रता और निर्भीकता से जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

✍️ NCERT पाठ्यपुस्तक प्रश्न-अभ्यास (कविता से)
प्र॰ 1
कविता पढ़कर तुम्हारे मन में चिड़िया का जो चित्र उभरता है उस चित्र को कागज़ पर बनाओ / अपने शब्दों में लिखो।
3 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

कविता पढ़कर हमारे मन में एक छोटी, नीले पंखों वाली, संतोषी, मधुरभाषी और साहसी चिड़िया का सजीव चित्र उभरता है:

  • शारीरिक रूप-रंग: उसका आकार छोटा और नन्हा है। उसके पंख सुंदर चमकीले नीले रंग के हैं और उसकी चोंच नुकीली है।
  • खान-पान और संतोष: वह खेतों में जाकर दूध से भरे ज्वार-बाजरे (जुंडी) के कच्चे दानों को बड़े चाव और स्वाद से खाती है। वह थोड़े में ही संतोष कर लेती है।
  • मधुर गायन और एकांत-प्रेम: वह घने पुराने जंगल (वन-बाबा) में अपने मधुर कंठ से रस घोलकर गाती है। उसे एकांत (विजन) से गहरा प्रेम है।
  • साहसी एवं गर्वीली: वह उफनती नदी के बीच से निडर होकर अपनी चोंच में पानी की बूँद रूपी मोती ले आती है। उसे अपने श्रम और साहस पर गर्व है।
CBSE अंक विभाजन 2026-27
रूप-रंग व नीले पंखों का स्पष्ट उल्लेख1 अंक
संतोषी स्वभाव, खान-पान व मधुर गायन1 अंक
साहस, गर्वीला स्वभाव व नदी से प्रेम1 अंक
प्र॰ 2
तुम्हें कविता का कोई और शीर्षक देना हो तो क्या शीर्षक देना चाहोगे? उपयुक्त शीर्षक सोचकर लिखो।
2 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

यदि हमें इस कविता का कोई अन्य शीर्षक देना हो, तो निम्नलिखित शीर्षक अत्यंत उपयुक्त होंगे:

  1. "नीले पंखों वाली चिड़िया" — क्योंकि पूरी कविता में चिड़िया के नीले पंखों और उसके विशिष्ट गुणों का ही वर्णन है।
  2. "नन्ही संतोषी चिड़िया" — क्योंकि चिड़िया का सबसे प्रमुख गुण उसका संतोषी और स्वाभिमानी स्वभाव है।
  3. "साहसी चिड़िया" — क्योंकि वह उफनती नदी से जल का मोती लाने वाली निडर पक्षी है।

इनमें से "नीले पंखों वाली चिड़िया" सबसे सटीक और सार्थक शीर्षक है।

CBSE अंक विभाजन 2026-27
उपयुक्त मौलिक शीर्षक का चयन1 अंक
शीर्षक के चयन का तर्कसंगत कारण1 अंक
प्र॰ 3
इस कविता के आधार पर बताओ कि चिड़िया को किन-किन चीज़ों से प्यार है?
3 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

कविता के आधार पर चिड़िया को निम्नलिखित तीन प्रमुख चीज़ों से बहुत प्यार है:

  • अन्न से प्यार: उसे दूध से भरे जुंडी (ज्वार) के कच्चे दानों से गहरा प्रेम है, जिन्हें वह बड़े चाव और आनंद से खाती है।
  • विजन (एकांत व वन) से प्यार: उसे विजन अर्थात् शांत और प्राकृतिक एकांत स्थान से बहुत प्यार है, जहाँ वह बूढ़े वन-बाबा के लिए मुक्त कंठ से गाती है।
  • नदी से प्यार: उसे बहती हुई उफनती नदी से अथाह प्रेम है, जिसकी गहरी जलधारा से वह अपनी प्यास बुझाती है और जल रूपी मोती ग्रहण करती है।
CBSE अंक विभाजन 2026-27
अन्न से प्यार का उल्लेख व व्याख्या1 अंक
विजन (एकांत/प्रकृति) से प्यार का उल्लेख1 अंक
नदी से प्यार व जल का मोती लाने का संदर्भ1 अंक
प्र॰ 4
आशय स्पष्ट करो: (क) रस उँडेलकर गा लेती है (ख) चढ़ी नदी का दिल टटोलकर जल का मोती ले जाती है।
4 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

(क) 'रस उँडेलकर गा लेती है' का आशय:

चिड़िया जब पुराने घने जंगल में गाती है, तो वह किसी बनावटीपन या संकोच के बिना अपने हृदय की सारी मिठास और आनंद अपने स्वर में भर देती है। उसका गीत इतना कर्णप्रिय, स्वाभाविक और भावपूर्ण होता है मानो उसने वातावरण में रस (अमृत) घोल दिया हो।

(ख) 'चढ़ी नदी का दिल टटोलकर जल का मोती ले जाती है' का आशय:

चिड़िया किनारे पर बैठकर बहते पानी को नहीं पीती, बल्कि जब नदी जल से लबालब भरी होकर पूरे वेग से बह रही होती है, तब वह निर्भीक होकर नदी की अगाध जलधारा के बीच तक जाती है और पानी की बूँद रूपी बहुमूल्य मोती अपनी चोंच में भर लेती है। इसमें चिड़िया का अदम्य साहस, निडरता और स्वाभिमान प्रकट होता है।

CBSE अंक विभाजन 2026-27
भाग (क) का सटीक भावार्थ व रस घोलने का अर्थ2 अंक
भाग (ख) का सटीक भावार्थ व साहस/निर्भीकता की व्याख्या2 अंक
प्र॰ 5 (कविता से आगे)
कवि ने नीली चिड़िया का नाम नहीं बताया है। वह कौन-सी चिड़िया रही होगी? अनुमान लगाओ और कारण सहित बताओ।
2 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

कवि ने जिस नीली चिड़िया का वर्णन किया है, वह अनुमानतः निम्नलिखित में से कोई एक चिड़िया हो सकती है:

  • नीलकंठ (Indian Roller): इसके पंख चटख नीले रंग के होते हैं और यह भारतीय जंगलों में बहुतायत से पाई जाती है।
  • किलकिला (Kingfisher): यह चिड़िया भी नीले पंखों वाली होती है और नदी के तेज़ बहाव से मछलियाँ व जल पकड़ने में अत्यंत कुशल व साहसी होती है।

कवि की चिड़िया के गुणों (नीले पंख, नदी से जल का मोती लाना) को देखते हुए यह किलकिला या नीलकंठ ही रही होगी।

CBSE अंक विभाजन 2026-27
नीलकंठ / किलकिला का तार्किक अनुमान1 अंक
पंखों व नदी के लक्षणों के आधार पर कारण1 अंक
प्र॰ 6 (भाषा की बात)
‘पंखों वाली चिड़िया’, ‘नीले पंखों वाली चिड़िया’ — रेखांकित शब्द विशेषण का काम कर रहे हैं। कविता में प्रयुक्त विशेषण शब्दों को छाँटकर उनके वाक्य प्रयोग कीजिए।
3 अंक
✅ CBSE Standard Model Answer

कविता में प्रयुक्त प्रमुख गुणवाचक विशेषण एवं उनके सार्थक वाक्य-प्रयोग:

  1. संतोषी: वह संतोषी स्वभाव का व्यक्ति है, जो थोड़े में भी प्रसन्न रहता है।
  2. मुँहबोली: वह नन्हीं बालिका पूरे परिवार की मुँहबोली लाडली है।
  3. गर्बीली: रानी लक्ष्मीबाई अपने आत्मसम्मान के प्रति अत्यंत गर्बीली थीं।
  4. बूढ़ा: गाँव के बाहर एक बूढ़ा बरगद का वृक्ष खड़ा है।
CBSE अंक विभाजन 2026-27
सही विशेषणों की पहचान1.5 अंक
शुद्ध व सार्थक वाक्य-प्रयोग1.5 अंक
🎯 योग्यता आधारित प्रश्न (CBQ) — वह चिड़िया जोNEP 2020 Aligned
🌿 जीवन-मूल्य एवं पर्यावरण संवेदनशीलता
चिड़िया के 'संतोषी' और 'गर्बीले' स्वभाव से आज की युवा पीढ़ी को क्या नैतिक शिक्षा मिलती है? वर्तमान उपभोक्तावादी युग में यह सीख कितनी प्रासंगिक है?

1. संतोष का महत्त्व: चिड़िया हमें सिखाती है कि भौतिक साधनों की अंधी दौड़ के बजाय जो प्राप्त है, उसमें आनंद और तृप्ति का अनुभव करना चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलती है।

2. स्वाभिमान और श्रम: वह दूसरों पर आश्रित रहने के बजाय अपने परिश्रम से अन्न और जल प्राप्त करती है तथा अपने स्वाभिमान (गर्व) की रक्षा करती है।

3. प्रासंगिकता: आज के समय में जहाँ दिखावा और असंतोष बढ़ रहा है, चिड़िया का यह आचरण हमें सादगी, प्रकृति-प्रेम और आत्मनिर्भरता की अनमोल सीख देता है।