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क्षितिज भाग-1 (गद्य खंड)

दो बैलों की कथा

मुंशी प्रेमचंद | गद्य खंड — CBSE Marking Scheme 2026-27

प्रश्न-अभ्यास (पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-उत्तर) — 100% कवरेज
प्रश्न 1
कांजीहौस में हाजिरी क्यों ली जाती होगी?
2 अंक (30-40 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

कांजीहौस (Cattle Pound) एक प्रकार का पशुओं का कारागार या बंदीगृह होता था, जहाँ लावारिस, दूसरों के खेतों में चरने वाले अथवा आवारा घूमने वाले पशुओं को पकड़कर बंद किया जाता था।

यहाँ प्रतिदिन पशुओं की हाजिरी निम्नलिखित कारणों से ली जाती होगी:

  • पशुओं की सही संख्या की निगरानी: कांजीहौस में बंद सभी पशुओं की सही गिनती का दैनिक रिकॉर्ड रखा जा सके ताकि कोई पशु वहाँ से भाग न जाए।
  • स्वास्थ्य एवं जीवित होने की पुष्टि: पशुओं की शारीरिक दशा व जीवित रहने की जानकारी प्राप्त की जा सके, क्योंकि भूख-प्यास के कारण कई दुर्बल पशु मर भी जाते थे।
  • जवाबदेही एवं नीलामी प्रक्रिया: पशुओं के मालिकों से जुर्माना वसूलने अथवा तय समय पर नीलामी करने के लिए विधिवत कानूनी रिकॉर्ड बना रहे।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
पशुओं की दैनिक संख्या व सुरक्षा की निगरानी का उल्लेख1.0 अंक
स्वास्थ्य, मृत्यु व कानूनी उत्तरदायित्व/नीलामी का स्पष्टीकरण0.5 अंक
भाषा एवं वर्तनी की शुद्धता0.5 अंक
प्रश्न 2
छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया?
3 अंक (50-60 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

गया के घर में रहने वाली छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी और उसकी सौतेली माँ उस पर आए दिन अत्याचार करती थी तथा उसे कठोर यातनाएँ देती थी। बच्ची स्वयं को उपेक्षित, असहाय और अनाथ महसूस करती थी।

जब उसने देखा कि गया ने हीरा और मोती को दिन भर हल में जोतकर मारा-पीटा और शाम को सूखा भूसा डालकर बाँध दिया, तो वह बैलों की मूक व्यथा और उनके स्वाभिमान भरे कष्ट को गहराई से समझ गई।

प्रेम उमड़ने का मुख्य कारण:

  • समान संवेदनात्मक पीड़ा: दोनों ही उस क्रूर परिवेश में बेसहारा, शोषित और प्रेम के भूखे थे। एक अनाथ बच्ची और मूक पशुओं के बीच आत्मीयता का गहरा बंधन स्थापित हो गया।
  • मूक आत्मीयता: बच्ची अपनी सहानुभूति प्रकट करने के लिए रोज रात को चुपके से दोनों बैलों को एक-एक रोटी खिलाती थी, जिससे उनके बीच अटूट भावनात्मक रिश्ता बन गया।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
बच्ची की पारिवारिक पृष्ठभूमि (सौतेली माँ का अत्याचार) का उल्लेख1.0 अंक
बैलों की दुर्दशा और बच्ची की व्यथा के बीच आत्मीय साम्य1.5 अंक
भाषा-शैली व अभिव्यक्ति0.5 अंक
प्रश्न 3
कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-कौन से नीति-विषयक मूल्य उभर कर आए हैं?
5 अंक (100-120 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

मुंशी प्रेमचंद जी ने 'दो बैलों की कथा' के माध्यम से न केवल पशु-प्रेम को दर्शाया है, बल्कि मानवीय समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नीति-विषयक (नैतिक) मूल्यों को भी उजागर किया है:

  1. स्वतंत्रता सर्वोपरि मूल्य है: स्वतंत्रता सहज और सरलता से नहीं मिलती। इसके लिए निरंतर संघर्ष, त्याग और कष्ट सहना पड़ता है। हीरा और मोती ने हर बंधन (गया की रस्सी, कांजीहौस की चारदीवारी, कसाई का खूँटा) को तोड़कर आजादी पाई।
  2. सच्ची मित्रता एवं परस्पर वफादारी: विपत्ति के समय एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब मोती कांजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य जानवरों को भगा देता है, तब हीरा के बँधे होने के कारण वह स्वयं भी भागने से इनकार कर देता है।
  3. सहानुभूति व कृतज्ञता का भाव: बैलों ने उपकार करने वाली छोटी बच्ची का सम्मान किया और गया की पत्नी अथवा बच्ची को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया, जो उनकी कृतज्ञता को दर्शाता है।
  4. मातृभूमि व गृह-प्रेम (देशभक्ति का प्रतीक): चाहे जितनी भी प्रताड़ना मिले, व्यक्ति का अपने मूल स्थान व स्वामी के प्रति अगाध प्रेम होता है। दोनों बैल अंततः झूरी की चरनी पर ही लौटकर आते हैं।
  5. नारी जाति का सम्मान: हीरा का कथन 'औरत जात पर सींग चलाना मना है' यह स्पष्ट करता है कि समाज में स्त्रियों के प्रति आदर व संरक्षण का भाव होना अनिवार्य है।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
स्वतंत्रता का महत्व एवं संघर्षशीलता का विश्लेषण1.5 अंक
सच्ची मित्रता, त्याग और परोपकार के उदाहरण1.5 अंक
नारी सम्मान, कृतज्ञता व देशभक्ति प्रतीकार्थ की स्पष्टता1.0 अंक
सुगठित भाषा एवं तर्कपूर्ण प्रस्तुति1.0 अंक
प्रश्न 4
प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ 'मूर्ख' का प्रयोग न कर किस नए अर्थ की ओर संकेत किया है?
3 अंक (50-60 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

सामान्यतः समाज में गधे को उसकी अत्यधिक सरलता के कारण 'मूर्खता' का प्रतीक मान लिया गया है। किसी व्यक्ति को बेवकूफ कहना हो तो उसे 'गधा' कह दिया जाता है।

परंतु प्रेमचंद जी ने गधे के स्वभाव के सकारात्मक व उदात्त गुणों को रेखांकित करते हुए उसे ऋषियों-मुनियों के समान सहनशील सिद्ध किया है:

  • असीम सहनशीलता व संतोष: गधा कभी क्रोध नहीं करता, चाहे उसे सूखी घास दी जाए या पीटा जाए। उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया तक नहीं दिखाई देती।
  • समभाव (सुख-दुःख में एक समान): सुख हो या दुःख, लाभ हो या हानि, उसका स्वभाव सदैव शांत और अपरिवर्तित रहता है।
  • ऋषि-तुल्य गरिमा: लेखक के अनुसार सद्गुणों की इतनी पराकाष्ठा केवल भारत के ऋषियों में पाई जाती है। अतः प्रेमचंद ने गधे को 'मूर्ख' के स्थान पर 'सत्याग्रही, परमसंतोषी और सहनशील प्राणी' का नया अर्थ प्रदान किया है।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
रूढ़ अर्थ (मूर्ख) का खंडन एवं सहनशीलता का वर्णन1.0 अंक
ऋषि-मुनियों के समभाव व संतोष से तुलना1.5 अंक
व्याकरणिक शुद्धता व सटीक निष्कर्ष0.5 अंक
प्रश्न 5
किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?
4 अंक (70-80 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

कहानी में ऐसी अनेक मार्मिक घटनाएँ वर्णित हैं जिनसे हीरा और मोती की प्रगाढ़, निस्वार्थ और अनूठी मित्रता सिद्ध होती है:

  • मूक भाषा में विचार-विनिमय: दोनों बैल एक-दूसरे को चाटकर, सूँघकर अपना प्रेम प्रकट करते थे और साँड़ों की तरह सींग मिलाकर केवल विनोद भाव से शक्ति आजमाते थे।
  • हल में एक-दूसरे का भार सहना: गाड़ी या हल में जुतने पर दोनों की यही चेष्टा रहती थी कि ज्यादा बोझ मेरी गर्दन पर रहे, साथी को कम कष्ट हो।
  • गया के घर से मिलकर भागना: जब गया उन्हें ले गया, तो दोनों ने सलाह करके रस्सियाँ तुड़ा लीं और एक साथ वापस झूरी के घर पहुँचे।
  • साँड का मिलकर मुकाबला करना: जब विशाल साँड ने हमला किया, तो दोनों ने एक संगठित योजना बनाई—एक आगे से वार करता तो दूसरा पीछे से, और साँड को परास्त कर दिया।
  • कांजीहौस में साथ निभाना: कांजीहौस की दीवार टूटने पर जब मोती भाग सकता था, तब भी वह हीरा को खूँटे से बँधा देखकर वहीं रुक गया और दोनों ने साथ में सजा भुगती।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
मूक प्रेम व हल में अधिक बोझ उठाने की चेष्टा1.0 अंक
साँड से संयुक्त मुकाबला करने का उदाहरण1.5 अंक
कांजीहौस में साथी के लिए स्वयं को संकट में डालने का त्याग1.0 अंक
भाषा-प्रवाह एवं वर्तनी0.5 अंक
प्रश्न 6
‘लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।’ — हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचंद के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
3 अंक (50-60 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

जब गया के घर में मोती गुस्से में आकर गया की पत्नी पर हमला करने की बात कहता है, तब हीरा उसे यह कहकर शांत करता है कि स्त्री पर प्रहार करना हमारी मर्यादा के विरुद्ध है।

प्रेमचंद के दृष्टिकोण का विश्लेषण:

  • स्त्री सम्मान की भारतीय परंपरा: प्रेमचंद भारतीय संस्कृति के उस उदात्त मूल्य के प्रबल समर्थक थे जहाँ नारी को पूजनीय, अबला और संरक्षणीय माना गया है। पशु भी इस मर्यादा का पालन करते हैं।
  • शारीरिक प्रताड़ना का कड़ा विरोध: लेखक समाज में स्त्रियों के प्रति होने वाले किसी भी प्रकार के शारीरिक या मानसिक अत्याचार के सख्त खिलाफ थे।
  • संस्कार व नैतिकता: यह कथन सिद्ध करता है कि क्रोध या विपत्ति की चरम सीमा में भी नैतिक सीमाओं और मानवीय मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
संदर्भ (हीरा-मोती का संवाद) की स्पष्टता1.0 अंक
प्रेमचंद के स्त्री-सम्मान व अहिंसक दृष्टिकोण का विश्लेषण1.5 अंक
अभिव्यक्ति एवं भाषा0.5 अंक
प्रश्न 7
किसान जीवन वाले समाज में पशु और मनुष्य के आपसी संबंध को कहानी में किस तरह चित्रित किया गया है?
3 अंक (50-60 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

भारतीय ग्रामीण व कृषक संस्कृति में मनुष्य और पशु का संबंध केवल स्वामी और सेवक का नहीं, बल्कि एक परिवार के अभिन्न सदस्य जैसा होता है। कहानी में इसके दो परस्पर विरोधी पक्ष दिखाए गए हैं:

  • आत्मीयता व प्रेम का संबंध (झूरी का चरित्र): झूरी अपने दोनों बैलों (हीरा-मोती) से पुत्रवत स्नेह करता था। वह उन्हें कभी मारता-पीटता नहीं था। उनके घर लौटने पर झूरी की आँखों से आनंद के आँसू बहने लगे और पूरा गाँव उनका स्वागत करता है।
  • शोषण व स्वार्थ का संबंध (गया का चरित्र): गया जैसे स्वार्थी और संवेदनहीन लोग पशुओं से केवल कठोर श्रम लेना जानते हैं, उन्हें भरपेट भोजन या स्नेह नहीं देते।

प्रेमचंद जी ने यह संदेश दिया है कि पशु भी केवल प्रेम और सम्मान की भाषा समझते हैं; यदि किसान उन्हें प्रेम दे, तो वे अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।

CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
झूरी के माध्यम से भावनात्मक पारिवारिक संबंध का निरूपण1.0 अंक
गया के माध्यम से स्वार्थी शोषण की तुलना1.0 अंक
ग्रामीण परिवेश में पशु-मानव सहअस्तित्व का सार1.0 अंक
प्रश्न 8
‘इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे’ — मोती के इस कथन के आलोक में उसकी विशेषताएँ बताइए।
3 अंक (50-60 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

मोती के इस कथन से उसके चरित्र की निम्नलिखित उदात्त विशेषताएँ प्रकट होती हैं:

  • परोपकारी व दयालु स्वभाव: कांजीहौस की दीवार तोड़कर उसने घोड़ों, बकरियों, गधों और भैंसों को आजाद कराया। अपनी जान जोखिम में डालकर भी उसने असहाय मूक प्राणियों की रक्षा की।
  • सकारात्मक एवं आशावादी दृष्टिकोण: खुद न भाग पाने और पुनः पकड़े जाने पर भी उसे निराशा नहीं हुई; उसे संतोष था कि उसके प्रयास से अनेक निर्दोष जीवों का जीवन बच गया।
  • अदम्य विद्रोही साहस: वह अन्याय और अत्याचार को मूक रहकर सहने के पक्ष में नहीं था; उसने संगठित सत्ता के प्रतीक कांजीहौस की दीवार को ढहा दिया।
CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
परोपकार एवं निस्वार्थ सेवा भाव का उल्लेख1.0 अंक
आशावादिता एवं विद्रोही स्वभाव का विश्लेषण1.5 अंक
भाषा एवं प्रस्तुति0.5 अंक
प्रश्न 9
आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) 'अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।'
(ख) 'उस एक रोटी से उनकी भूख तो क्या शांत होती; पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया।'
4 अंक (60-80 शब्द)
✅ CBSE Standard Answer (अधिकतम शब्द-सीमा / Max Word Count)

(क) प्रथम कथन का आशय:
मनुष्य स्वयं को समस्त सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानता है क्योंकि उसके पास विकसित बुद्धि और वाणी है। परंतु हीरा और मोती बिना बोले, केवल मूक भाव से एक-दूसरे के मन की बात, पीड़ा और प्रेम को समझ लेते थे। मनुष्य अपने स्वार्थ, छल-कपट और अहंकार के कारण इस निस्वार्थ संवेदनात्मक 'मूक प्रेम की शक्ति' से वंचित हो चुका है।

(ख) द्वितीय कथन का आशय:
विशालकाय बैलों के लिए एक छोटी-सी रोटी पेट भरने के लिए नगण्य थी। परंतु उस रोटी में छोटी अनाथ बच्ची का निस्वार्थ प्रेम, करुणा और आत्मीयता समाहित थी। उस प्रेममयी अनुभूति ने बैलों की आत्मा को तृप्त कर दिया और उन्हें यह अहसास कराया कि इस निर्दयी संसार में भी कोई उनका अपना है।

CBSE अंक योजना (Marking Scheme) 2026-27
भाग (क): मूक प्रेम व मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य की व्याख्या2.0 अंक
भाग (ख): प्रेम व आत्मीयता की आत्मिक तृप्ति का स्पष्टीकरण1.5 अंक
भाषा की सटीकता0.5 अंक
🎯 योग्यता एवं मूल्य आधारित प्रश्न (Competency-Based Questions) — पाठ 1CBSE 2026-27
मूल्यपरक प्रश्न (Value-Based Question)
हीरा और मोती का संघर्ष भारत के स्वाधीनता संग्राम की किस ऐतिहासिक भावना का प्रतिनिधित्व करता है? सविस्तार स्पष्ट कीजिए।

'दो बैलों की कथा' केवल दो पशुओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह परोक्ष रूप से तत्कालीन पराधीन भारत और स्वतंत्रता संग्राम का जीवंत रूपक है। जिस प्रकार हीरा और मोती को बिना किसी अपराध के गया के घर और बाद में कांजीहौस में गुलाम बना दिया गया, उसी प्रकार भारतीय जनता ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन शोषित थी।

बैलों का बार-बार रस्सियाँ तोड़ना, संगठित होकर अत्याचार का मुकाबला करना और अंत तक हार न मानना यह सिखाता है कि आज़ादी मुफ्त में नहीं मिलती; उसके लिए निरंतर त्याग, बलिदान और एकजुटता की आवश्यकता होती है। प्रेमचंद जी ने बैलों के माध्यम से देशवासियों में स्वाधीनता की अलख जगाने का कार्य किया।

दक्षता आधारित प्रश्न (Competency-Based Question)
आज के आधुनिक समाज में जहाँ स्वार्थ और एकाकीपन बढ़ रहा है, हीरा और मोती की मित्रता से युवा पीढ़ी क्या सीख ले सकती है?

आज के भौतिकवादी युग में संबंध अक्सर स्वार्थ, लाभ-हानि और दिखावे पर टिके होते हैं। ऐसे समय में हीरा और मोती की मित्रता अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करती है। वे सुख और दुःख दोनों में अविभाज्य रहे। जब मोती कांजीहौस से भाग सकता था, उसने अपने मित्र हीरा का साथ नहीं छोड़ा।

युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि सच्ची मित्रता संकट की घड़ी में त्याग, परस्पर विश्वास, समान संवेदनशीलता और बिना शर्त सहयोग की माँग करती है। मित्रता का आधार भौतिक लाभ नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव होना चाहिए।