V1

पाठ 1: हम पंछी उन्मुक्त गगन के

📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 1) — कविता — शिवमंगल सिंह "सुमन" | स्वतंत्रता का मूल्य एवं स्वच्छंद जीवन की अभिलाषा

हम पंछी उन्मुक्त गगन के पिंजरबद्ध न गा पाएँगे, कनक-तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट जाएँगे। हम बहता जल पीने वाले मर जाएँगे भूखे-प्यासे, कहीँ भली है कटुक निबौरी कनक-कटोरी की मैदा से। स्वर्ण-श्रृंखला के बंधन में अपनी गति, उड़ान सब भूले, बस सपनों में देख रहे हैं तरु की फुनगी पर के झूले। ऐसे थे अरमान कि उड़ते नीले नभ की सीमा पाने, लाल किरण-सी चोंच खोल चुगते तारक-अनार के दाने। होती सीमाहीन क्षितिज से इन पंखों की होड़ा-होड़ी, या तो क्षितिज मिलन बन जाता या तनती साँसों की डोरी। नीड़ न दो, चाहे टहनी का आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो, लेकिन पंख दिए हैं तो आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।
— शिवमंगल सिंह "सुमन"
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रस्तुत कविता 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' में प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने पक्षियों के माध्यम से स्वतंत्रता के सर्वोपरि महत्त्व को प्रतिपादित किया है। पक्षी कहते हैं कि वे खुले आकाश में उड़ने वाले जीव हैं। यदि उन्हें सोने के पिंजरे में भी बंद कर दिया जाए, तो वे कभी सुखी नहीं रह सकते और उनके कोमल पंख पिंजरे की तीलियों से टकराकर टूट जाएँगे। उन्हें बहती नदियों और झरनों का शीतल जल पीना प्रिय है; पिंजरे में सोने की कटोरी में रखी मैदा की अपेक्षा उन्हें नीम की कड़वी निबौरी खाना कहीं अधिक पसंद है। पराधीनता में वे अपनी स्वाभाविक गति और ऊँची उड़ान सब कुछ भूल चुके हैं। अब तो पेड़ों की सबसे ऊँची शाखा (फुनगी) पर झूलना केवल एक स्वप्न बनकर रह गया है। उनकी प्रबल इच्छा है कि वे नीले आकाश की अंतिम सीमा तक उड़ें और तारों रूपी अनार के दानों को चुगें। अंत में पक्षी मनुष्य से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि चाहे उनका घोंसला तोड़ दो, टहनी का आश्रय नष्ट कर दो, परंतु जब ईश्वर ने उन्हें पंख दिए हैं, तो उनकी बेचैन और पावन उड़ान में कभी बाधा मत डालो।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: स्वाधीनता प्रत्येक प्राणी का जन्मसिद्ध अधिकार है। पराधीनता का स्वर्ण-पिंजरा भी स्वतंत्रता के अभाव में असहनीय कारागार के समान होता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)

हर प्रकार की सुख-सुविधाएँ (जैसे सोने का पिंजरा, दाना और स्वच्छ जल) मिलने के बावजूद पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • स्वाभाविक स्वतंत्रता का ह्रास: पक्षियों की स्वाभाविक प्रकृति खुले नीले आकाश में उन्मुक्त उड़ान भरना है। पिंजरे की सीमाएँ उनकी इस मूल प्रवृत्ति को छीन लेती हैं।
  • प्रकृति से विछोह: पक्षियों को बहता शीतल जल पीना, वृक्षों की सबसे ऊँची शाखाओं पर झूलना और कड़वी निबौरियाँ खाना पसंद है, जो पिंजरे के बंद वातावरण में असंभव है।
  • स्वर्ण-बंधन का कष्ट: सोने का पिंजरा भले ही कितना भी मूल्यवान क्यों न हो, वह अंततः एक कारागार ही है जहाँ उनके कोमल पंख तीलियों से टकराकर घायल हो जाते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पक्षियों की प्राकृतिक उड़ान और स्वच्छंदता का उल्लेख 1 अंक
प्राकृतिक वातावरण (बहता जल, निबौरी) से प्रेम 1 अंक
पराधीनता की पीड़ा एवं भाषा की शुद्धता 1 अंक
प्र. 2 (कविता से)
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)

पक्षी उन्मुक्त (स्वतंत्र) रहकर निम्नलिखित दिली इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं:

  • वे खुले और विस्तृत आकाश में बिना किसी रोक-टोक के दूर-दूर तक उड़ना चाहते हैं।
  • वे बहती नदियों और पहाड़ी झरनों का ताजा व शीतल जल पीना चाहते हैं।
  • वे कड़वे नीम के पेड़ों पर बैठकर स्वाद से 'कटुक निबौरियाँ' खाना चाहते हैं।
  • वे वृक्षों की सबसे ऊँची टहनी (फुनगी) के सिरे पर बैठकर झूले झूलना चाहते हैं।
  • वे अपनी लाल चोंच से आसमान के तारों रूपी अनार के दानों को चुगना चाहते हैं तथा सीमाहीन क्षितिज तक उड़ने की होड़ लगाना चाहते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
उड़ान और क्षितिज मिलन की इच्छा 1 अंक
प्राकृतिक आहार व तरु-फुनगी पर झूलना 1 अंक
तारक-अनार चुगने का भाव एवं प्रस्तुति 1 अंक
प्र. 3 (कविता से)
भाव स्पष्ट कीजिए— "या तो क्षितिज मिलन बन जाता / या तनती साँसों की डोरी।"
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)

भावार्थ:

इन पंक्तियों में कवि पक्षियों की स्वतंत्रता के प्रति अगाध निष्ठा और दृढ़ संकल्प को व्यक्त कर रहे हैं। 'क्षितिज' वह काल्पनिक स्थान है जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं, जिसका कोई वास्तविक अंत नहीं होता।

पक्षी कहते हैं कि यदि वे स्वतंत्र होते, तो अपने नन्हे पंखों से उस सीमाहीन क्षितिज को छूने के लिए प्रतिस्पर्धा (होड़ा-होड़ी) करते। इस प्रयास में या तो वे उड़ते-उड़ते सचमुच क्षितिज की अंतिम सीमा को प्राप्त कर लेते (क्षितिज मिलन बन जाता), अथवा अपने प्राण न्योछावर कर देते (तनती साँसों की डोरी)। आशय यह है कि पक्षियों के लिए परतंत्र रहकर जीने से कहीं श्रेष्ठ स्वतंत्रता की राह में अपने प्राणों का विसर्जन करना है।

📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
क्षितिज और होड़ा-होड़ी का अर्थ स्पष्टीकरण 1 अंक
स्वतंत्रता हेतु प्राणोत्सर्ग की भावना का विश्लेषण 1.5 अंक
काव्य-सौंदर्य एवं भाषा अभिव्यक्ति 0.5 अंक
प्र. 4 (कविता से आगे)
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं— (क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपना विचार लिखिए। (ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी?
4 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)

(क) पक्षियों को पालने के संबंध में विचार:
हमारे विचार से पक्षियों को पिंजरे में कैद करके पालना सर्वथा अनुचित है। ईश्वर ने पक्षियों को स्वच्छंद आकाश में उड़ने के लिए पंख दिए हैं। जब हम उन्हें पिंजरे में कैद करते हैं, तो हम उनकी स्वतंत्रता, उनकी उड़ान और उनके प्राकृतिक जीवन को छीन लेते हैं। किसी भी जीव को बंदी बनाकर अपनी खुशी तलाशना मानवीय संवेदना के प्रतिकूल है।

(ख) पक्षी की देखरेख का प्रसंग:
हाँ, हमारे एक पड़ोसी ने एक तोता पाला हुआ था। वे उसकी देखरेख के लिए प्रतिदिन निम्नलिखित कार्य करते थे:

  • पिंजरे की नियमित सफाई करना और फर्श पर बिछाए गए अखबार को बदलना।
  • कटोरी में ताजा पानी तथा हरी मिर्च, भीगे चने और फल-अमरूद खाने के लिए देना।
  • उसे धूप और ताजी हवा में रखना तथा परिवार के सदस्य उससे बातें करते थे।

निष्कर्ष: यद्यपि वे उसकी पूरी देखभाल करते थे, फिर भी जब वह बाहर उड़ते अन्य पक्षियों को देखता था, तो उसकी आँखों में छटपटाहट साफ दिखाई देती थी। अंततः उन्होंने उसे खुले आकाश में मुक्त कर दिया।

📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
(क) पक्षी पालने पर तार्किक एवं मानवीय दृष्टिकोण 2 अंक
(ख) देखरेख के व्यवहारिक बिंदु व संवेदनशीलता 2 अंक
प्र. 5 (भाषा की बात)
(क) "स्वर्ण-श्रृंखला" और "लाल किरण-सी" में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए। (ख) "भूख-प्यास" में द्वंद्व समास है। इस प्रकार के पाँच अन्य उदाहरण बनाइए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)

(क) गुणवाचक विशेषण के तीन अन्य उदाहरण:

  1. उन्मुक्त गगन (गगन का गुण: उन्मुक्त/खुला)
  2. पुलकित पंख (पंखों का गुण: पुलकित/हर्षित)
  3. कटुक निबौरी (निबौरी का गुण: कटुक/कड़वी)

(ख) द्वंद्व समास के पाँच अन्य उदाहरण (दोनों पद प्रधान, विग्रह करने पर 'और'):

  1. सुख-दुख = सुख और दुख
  2. रात-दिन = रात और दिन
  3. तन-मन = तन और मन
  4. हँसना-रोना = हँसना और रोना
  5. पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
गुणवाचक विशेषण के 3 सटीक उदाहरण 1.5 अंक
द्वंद्व समास के 5 सटीक समस्त पद व विग्रह 1.5 अंक
भाषा की बात — प्रश्न 1
'स्वर्ण-शृंखला' और 'लाल किरण-सी' में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।
3 अंक (1 अंक प्रति उदाहरण)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता में संज्ञा शब्दों की विशेषता बताने वाले गुणवाचक विशेषण के तीन अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. पुलकित पंख: यहाँ 'पुलकित' शब्द पंखों की कोमलता और उमंग का गुण प्रकट करता है।
2. कटुक निबौरी: यहाँ 'कटुक' (कड़वी) शब्द निबौरी (नीम के फल) के स्वाद का गुण बताता है।
3. उन्मुक्त गगन: यहाँ 'उन्मुक्त' (स्वतंत्र/बंधनहीन) शब्द आकाश की असीम विस्तार रूपी विशेषता बताता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
तीन सही गुणवाचक विशेषण उदाहरण अर्थ सहित 3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27) Applied Hindi
Competency-Based / HOTS Question
यदि आपको किसी आलीशान महल में सभी सुख-सुविधाओं और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ नजरबंद (कैद) कर दिया जाए, तो क्या आप वहाँ रहना स्वीकार करेंगे? "हम पंछी उन्मुक्त गगन के" कविता के आलोक में स्वाधीनता के मानवीय महत्त्व पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

उत्तर एवं विश्लेषण:

नहीं, हम किसी भी सुख-सुविधा संपन्न आलीशान महल में नजरबंद होकर रहना कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

कविता के आलोक में मानवीय दृष्टिकोण:

  • आत्मसम्मान और व्यक्तित्व का विकास: भौतिक सुख-सुविधाएँ केवल शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती हैं, किंतु मानसिक शांति और आत्मसम्मान केवल स्वतंत्रता के वातावरण में ही संभव है।
  • पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं: तुलसीदास जी ने भी कहा है कि पराधीन व्यक्ति को स्वप्न में भी सच्चा सुख नहीं मिल सकता। बंद कमरे में मनुष्य का मानसिक और रचनात्मक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
  • स्वतंत्रता की कीमत: जैसे पक्षियों के लिए सोने की कटोरी की मैदा से नीम की कड़वी निबौरी श्रेष्ठ है, वैसे ही स्वाभिमानी मनुष्य के लिए पराधीनता के 56 भोगों से अपनी मेहनत की सूखी रोटी और उन्मुक्त जीवन अनंत गुना मूल्यवान है।