वसंत भाग - 2 (20 पाठ), बाल महाभारत कथा (10 प्रसंग) और दूर्वा भाग - 2 (18 पाठ) के समस्त प्रश्न-उत्तर, भाषा की बात (व्याकरण), अंक विभाजन एवं योग्यता-आधारित प्रश्न (CBSE 2026-27)।
📖 वसंत भाग - 2 (20)🏹 बाल महाभारत कथा (10)📜 दूर्वा भाग - 2 (18)
11: हम पंछी उन्मुक्त गगन के
22: दादी माँ
33: हिमालय की बेटियाँ
44: कठपुतली
55: मिठाईवाला
66: रक्त और हमारा शरीर
77: पापा खो गए
88: शाम एक किसान
99: चिड़िया की बच्ची
1010: अपूर्व अनुभव
1111: रहीम के दोहे
1212: कंचा
1313: एक तिनका
1414: खानपान की बदलती तस्वीर
1515: नीलकंठ
1616: भोर और बरखा
1717: वीर कुंवर सिंह
1818: संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया: धनराज
1919: आश्रम का अनुमानित व्यय
2020: विप्लव-गायन
M11: महाभारत कथा व आदि पर्व: देवव्रत और भीष्म प्रतिज्ञा
M22: कुंती, विदुर और कर्ण का प्रादुर्भाव
M33: आचार्य द्रोण और लाक्षागृह का षड्यंत्र
M44: द्रौपदी स्वयंवर और इंद्रप्रस्थ की स्थापना
M55: द्यूतक्रीड़ा, द्रौपदी चीरहरण और बारह वर्ष का वनवास
M66: मत्स्य देश में अज्ञातवास और विराट का दरबार
M77: शांति दूत श्री कृष्ण और युद्ध की घोषणा
M88: कुरुक्षेत्र महासमर: भीष्म और द्रोण पर्व
M99: चक्रव्यूह: अभिमन्यु और जयद्रथ वध
M1010: कर्ण वध, दुर्योधन का अंत और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक
D11: चिड़िया और चुरुंगुन
D22: सबसे सुंदर लड़की
D33: मैं हूँ रोबोट
D44: गुब्बारे पर चीता
D55: थोड़ी धरती पाऊँ
D66: गारो
D77: पुस्तकें जो अमर हैं
D88: काबुलीवाला
D99: विश्वेश्वरैया
D1010: हम धरती के लाल
D1111: पोंगल
D1212: शहीद झलकारीबाई
D1313: नृत्यांगना सुधा चंद्रन
D1414: पानी और धूप
D1515: गीत
D1616: मिट्टी की मूर्तियाँ
D1717: मौत का पहाड़
D1818: हम होंगे कामयाब एक दिन
V1
पाठ 1: हम पंछी उन्मुक्त गगन के
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 1) — कविता — शिवमंगल सिंह "सुमन" | स्वतंत्रता का मूल्य एवं स्वच्छंद जीवन की अभिलाषा
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाएँगे।
हम बहता जल पीने वाले
मर जाएँगे भूखे-प्यासे,
कहीँ भली है कटुक निबौरी
कनक-कटोरी की मैदा से।
स्वर्ण-श्रृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं
तरु की फुनगी पर के झूले।
ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नीले नभ की सीमा पाने,
लाल किरण-सी चोंच खोल
चुगते तारक-अनार के दाने।
होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी।
नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्न-भिन्न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं तो
आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।
— शिवमंगल सिंह "सुमन"
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रस्तुत कविता 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' में प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने पक्षियों के माध्यम से स्वतंत्रता के सर्वोपरि महत्त्व को प्रतिपादित किया है। पक्षी कहते हैं कि वे खुले आकाश में उड़ने वाले जीव हैं। यदि उन्हें सोने के पिंजरे में भी बंद कर दिया जाए, तो वे कभी सुखी नहीं रह सकते और उनके कोमल पंख पिंजरे की तीलियों से टकराकर टूट जाएँगे। उन्हें बहती नदियों और झरनों का शीतल जल पीना प्रिय है; पिंजरे में सोने की कटोरी में रखी मैदा की अपेक्षा उन्हें नीम की कड़वी निबौरी खाना कहीं अधिक पसंद है। पराधीनता में वे अपनी स्वाभाविक गति और ऊँची उड़ान सब कुछ भूल चुके हैं। अब तो पेड़ों की सबसे ऊँची शाखा (फुनगी) पर झूलना केवल एक स्वप्न बनकर रह गया है। उनकी प्रबल इच्छा है कि वे नीले आकाश की अंतिम सीमा तक उड़ें और तारों रूपी अनार के दानों को चुगें। अंत में पक्षी मनुष्य से विनम्र प्रार्थना करते हैं कि चाहे उनका घोंसला तोड़ दो, टहनी का आश्रय नष्ट कर दो, परंतु जब ईश्वर ने उन्हें पंख दिए हैं, तो उनकी बेचैन और पावन उड़ान में कभी बाधा मत डालो।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: स्वाधीनता प्रत्येक प्राणी का जन्मसिद्ध अधिकार है। पराधीनता का स्वर्ण-पिंजरा भी स्वतंत्रता के अभाव में असहनीय कारागार के समान होता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
हर प्रकार की सुख-सुविधाएँ (जैसे सोने का पिंजरा, दाना और स्वच्छ जल) मिलने के बावजूद पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
स्वाभाविक स्वतंत्रता का ह्रास: पक्षियों की स्वाभाविक प्रकृति खुले नीले आकाश में उन्मुक्त उड़ान भरना है। पिंजरे की सीमाएँ उनकी इस मूल प्रवृत्ति को छीन लेती हैं।
प्रकृति से विछोह: पक्षियों को बहता शीतल जल पीना, वृक्षों की सबसे ऊँची शाखाओं पर झूलना और कड़वी निबौरियाँ खाना पसंद है, जो पिंजरे के बंद वातावरण में असंभव है।
स्वर्ण-बंधन का कष्ट: सोने का पिंजरा भले ही कितना भी मूल्यवान क्यों न हो, वह अंततः एक कारागार ही है जहाँ उनके कोमल पंख तीलियों से टकराकर घायल हो जाते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पक्षियों की प्राकृतिक उड़ान और स्वच्छंदता का उल्लेख1 अंक
प्राकृतिक वातावरण (बहता जल, निबौरी) से प्रेम1 अंक
पराधीनता की पीड़ा एवं भाषा की शुद्धता1 अंक
प्र. 2 (कविता से)
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पक्षी उन्मुक्त (स्वतंत्र) रहकर निम्नलिखित दिली इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं:
वे खुले और विस्तृत आकाश में बिना किसी रोक-टोक के दूर-दूर तक उड़ना चाहते हैं।
वे बहती नदियों और पहाड़ी झरनों का ताजा व शीतल जल पीना चाहते हैं।
वे कड़वे नीम के पेड़ों पर बैठकर स्वाद से 'कटुक निबौरियाँ' खाना चाहते हैं।
वे वृक्षों की सबसे ऊँची टहनी (फुनगी) के सिरे पर बैठकर झूले झूलना चाहते हैं।
वे अपनी लाल चोंच से आसमान के तारों रूपी अनार के दानों को चुगना चाहते हैं तथा सीमाहीन क्षितिज तक उड़ने की होड़ लगाना चाहते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
उड़ान और क्षितिज मिलन की इच्छा1 अंक
प्राकृतिक आहार व तरु-फुनगी पर झूलना1 अंक
तारक-अनार चुगने का भाव एवं प्रस्तुति1 अंक
प्र. 3 (कविता से)
भाव स्पष्ट कीजिए— "या तो क्षितिज मिलन बन जाता / या तनती साँसों की डोरी।"
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भावार्थ:
इन पंक्तियों में कवि पक्षियों की स्वतंत्रता के प्रति अगाध निष्ठा और दृढ़ संकल्प को व्यक्त कर रहे हैं। 'क्षितिज' वह काल्पनिक स्थान है जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं, जिसका कोई वास्तविक अंत नहीं होता।
पक्षी कहते हैं कि यदि वे स्वतंत्र होते, तो अपने नन्हे पंखों से उस सीमाहीन क्षितिज को छूने के लिए प्रतिस्पर्धा (होड़ा-होड़ी) करते। इस प्रयास में या तो वे उड़ते-उड़ते सचमुच क्षितिज की अंतिम सीमा को प्राप्त कर लेते (क्षितिज मिलन बन जाता), अथवा अपने प्राण न्योछावर कर देते (तनती साँसों की डोरी)। आशय यह है कि पक्षियों के लिए परतंत्र रहकर जीने से कहीं श्रेष्ठ स्वतंत्रता की राह में अपने प्राणों का विसर्जन करना है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
क्षितिज और होड़ा-होड़ी का अर्थ स्पष्टीकरण1 अंक
स्वतंत्रता हेतु प्राणोत्सर्ग की भावना का विश्लेषण1.5 अंक
काव्य-सौंदर्य एवं भाषा अभिव्यक्ति0.5 अंक
प्र. 4 (कविता से आगे)
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं— (क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपना विचार लिखिए। (ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी?
4 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) पक्षियों को पालने के संबंध में विचार:
हमारे विचार से पक्षियों को पिंजरे में कैद करके पालना सर्वथा अनुचित है। ईश्वर ने पक्षियों को स्वच्छंद आकाश में उड़ने के लिए पंख दिए हैं। जब हम उन्हें पिंजरे में कैद करते हैं, तो हम उनकी स्वतंत्रता, उनकी उड़ान और उनके प्राकृतिक जीवन को छीन लेते हैं। किसी भी जीव को बंदी बनाकर अपनी खुशी तलाशना मानवीय संवेदना के प्रतिकूल है।
(ख) पक्षी की देखरेख का प्रसंग:
हाँ, हमारे एक पड़ोसी ने एक तोता पाला हुआ था। वे उसकी देखरेख के लिए प्रतिदिन निम्नलिखित कार्य करते थे:
पिंजरे की नियमित सफाई करना और फर्श पर बिछाए गए अखबार को बदलना।
कटोरी में ताजा पानी तथा हरी मिर्च, भीगे चने और फल-अमरूद खाने के लिए देना।
उसे धूप और ताजी हवा में रखना तथा परिवार के सदस्य उससे बातें करते थे।
निष्कर्ष: यद्यपि वे उसकी पूरी देखभाल करते थे, फिर भी जब वह बाहर उड़ते अन्य पक्षियों को देखता था, तो उसकी आँखों में छटपटाहट साफ दिखाई देती थी। अंततः उन्होंने उसे खुले आकाश में मुक्त कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
(क) पक्षी पालने पर तार्किक एवं मानवीय दृष्टिकोण2 अंक
(ख) देखरेख के व्यवहारिक बिंदु व संवेदनशीलता2 अंक
प्र. 5 (भाषा की बात)
(क) "स्वर्ण-श्रृंखला" और "लाल किरण-सी" में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए। (ख) "भूख-प्यास" में द्वंद्व समास है। इस प्रकार के पाँच अन्य उदाहरण बनाइए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) गुणवाचक विशेषण के तीन अन्य उदाहरण:
उन्मुक्त गगन (गगन का गुण: उन्मुक्त/खुला)
पुलकित पंख (पंखों का गुण: पुलकित/हर्षित)
कटुक निबौरी (निबौरी का गुण: कटुक/कड़वी)
(ख) द्वंद्व समास के पाँच अन्य उदाहरण (दोनों पद प्रधान, विग्रह करने पर 'और'):
सुख-दुख = सुख और दुख
रात-दिन = रात और दिन
तन-मन = तन और मन
हँसना-रोना = हँसना और रोना
पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
गुणवाचक विशेषण के 3 सटीक उदाहरण1.5 अंक
द्वंद्व समास के 5 सटीक समस्त पद व विग्रह1.5 अंक
भाषा की बात — प्रश्न 1
'स्वर्ण-शृंखला' और 'लाल किरण-सी' में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।
3 अंक (1 अंक प्रति उदाहरण)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता में संज्ञा शब्दों की विशेषता बताने वाले गुणवाचक विशेषण के तीन अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1. पुलकित पंख: यहाँ 'पुलकित' शब्द पंखों की कोमलता और उमंग का गुण प्रकट करता है।
2. कटुक निबौरी: यहाँ 'कटुक' (कड़वी) शब्द निबौरी (नीम के फल) के स्वाद का गुण बताता है।
3. उन्मुक्त गगन: यहाँ 'उन्मुक्त' (स्वतंत्र/बंधनहीन) शब्द आकाश की असीम विस्तार रूपी विशेषता बताता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
तीन सही गुणवाचक विशेषण उदाहरण अर्थ सहित3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based / HOTS Question
यदि आपको किसी आलीशान महल में सभी सुख-सुविधाओं और स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ नजरबंद (कैद) कर दिया जाए, तो क्या आप वहाँ रहना स्वीकार करेंगे? "हम पंछी उन्मुक्त गगन के" कविता के आलोक में स्वाधीनता के मानवीय महत्त्व पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर एवं विश्लेषण:
नहीं, हम किसी भी सुख-सुविधा संपन्न आलीशान महल में नजरबंद होकर रहना कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
कविता के आलोक में मानवीय दृष्टिकोण:
आत्मसम्मान और व्यक्तित्व का विकास: भौतिक सुख-सुविधाएँ केवल शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती हैं, किंतु मानसिक शांति और आत्मसम्मान केवल स्वतंत्रता के वातावरण में ही संभव है।
पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं: तुलसीदास जी ने भी कहा है कि पराधीन व्यक्ति को स्वप्न में भी सच्चा सुख नहीं मिल सकता। बंद कमरे में मनुष्य का मानसिक और रचनात्मक विकास अवरुद्ध हो जाता है।
स्वतंत्रता की कीमत: जैसे पक्षियों के लिए सोने की कटोरी की मैदा से नीम की कड़वी निबौरी श्रेष्ठ है, वैसे ही स्वाभिमानी मनुष्य के लिए पराधीनता के 56 भोगों से अपनी मेहनत की सूखी रोटी और उन्मुक्त जीवन अनंत गुना मूल्यवान है।
V2
पाठ 2: दादी माँ
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 2) — कहानी — शिवप्रसाद सिंह | वात्सल्य, पारिवारिक संबल और ग्रामीण संस्कृति का भावुक संस्मरण
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रस्तुत कहानी 'दादी माँ' प्रख्यात लेखक शिवप्रसाद सिंह द्वारा रचित एक अत्यंत संवेदनशील आत्मकथात्मक संस्मरण है। लेखक को अपने बड़े भाई के पत्र से अचानक दादी माँ के देहांत का दुखद समाचार मिलता है। पत्र पढ़ते ही लेखक की आँखों के सामने दादी माँ के साथ बिताए बचपन के अनगिनत चित्र सजीव हो उठते हैं। क्वार के महीने में जलाशय के झागदार पानी में नहाना, बीमार होने पर दादी माँ का रात-दिन चारपाई के पास बैठकर माथे पर हाथ फेरना, पीपल की छाल और मूँग की दाल की खिचड़ी का ध्यान रखना। दादी माँ केवल घर ही नहीं, बल्कि पूरे गाँव के सुख-दुख में खड़ी रहती थीं। जब रामी की चाची (धन्नो) उनके कर्जे में दबी थी, तब दादी ने पहले उसे डाँटा, परंतु बाद में उसकी बेटी के विवाह में सारा कर्जा माफ कर दस रुपये शगुन के भी दिए। दादा जी की मृत्यु के बाद कपटी मित्रों के कारण घर की आर्थिक स्थिति डाँवाडोल हो गई थी, तब दादी माँ ने वंश की निशानी 'सोने के कंगन' पिता जी को सौंपकर परिवार को गहरे संकट से उबारा था। दादी माँ ममता, स्नेह, दया और त्याग की सजीव प्रतिमूर्ति थीं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: बुजुर्ग हमारे परिवार की धुरी, संस्कारों के संरक्षक और विपत्ति के समय सबसे बड़े संबल होते हैं। उनका स्नेह निस्वार्थ और अमूल्य होता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की और किन-किन बातों की याद आ जाती है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब लेखक को बड़े भाई के पत्र द्वारा दादी माँ की मृत्यु की सूचना मिलती है, तो उनके स्मृति-पटल पर बचपन की निम्नलिखित बातें सजीव हो उठती हैं:
क्वार के महीने में गंधपूर्ण पानी में नहाना: झागदार गँदले पानी में कूद-कूदकर नहाना और उसके बाद एक दिन बीमार पड़ जाना।
दादी माँ द्वारा दिन-रात सेवा: बीमारी में दादी माँ का सिरहाने बैठकर पंखा झलना, माथे पर दालचीनी का लेप लगाना और मूंग की दाल की खिचड़ी का विशेष ध्यान रखना।
रामी की चाची (धन्नो) का प्रसंग: दादी माँ का धन्नो को ब्याज के लिए डाँटना और बाद में उसकी बेटी के ब्याह में सारा पिछला कर्ज माफ कर दस रुपये का शगुन देना।
किशन भैया के विवाह के समय का उत्सव: औरतों द्वारा गाए जाने वाले मंगल गीत, अभिनय (नाट्य) और लेखक का दालान में सोए पकड़े जाने पर औरतों द्वारा हँसना।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
क्वार के झागदार पानी में नहाने व बीमारी की सेवा का उल्लेख1 अंक
रामी की चाची व विवाह उत्सव के प्रसंगों का वर्णन1 अंक
संस्मरण की भाषा-शैली व स्पष्टता1 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
दादा जी की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति दयनीय हो जाने के मुख्य कारण थे:
कपटपूर्ण मित्रों की संगत: दादा जी की मृत्यु के बाद मुँह में राम बगल में छुरी रखने वाले स्वार्थी और चापलूस मित्रों की भरमार हो गई, जिन्होंने गलत सलाह देकर धन की बर्बादी करवाई।
श्राद्ध में अत्यधिक अपव्यय: दादी माँ के लाख मना करने पर भी लेखक के पिता जी ने दादा जी के श्राद्ध में हैसियत से अधिक अपार संपत्ति और उधार लिया हुआ रुपया पानी की तरह बहा दिया।
ऋण का बोझ: पहले का लिया गया कर्ज चुकाया नहीं जा सका था और नई उधारी बढ़ जाने से परिवार भयंकर कर्ज संकट में घिर गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चापलूस और कपटी मित्रों का दुष्प्रभाव1 अंक
श्राद्ध में सामर्थ्य से अधिक धन का अपव्यय1 अंक
बढ़ते कर्ज का प्रभाव व निष्कर्ष1 अंक
प्र. 3 (कहानी से)
दादी माँ के स्वभाव का कौन-सा पक्ष आपको सबसे अच्छा लगता है और क्यों?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
दादी माँ के स्वभाव का दयालु, परोपकारी, दृढ़ संकल्पी और दूसरों की सहायता करने वाला पक्ष हमें सबसे अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि:
बाहर से कठोर, भीतर से मोम जैसी: वे ऊपर से भले ही डाँटती-फटकारती थीं (जैसे रामी की चाची को डाँटा), परंतु भीतर से उनका हृदय अत्यंत कोमल था। उन्होंने धन्नो का पूरा कर्जा माफ किया और बेटी की शादी में आर्थिक सहायता भी दी।
संकटमोचक संरक्षक: जब परिवार पर दादा जी के बाद भयंकर आर्थिक संकट आया, तो उन्होंने बिना संकोच अपने पुश्तैनी सोने के कंगन पिता जी को सौंप दिए ताकि परिवार का मान बच सके।
निस्वार्थ सेवाभाव: गाँव में किसी के भी बीमार होने पर वे तुरंत पहुँचतीं और बिना किसी भेदभाव के देशी दवाइयों से उसकी दिन-रात तीमारदारी करती थीं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
स्वभावगत विशेषता (परोपकार/दयालुता) का चयन1 अंक
रामी की चाची अथवा सोने के कंगन प्रसंग का प्रमाण1 अंक
व्यक्तिगत प्रभाव व तार्किक निष्कर्ष1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
(क) "सा, सी, से" का प्रयोग करके तीन तुलनात्मक वाक्य बनाइए। (ख) कहानी में प्रयुक्त देशज/स्थानीय बोली के चार शब्द छाँटकर उनके मानक हिंदी रूप लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'सा, सी, से' के प्रयोग द्वारा समानता दर्शाने वाले वाक्य:
बच्चे का मुख गुलाब-सा कोमल और सुंदर है।
चांदनी रात में बर्फ से ढकी चोटियाँ चाँदी-सी चमक रही थीं।
क्रोध में लाल होकर उसकी आँखें अंगारे-सी दहक उठीं।
(ख) देशज/बोली के शब्द और उनके मानक हिंदी रूप:
क्वार = आश्विन मास (सितंबर-अक्टूबर का समय)
उरिण = उऋण (कर्जमुक्त होना)
कार-परोजन = कार्य-प्रयोजन (मांगलिक कार्य/समारोह)
निस्तार = छुटकारा / उद्धार / निपटारा
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सा/सी/से से युक्त 3 अर्थपूर्ण उपमा वाक्य1.5 अंक
4 देशज शब्दों के शुद्ध मानक अर्थ1.5 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
आपने इस कहानी में महीनों के नाम पढ़े—क्वार, आषाढ़, माघ। इन महीनों में मौसम कैसा रहता है? लिखिए।
3 अंक (1 अंक प्रति माह)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. क्वार (आश्विन): इस महीने में न तो अधिक गर्मी होती है और न ही अधिक सर्दी। बरसात समाप्त हो चुकी होती है और हल्की-हल्की गुलाबी ठंडक शुरू होती है। 2. आषाढ़: यह वर्षा ऋतु का प्रारंभिक महीना है। भीषण गर्मी के बाद आसमान में काले-काले मेघ घिर आते हैं और मूसलाधार बारिश से धरती हरी-भरी हो जाती है। 3. माघ: यह अत्यधिक कड़ाके की ठंड का महीना होता है। बर्फीली पछुआ हवाएं चलती हैं और पाला पड़ता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
क्वार, आषाढ़ और माघ के मौसम का यथार्थ वर्णन3 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 2
'अपने-अपने मौसम की अपनी-अपनी बातें होती हैं'—लेखक के इस कथन के अनुसार यह बताइए कि किस मौसम में कौन-सी वस्तुएं विशेष रूप से मिलती हैं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
प्रत्येक मौसम की खान-पान और प्राकृतिक उपहारों की अपनी विशेषता होती है:
• गर्मी और बरसात (आषाढ़/क्वार): आम, जामुन, लीची, खरबूजा, तरबूज और चूड़ा-गुड़ विशेष रूप से मिलते हैं।
• सर्दी (माघ/पौष): तिलकुट, गुड़ की पट्टी, मूंगफली, गाजर का हलवा और हरी पत्तेदार सब्जियाँ (सरसों का साग, बथुआ) प्रचुर मात्रा में मिलती हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ऋतु अनुसार खान-पान की वस्तुओं का सटीक विवरण2 अंक
भाषा की बात — मुहावरे
नीचे दी गई बोलचाल की भाषा के प्रयोगों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए: (i) दाल न गलना (ii) आँखें भराना
2 अंक (1 अंक प्रति मुहावरा)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) दाल न गलना (सफल न होना / युक्ति न चलना):
• वाक्य: बेईमान दुकानदार ने ग्राहक को ठगने का बहुत प्रयास किया, किंतु जागरूक ग्राहक के आगे उसकी दाल न गली।
(ii) आँखें भराना (भावुक हो जाना / आँसू आ जाना):
• वाक्य: बरसों बाद परदेस से लौटे पुत्र को देखकर बूढ़ी माँ की आँखें भरा आईं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मुहावरे का सही अर्थ और सार्थक वाक्य प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Case Study
आज के एकल परिवारों (Nuclear Families) में बुजुर्गों की उपेक्षा एक ज्वलंत समस्या बन चुकी है। "दादी माँ" पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि परिवार के संतुलन, बच्चों के संस्कारों और संकटकालीन समाधान में बुजुर्गों की क्या अनिवार्य भूमिका होती है?
मूल्यांकन एवं उत्तर:
संस्कारों की पाठशाला: बुजुर्ग बच्चों को केवल कहानियों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि अपने आचरण द्वारा त्याग, प्रेम, क्षमा और परोपकार के जीवन-मूल्य सिखाते हैं।
अनुभव का अमूल्य खजाना: दादी माँ की तरह घर के वरिष्ठ सदस्य कठिन से कठिन संकट (जैसे आर्थिक तंगी या पारिवारिक कलह) में अपनी परिपक्व सोच और अनुभव से सही मार्ग प्रशस्त करते हैं।
भावनात्मक सुरक्षा कवच: माता-पिता की व्यस्त दिनचर्या में दादा-दादी बच्चों को अकेलापन महसूस नहीं होने देते और घर में एक अपनत्व भरा संरक्षणकारी वातावरण निर्मित करते हैं।
V3
पाठ 3: हिमालय की बेटियाँ
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 3) — निबंध — नागार्जुन | नदियों का मानवीकरण, हिमालय की भव्यता और प्रकृति का अनुपम रिश्ता
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रसिद्ध लेखक नागार्जुन ने अपने ललित निबंध 'हिमालय की बेटियाँ' में हिमालय पर्वत से निकलने वाली पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, सतलुज, सिंधु, ब्रह्मपुत्र आदि) के प्रति एक नितांत नवीन और आत्मीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। मैदानों में बहती हुई ये नदियाँ अत्यंत शांत, गंभीर और कुलीन महिला की तरह प्रतीत होती थीं, जिनके प्रति लेखक के मन में माँ और मौसी जैसा श्रद्धाभाव था। परंतु जब लेखक हिमालय के दुर्गम शिखरों पर चढ़ा, तो उसने नदियों का एक सर्वथा भिन्न और कौतूहलपूर्ण रूप देखा। वहाँ वे नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं की तरह दुबली-पतली, उछलती-कूदती और अटखेलियाँ करती प्रतीत हुईं। लेखक ने हिमालय को एक स्नेही पिता, नदियों को उसकी चंचल बेटियाँ और उस अथाह समुद्र को, जिसमें ये नदियाँ समाहित होती हैं, हिमालय का भाग्यशाली दामाद निरूपित किया है। लेखक कालिदास के मेघदूत, काका कालेलकर द्वारा नदियों को 'लोकमाता' कहे जाने और सतलुज के किनारे बैठकर तिब्बती लोकधुनों में मानसिक शांति पाने का सुंदर चित्रण करते हैं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: प्रकृति के उपादान केवल निर्जीव वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि उनके साथ मनुष्य का संवेदनशील, पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंध है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (लेख से)
नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफी पुरानी है। लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भारतीय संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी 'माँ' और 'लोकमाता' माना जाता रहा है, किंतु लेखक नागार्जुन ने अपने निबंध में नदियों को निम्नलिखित विविध मानवीय रिश्तों के रूप में देखा है:
बेटियों के रूप में: हिमालय के आँगन में अठखेलियाँ करती, हँसती और उछलती-कूदती नन्हीं बालिकाओं (बेटियों) के रूप में।
प्रेयसी (प्रिया) के रूप में: कालिदास के यक्ष के संदर्भ में वे बेतवा नदी को एक विरही प्रेमिका के रूप में देखते हैं जो अपने प्रियतम से मिलने को उत्सुक है।
बहन के रूप में: सतलुज के किनारे जब लेखक थके और उदास मन से बैठे, तो उन्होंने सतलुज को एक स्नेहमयी 'बहन' के रूप में अनुभव किया, जिसकी शीतल जलधारा ने उनकी सारी थकान पल भर में हर ली।
माता और मौसी के रूप में: मैदानी भागों में उनकी गोद में माँ, मौसी और मामी की गोद जैसी ममतामयी शांति का अनुभव होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बेटी और प्रेयसी रूप का उल्लेख1 अंक
बहन और ममतामयी गोद के रूपों का स्पष्टीकरण1 अंक
नागार्जुन के मानवीकरण दृष्टिकोण की व्याख्या1 अंक
प्र. 2 (लेख से)
सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
निबंध में सिंधु और ब्रह्मपुत्र की निम्नलिखित विशिष्टताएँ रेखांकित की गई हैं:
पौराणिक और विशाल नदियाँ: ये दोनों भारत की दो ऐसी महान नदियाँ (नद) हैं, जिनका नाम सुनते ही रावी, चेनाब, झेलम, सतलुज, व्यास, गंगा, यमुना आदि अनगिनत छोटी-बड़ी नदियों का स्मरण हो आता है।
हिमालय के आंसुओं का संचय: लेखक के अनुसार इनका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है, बल्कि दयालु हिमालय के पिघले हुए हृदय की एक-एक बूँद एकत्रित होकर इन दो विशाल जलधाराओं के रूप में समुद्र की ओर प्रवाहित होती है।
समुद्र का सौभाग्य: समुद्र को अत्यंत भाग्यशाली माना गया है, जिसे हिमालय के इन दो तेजस्वी बेटियों का हाथ थामने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विशाल नद और सहायक नदियों का उल्लेख1 अंक
हिमालय के पिघले हृदय की बूँदों का संचय रूप1 अंक
समुद्र और बेटियों के संबंध का सुंदर विश्लेषण1 अंक
प्र. 3 (लेख से)
काका कालेलकर ने नदियों को "लोकमाता" क्यों कहा है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
प्रसिद्ध विचारक काका कालेलकर ने नदियों को 'लोकमाता' (संपूर्ण संसार की माता) कहा है, क्योंकि:
जीवनदायिनी अमृत धारा: जल ही जीवन है। नदियाँ युगों-युगों से अपनी अमृतमयी जलधारा से मानव सभ्यता, पशु-पक्षियों, वनों और कृषि को सींचकर जीवन का भरण-पोषण करती आ रही हैं।
सभ्यता की जननी: विश्व की समस्त प्राचीन मानव संस्कृतियाँ और महान नगर नदियों की घाटियों में ही पल्लवित और पुष्पित हुए हैं।
निस्वार्थ मातृत्व: नदियाँ हमारे द्वारा की जाने वाली गंदगी और प्रदूषण को सहकर भी बिना किसी भेदभाव के सभी जीवों पर अपना स्नेह और शीतल जल लुटाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक माँ अपनी संतान के समस्त दोषों को क्षमा कर उसका पालन करती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
जीवनदायिनी व कृषि-सभ्यता संवर्धक भूमिका1 अंक
निस्वार्थ त्याग और मातृत्व भाव का निरूपण1.5 अंक
भाषा की प्रवाहमयता0.5 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
निबंध में प्रयुक्त मानवीकरण अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए तथा बताइए कि निर्जीव वस्तुओं में सजीवता का आरोप कैसे किया गया है।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मानवीकरण अलंकार (जब प्रकृति अथवा निर्जीव वस्तुओं पर मानवीय भावनाओं व क्रियाओं का आरोप किया जाए):
उदाहरण 1:"संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।" स्पष्टीकरण: यहाँ मैदानी भाग में बहती हुई शांत और गंभीर नदी को एक सुसंस्कृत, शालीन और कुलीन स्त्री के रूप में चित्रित किया गया है।
उदाहरण 2:"हिमालय को ससुर और समुद्र को उसका दामाद कहने में कुछ भी झिझक नहीं होती।" स्पष्टीकरण: यहाँ पर्वतराज हिमालय को ससुर और समुद्र को दामाद मानकर दो निर्जीव प्राकृतिक भौगोलिक रूपों में मानवीय वैवाहिक रिश्तों का सजीव आरोप किया गया है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मानवीकरण के 2 सटीक उद्धरण1.5 अंक
दोनों उदाहरणों का तर्कपूर्ण स्पष्टीकरण1.5 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
नदियों से होने वाले लाभों पर अपने विचार व्यक्त कीजिए और बताइए कि मानव समाज नदियों का ऋणी क्यों है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नदियाँ मानव सभ्यता और प्रकृति की जीवनरेखा हैं:
1. पेयजल एवं कृषि: नदियाँ सिंचाई के लिए उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और मीठा जल प्रदान करती हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
2. जलविद्युत एवं उद्योग: नदियों पर बाँध बनाकर पर्यावरण-अनुकूल पनबिजली का उत्पादन किया जाता है जो उद्योगों और नगरों को ऊर्जा देती है।
3. जैव विविधता एवं पर्यावरण: नदियाँ जलीय जीवों और वनों का पोषण करती हैं। अतः नदियों को 'लोकमाता' मानकर उन्हें प्रदूषणमुक्त रखना हमारा नैतिक दायित्व है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कृषि, विद्युत और जैव विविधता में नदियों का योगदान3 अंक
भाषा की बात — प्रश्न 2
निर्जीव वस्तुओं को मानव-समान सजीव मानकर प्रस्तुत करने को 'मानवीकरण अलंकार' कहते हैं। पाठ से ऐसे दो उदाहरण छाँटकर लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
लेखक नागार्जुन द्वारा रचित पाठ 'हिमालय की बेटियाँ' से मानवीकरण अलंकार के दो सुंदर उदाहरण:
1. "सभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत होती थीं।" — यहाँ नदियों के शांत और गंभीर प्रवाह की तुलना एक शिष्ट, कुलीन नारी से की गई है।
2. "बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर ये कैसे खेला करती हैं!" — यहाँ हिमालय को पिता और नदियों को उसकी अठखेलियाँ करती हुई नन्हीं बेटियों के रूप में चित्रित किया गया है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पाठ से दो सटीक मानवीकरण उदाहरण स्पष्टीकरण सहित2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Environmental HOTS
आज नदियाँ तीव्र औद्योगिक कचरे और मानवीय लापरवाही के कारण प्रदूषित और मृतप्राय हो रही हैं। पाठ में व्यक्त नागार्जुन के "पारिवारिक रिश्ते" और काका कालेलकर के "लोकमाता" भाव के आधार पर नदियों के संरक्षण हेतु तीन व्यावहारिक सुझाव दीजिए।
संरक्षण हेतु व्यावहारिक एवं नीतिगत सुझाव:
औद्योगिक अपशिष्टों पर पूर्ण पाबंदी: कारखानों और रासायनिक उद्योगों के बिना उपचारित (Untreated) दूषित जल को सीधे नदियों में बहाने पर कड़े दंडात्मक कानून लागू किए जाने चाहिए।
धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर जागरूकता: मूर्तियों का विसर्जन, प्लास्टिक, साबुन और कचरा नदियों में डालने के स्थान पर कृत्रिम तालाबों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
तटवर्ती वृक्षारोपण एवं पुनर्जीवन: नदियों के दोनों किनारों पर व्यापक स्तर पर सघन वनीकरण किया जाए ताकि मृदा अपरदन रुके और प्राकृतिक जलस्रोत जीवित रहें।
V4
पाठ 4: कठपुतली
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 4) — कविता — भवानीप्रसाद मिश्र | परतंत्रता का आक्रोश, स्वावलंबन और सामूहिक उत्तरदायित्व का बोध
कठपुतली
गुस्से से उबली
बोली—ये धागे
क्यों हैं मेरे पीछे-आगे?
इन्हें तोड़ दो;
मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।
सुनकर बोलीं और-और
कठपुतलियाँ
कि हाँ,
बहुत दिन हुए
हमें अपने मन के छंद छुए।
मगर...
पहली कठपुतली सोचने लगी—
ये कैसी इच्छा
मेरे मन में जगी?
— भवानीप्रसाद मिश्र
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कवि भवानीप्रसाद मिश्र द्वारा रचित यह प्रसिद्ध कविता 'कठपुतली' स्वतंत्रता की प्रबल चाह और उसके साथ जुड़ी गंभीर ज़िम्मेदारी को अत्यंत मार्मिक ढंग से रेखांकित करती है। दूसरों के इशारों पर धागों में बँधकर नाचना कठपुतलियों की नियति बन चुका है। एक दिन एक कठपुतली अपनी पराधीनता से अत्यंत क्रोधित हो उठती है और विद्रोह करते हुए कहती है कि उसके आगे-पीछे बँधे इन धागों को तोड़ दिया जाए और उसे अपने पाँवों पर स्वतंत्र छोड़ दिया जाए। उसकी इस विद्रोही पुकार को सुनकर अन्य सभी कठपुतलियाँ भी उसका समर्थन करती हैं कि सचमुच बहुत दिन बीत गए, उन्होंने अपने मन की खुशी और स्वतंत्रता का अनुभव नहीं किया है। परंतु जैसे ही अन्य कठपुतलियों के स्वतंत्र होने की ज़िम्मेदारी पहली कठपुतली पर आती है, वह ठहरकर सोचने लगती है। उसे अहसास होता है कि बिना सोचे-समझे उठाया गया कदम कहीं सभी को और बड़ी विपत्ति में न डाल दे। स्वाधीन होना जितना आवश्यक है, स्वाधीनता को बनाए रखना और आत्मनिर्भर होना उससे भी बड़ा दायित्व है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: स्वतंत्रता प्राप्त करना जितना महत्वपूर्ण है, सामूहिक ज़िम्मेदारी को समझकर उस स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना और आत्मनिर्भर होना उतना ही गंभीर कार्य है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कठपुतली को निम्नलिखित कारणों से अत्यधिक क्रोध (गुस्सा) आया:
पराधीनता और बंधन का कष्ट: कठपुतली सदैव दूसरों की उँगलियों और धागों के इशारों पर नाचने के लिए विवश थी। उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं था।
धागों में जकड़ा शरीर: उसके आगे और पीछे हर तरफ धागे बँधे हुए थे, जिससे उसे अपनी परतंत्रता और लाचारी का गहरा अहसास हुआ।
स्वावलंबन की चाह: वह किसी का खिलौना बनकर नहीं, बल्कि अपने पाँवों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर और स्वच्छंद जीवन जीना चाहती थी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
धागों में बँधकर नाचने की विवशता1 अंक
पराधीनता के विरुद्ध स्वाभाविक विद्रोह1 अंक
आत्मनिर्भरता की इच्छा व स्पष्ट उत्तर1 अंक
प्र. 2 (कविता से)
कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कठपुतली अपने पाँवों पर खड़ी होने की तीव्र इच्छा रखने के बावजूद खड़ी नहीं हो पाती, क्योंकि:
शारीरिक असमर्थता: कठपुतलियाँ काठ (लकड़ी) और कपड़े की बनी होती हैं तथा धागों के सहारे ही चलती हैं। उनके पास स्वयं के बल पर खड़े होने की शारीरिक शक्ति और संतुलन नहीं होता।
पराधीनता का दीर्घकालीन अभ्यास: सदियों से धागों के सहारे चलने के कारण वे बिना सहारे के खड़े होने की क्षमता विकसित नहीं कर पाई हैं।
असुरक्षा की आशंका: यदि धागे काट दिए जाएँ, तो वह सीधे जमीन पर गिरकर टूट सकती है। इसलिए इच्छा होते हुए भी वह असमर्थ रहती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
काठ की संरचना व शारीरिक असमर्थता का उल्लेख1.5 अंक
स्वतंत्रता को संभालने की क्षमता के अभाव का विश्लेषण1.5 अंक
प्र. 3 (कविता से)
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को बहुत अच्छी लगी क्योंकि:
स्वतंत्रता की सार्वभौमिक चाह: संसार का कोई भी प्राणी पराधीन होकर खुश नहीं रह सकता। अन्य सभी कठपुतलियाँ भी धागों के बंधन में घुट रही थीं।
मन की बात कहना: पहली कठपुतली ने उन सभी के दबे हुए दर्द को स्वर दे दिया था।
खुशी की अभिलाषा: उन्होंने भी बहुत दिनों से अपने मन की इच्छा पूरी नहीं की थी और वे भी बंधनमुक्त होकर अपनी मर्जी से नाचना और जीना चाहती थीं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पराधीनता से मुक्ति की साझी आकांक्षा1.5 अंक
मन के छंद छूने की इच्छा का प्रकटीकरण1.5 अंक
प्र. 4 (कविता से)
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि "ये धागे क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? इन्हें तोड़ दो..." तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि "ये कैसी इच्छा मेरे मन में जगी?"
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पहली कठपुतली के मन में यह चिंता निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न हुई:
सामूहिक उत्तरदायित्व का अहसास: जब उसकी बात सुनकर बाकी सभी कठपुतलियाँ भी आजादी के लिए तैयार हो गईं, तो पहली कठपुतली पर उन सभी के भविष्य की भारी ज़िम्मेदारी आ गई।
अनिश्चित परिणाम का भय: उसे लगा कि क्या वे सचमुच स्वतंत्र होकर अपने पैरों पर खड़ी रह पाएँगी? कहीं यह आजादी उनके लिए और बड़ी विपत्ति या विनाश न बन जाए।
सोच-समझकर कदम उठाने की परिपक्वता: भावावेश में उठाया गया कदम यदि असफल हो जाए, तो इतिहास नेतृत्वकर्ता को दोषी ठहराता है। इसलिए वह अपने विचार और सामर्थ्य का पुनर्मूल्यांकन करने लगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नेतृत्व और सामूहिक उत्तरदायित्व का बोध1.5 अंक
स्वावलंबन की क्षमता पर विचार व दूरदर्शिता1.5 अंक
प्र. 5 (भाषा की बात)
(क) "काठ" से बना शब्द "कठपुतली" है। इसी प्रकार "कठ" और "हथ" से बनने वाले दो-दो शब्द लिखिए। (ख) "हाथ-पाँव फूलना" और "पाँवों पर खड़ा होना" मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) शब्द रचना:
कठ (काठ से): कठफोड़वा, कठघरा, कठगुलाब।
हथ (हाथ से): हथकड़ी, हथगोला, हथौड़ा।
(ख) मुहावरे और वाक्य प्रयोग:
हाथ-पाँव फूलना (घबरा जाना / भयभीत होना) वाक्य: अचानक परीक्षा भवन में प्रश्नपत्र देखकर कमजोर छात्र के हाथ-पाँव फूल गए।
पाँवों पर खड़ा होना (आत्मनिर्भर / स्वावलंबी होना) वाक्य: उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद रोहन अपने पाँवों पर खड़ा हो गया और उसने परिवार का सहारा संभाला।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कठ और हथ से 2-2 सही शब्द1.5 अंक
मुहावरों के सही अर्थ व सार्थक वाक्य प्रयोग1.5 अंक
भाषा की बात — प्रश्न 1
'पीछे' शब्द का प्रयोग करके विभिन्न अर्थों को प्रकट करने वाले दो सार्थक वाक्य बनाइए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. स्थानवाचक अर्थ में (पीछे की दिशा):
विद्यालय के पीछे एक बहुत बड़ा खेल का मैदान और आम का बगीचा है।
2. समय/कारण के अर्थ में (सहयोग या किसी के उपरांत):
उस अनाथ बालक की सफलता के पीछे उसकी गुरुजी का कठोर परिश्रम और त्याग था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
भिन्न संदर्भों में 'पीछे' शब्द के दो शुद्ध वाक्य2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Value Question
कठपुतली कविता के माध्यम से कवि ने "आजादी की माँग" और "आजादी की ज़िम्मेदारी" के बीच क्या द्वंद्व प्रस्तुत किया है? एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें अपनी स्वतंत्रता का उपभोग कैसे करना चाहिए?
विश्लेषण एवं जीवन-मूल्य:
कविता में यह शाश्वत सत्य उजागर किया गया है कि नारे लगाना या स्वतंत्रता की माँग करना बहुत सरल है, परंतु उस स्वतंत्रता को सँभालने की योग्यता और आत्मनिर्भरता अर्जित करना अत्यंत कठिन और उत्तरदायी कार्य है। पहली कठपुतली का संशय इसी परिपक्व नेतृत्व को दर्शाता है।
जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्य:
स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता (उच्छृंखलता) नहीं है; हमें संविधान और समाज के नियमों का सम्मान करना चाहिए।
अपनी आज़ादी का उपभोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दूसरों के अधिकारों और स्वाभिमान को ठेस न पहुँचे।
V5
पाठ 5: मिठाईवाला
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 5) — कहानी — भगवतीप्रसाद वाजपेयी | वात्सल्य की तलाश, आत्मिक सुख और परहित में जीने का आदर्श
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रसिद्ध कहानीकार भगवतीप्रसाद वाजपेयी द्वारा रचित 'मिठाईवाला' एक अत्यंत भावुक और मार्मिक कहानी है। नगर भर में एक फेरीवाले की मीठी और स्नेहमयी आवाज गूँजती है—"बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला।" वह कभी खिलौनेवाला, कभी मुरलीवाला और कभी मिठाईवाला बनकर आता है और बच्चों को बहुत ही कम दामों में सुंदर वस्तुएँ बेचता है। विजय बाबू के बच्चे चुन्नू और मुन्नू भी उससे खिलौने और मुरलियाँ खरीदते हैं। बच्चों की माँ रोहिणी इस बात से हैरान होती है कि कोई इतने सस्ते में चीजें कैसे बेच सकता है। अंत में जब वह मिठाई बेचने आता है, तो रोहिणी दादी के माध्यम से उससे उसका परिचय पूछती है। तब मिठाईवाला अपनी करुण गाथा सुनाता है। वह कभी अपने नगर का एक प्रतिष्ठित, धनी और सुखी व्यापारी था, जिसके पास सुंदर पत्नी और सोने के दो प्यारे बच्चे थे। परंतु विधाता की लीला से एक भयंकर दुर्घटना में उसका पूरा परिवार काल के गाल में समा गया। अब वह इन अनजान बच्चों की हँसी और किलकारियों में अपने मृत बच्चों की छवि खोजता है और उन्हें खुशियाँ बाँटकर अपने हृदय की तपन बुझाता है। अंत में वह रोहिणी के बच्चों को मुफ्त में मिठाई देकर कहता है—"अब इस बार ये पैसे न लूँगा।"
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: दुख की अग्नि में जलने के बजाय दूसरों को खुशियाँ बाँटकर अपने जीवन को सार्थक बनाना और वात्सल्य का विस्तार करना ही सच्ची मानवता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
मिठाईवाला अलग-अलग चीजें क्यों बेचता था और वह महीनों बाद क्यों आता था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिठाईवाला निम्नलिखित कारणों से रूप बदलकर अलग-अलग चीजें बेचता था और महीनों के अंतराल पर आता था:
बच्चों का आकर्षण बनाए रखना: यदि वह रोज एक ही चीज बेचता, तो बच्चे उससे ऊब जाते। बच्चों में नवीनता और उत्सुकता बनाए रखने के लिए वह कभी खिलौने, कभी मुरली और कभी रंग-बिरंगी मिठाइयाँ लेकर आता था।
व्यापार उसका उद्देश्य नहीं था: उसका उद्देश्य धन कमाना नहीं था, बल्कि बच्चों का सान्निध्य और उनकी मासूम मुस्कान पाना था। इसलिए वह नया सामान जुटाने में समय लेता था।
स्मृतियों की पीड़ा से उबरना: बच्चों के साथ कुछ दिन बिताने के बाद जब उसके मन को शांति मिल जाती, तो वह अपने निवास लौट जाता और जब पुनः बच्चों की याद सताती, तो महीनों बाद नए रूप में आता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बच्चों में नवीनता व उत्सुकता बनाए रखने का तर्क1 अंक
व्यापारिक लाभ न होकर आत्मिक सुख का उद्देश्य1 अंक
महीनों बाद आने का मनोवैज्ञानिक कारण1 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
मिठाईवाले में वे कौन-से गुण थे जिनकी वजह से बच्चे तो बच्चे, बड़े भी उसकी ओर खिंचे चले आते थे?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिठाईवाले में निम्नलिखित अद्वितीय मानवीय गुण थे, जिनके कारण सभी उसकी ओर आकर्षित होते थे:
मधुर और मादक कंठ: उसके गाने का ढंग अत्यंत मनमोहक था। वह गा-गाकर कहता—"बच्चों को बहलानेवाला, मुरलीवाला/मिठाईवाला", जो सबके दिलों को छू लेता था।
असीम धैर्य और स्नेह: वह बच्चों से कभी खीझता या गुस्सा नहीं करता था। बच्चों के साथ उसका व्यवहार अत्यंत आत्मीय, मृदु और लाड़-दुलार से भरा होता था।
उदारता और सस्ता दाम: वह बाजार भाव से बहुत सस्ते में उत्तम कोटि की चीजें बेचता था। यदि किसी बच्चे के पास पैसे कम होते, तो भी वह उसे खाली हाथ नहीं लौटाता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मधुर वाणी व गाने की विशिष्ट शैली1 अंक
स्नेहिल व्यवहार व बच्चों के प्रति धैर्य1 अंक
उदारता व सस्ते दाम में वस्तुएँ देना1 अंक
प्र. 3 (कहानी से)
विजय बाबू एक ग्राहक थे और मुरलीवाला एक विक्रेता। दोनों अपने-अपने पक्ष के समर्थन में क्या तर्क पेश करते हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
विजय बाबू और मुरलीवाले के बीच हुआ संवाद एक ग्राहक और विक्रेता की पारंपरिक मानसिकता को दर्शाता है:
ग्राहक (विजय बाबू) का तर्क: विजय बाबू कहते हैं कि तुम फेरीवालों की आदत ही ऐसी होती है। देते तो सबको दो-दो पैसे में ही होगे, पर मुझ पर एहसान का बोझा लाद रहे हो कि विशेष रूप से तुम्हें दो पैसे में दे रहा हूँ। ग्राहक हमेशा सोचता है कि दुकानदार उसे ठग रहा है।
विक्रेता (मुरलीवाला) का तर्क: मुरलीवाला विनम्रता से उत्तर देता है कि बाबूजी! ग्राहकों को असली लागत का पता नहीं होता। विक्रेता भले ही हानि उठाकर चीज बेचे, पर ग्राहक यही समझता है कि दुकानदार उसे लूट रहा है। उसने बताया कि उसने एक हजार मुरलियाँ एक साथ बनवाई थीं, इसलिए वह इस सस्ती दर पर दे पा रहा है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विजय बाबू का ग्राहक दृष्टिकोण (एहसान लादने का तर्क)1.5 अंक
मुरलीवाले का विक्रेता दृष्टिकोण (लागत व थोक दर का तर्क)1.5 अंक
प्र. 4 (कहानी से)
"अब इस बार ये पैसे न लूँगा"—कहानी के अंत में मिठाईवाले ने ऐसा क्यों कहा?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कहानी के अंत में मिठाईवाले ने पैसे लेने से मना कर दिया क्योंकि:
चुन्नू-मुन्नू में अपने बच्चों की छवि देखना: जब उसने चुन्नू और मुन्नू को देखा, तो उसे लगा कि वह अपने ही बच्चों को मिठाई दे रहा है। अपने बच्चों से कोई पिता पैसे नहीं लेता।
रोहिणी की सहानुभूति: रोहिणी ने पर्दे के पीछे से उसकी करुण दास्तान सुनकर जो आत्मीय संवेदना और अपनत्व दर्शाया, उससे मिठाईवाले का हृदय भर आया।
व्यापारिक भाव का लोप: उस क्षण वह एक फेरीवाला या व्यापारी नहीं रहा था, बल्कि एक वात्सल्यमयी पिता बन गया था जिसके लिए आत्मिक सुख धन से कहीं ऊपर था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अपने मृत बच्चों की छवि का दर्शन1.5 अंक
पिता के निस्वार्थ वात्सल्य व संवेदना की अभिव्यक्ति1.5 अंक
प्र. 5 (भाषा की बात)
फेरीवालों के बोलने के ढंग पर ध्यान दीजिए। वे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किस प्रकार की तुकबंदी या लयबद्ध आवाजों का प्रयोग करते हैं? कोई दो उदाहरण बनाकर लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
फेरीवाले ग्राहकों, विशेषकर बच्चों और गृहणियों को आकर्षित करने के लिए लयात्मक और काव्यात्मक बोलियों का प्रयोग करते हैं। उदाहरण:
सब्जीवाला: "ताजा मटर, लाल टमाटर, ले लो हरी-हरी पालक! स्वाद ऐसा कि याद रखेगा हर बालक!"
कुल्फीवाला: "ठंडी-मीठी मलाईदार कुल्फी, केसर-पिस्ता रबड़ी वाली कुल्फी! गर्मी भगाए, दिल को बहलाए!"
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दो स्वरचित लयबद्ध व रोचक फेरीवालों के संवाद2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
मिठाईवाला भिन्न-भिन्न वेश बदलकर (खिलौनेवाला, मुरलीवाला, मिठाईवाला बनकर) बच्चों के बीच क्यों आता था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिठाईवाला वास्तव में एक अत्यंत प्रतिष्ठित, धनी और सुखी व्यापारी था, जिसके हंसते-खेलते दो बच्चे और सुंदर पत्नी थी। एक दुर्घटना में उसका पूरा परिवार उजड़ गया।
• वह व्यवसाय मुनाफे या धन कमाने के लिए नहीं करता था, बल्कि वह उन नन्हें बच्चों की बाल-सुलभ हंसी और खिलखिलाहट में अपने खोए हुए बच्चों की झलक खोजता था।
• बच्चों को कम दामों में खिलौने और मिठाइयाँ देकर उन्हें प्रसन्न देखकर उसके विरही हृदय को असीम संतोष और ढांढस मिलता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिठाईवाले की पारिवारिक त्रासदी और मानसिक संतोष की खोज3 अंक
भाषा की बात — विशेषण
पाठ में से चुनकर निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए: (i) अनुराग (ii) धैर्य (iii) हर्ष (iv) मधुर
2 अंक (1/2 अंक प्रति शब्द)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) अनुराग:विराग (ii) धैर्य:अधैर्य (iii) हर्ष:शोक / विषाद (iv) मधुर:कटु
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सटीक विलोम शब्द2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Case Study
मिठाईवाला अपने अथाह व्यक्तिगत दुख और एकाकीपन को समाज के नन्हे बच्चों में खुशियाँ बाँटकर मिटाता है। क्या मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए परोपकार और दूसरों की सेवा एक प्रभावी उपचार सिद्ध हो सकता है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
विश्लेषण एवं मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य:
हाँ, परोपकार, समाज सेवा और दूसरों के जीवन में खुशियाँ लाना अवसाद और अकेलेपन से मुक्ति पाने का सर्वोत्तम साधन है।
सहानुभूति और उद्देश्य की प्राप्ति: जब व्यक्ति अपने दुख की संकीर्ण सीमा से बाहर निकलकर दूसरों के दुख-दर्द को दूर करने का प्रयास करता है, तो उसके जीवन को एक नया लक्ष्य और सार्थकता मिलती है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार: मिठाईवाले की भाँति जब हम बच्चों या असहाय लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तो मिलने वाला आत्मिक संतोष हमारे आंतरिक तनाव और मानसिक विषाद को पूरी तरह धो डालता है।
V6
पाठ 6: रक्त और हमारा शरीर
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 6) — निबंध — डॉ. यतीश अग्रवाल | रुधिर की संरचना, रक्ताल्पता (एनीमिया) और रक्तदान का महादान
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रसिद्ध चिकित्सक एवं लेखक डॉ. यतीश अग्रवाल द्वारा लिखित यह निबंध 'रक्त और हमारा शरीर' मानव शरीर में रक्त के महत्त्व, उसकी जटिल संरचना और स्वास्थ्य नियमों की वैज्ञानिक जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। अनिल अपनी छोटी बहन दिव्या को, जिसे हर समय थकान और भूख न लगने की शिकायत थी, अस्पताल ले जाता है। डॉक्टर दीदी जाँच के बाद बताती हैं कि दिव्या को एनीमिया (रक्ताल्पता) है। अनिल के पूछने पर डॉक्टर दीदी सूक्ष्मदर्शी (Microscope) से रक्त की स्लाइड दिखाकर बताती हैं कि रक्त देखने में लाल द्रव जैसा दिखता है, किंतु वास्तव में यह 'भानुमती का पिटारा' है। इसके दो मुख्य भाग हैं—तरल भाग प्लाज्मा और उसमें तैरने वाले तीन प्रकार के कण: लाल रक्त कण (RBC - जो ऑक्सीजन पहुँचाते हैं और लाल रंग देते हैं), श्वेत रक्त कण (WBC - जो रोगाणुओं से लड़कर शरीर के 'वीर सिपाही' कहलाते हैं) और बिम्बाणु (Platelets - जो चोट लगने पर रक्त का थक्का जमाकर खून बहने से रोकते हैं)। दीदी बताती हैं कि संतुलित आहार, हरी सब्जियाँ, लोहतत्व और स्वच्छता अपनाकर एनीमिया से बचा जा सकता है। साथ ही वे 18 वर्ष से अधिक स्वस्थ व्यक्तियों को नियमित रक्तदान करने के लिए प्रेरित करती हैं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और रक्तदान के प्रति वैज्ञानिक जागरूकता ही स्वस्थ जीवन और स्वस्थ समाज की आधारशिला है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
खून को "भानुमती का पिटारा" क्यों कहा गया है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
खून को 'भानुमती का पिटारा' (अनेक आश्चर्यजनक और विविध वस्तुओं का संदूक) कहा गया है, क्योंकि:
बाहरी रूप की सादगी: सामान्य आँखों से देखने पर खून केवल एक पतला लाल तरल पदार्थ दिखाई देता है।
सूक्ष्मदर्शी से देखने पर जटिल संरचना: जब इसे सूक्ष्मदर्शी से देखा जाए, तो इसमें अनगिनत घटक तैरते हुए दिखाई देते हैं, जैसे—
तरल भाग (प्लाज्मा)
करोड़ों की संख्या में लाल रक्त कण (जो बालूशाही जैसे गोल और उभयावतल होते हैं)
सफेद रक्त कण (शरीर के रक्षक सिपाही)
बिम्बाणु या प्लेटलेट्स (रक्त जमाने वाले रंगहीन कण)
खून की एक अकेली बूँद में लाखों विभिन्न प्रकार के कणों का अस्तित्व होना ही इसे भानुमती का पिटारा सिद्ध करता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मुहावरे का अर्थ (विविधताओं से भरा)1 अंक
रक्त के चारों घटकों (प्लाज्मा, RBC, WBC, Platelets) का उल्लेख1.5 अंक
स्पष्ट निष्कर्ष0.5 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
एनीमिया से बचने के लिए हमें क्या-क्या खाना चाहिए?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
एनीमिया (खून में लाल कणों व हीमोग्लोबिन की कमी) से बचने के लिए हमें संतुलित और पोषक आहार ग्रहण करना चाहिए, जिसमें निम्नलिखित प्रचुर मात्रा में हों:
लोहतत्व (आयरन) युक्त खाद्य पदार्थ: पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियाँ, बथुआ, मेथी आदि।
प्रोटीन युक्त आहार: दालें, दूध, अंडा, मांस, पनीर और सोयाबीन।
विटामिन और खनिज: फल (विशेषकर सेब, अनार, अमरूद, केला), गुड़, तिल, मूंगफली और संतरा।
ये सभी तत्व हमारी हड्डियों के मज्जा (Bone Marrow) में लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण के लिए कच्चे माल (Raw Material) का कार्य करते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
हरी पत्तेदार सब्जियाँ व आयरन युक्त आहार1 अंक
प्रोटीन व विटामिन्स के स्रोत1 अंक
अस्थिमज्जा में रक्त निर्माण का वैज्ञानिक कारण1 अंक
प्र. 3 (पाठ से)
पेट में कीड़े क्यों हो जाते हैं? इनसे कैसे बचा जा सकता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) पेट में कीड़े होने के कारण:
दूषित (गंदा) जल पीने और बिना धुले या बासी फल व खाद्य पदार्थ खाने से कीड़ों के अंडे पेट में पहुँच जाते हैं।
नंगे पाँव जमीन पर घूमने से कुछ विशेष कृमियों के लार्वा त्वचा के रास्ते शरीर में प्रवेश कर आँतों में अपना घर बना लेते हैं।
(ख) बचाव के प्रमुख उपाय:
हमेशा शुद्ध, उबला हुआ अथवा छाना हुआ स्वच्छ जल ही पिएँ।
खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएँ।
फल और कच्ची सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर खाएँ तथा खुले में रखी खाद्य सामग्री न खाएँ।
हमेशा शौचालय का ही प्रयोग करें और कभी भी नंगे पाँव जमीन पर न घूमें।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दूषित भोजन/जल व नंगे पाँव घूमने का कारण1.5 अंक
स्वच्छता, हाथ धोने व जूते पहनने के उपाय1.5 अंक
प्र. 4 (पाठ से)
रक्त के सफेद कणों को "वीर सिपाही" क्यों कहा गया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रक्त के सफेद कणों (WBC) को 'वीर सिपाही' इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार देश की सीमा पर तैनात सैनिक शत्रुओं के आक्रमण को रोकते हैं, ठीक उसी प्रकार जब बाहर से रोगाणु (बैक्टीरिया, वायरस) हमारे शरीर पर हमला करते हैं, तो सफेद रक्त कण उनसे डटकर मुकाबला करते हैं और उन्हें शरीर में घर नहीं बनाने देते। वे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) के मुख्य रक्षक हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रोगाणुओं से मुकाबला करने की क्षमता1 अंक
रोग प्रतिरोधक तंत्र के रूप में कार्य1 अंक
प्र. 5 (पाठ से)
ब्लड बैंक में रक्तदान करने से क्या-क्या लाभ होते हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
ब्लड बैंक में रक्तदान करने से निम्नलिखित अत्यंत महत्वपूर्ण लाभ होते हैं:
आपातकाल में प्राण रक्षा: सड़क दुर्घटना, गंभीर बीमारी, सर्जरी या प्रसव के समय जब मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता होती है, तो ब्लड बैंक से उसी ग्रुप का रक्त तुरंत उपलब्ध हो जाता है।
रक्त की सुरक्षित उपलब्धता: ब्लड बैंक में सुरक्षित वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा रक्त को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है, जिससे रक्त की बर्बादी नहीं होती।
दाता के स्वास्थ्य को लाभ: एक स्वस्थ वयस्क के शरीर से एक समय में केवल 300 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है, जिसकी पूर्ति हमारा शरीर कुछ ही दिनों में स्वतः कर लेता है। रक्तदान से नया रक्त बनता है और हृदय स्वस्थ रहता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
आपातकालीन जीवन रक्षा का बिंदु1 अंक
वैज्ञानिक संरक्षण व ब्लड ग्रुप की उपलब्धता1 अंक
दाता के शरीर पर कोई दुष्प्रभाव न होना1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
रक्तदान को 'महादान' क्यों कहा जाता है? समाज में रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को कैसे दूर किया जा सकता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. महादान क्यों: रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प या औद्योगिक निर्माण संभव नहीं है। दुर्घटना, सर्जरी अथवा थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों में केवल एक व्यक्ति का दिया हुआ रक्त ही दूसरे मरणासन्न व्यक्ति का जीवन बचा सकता है। अतः रक्तदान जीवनदान है।
2. भ्रांतियों का निवारण: कई लोग सोचते हैं कि रक्तदान से शरीर में कमजोरी आ जाती है। सच्चाई यह है कि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दिया गया 350 मिली रक्त शरीर कुछ ही दिनों में पुनः बना लेता है। विद्यालयों और मीडिया द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर इस भ्रांति को दूर किया जा सकता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रक्तदान का जीवनरक्षक महत्व एवं वैज्ञानिक तथ्यों द्वारा भ्रांति निवारण3 अंक
भाषा की बात — मुहावरे
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए: (i) पीठ ठोकना (ii) घर करना
2 अंक (1 अंक प्रति मुहावरा)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) पीठ ठोकना (शाबाशी देना / प्रोत्साहित करना):
कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रधानाचार्य जी ने रोहन की पीठ ठोकी।
(ii) घर करना (स्थायी रूप से बस जाना / प्रभाव जमाना):
अध्यापिका के मधुर और दयालु व्यवहार ने सभी विद्यार्थियों के मन में घर कर लिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मुहावरे का सही अर्थ और उपयुक्त वाक्य प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Health & Science HOTS
समाज में कई लोग यह अंधविश्वास पालते हैं कि "रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है या कोई बीमारी लग जाती है।" पाठ के वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इस भ्रांति का निवारण करते हुए स्पष्ट कीजिए कि रक्तदान महादान क्यों है।
भ्रांति का वैज्ञानिक निवारण:
शरीर में रक्त का भंडार: एक सामान्य स्वस्थ मनुष्य के शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त होता है। रक्तदान के दौरान केवल 300 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है।
त्वरित पुनर्निर्माण: हमारा शरीर इस खोए हुए तरल की भरपाई कुछ ही घंटों में कर लेता है और नई लाल रक्त कोशिकाएँ कुछ हफ्तों में बनकर तैयार हो जाती हैं।
संक्रमण का शून्य खतरा: आधुनिक अस्पतालों और ब्लड बैंकों में पूरी तरह से विसंक्रमित (Sterilized) नई सुई और बैग का उपयोग होता है, जिससे किसी संक्रमण का कोई खतरा नहीं रहता।
महादान: हमारा दिया हुआ रक्त किसी मरते हुए व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है, इसलिए इसे सबसे बड़ा मानवीय दान माना जाता है।
V7
पाठ 7: पापा खो गए
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 7) — नाटक — विजय तेंदुलकर | निर्जीव वस्तुओं की सजीव संवेदना और बाल सुरक्षा का सामाजिक संदेश
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
मराठी के सुप्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर द्वारा रचित नाटक 'पापा खो गए' (हिंदी अनुवाद: वसंत देव) एक अत्यंत रोचक, कल्पनाशील और विचारोत्तेजक बाल-नाटक है। समुद्र के किनारे एक सुनसान सड़क पर रात के समय बिजली का खंभा, पेड़, लेटरबक्स और नाचने वाली का पोस्टर आपस में बातें करते हैं। अचानक एक दुष्ट आदमी एक छोटी सोई हुई बच्ची का अपहरण करके वहाँ लाता है और उसे छिपाकर भोजन की तलाश में जाता है। बच्ची जागकर डर जाती है और रोने लगती है। सड़क के ये निर्जीव पात्र—खंभा, पेड़, लाल ताऊ (लेटरबक्स) और कौआ—उस मासूम बच्ची की रक्षा के लिए सजीव हो उठते हैं। बच्ची अपने घर का पता या पिता का नाम ठीक से नहीं बता पाती, वह केवल इतना कहती है कि 'पापा खो गए हैं'। सभी पात्र मिलकर एक अनूठी योजना बनाते हैं: कौआ जोर-जोर से चिल्लाकर लोगों को बुलाता है, पेड़ बच्ची पर छाया करता है, खंभा तिरछा होकर दुर्घटना का नाटक करता है और लेटरबक्स दर्शकों और पुलिस से अपील करता है कि इस बच्ची को इसके पापा तक पहुँचाया जाए।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: मानवीय संवेदना, संकट में असहाय की रक्षा का सामूहिक संकल्प और समाज में बाल सुरक्षा के प्रति सजगता।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (नाटक से)
नाटक में आपको सबसे प्यारा पात्र कौन लगा और क्यों?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नाटक में हमें सबसे प्यारा पात्र लेटरबक्स (लाल ताऊ) लगा, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
विद्वान और स्नेही स्वभाव: वह अकेला ऐसा पात्र है जो पढ़ना-लिखना जानता है। वह लोगों के पत्रों को मन लगाकर पढ़ता है और समाज के अच्छे-बुरे की गहरी समझ रखता है।
मनोरंजक व्यक्तित्व: वह बोर होने पर खुद ही गुनगुनाता है, नाचता है और सबको हँसाता रहता है। उसे सभी प्यार से 'लाल ताऊ' कहते हैं।
सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका: बच्ची की रक्षा की योजना बनाने में वह सबसे आगे रहता है और अंत में सीधे दर्शकों और समाज से बच्ची को उसके घर पहुँचाने की भावुक अपील करता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पात्र (लेटरबक्स) का चयन0.5 अंक
साक्षरता व मनोरंजक स्वभाव का उल्लेख1.5 अंक
योजना निर्माण व मानवीय संवेदना का विश्लेषण1 अंक
प्र. 2 (नाटक से)
पेड़ और खंभे में दोस्ती कैसे हुई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पेड़ और खंभे के बीच मित्रता की शुरुआत एक संकटपूर्ण घटना के दौरान हुई थी:
प्रारंभिक उपेक्षा: शुरुआत में जब बिजली का खंभा पेड़ के पास नया-नया लगाया गया था, तो वह बहुत घमंडी था और पेड़ से सीधे मुँह बात नहीं करता था। पेड़ ने कई बार बात करने की कोशिश की, पर खंभे ने घमंड दिखाया।
तूफान की रात: एक रात भयंकर आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश आई। हवा के तेज थपेड़ों से खंभा अपनी जड़ से उखड़कर सीधे पेड़ के ऊपर गिरने लगा।
पेड़ का परोपकार: पेड़ ने अपनी मजबूत शाखाओं और तने पर खंभे को झेल लिया और स्वयं घायल होकर भी खंभे को नीचे नहीं गिरने दिया।
इस घटना से खंभे का घमंड चूर-चूर हो गया और दोनों में अटूट मित्रता हो गई।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शुरुआती अनबन व खंभे का अहंकार1 अंक
तूफान में पेड़ द्वारा खंभे को थामने की घटना1.5 अंक
सच्ची मित्रता की शुरुआत0.5 अंक
प्र. 3 (नाटक से)
लेटरबक्स को सभी "लाल ताऊ" कहकर क्यों पुकारते थे?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
लेटरबक्स ऊपर से नीचे तक पूरे लाल रंग में रंगा हुआ था और उम्र व अनुभव में वह सभी पात्रों में सबसे बड़ा और समझदार था। वह बड़ों की तरह गंभीर बातें करता था और सबको ताऊ (चाचा) की तरह स्नेह और सलाह देता था। इसलिए सभी उसे प्यार से 'लाल ताऊ' कहकर पुकारते थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
लाल रंग का कारण1 अंक
बुजुर्ग/ताऊ जैसी समझदारी व स्नेह का कारण1 अंक
प्र. 4 (नाटक से)
बच्ची को दुष्ट आदमी से बचाने और उसके घर पहुँचाने के लिए सभी पात्रों ने क्या-क्या योजना बनाई?
4 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मासूम बच्ची को अपहरणकर्ता से बचाने और घर पहुँचाने के लिए सभी पात्रों ने मिलकर निम्नलिखित अद्भुत संयुक्त योजना बनाई:
दुष्ट को डराना: जब दुष्ट आदमी आया, तो खंभा, पेड़ और लेटरबक्स ने मिलकर 'भूत-भूत' की डरावनी आवाजें निकालीं, जिससे डरकर वह भाग गया।
पुलिस और भीड़ को आकर्षित करना: कौए ने सलाह दी कि जैसे ही सुबह हो, खंभा टेढ़ा होकर खड़ा हो जाए जैसे कोई भयानक दुर्घटना हो गई हो।
पेड़ का सहयोग: पेड़ अपनी बड़ी-बड़ी शाखाओं और पत्तों को झुकाकर बच्ची को छाया में छुपा ले ताकि कोई उसे फिर से न चुरा सके।
कौए की काँव-काँव: कौआ जोर-जोर से काँव-काँव करके सड़क के लोगों का ध्यान बच्ची की तरफ खींचेगा।
लेटरबक्स की सार्वजनिक अपील: यदि फिर भी कोई न आए, तो लेटरबक्स दर्शकों से कहेगा कि जिस किसी को भी इस प्यारी बच्ची के पापा का पता मालूम हो, वह तुरंत इसे इसके घर पहुँचा दे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
भूत बनकर दुष्ट को भगाने की योजना1 अंक
खंभे के टेढ़े होने व पेड़ की छाया का कार्य1 अंक
कौए और लेटरबक्स की भूमिका1.5 अंक
प्रस्तुति व भाषा की शुद्धता0.5 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
नाटक 'पापा खो गए' में आपको सबसे अधिक बुद्धिमान और सक्रिय पात्र कौन लगा और क्यों?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नाटक 'पापा खो गए' में सबसे अधिक बुद्धिमान और सक्रिय पात्र कौआ लगा, क्योंकि:
1. जब दुष्ट व्यक्ति छोटी बच्ची का अपहरण करके लाया, तो सबसे पहले कौए ने ही संकट को भाँपकर सभी निर्जीव मित्रों (पेड़, खंभा, लेटरबॉक्स) को जगाया।
2. कौए ने ही बच्ची को बचाने की सफल योजना बनाई कि खंभे को टेढ़ा कर दिया जाए ताकि पुलिस और राहगीरों का ध्यान आकर्षित हो सके।
3. उसने ही दर्शकों और समाज से अपील की कि यदि बच्ची के पापा दिखाई दें तो उन्हें यहाँ ले आएं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कौए की सतर्कता, बुद्धिमानी और नेतृत्व का तार्किक विवेचन3 अंक
भाषा की बात — व्याकरण
निर्जीव वस्तुओं के मानवीकरण से नाटक में क्या विशेषता उत्पन्न हुई है? संक्षेप में लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
निर्जीव वस्तुओं (खंभा, पेड़, लेटरबॉक्स और नाचने वाली लड़की का पोस्टर) के आपसी संवादों और मानवीकरण से नाटक अत्यंत रोचक, सजीव और संवेदनशील बन गया है। यह तकनीक मानवीय समाज की स्वार्थपरकता और संवेदनहीनता पर करारा व्यंग्य करती है कि जो काम जीते-जागते मनुष्य नहीं कर पाते, वे निर्जीव वस्तुएं बच्ची की रक्षा के लिए एकजुट होकर कर दिखाती हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मानवीकरण का कलात्मक प्रभाव एवं सामाजिक व्यंग्य2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Life Skills / HOTS
नाटक में छोटी बच्ची अपने घर का सटीक पता या पिता का फोन नंबर नहीं बता पाती और केवल कहती है कि "पापा खो गए हैं"। आज के समय में बाल सुरक्षा (Child Safety) के दृष्टिकोण से प्रत्येक बच्चे को अपने बारे में कौन-सी 3 आवश्यक जानकारियाँ कंठस्थ होनी चाहिए?
बाल सुरक्षा हेतु अनिवार्य जीवन-कौशल:
माता-पिता का पूर्ण नाम एवं सक्रिय मोबाइल नंबर: बच्चे को कम से कम माता या पिता में से किसी एक का 10 अंकों का फोन नंबर पूरी तरह याद होना चाहिए।
घर का स्थायी पता एवं प्रसिद्ध लैंडमार्क: बच्चे को अपने घर का नंबर, गली/मोहल्ले का नाम और शहर का नाम स्पष्ट रूप से मालूम होना चाहिए।
आपातकालीन नंबरों की समझ: बच्चे को पुलिस हेल्पलाइन (112 या 100) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए तथा अजनबियों से खाने की चीज न लेने की समझ होनी चाहिए।
V8
पाठ 8: शाम एक किसान
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 8) — कविता — सर्वेश्वर दयाल सक्सेना | जाड़े की शाम का अद्वितीय मानवीकरण और प्रकृति का शांत सौंदर्य
आकाश का साफ़ा बाँधकर
सूरज की चिलम खींचता
बैठा है पहाड़,
घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी,
पास ही दहक रही है
पलाश के जंगल की अँगीठी,
अंधकार दूर पूर्व में
सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा।
अचानक बोला मोर।
जैसे किसी ने आवाज़ दी—
'सुनते हो!'
चिलम औंधी
धुआँ उठा—
सूरज डूबा
अँधेरा छा गया।
— सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रसिद्ध आधुनिक कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित कविता 'शाम एक किसान' में जाड़े की एक शांत शाम के प्राकृतिक दृश्य का एक किसान के रूप में अत्यंत सजीव और मौलिक मानवीकरण किया गया है। कवि कल्पना करते हैं कि ऊँचा पहाड़ एक किसान की तरह घुटने मोड़े बैठा है, जिसने सिर पर नीले आकाश का साफ़ा (पगड़ी) बाँध रखा है। वह डूबते हुए लाल सूरज को चिलम की तरह सुलगता हुआ पी रहा है। पहाड़ के चरणों में बहती हुई नदी ऐसी प्रतीत होती है मानो किसान ने अपने घुटनों पर सफेद चादर ओढ़ रखी हो। पास ही खिले हुए लाल-लाल पलाश के फूल दहकती हुई अँगीठी के समान लग रहे हैं। पूर्व दिशा में गहराता हुआ अंधकार ऐसे सिमटकर बैठा है मानो भेड़ों का झुंड (गल्ला) एक स्थान पर दुबक कर बैठा हो। संपूर्ण वातावरण में एक गहरा सन्नाटा और शांति है। तभी अचानक मोर बोल उठता है, मानो किसी ने पुकारा हो—'सुनते हो!'। इस आवाज के साथ ही सारा दृश्य एकाएक बदल जाता है। चिलम उलट जाती है, धुआँ उठने लगता है, सूरज डूब जाता है और चारों ओर घना अंधकार छा जाता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: प्रकृति के प्रत्येक रूप में जीवन और मानवीय गतिविधियों का सुंदर सामंजस्य है। एक छोटी सी प्राकृतिक ध्वनि भी संपूर्ण वातावरण को पल भर में बदल सकती है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
इस कविता में शाम के दृश्य को किसान के रूप में दिखाया गया है। इसे बनाने के लिए किन-किन उपमानों और रूपकों का प्रयोग किया गया है? सूची बनाइए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता में जाड़े की शाम को किसान का रूप देने के लिए निम्नलिखित उपमानों और रूपकों का सुंदर संयोजन किया गया है:
प्राकृतिक दृश्य (उपमेय)
किसान से संबंध (उपमान/रूपक)
1. पहाड़
घुटने मोड़े बैठा हुआ किसान
2. नीला आकाश
किसान के सिर पर बँधा साफ़ा (पगड़ी)
3. ढलता हुआ सूरज
सुलगती हुई चिलम
4. बहती हुई नदी
घुटनों पर पड़ी सफेद चादर
5. पलाश के लाल फूल
पास ही दहकती हुई अँगीठी
6. पूर्व का अंधकार
सिमटकर बैठा भेड़ों का झुंड (गल्ला)
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पहाड़, आकाश और सूरज के रूपकों का उल्लेख1.5 अंक
नदी, पलाश और अंधकार के उपमानों का उल्लेख1.5 अंक
प्र. 2 (कविता से)
शाम का शांत वातावरण अचानक कैसे बदल गया? घटनाक्रम का वर्णन कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
शाम का गहराता हुआ सन्नाटा एक मोर की आवाज से एकाएक नाटकीय ढंग से बदल गया:
मोर की आवाज: शांत वातावरण में अचानक एक मोर की कूक गूँजी, जो ऐसी लगी मानो किसी ने घर से किसान को पुकारा हो—'सुनते हो!'
क्रमभंग और हलचल: इस अप्रत्याशित आवाज से किसान का ध्यान टूट गया। हड़बड़ाहट में उसके हाथ से चिलम औंधी (उलट) हो गई।
अंगारों का बुझना: चिलम उलटने से आग बुझ गई और धुआँ उठने लगा।
रात्रि का आगमन: पश्चिम में सूरज पूरी तरह डूब गया, दिशाओं में लालिमा समाप्त हो गई और पूर्व से आया अंधकार संपूर्ण पृथ्वी पर छा गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मोर की आवाज और पुकार का प्रभाव1 अंक
चिलम का उलटना और धुआँ उठने की घटना1 अंक
सूरज डूबने और अंधकार छाने का निष्कर्ष1 अंक
प्र. 3 (भाषा की बात)
नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों के आधार पर उपमा और रूपक का अंतर स्पष्ट कीजिए— (क) "नदी चादर-सी" (ख) "आकाश का साफ़ा"
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'नदी चादर-सी': इसमें उपमा अलंकार है। यहाँ नदी की तुलना चादर से की गई है और सादृश्यवाचक शब्द 'सी' का स्पष्ट प्रयोग हुआ है।
(ख) 'आकाश का साफ़ा': इसमें रूपक अलंकार है। यहाँ आकाश और साफ़े में कोई अंतर नहीं रखा गया, बल्कि आकाश पर ही साफ़े का सीधा अभेद आरोप कर दिया गया है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
उपमा अलंकार व वाचक शब्द का स्पष्टीकरण1 अंक
रूपक अलंकार व अभेद आरोप का स्पष्टीकरण1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
शाम के समय आपके आस-पास के वातावरण में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
शाम ढलते ही प्रकृति और जन-जीवन में मनोरम परिवर्तन देखने को मिलते हैं:
1. पक्षियों का कलरव: दिनभर भोजन की तलाश में उड़े पक्षी झुंड बनाकर चहचहाते हुए अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
2. आकाश की लालिमा: पश्चिम दिशा में सूर्य अस्त होता है और सिंदूरी लालिमा धीरे-धीरे धुंधले अंधकार में विलीन होने लगती है।
3. जन-जीवन की वापसी: खेतों में काम करने वाले किसान, चरवाहे अपनी गायों के साथ और दफ्तरों से थके-हारे लोग अपने-अपने घरों की ओर लौटते हैं तथा मंदिरों में संध्या आरती की घंटियाँ गूँज उठती हैं।
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संध्याकाल के प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश का सुंदर वर्णन3 अंक
भाषा की बात — क्रिया शब्द
कविता में 'दहाड़ना', 'सिमटना', 'पलटना' जैसे क्रिया शब्दों का प्रयोग हुआ है। इनमें से किन्हीं दो शब्दों से नए वाक्य बनाइए।
2 अंक (1 अंक प्रति वाक्य)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) सिमटना: ठंड बढ़ते ही सड़क पर बैठा कुत्ता अपने शरीर को सिकोड़कर कोने में सिमट गया। (ii) पलटना: अचानक तेज हवा का झोंका आया और मेज पर रखी खुली किताब के पन्ने पलटने लगे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दिए गए क्रिया शब्दों के दो व्याकरण सम्मत वाक्य2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Creative Expression
कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने शाम को एक शांत किसान के रूप में देखा। यदि आपको किसी "महानगर की शाम" का चित्रण करना हो, तो आप किन-किन बिंबों (Images) और उपमानों का प्रयोग करेंगे? संक्षेप में लिखिए।
महानगर की शाम का आधुनिक बिंब-चित्रण:
सड़कों पर ट्रैफिक: सड़कों पर रेंगती हुई गाड़ियों की लाल और पीली बत्तियों की कतारें ऐसी लगती हैं मानो कोई विशाल चमकीला अजगर सरक रहा हो।
ऊँची इमारतें: शीशे की बहुमंजिला इमारतें ऐसी लगती हैं जैसे कोई विशालकाय रोबोट बत्तियों की आँखें झपकाए थकान से खड़ा हो।
भागती भीड़: लोकल ट्रेनों और मेट्रो स्टेशनों में घुसती हुई भीड़ चींटियों की कतार जैसी प्रतीत होती है, जो दिनभर के परिश्रम के बाद अपने घोंसलों की ओर लौट रही हो।
V9
पाठ 9: चिड़िया की बच्ची
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 9) — कहानी — जैनेंद्र कुमार | धन का प्रलोभन, वात्सल्य का मूल्य और स्वतंत्रता की अदम्य भावना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कथाकार जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित यह कहानी 'चिड़िया की बच्ची' मानव मन के स्वार्थ, संपन्नता के खोखलेपन और एक नन्हीं चिड़िया के अपनी माँ के प्रति निश्छल प्रेम का अद्भुत मनोवैज्ञानिक द्वंद्व प्रस्तुत करती है। सेठ माधवदास ने संगमरमर की एक भव्य कोठी बनवाई है और उसके सामने एक सुंदर बगीचा लगवाया है। उनके पास अपार धन-दौलत है, परंतु वे भीतर से अत्यंत अकेले हैं। एक शाम एक नन्हीं सुंदर चिड़िया उड़ती हुई गुलाब की डाली पर आ बैठती है। चिड़िया की चंचलता देखकर माधवदास मुग्ध हो जाते हैं। वे चाहते हैं कि चिड़िया हमेशा के लिए उनके पास ही रुक जाए। वे उसे सोने के पिंजरे, मोतियों की झालर और सोने की कटोरी में दाने-पानी के प्रलोभन देते हैं। परंतु नन्हीं चिड़िया इन सांसारिक प्रलोभनों से सर्वथा अनभिज्ञ है। वह कहती है कि उसे तो केवल अपनी माँ की गोद, धूप और ताजी हवा से प्यार है और शाम होते ही उसे अपनी माँ के पास लौटना है। जब चिड़िया जाने की जिद करती है, तो सेठ चुपके से नौकर को इशारा करके उसे पकड़वाने की कोशिश करता है। नौकर का कठोर हाथ लगते ही चिड़िया चीख मारकर उड़ जाती है और अंततः अपनी माँ की गोद में जाकर ही अपनी जान बचाती है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: भौतिक सुख-सुविधाएँ और धन का प्रलोभन माँ के वात्सल्य और स्वतंत्रता के सामने तिनके के समान तुच्छ हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से उनके अकेलेपन का पता चलता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) संपन्नता (अमीरी) दर्शाने वाली बातें:
माधवदास के पास संगमरमर की बहुत बड़ी और आलीशान कोठी थी।
सुंदर बगीचा, फव्वारे, सोने-चाँदी के बर्तन और नौकर-चाकरों की लंबी फौज थी।
वे चिड़िया के लिए सोने का पिंजरा बनवाने और उसमें मोतियों की झालर लटकाने की बात सहजता से कहते हैं।
(ख) अकेलेपन (खालीपन) को दर्शाने वाली बातें:
शाम के समय वे कोठी के चबूतरे पर मसनद के सहारे बैठकर अकेले ही शाम का ढलना देखते थे।
वे स्वयं स्वीकार करते हैं कि उनके महल में कोई हँसने-बोलने वाला नहीं है और उनका दिल बिल्कुल सूना और वीरान है।
एक अनजान छोटी चिड़िया को अपने पास रोकने के लिए वे इतने लाचार हो जाते हैं कि छल-कपट का सहारा लेते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
संगमरमर की कोठी व धन के साक्ष्य1.5 अंक
सूनेपन व चिड़िया को रोकने की व्यग्रता के साक्ष्य1.5 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि "यह बगीचा तुम्हारा ही है"? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
माधवदास बार-बार चिड़िया से कहता है कि 'यह बगीचा तुम्हारा ही है' ताकि चिड़िया के मन से सारा डर निकल जाए और वह उस बगीचे को अपना समझकर वहीं बस जाए।
निःस्वार्थता का खंडन:
नहीं, माधवदास यह बात बिल्कुल भी निःस्वार्थ मन से नहीं कह रहा था। उसके पीछे उसका गहरा स्वार्थ छिपा था। वह चिड़िया की मनमोहक चहचहाहट और मासूम अठखेलियों से अपने जीवन के अकेलेपन और वीराने को भरना चाहता था। वह चिड़िया को एक खिलौना बनाकर अपनी कोठी की शोभा बढ़ाना चाहता था। जब चिड़िया बातों से नहीं मानी, तो उसने नौकर से उसे झपटने को कहकर अपनी स्वार्थी और कपटी मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण दे दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चिड़िया का भय दूर कर फुसलाने का उद्देश्य1.5 अंक
स्वार्थ व अकेलेपन को भरने की कपटपूर्ण मंशा1.5 अंक
प्र. 3 (कहानी से)
माधवदास के प्रलोभनों का नन्हीं चिड़िया पर क्या प्रभाव पड़ा और उसने क्या उत्तर दिया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
माधवदास ने चिड़िया को सोने का पिंजरा, सोने की कटोरी और अथाह धन-दौलत का लालच दिया, परंतु नन्हीं चिड़िया पर इन भौतिक प्रलोभनों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा:
सोने के मूल्य से अनजान: चिड़िया ने सीधेपन से कहा कि वह नहीं जानती कि 'सोना' क्या होता है और उसका क्या मूल्य है।
माँ का सर्वोच्च स्थान: उसने कहा कि उसके लिए उसकी माँ की धूप, घास के तिनके, पानी की बूँदें और माँ की छाती से चिपककर सोना ही संसार का सबसे बड़ा सुख है।
घर लौटने की व्याकुलता: जैसे ही उसे आभास हुआ कि सेठ उसे जाने नहीं देना चाहता, वह घबरा गई और बार-बार कहने लगी—"मुझे देर हो रही है, मेरी माँ बाट (रास्ता) देखती होगी।"
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सोने के प्रलोभन की उपेक्षा1 अंक
माँ के प्रेम और प्राकृतिक सुख को प्राथमिकता1 अंक
घर लौटने की तड़प व उत्तर1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
पाठ में "ही" और "भी" निपात शब्दों का प्रयोग कई बार हुआ है। इन दोनों निपातों का प्रयोग करते हुए दो-दो सार्थक वाक्य बनाइए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'ही' निपात (निश्चय या सीमा का बोध कराने हेतु):
मैं आज शाम को ही अपना गृहकार्य पूरा करूँगा।
सचिन ही हमारी टीम का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज है।
(ख) 'भी' निपात (समावेश या अतिरिक्तता का बोध कराने हेतु):
मेरे साथ मेरा छोटा भाई भी मेले में जाएगा।
कठिन परिश्रम करने पर असफल व्यक्ति भी सफलता प्राप्त कर सकता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'ही' निपात से 2 शुद्ध वाक्य1 अंक
'भी' निपात से 2 शुद्ध वाक्य1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
सेठ माधवदास के विशाल संगमरमरी महल, सोने के पिंजरे और धन-वैभव की तुलना में नन्ही चिड़िया के लिए माँ की गोद क्यों अधिक मूल्यवान थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित कहानी 'चिड़िया की बच्ची' स्वतंत्रता और ममता के शाश्वत सत्य को उजागर करती है:
• सेठ माधवदास के पास अपार भौतिक संपदा थी, किंतु उसके जीवन में अकेलापन और शून्य था। वह सोने के पिंजरे और मोतियों की झालर से चिड़िया की स्वतंत्रता खरीदना चाहता था।
• नन्ही चिड़िया के लिए भौतिक विलासिता का कोई मोल नहीं था। उसके लिए खुली हवा, धूप, बहता पानी, हरी डालियाँ और सबसे बढ़कर अपनी माँ का निस्वार्थ प्रेम, आंचल और गोद ही संसार का सबसे बड़ा सुख था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
भौतिक सुख बनाम प्राकृतिक स्वतंत्रता एवं मातृत्व का विश्लेषण3 अंक
भाषा की बात — निपात
पाठ में 'भी', 'तो', 'ही' जैसे निपात शब्दों का प्रयोग हुआ है। किन्हीं दो निपात शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
2 अंक (1 अंक प्रति वाक्य)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) 'ही' निपात (निश्चय/बल देने के लिए): मैं कल शाम को ही अपना गृहकार्य पूरा कर लूँगा। (ii) 'भी' निपात (समावेश करने के लिए): इस कठिन प्रतियोगिता में रीमा के साथ-साथ रोहन ने भी भाग लिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
निपात का सही वाक्य में बलपूर्वक सार्थक प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Moral / HOTS Question
सेठ माधवदास के पास सब कुछ था, फिर भी वे एक नन्हीं चिड़िया की स्वतंत्रता छीनना चाहते थे। इस कहानी के माध्यम से लेखक आज के भौतिकतावादी समाज के किस क्रूर चेहरे को बेनकाब करते हैं?
समीक्षा एवं जीवन-मूल्य:
पैसे से सब कुछ खरीदने का भ्रम: धनवान व्यक्ति अक्सर यह मान बैठते हैं कि धन के बल पर वे किसी का प्रेम, निष्ठा और यहाँ तक कि स्वतंत्रता भी खरीद सकते हैं।
प्रकृति का शोषण: मनुष्य अपने स्वार्थ और मनोरंजन के लिए बेजुबान पशु-पक्षियों को बंदी बनाने में तनिक भी संकोच नहीं करता।
प्रेम की विजय: चिड़िया की जीत यह संदेश देती है कि सच्चा स्नेह, आत्मीयता और स्वतंत्रता कभी भी सोने के सिक्कों या महलों से नहीं खरीदी जा सकती।
V10
पाठ 10: अपूर्व अनुभव
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 10) — संस्मरण — तेत्सुको कुरोयानागी (तोत्तो-चान) | अदम्य साहस, सच्ची मित्रता और समावेशी शिक्षा का अनुपम प्रसंग
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
विश्वप्रसिद्ध जापानी पुस्तक 'तोत्तो-चान: खिड़की पर तोत्तो-चान' से साभार लिया गया यह संस्मरण तेत्सुको कुरोयानागी के बचपन की एक अत्यंत साहसिक और भावुक घटना पर आधारित है। तोमोए स्कूल में प्रत्येक बच्चे का अपना एक निजी पेड़ था, जिसे वे अपनी निजी संपत्ति मानते थे। तोत्तो-चान का मित्र यासुकी-चान पोलियो ग्रस्त था, जिसके कारण उसके हाथ-पैर कमजोर थे और वह कभी किसी पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। तोत्तो-चान ने निश्चय किया कि वह यासुकी-चान को अपने पेड़ की द्विशाखा पर चढ़ाकर ही रहेगी। दोनों ने यह बात अपने माता-पिता से छिपाकर रखी। तोत्तो-चान चौकीदार के छप्पर से एक सीढ़ी घसीटकर लाती है, परंतु कमजोर यासुकी-चान उस पर नहीं चढ़ पाता। तोत्तो-चान हार नहीं मानती; वह तिपाई सीढ़ी लाती है और पसीने से लथपथ होकर यासुकी-चान को पीछे से सहारा देकर ऊपर धकेलती है। अंततः अथक परिश्रम से वह यासुकी-चान को पेड़ की द्विशाखा पर पहुँचा देती है। दोनों बच्चे वहाँ बैठकर दुनिया का नजारा देखते हैं और यासुकी-चान पहली बार पेड़ पर चढ़ने का 'अपूर्व अनुभव' प्राप्त करता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: सच्ची मित्रता में शारीरिक सीमाएँ बाधा नहीं बनतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और निस्वार्थ सहयोग से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने के लिए तोत्तो-चान ने क्या-क्या अथक प्रयास किए?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
तोत्तो-चान ने पोलियो ग्रस्त यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने के लिए निम्नलिखित कठिन प्रयास किए:
सीढ़ी लाना: वह सबसे पहले स्कूल के चौकीदार के छप्पर से एक भारी सीढ़ी घसीटकर लाई और उसे पेड़ के तने से लगाया, किंतु यासुकी-चान के पैर इतने कमजोर थे कि वह पहली सीढ़ी पर भी न चढ़ सका।
तिपाई सीढ़ी का प्रबंध: पहली योजना विफल होने पर तोत्तो-चान निराश नहीं हुई। वह दौड़कर छप्पर से एक स्थिर तिपाई सीढ़ी (तीन पैरों वाली सीढ़ी) खींचकर लाई।
शारीरिक सहयोग: चिलचिलाती धूप में पसीने से तरबतर होने के बावजूद तोत्तो-चान ने यासुकी-चान का एक-एक पैर सीढ़ी के डंडों पर रखा और अपने पूरे शरीर के बल से उसे पीछे से धकेलकर ऊपर चढ़ाया।
द्विशाखा पर खींचना: अंत में जब यासुकी-चान सीढ़ी के शीर्ष पर पहुँचा, तो तोत्तो-चान ने पेड़ पर लेटकर अपने दोनों नन्हे हाथों से उसे पूरी ताकत से खींचकर द्विशाखा पर सुरक्षित पहुँचा दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सीढ़ी व तिपाई सीढ़ी लाने का उल्लेख1 अंक
पसीने से लथपथ होकर पीछे से सहारा देने का वर्णन1 अंक
द्विशाखा पर खींचने का साहसिक प्रयास1 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोत्तो-चान और यासुकी-चान को "अपूर्व अनुभव" क्यों मिला?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
दोनों बच्चों को मिला अनुभव 'अपूर्व' (जो पहले कभी न हुआ हो) था, क्योंकि:
यासुकी-चान के लिए: उसने अपने जीवन में कभी किसी पेड़ पर चढ़ने की कल्पना भी नहीं की थी। पोलियो के कारण वह हमेशा जमीन पर रहता था। पेड़ की ऊँचाई से आकाश, हवा और दूर की दुनिया को देखना उसके लिए एक अलौकिक और जादुई अनुभव था।
तोत्तो-चान के लिए: उसने अपने एक असहाय मित्र के असंभव सपने को सच कर दिखाया था। एक बड़े जोखिम भरे काम को अपनी लगन से पूरा करने पर उसे जो आत्मिक संतोष और विजय का उल्लास मिला, वह उसके लिए पहला और अविस्मरणीय अनुभव था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
यासुकी-चान के दृष्टिकोण से नया संसार देखना1.5 अंक
तोत्तो-चान के दृष्टिकोण से मित्र का सपना पूरा करने का उल्लास1.5 अंक
प्र. 3 (पाठ से)
यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम अवसर क्यों था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
यासुकी-चान के लिए यह पहला और अंतिम अवसर इसलिए था क्योंकि वह पोलियो ग्रस्त था और स्वयं कभी किसी पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। तोत्तो-चान जैसी समर्पित, साहसी और जान जोखिम में डालकर साथ देने वाली सहेली रोज-रोज ऐसा असंभव और खतरनाक कार्य नहीं कर सकती थी। बड़े होने पर ऐसा दुस्साहस करना और भी कठिन होता। अतः यह उसके जीवन का एकमात्र दुर्लभ अवसर था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शारीरिक अक्षमता व जोखिम का उल्लेख1 अंक
तोत्तो-चान जैसे समर्पित मित्र के दुर्लभ प्रयास का तर्क1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
पाठ में द्विशाखा शब्द आया है (द्वि + शाखा = दो शाखाएँ)। इसी प्रकार "द्वि" और "त्रि" उपसर्ग से बनने वाले दो-दो शब्द लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'द्वि' उपसर्ग से बने शब्द (अर्थ: दो):
द्विपक्षीय (दो पक्षों से संबंधित)
द्विगु (दो गायों का समूह / समास का नाम)
(ख) 'त्रि' उपसर्ग से बने शब्द (अर्थ: तीन):
त्रिभुज (तीन भुजाओं वाली आकृति)
त्रिलोक (तीनों लोकों का समाहार)
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'द्वि' से 2 सही शब्द1 अंक
'त्रि' से 2 सही शब्द1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
तोत्तो-चान द्वारा पोलियो ग्रस्त यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने का प्रयास किस मानवीय मूल्य को दर्शाता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
तोत्तो-चान का यह प्रयास बाल-सुलभ मित्रता, संवेदनशीलता और समावेशी दृष्टिकोण की पराकाष्ठा है:
1. सच्ची मित्रता: उसने शारीरिक अक्षमता को मित्रता के आड़े नहीं आने दिया और अपने मित्र को भी वही आनंद देना चाहा जो सामान्य बच्चे पाते हैं।
2. धैर्य और दृढ़ संकल्प: भीषण गर्मी और पसीने से लथपथ होने पर भी उसने हार नहीं मानी और जोखिम उठाकर तिपाई सीढ़ी की मदद से यासुकी-चान को पेड़ की द्विशाखा तक पहुँचाया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सहानुभूति, सहयोग और अटूट बाल-संकल्प का निरूपण3 अंक
भाषा की बात — समास
द्वंद्व समास के दो उदाहरण पाठ के आधार पर लिखिए तथा उनका विग्रह कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. दिन-रात: दिन और रात (दोनों पद प्रधान, योजक चिह्न सहित) 2. माता-पिता: माता और पिता
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
द्वंद्व समास के दो शुद्ध उदाहरण और विग्रह2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Inclusive Education Case Study
तोत्तो-चान ने अपने दिव्यांग मित्र यासुकी-चान के प्रति जो संवेदनशीलता और सहयोग दिखाया, वह समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। हमारे विद्यालयों में दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) सहपाठियों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए?
समावेशी दृष्टिकोण एवं व्यवहारिक सुझाव:
सहानुभूति नहीं, समान सम्मान: हमें दिव्यांग मित्रों पर दया या तरस खाने के बजाय उन्हें सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों में बराबरी का भागीदार बनाना चाहिए।
सक्रिय सहयोग: सीढ़ियों पर चढ़ने, कक्षा बदलने या खेल मैदान में आवश्यकता पड़ने पर बिना उनका स्वाभिमान आहत किए प्रेमपूर्वक उनकी मदद करनी चाहिए।
उत्साहवर्धन: उनकी प्रतिभा (चित्रकला, गायन, लेखन आदि) की खुलकर सराहना करनी चाहिए ताकि उनके भीतर हीनभावना न पनपने पाए।
V11
पाठ 11: रहीम के दोहे
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 11) — नीतिपरक दोहे — रहीम | सच्चे मित्र की पहचान, परोपकार, सहनशीलता और प्रेम की गरिमा
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।
बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥
जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह॥
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियत न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहिं सुजान॥
थोथे बादर क्वाँर के, ज्यों रहीम घहरात।
धनी पुरुष निरधन भए, करैं पाछिली बात॥
धरती की सी रीत है, सीत घाम औ मेह।
जैसी परे सो सहि रहै, त्यों रहीम यह देह॥
— अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम)
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
मध्यकालीन भक्तिकालीन एवं नीतिकार कवि रहीम के ये नीतिपरक दोहे व्यावहारिक जीवन, आचरण और मानवीय संबंधों की अमूल्य शिक्षा देते हैं:
1. सच्चे मित्र की पहचान: धन-दौलत होने पर संसार के बहुत से लोग विभिन्न बहाने बनाकर सगे-संबंधी बन जाते हैं, परंतु सच्चा मित्र केवल वही होता है जो विपत्ति (कठिनाई) की कसौटी पर खरा उतरे।
2. अनन्य निष्ठा: मछली जल से निस्वार्थ प्रेम करती है। जाल फेंके जाने पर जल मछली का मोह त्यागकर बह जाता है, परंतु मछली जल के वियोग में तड़प-तड़प कर अपने प्राण त्याग देती है।
3. परोपकार का आदर्श: वृक्ष कभी अपने मीठे फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर कभी अपना जल स्वयं नहीं पीता। इसी प्रकार सज्जन पुरुष परोपकार और समाज कल्याण के लिए ही धन का संचय करते हैं।
4. अहंकार और बड़बोलापन: क्वार (आश्विन) मास के खाली बादल केवल गड़गड़ाहट करते हैं, बरसते नहीं। वैसे ही जो धनी व्यक्ति निर्धन हो जाते हैं, वे अपनी पुरानी संपन्नता की डींगें हाँकते रहते हैं।
5. सहनशीलता: यह मानव शरीर धरती के समान सहनशील होना चाहिए। जिस प्रकार धरती सर्दी, गर्मी और वर्षा के हर थपेड़े को धैर्यपूर्वक सहती है, उसी प्रकार मनुष्य को जीवन के सुख-दुख को समभाव से स्वीकार करना चाहिए।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: सच्ची मित्रता, निस्वार्थ परोपकार, सहनशीलता और अनुकूलनशीलता ही सुखी एवं सार्थक मानवीय जीवन के आधार-स्तंभ हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (दोहों से)
पाठ में दिए गए दोहों की सहायता से बताइए कि सच्चे मित्र की क्या पहचान है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रहीम जी के प्रथम दोहे के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान निम्नलिखित है:
विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरना: जिस प्रकार सोने की शुद्धता की पहचान कसौटी नामक पत्थर पर घिसकर की जाती है, ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र की पहचान संकट और विपत्ति के समय होती है।
सुख के साथी बनाम दुख के साथी: जब व्यक्ति के पास धन-संपत्ति होती है, तो अनगिनत लोग स्वार्थवश मित्र बन जाते हैं। परंतु सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय, विपदा और अभाव में भी साथ न छोड़े और निःस्वार्थ भाव से सहायता करे।
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विपत्ति कसौटी का उल्लेख व अर्थ1.5 अंक
सुख के झूठे संबंध बनाम संकट में स्थायी साथ का विश्लेषण1.5 अंक
प्र. 2 (दोहों से)
तरुवर और सरोवर के माध्यम से रहीम जी ने परोपकार का क्या संदेश दिया है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रहीम जी ने तीसरे दोहे में प्रकृति के दो अनुपम उदाहरण देकर परोपकार की महत्ता समझाई है:
वृक्ष का त्याग: वृक्ष ऋतु आने पर मीठे और रसीले फलों से लद जाते हैं, किंतु वे अपने फल स्वयं कभी नहीं खाते, बल्कि उन्हें राहगीरों और भूखे प्राणियों को अर्पित कर देते हैं।
सरोवर की निस्वार्थता: सरोवर (तालाब) अपने भीतर मीठा जल संचित करता है, किंतु वह स्वयं एक बूँद पानी नहीं पीता; उसका सारा जल प्यासे जीवों की तृप्ति के लिए होता है।
सज्जनों का कर्तव्य: ठीक इसी प्रकार श्रेष्ठ और ज्ञानी मनुष्य (सुजान) अपने व्यक्तिगत भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि निर्धनों, असहायों और परहित के कल्याणार्थ ही धन-संपत्ति का संचय करते हैं।
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तरुवर और सरोवर के प्राकृतिक उदाहरण का स्पष्टीकरण1.5 अंक
सज्जनों द्वारा परोपकार हेतु धन संचय की सीख1.5 अंक
प्र. 3 (दोहों से)
"धरती की सी रीत है, सीत घाम औ मेह..." दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भावार्थ:
इस दोहे में रहीम जी ने मनुष्य को धरती के समान धैर्यवान और सहनशील बनने की प्रेरणा दी है:
धरती माता बिना किसी शिकायत के भीषण शीत (ठंड), प्रचंड घाम (धूप/गर्मी) और मूसलाधार मेह (वर्षा) के थपेड़ों को शांत भाव से सहन करती है।
कवि कहते हैं कि हमारे इस नश्वर शरीर का स्वभाव भी धरती जैसा ही होना चाहिए। जीवन में चाहे अपार सुख आए या गहरा दुख, मान मिले या अपमान, मनुष्य को विचलित हुए बिना हर परिस्थिति को समभाव और धैर्य के साथ स्वीकार करना चाहिए।
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धरती द्वारा ऋतुओं के प्रभाव को सहने का भाव1.5 अंक
मनुष्य शरीर द्वारा सुख-दुख में समभाव रखने की शिक्षा1.5 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
रहीम के दोहों में अवधी/ब्रज के तद्भव शब्दों का सुंदर प्रयोग हुआ है। निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित मानक हिंदी रूप लिखिए: (क) बिपति (ख) बादर (ग) सीत (घ) मेह
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
तद्भव शब्दों के मानक हिंदी रूप:
(क) बिपति = विपत्ति / संकट / मुसीबत
(ख) बादर = बादल / मेघ
(ग) सीत = शीत / सर्दी / ठंड
(घ) मेह = मेघ / वर्षा / बारिश
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चारों शब्दों के सही मानक रूप (0.5 अंक प्रत्येक)2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
रहीम के अनुसार 'सच्चे मित्र' की क्या कसौटी है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रहीम दास जी के अनुसार, जब व्यक्ति के पास धन-दौलत और संपन्नता होती है, तो अनेक लोग तरह-तरह से मित्र बन जाते हैं। परंतु सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति, संकट और अभाव के समय भी साथ न छोड़े और ढाल बनकर खड़ा रहे। संकट ही सच्चे मित्र की परख करने वाली वास्तविक कसौटी है।
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विपत्ति कसौटी जे कसे तेई सांचे मीत का भावार्थ2 अंक
भाषा की बात — देशज शब्द
दोहों में प्रयुक्त निम्नलिखित देशज शब्दों के मानक हिंदी रूप लिखिए: (i) बिपति (ii) मछरी (iii) बादर (iv) सीत
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मानक हिंदी रूपांतरण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Value Question
"थोथे बादर क्वाँर के, ज्यों रहीम घहरात..." दोहे के माध्यम से रहीम जी समाज के किस खोखले व्यवहार पर व्यंग्य करते हैं? वर्तमान संदर्भ में इसका क्या व्यावहारिक सबक है?
समीक्षा एवं व्यावहारिक सबक:
खोखली शान का दिखावा: समाज में कुछ लोग जब अपनी आर्थिक स्थिति खो बैठते हैं, तब भी वे अपने अतीत के वैभव की झूठी डींगें हाँकते रहते हैं। जैसे क्वार के जलहीन बादल केवल गरजते हैं, बरसते नहीं, वैसे ही कर्महीन व्यक्ति केवल बातें बनाता है।
यथार्थ को स्वीकार करना: वर्तमान का सबक यह है कि हमें अपने अतीत के अहंकार में जीने के बजाय वर्तमान की वास्तविकताओं को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करना चाहिए और खोखले दिखावे से बचकर कर्मठ बनना चाहिए।
V12
पाठ 12: कंचा
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 12) — कहानी — टी. पद्मनाभन | बाल मनोविज्ञान, कल्पनाशीलता और एक बालक की मासूम दुनिया
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
मलयालम के प्रसिद्ध साहित्यकार टी. पद्मनाभन द्वारा रचित यह कहानी 'कंचा' बाल-मन के सहज आकर्षण, दिवास्वप्नों और सम्मोहन का अत्यंत सजीव चित्रण करती है। कहानी का नायक एक नन्हा स्कूली बालक अप्पू है। स्कूल जाते समय दुकान के शोकेस में रखे एक बड़े से शीशे के जार में सफेद गोल, हरी लकीर वाले कंचे (आँवले जैसे) देखकर वह पूरी तरह सम्मोहित हो जाता है। कंचे उसकी कल्पना में इतने विशाल हो जाते हैं कि जार आसमान जैसा और कंचे बड़े-बड़े गोलों जैसे लगने लगते हैं। कक्षा में जब मास्टर जी रेलगाड़ी का पाठ पढ़ा रहे होते हैं, तब अप्पू का ध्यान कक्षा में न होकर कंचों की जादुई दुनिया में खोया रहता है। मास्टर जी के पूछने पर वह हड़बड़ाकर 'कंचा' कह देता है, जिस पर मास्टर जी उसे बेंच पर खड़ा कर देते हैं और बच्चे हँसते हैं। स्कूल की फीस के लिए मिले एक रुपये पचास पैसे (डेढ़ रुपया) से वह फीस जमा करने के बजाय सीधे दुकानदार के पास जाकर सारे पैसों के कंचे खरीद लेता है। घर लौटते समय रास्ते में कंचों की पोटली फट जाती है और कंचे सड़क पर बिखर जाते हैं। एक कार ड्राइवर पहले गुस्सा होता है, पर अप्पू की मासूमियत देखकर हँस पड़ता है। घर पहुँचने पर माँ पहले तो फीस के पैसे गँवाने पर रोती है, परंतु अप्पू के कंचों के प्रति असीम प्रेम को देखकर उसे गले से लगा लेती है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: बच्चों का अपना एक स्वतंत्र, मासूम और स्वप्नमय संसार होता है जहाँ भौतिक दुनिया के नियम और मूल्य गौण हो जाते हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
कंचे जब जार से निकलकर अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं, तब क्या होता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब कंचे अप्पू के मन की कल्पना में समा जाते हैं, तो निम्नलिखित कौतूहलपूर्ण दृश्य उपस्थित होता है:
जार का असीम विस्तार: अप्पू की कल्पना में वह शीशे का जार इतना विशाल हो जाता है जैसे आसमान। उसमें केवल वह और कंचे होते हैं, बाकी सब कुछ गायब हो जाता है।
कंचों के साथ एकांत खेल: वह स्वयं को उस विशाल जार के भीतर महसूस करता है जहाँ वह हरी लकीर वाले सफेद कंचों को हाथों में उछालता है, बिखेरता है और उनसे बातें करता है।
वास्तविक दुनिया से विच्छेद: वह दुकान, स्कूल का रास्ता, बस्ता और समय सब कुछ भूलकर पूरी तरह से कंचों के सम्मोहन में विलीन हो जाता है।
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जार के विशाल विस्तार की बाल-कल्पना1.5 अंक
कंचों के साथ आत्मीय खेल व दुनिया भूल जाने का वर्णन1.5 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
दुकानदार और ड्राइवर के चेहरे पर पहले गुस्सा और फिर हँसी क्यों आ गई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) दुकानदार के चेहरे पर:
पहले वह इसलिए चिढ़ा क्योंकि अप्पू काफी देर से जार को लगातार घूरे जा रहा था और कुछ खरीद नहीं रहा था। परंतु जब अप्पू ने मासूमियत से कंचों को छुआ और अंत में अपनी पूरी फीस के पैसे निकालकर कंचे खरीदने की जिद की, तो उसकी अबोध बाल-सुलभ चाहत देखकर दुकानदार का दिल पसीज गया और वह हँस पड़ा।
(ख) कार ड्राइवर के चेहरे पर:
सड़क के बीचों-बीच बिखरे कंचों को बीनने में मगन अप्पू को देखकर ड्राइवर को ब्रेक लगाना पड़ा। वह दुर्घटना के खतरे से अत्यंत क्रोधित हो गया। परंतु जब उसने देखा कि अप्पू कार की परवाह किए बिना मुस्कुराते हुए कह रहा है—"कंचा अच्छा है न!", तो बालक की इस निष्पाप और बेपरवाह मासूमियत ने ड्राइवर का गुस्सा पल भर में पिघला दिया और वह मुस्कुरा उठा।
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दुकानदार के क्रोध व हँसी का स्पष्टीकरण1.5 अंक
ड्राइवर के गुस्से व मासूमियत पर हँसने का कारण1.5 अंक
प्र. 3 (कहानी से)
"मास्टर जी की आवाज अब कम ऊँची थी। वे रेलगाड़ी के बारे में बता रहे थे"—अप्पू का ध्यान कक्षा में क्यों नहीं था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अप्पू का ध्यान मास्टर जी के रेलगाड़ी वाले पाठ में बिल्कुल नहीं था क्योंकि:
कंचों का मानसिक सम्मोहन: उसकी आँखों के सामने केवल वही हरी लकीर वाले सफेद गोल कंचे नाच रहे थे।
जॉर्ज के साथ खेलने की योजना: वह सोच रहा था कि जब जॉर्ज बुखार से ठीक होकर स्कूल आएगा, तो वह उसके साथ मिलकर इन कंचों से खेलेगा।
मास्टर जी की बात का कंचों में रूपांतरण: मास्टर जी जब रेलगाड़ी के डिब्बे और इंजन का वर्णन कर रहे थे, तो अप्पू को भाप के इंजन में भी कंचों जैसा गोलाकार और धुआँ निकलता हुआ प्रतीत हो रहा था। उसका शरीर कक्षा में था, परंतु आत्मा कंचों के संसार में थी।
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कंचों के प्रति प्रबल आकर्षण का उल्लेख1 अंक
जॉर्ज के साथ खेलने की दिमागी योजना1 अंक
कक्षा के पाठ से मानसिक अनुपस्थिति का विश्लेषण1 अंक
प्र. 4 (कहानी से)
अप्पू ने अपनी स्कूल फीस के पैसों का क्या किया और माँ की क्या प्रतिक्रिया हुई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अप्पू को स्कूल फीस के लिए एक रुपया पचास पैसे (डेढ़ रुपया) मिले थे। उसने फीस जमा करने के बजाय सारे पैसों से दुकानदार से कंचे खरीद लिए।
माँ की प्रतिक्रिया:
घर पहुँचने पर जब माँ ने कंचों से भरा बस्ता देखा और जाना कि उसने फीस के सारे पैसे कंचों में उड़ा दिए हैं, तो पहले वह अत्यधिक व्यथित और दुखी हो गई। उसकी आँखों में आँसू आ गए कि घर में तंगी है और इस लड़के ने क्या कर डाला। साथ ही उसे अपनी मृत बेटी (अप्पू की छोटी बहन) की याद आ गई जिसके साथ अप्पू खेल सकता था। परंतु जब अप्पू ने मासूमियत से पूछा—"क्या कंचे बुरे हैं माँ?", तो बेटे का भोला चेहरा देखकर माँ का सारा गुस्सा प्यार में बदल गया और उसने अप्पू को गले लगाकर हँसते हुए चूम लिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
फीस के पैसों से कंचे खरीदने का उल्लेख1 अंक
माँ के दुख, आँसू व छोटी बहन की स्मृति का प्रसंग1 अंक
मासूमियत देखकर वात्सल्य में परिणति1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
अप्पू जब कंचों की दुनिया में खो जाता है, तो कक्षा में उसके साथ क्या घटित होता है? बाल मनोविज्ञान के आधार पर लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. मास्टर जी कक्षा में रेलगाड़ी का पाठ पढ़ा रहे थे, किंतु अप्पू का ध्यान पूरी तरह जार में रखे हरी लकीर वाले सफेद कंचों की जादुई दुनिया में रमा हुआ था।
2. मास्टर जी ने जब अचानक उससे प्रश्न पूछा, तो वह हड़बड़ा गया और उसके मुंह से 'कंचा' निकल पड़ा, जिस पर पूरी कक्षा ठहाका मारकर हंस पड़ी और मास्टर जी ने उसे बेंच पर खड़ा कर दिया।
3. यह घटना बाल-सुलभ कल्पनाशीलता और एकाग्रता के भटकाव को यथार्थ रूप में उजागर करती है।
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कक्षा की घटना और बाल मनोविज्ञान का सटीक समन्वय3 अंक
भाषा की बात — विशेषण
पाठ में से विशेषण और विशेष्य के दो सुंदर युग्म छाँटकर लिखिए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विशेषण-विशेष्य के दो सटीक युग्म2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Child Psychology Question
कक्षा में बच्चों का ध्यान भटकना और किसी प्रिय वस्तु या खेल में खो जाना एक सामान्य बाल-सुलभ व्यवहार है। "कंचा" कहानी के आधार पर बताइए कि एक शिक्षक को ऐसे समय में बच्चे को दंडित करने के बजाय कौन-सा संवेदनशील शिक्षण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए?
मनोवैज्ञानिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण:
रुचिकर शिक्षण पद्धतियाँ: यदि कक्षा का शिक्षण केवल शुष्क भाषण न होकर गतिविधियों, चित्रों और मॉडलों पर आधारित हो, तो बच्चों का ध्यान कक्षा से बाहर नहीं भटकेगा।
सहानुभूतिपूर्ण समझ: बच्चे को बेंच पर खड़ा कर पूरी कक्षा के सामने लज्जित करने से उसके मन में कुंठा और भय पैदा होता है। शिक्षक को एकांत में बच्चे से बात कर उसकी रुचि और जिज्ञासा को जानना चाहिए।
जिज्ञासा को विषय से जोड़ना: जैसे अप्पू कंचों में रुचि रखता था, शिक्षक कंचों का प्रयोग गणित के जोड़-घटाव या भौतिकी की गति के सिद्धांतों को समझाने के लिए शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) के रूप में कर सकते थे।
V13
पाठ 13: एक तिनका
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 13) — कविता — अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध" | अहंकार का विनाश, विनम्रता का पाठ और आत्म-बोध
मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,
एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।
आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,
एक तिनका आँख में मेरी पड़ा।
मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा,
लाल होकर आँख भी दुखने लगी।
मूँठ देने लोग कपड़े की लगे,
ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी।
जब किसी ढब से निकल तिनका गया,
तब 'समझ' ने यों मुझे ताने दिए।
'ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।'
— अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध"
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
द्विवेदी युग के मूर्धन्य कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्वारा रचित यह प्रसिद्ध कविता 'एक तिनका' मनुष्य के झूठे अहंकार (घमंड) पर गहरी चोट करती है। एक दिन कवि अपने घर की छत की मुँडेर पर अहंकार और घमंड में चूर होकर ऐंठ में खड़ा था। उसे अपने ज्ञान, धन या सामर्थ्य का झूठा गुरूर था। तभी अचानक हवा के एक हल्के झोंके से एक छोटा सा सूखा तिनका उड़कर सीधे उसकी आँख में आ गिरा। तिनका गिरते ही कवि की सारी अकड़ पल भर में गायब हो गई। आँख लाल हो गई, तेज दर्द होने लगा और वह बेचैनी से तड़प उठा। उसकी दयनीय स्थिति देखकर आसपास के लोग कपड़े की मुँठ बनाकर उसकी आँख सेंकने लगे। इस लाचारी में कवि का घमंड दबे पाँवों भाग खड़ा हुआ। जब बहुत यत्नों के बाद किसी प्रकार तिनका आँख से बाहर निकला, तब कवि के अंतर्मन (विवेक/समझ) ने उसे धिक्कारते हुए ताना दिया—"अरे मूर्ख! तू अपने किस सामर्थ्य पर इतना घमंड कर रहा था? तेरे जैसे घमंडी का अहंकार चूर-चूर करने के लिए तो एक मामूली निर्जीव तिनका ही बहुत है!"
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: मनुष्य को कभी भी अपने बल, रूप या धन पर घमंड नहीं करना चाहिए। प्रकृति की एक तुच्छ वस्तु भी मनुष्य के झूठे अहंकार को नष्ट करने में सक्षम है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
"घमंडों में भरा ऐंठा हुआ" कवि की क्या दशा हुई जब उसकी आँख में एक तिनका पड़ गया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
आँख में तिनका पड़ते ही घमंडी कवि की स्थिति अत्यंत दयनीय और विवश हो गई:
तीव्र बेचैनी और असहनीय पीड़ा: कवि बुरी तरह झिझक उठा और दर्द के मारे छटपटाने लगा।
आँख का लाल होना: तिनके की रगड़ से उसकी आँख में सूजन आ गई, आँख लाल हो गई और उससे लगातार पानी बहने लगा।
घमंड का पलायन: जिस अकड़ और घमंड में वह मुँडेर पर तना खड़ा था, वह सारी ऐंठ दबे पाँवों भाग गई और वह दूसरों की दया और सहायता का मोहताज हो गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शारीरिक पीड़ा व आँख लाल होने का वर्णन1.5 अंक
अहंकार चूर होने व लाचारी की स्थिति1.5 अंक
प्र. 2 (कविता से)
घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने क्या किया?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
घमंडी कवि को असहनीय दर्द से कराहते देखकर आसपास के लोग तुरंत उसकी सहायता के लिए दौड़े। उन्होंने अपने कपड़े (धोती/रूमाल) को मोड़कर एक गोल 'मूँठ' बनाई और उस मूँठ को फूँक मारकर गर्म करके कवि की सूजी हुई आँख पर सेंक देने लगे ताकि तिनका ढीला होकर किसी प्रकार बाहर निकल सके।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कपड़े की मूँठ बनाने की क्रिया1 अंक
सेंक देकर तिनका निकालने का प्रयास1 अंक
प्र. 3 (कविता से)
"एक तिनका" कविता में घमंडी को उसकी "समझ" ने क्या ताना दिया और इससे क्या सीख मिलती है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'समझ' (विवेक) का ताना:
जब किसी तरह तिनका निकल गया, तो कवि के विवेक ने उसे फटकारते हुए कहा कि तू व्यर्थ ही इतना ऐंठता और घमंड करता रहा। यदि तू इतना ही शक्तिशाली है, तो एक मामूली तिनके के सामने इतना लाचार क्यों हो गया? तेरे अहंकार को नष्ट करने के लिए किसी बड़ी सेना या अस्त्र की जरूरत नहीं, एक छोटा सा तिनका ही पर्याप्त है।
(ख) जीवन की सीख:
इस कविता से हमें यह शाश्वत संदेश मिलता है कि संसार में किसी भी वस्तु या प्राणी को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए। मनुष्य को सदैव विनम्र, सहनशील और अहंकार-मुक्त जीवन जीना चाहिए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
समझ द्वारा दिए गए ताने का स्पष्टीकरण1.5 अंक
विनम्रता और निरहंकारिता की सीख1.5 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
कविता की निम्नलिखित पंक्तियों को सामान्य गद्य के वाक्यों में बदलिए: (क) "एक तिनका आँख में मेरी पड़ा" (ख) "मूँठ देने लोग कपड़े की लगे" (ग) "ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी"
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पद्य से सामान्य गद्य में रूपांतरण:
(क) मेरी आँख में एक तिनका पड़ गया।
(ख) लोग कपड़े की मूँठ से आँख को सेंकने लगे।
(ग) बेचारी ऐंठ (घमंड) दबे पाँवों भाग गई।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
तीनों वाक्यों का शुद्ध व्याकरणसम्मत गद्य रूपांतरण (1 अंक प्रत्येक)3 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
'एक तिनका' कविता से हमें क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की इस कविता से हमें यह शाश्वत शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी भी अपने धन, बल, ज्ञान या सामर्थ्य पर घमंड (अहंकार) नहीं करना चाहिए। एक तुच्छ-सा तिनका भी हवा के झोंके से आँख में पड़कर बड़े-से-बड़े अभिमानी मनुष्य की अकड़ ढीली कर सकता है और उसे विवश बना सकता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अहंकार त्याग और विनम्रता की प्रेरणा2 अंक
भाषा की बात — मुहावरे
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट कीजिए: (i) ऐंठ ढीली होना (ii) पाँव उखड़ना
2 अंक (1 अंक प्रति मुहावरा)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) ऐंठ ढीली होना (घमंड चूर-चूर होना): परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर अभिमानी छात्र की सारी ऐंठ ढीली हो गई। (ii) पाँव उखड़ना (हिम्मत टूट जाना / मैदान छोड़कर भागना): भारतीय सेना के पराक्रम के आगे शत्रु सेना के पाँव उखड़ गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मुहावरों का अर्थ एवं वाक्य प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Ethical Reflection
कबीरदास जी ने भी कहा है— "तिनका कबहुँ न नींदिए, जो पाँयन तर होय। कबहुँ उड़ी आँखिन परै, पीर घनेरी होय॥" हरिऔध जी की कविता "एक तिनका" और कबीर के इस दोहे में क्या समानता है? दैनिक जीवन में इसका क्या महत्व है?
तुलनात्मक विश्लेषण एवं महत्व:
विचारों की पूर्ण समानता: कबीरदास जी और हरिऔध जी दोनों ही इस बात पर बल देते हैं कि पैरों के नीचे पड़े रहने वाले मामूली तिनके की भी उपेक्षा या निंदा नहीं करनी चाहिए। यदि वही तिनका उड़कर आँख में पड़ जाए, तो भयंकर पीड़ा देता है।
समानता का भाव: समाज के किसी भी निर्धन, सफाईकर्मी या छोटे कर्मचारी को कमजोर समझकर उसका तिरस्कार नहीं करना चाहिए। समय आने पर प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु का अपना विशिष्ट महत्त्व सिद्ध होता है।
V14
पाठ 14: खानपान की बदलती तस्वीर
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 14) — निबंध — प्रयाग शुक्ल | आधुनिक खानपान संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और पारंपरिक पोषण की रक्षा
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रयाग शुक्ल द्वारा रचित निबंध 'खानपान की बदलती तस्वीर' पिछले दो-तीन दशकों में भारतीय समाज के आहार, रसोई और स्वाद में आए युगांतरकारी परिवर्तनों का सूक्ष्म विश्लेषण करता है। आज भारत में खानपान की एक नई 'मिश्रित संस्कृति' (Fusion Culture) का जन्म हुआ है। कभी दक्षिण भारत तक सीमित इडली, डोसा और सांभर आज उत्तर भारत के हर कोने और ढाबे पर सुलभ हैं, और उत्तर भारत की रोटी-दाल-साग पूरे दक्षिण भारत में उपलब्ध है। नूडल्स, बर्गर और पिज्जा जैसे विदेशी फास्ट फूड (तुरंत भोजन) आज बच्चों और कामकाजी परिवारों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। दो मिनट वाले नूडल्स से हर कोई परिचित है। एक ओर इसके सकारात्मक पहलू हैं—जैसे राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा, कामकाजी महिलाओं के समय की बचत और नई पीढ़ी को देश-विदेश के व्यंजनों का परिचय। वहीं दूसरी ओर गंभीर नकारात्मक पहलू भी हैं—स्थानीय व्यंजनों (जैसे मथुरा के पेड़े, आगरा का पेठा, दाल-मोठ) का ह्रास हो रहा है, स्थानीयता छिन रही है और जंक फूड के अत्यधिक सेवन से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। लेखक अंत में निष्कर्ष देते हैं कि हमें इस मिश्रित संस्कृति का लाभ लेते हुए अपने पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों को सहेजना चाहिए।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: आधुनिक खानपान की विविधता का स्वागत करते हुए हमें अपनी पारंपरिक स्थानीय पोषण परंपरा और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (निबंध से)
खानपान की बदलती तस्वीर से लेखक का क्या आशय है? इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
खानपान की बदलती तस्वीर से लेखक का आशय पिछले कुछ दशकों में हमारे भोजन, उसकी तैयारी और खाने की आदतों में आए क्रांतिकारी और मिश्रित परिवर्तनों से है। इसके प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
क्षेत्रीय सीमाओं का टूटना: दक्षिण भारतीय व्यंजन (इडली, डोसा, सांभर) उत्तर भारत के हर शहर में लोकप्रिय हो चुके हैं और उत्तर भारतीय रोटी-दाल-सब्जी दक्षिण भारत में सुलभ हैं।
फास्ट फूड का तीव्र प्रसार: दो मिनट नूडल्स, बर्गर, पिज्जा जैसे व्यंजन घर-घर में बच्चों के प्रिय बन चुके हैं।
मिश्रित संस्कृति: आज खानपान में विविध संस्कृतियों का ऐसा मेल हो चुका है कि एक ही थाली में विभिन्न प्रांतों के व्यंजन परोसे जाते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
खानपान की मिश्रित संस्कृति का अर्थ1 अंक
क्षेत्रीय व्यंजनों के अंतर-राज्यीय प्रसार का उल्लेख1 अंक
फास्ट फूड के आगमन का लक्षण1 अंक
प्र. 2 (निबंध से)
खानपान के मामले में "स्थानीयता" का क्या अर्थ है और यह किस प्रकार प्रभावित हुई है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) स्थानीयता का अर्थ:
स्थानीयता का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र, शहर या प्रांत के वे पारंपरिक व्यंजन जो वहाँ की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध ताजी सामग्री और सदियों पुरानी पाक-कला से जुड़े होते हैं। जैसे—मथुरा के पेड़े, आगरा का पेठा व नमकीन, ढाबों की तंदूरी रोटी आदि।
(ख) प्रभावित होने का स्वरूप:
आधुनिक फास्ट फूड और व्यावसायिक पैकेटबंद भोजन के अत्यधिक प्रसार के कारण स्थानीय व्यंजनों की गुणवत्ता और उपलब्धता में भारी गिरावट आई है। आज नई पीढ़ी अपने क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को बनाना तो दूर, उनके नाम तक भूलती जा रही है। स्थानीय व्यंजन अब केवल खास दुकानों या आयोजनों तक सिमटकर रह गए हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
स्थानीयता की सही परिभाषा व उदाहरण1.5 अंक
पारंपरिक गुणवत्ता में गिरावट व नई पीढ़ी की अनभिज्ञता1.5 अंक
प्र. 3 (निबंध से)
खानपान की मिश्रित संस्कृति के क्या-क्या सकारात्मक और नकारात्मक पहलू हैं?
4 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) सकारात्मक (लाभप्रद) पहलू:
राष्ट्रीय एकता का संवर्धन: विभिन्न राज्यों के खानपान के आदान-प्रदान से देशवासियों के बीच भावनात्मक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द बढ़ता है।
समय की बचत: कामकाजी महिलाओं और व्यस्त परिवारों के लिए तुरंत तैयार होने वाले व्यंजनों से समय और श्रम की बचत होती है।
स्वाद और विविधता: नई पीढ़ी को देश-विदेश के अनगिनत प्रकार के व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर प्राप्त होता है।
(ख) नकारात्मक (हानिकारक) पहलू:
स्वास्थ्य पर बुरा असर: मैदे, अत्यधिक तेल, चीनी और रासायनिक संरक्षकों (Preservatives) से युक्त जंक फूड से मोटापा, मधुमेह और पाचन विकार बढ़ रहे हैं।
पारंपरिक व्यंजनों का विलुप्त होना: मौसमी फल-सब्जियों से बनने वाले पौष्टिक देशी व्यंजन धीरे-धीरे हमारी थालियों से गायब हो रहे हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सकारात्मक पहलू (राष्ट्रीय एकता, समय की बचत)2 अंक
नकारात्मक पहलू (स्वास्थ्य संकट, स्थानीय व्यंजनों का ह्रास)2 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
"खानपान" शब्द में दो शब्द जुड़े हैं—खान और पान। यह द्वंद्व समास है। इसी प्रकार निम्नलिखित शब्दों के समास-विग्रह कीजिए: (क) भला-बुरा (ख) देश-विदेश (ग) दाल-रोटी (घ) सुख-दुख
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
द्वंद्व समास का विग्रह (दोनों पद प्रधान, योजक 'और'):
(क) भला-बुरा = भला और बुरा
(ख) देश-विदेश = देश और विदेश
(ग) दाल-रोटी = दाल और रोटी
(घ) सुख-दुख = सुख और दुख
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चारों शब्दों का सही विग्रह (0.5 अंक प्रत्येक)2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
खानपान की मिश्रित संस्कृति से क्या लाभ और क्या हानियाँ हैं? संक्षेप में लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
लाभ:
• हमें एक ही स्थान पर पूरे भारत और विश्व के विभिन्न व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलता है।
• राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
हानियाँ:
• स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों की शुद्धता और गुणवत्ता कम हो रही है।
• फास्ट फूड और पैकेज्ड भोजन के अत्यधिक चलन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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मिश्रित संस्कृति के लाभ और हानियों का संतुलित विश्लेषण3 अंक
भाषा की बात — शब्द युग्म
पाठ में आए 'खान-पान', 'ढोकला-गांठिया' जैसे दो शब्द-युग्मों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) खान-पान: स्वास्थ्य की दृष्टि से हमें अपने दैनिक खान-पान में हरी सब्जियों और फलों को अवश्य शामिल करना चाहिए। (ii) मेल-जोल: त्योहारों का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी मेल-जोल और भाईचारे को सुदृढ़ करना है।
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शब्द युग्मों का शुद्ध वाक्य प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Health & Lifestyle HOTS
आजकल स्कूली बच्चों में फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स की लत एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। "खानपान की बदलती तस्वीर" निबंध के आलोक में विद्यालयों की कैंटीन और घर में स्वस्थ आहार संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु तीन ठोस सुझाव दीजिए।
स्वस्थ आहार संस्कृति संवर्धन हेतु व्यावहारिक सुझाव:
विद्यालय कैंटीन में जंक फूड पर प्रतिबंध: कैंटीन में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स और नूडल्स के स्थान पर ताजे मौसमी फल, नारियल पानी, अंकुरित अनाज (Sprouts), इडली और भुने चने अनिवार्य किए जाएँ।
पारंपरिक व्यंजनों का नवीनीकरण: घरों में माता-पिता पारंपरिक पोषक अनाजों (जैसे बाजरा, ज्वार, रागी) से आकर्षक और स्वादिष्ट व्यंजन (जैसे रागी डोसा, बाजरे की मठरी) तैयार करें जिससे बच्चे आकर्षित हों।
आहार जागरूकता सत्र: विद्यालयों में नियमित रूप से पोषण विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाएँ आयोजित कर बच्चों को संतुलित आहार के लाभ समझाए जाएँ।
V15
पाठ 15: नीलकंठ
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 15) — रेखाचित्र — महादेवी वर्मा | मूक जीवों का अनुपम सौंदर्य, वीरता, ईर्ष्या का द्वंद्व और करुण अंत
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
छायावाद की प्रमुख कवयित्री एवं गद्यकार महादेवी वर्मा द्वारा रचित यह रेखाचित्र 'नीलकंठ' उनके प्रिय पालतू मोर के अद्भुत सौंदर्य, शौर्य, राजसी स्वभाव और करुण अंत का सजीव दस्तावेज है। लेखिका एक दिन नखास कोने के चिड़ीमार से मोर और मोरनी के दो छोटे बच्चे खरीद लाती हैं। बड़े होने पर मोर अपनी नीली गर्दन और इंद्रधनुषी पंखों के कारण 'नीलकंठ' तथा मोरनी 'राधा' कहलाई। नीलकंठ अत्यंत सुंदर और राजसी ठाठ वाला पक्षी था। जब वह अपने पंख मंडलाकार फैलाकर नृत्य करता, तो विदेशी मेहमान भी उसकी सुंदरता पर मुग्ध होकर उसे 'परफेक्ट जेंटलमैन' कहते थे। नीलकंठ जालीघर के सभी जीव-जंतुओं (खरगोश, तीतर, तोते आदि) का संरक्षक और रक्षक बन गया था। एक बार जब एक विषैले साँप ने छोटे खरगोश के बच्चे को मुँह में दबा लिया, तो नीलकंठ ने साहसपूर्वक अपनी पंजों और नुकीली चोंच से प्रहार करके साँप के दो टुकड़े कर दिए और खरगोश के बच्चे को सकुशल बचा लिया। सब कुछ शांतिपूर्ण चल रहा था कि एक दिन लेखिका एक पैर से अपंग 'कुब्जा' मोरनी को खरीद लाईं। कुब्जा अत्यंत ईर्ष्यालु थी। वह राधा को चोंचों से मारती, उसके अंडे फोड़ देती और नीलकंठ के साथ जबरन रहना चाहती थी। कुब्जा के इस दुष्ट स्वभाव और राधा से विरह की मानसिक वेदना से नीलकंठ भीतर से टूट गया और एक दिन उसने अपने प्राण त्याग दिए। लेखिका ने उसे नम आँखों से गंगा में प्रवाहित किया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पशु-पक्षियों में भी प्रेम, संरक्षण, ईर्ष्या और विरह की गहरी मानवीय भावनाएँ होती हैं। ईर्ष्या हमेशा विनाश की ओर ले जाती है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
जालीघर में रहने वाले सभी जीव-जंतुओं के लिए नीलकंठ किस प्रकार उनका संरक्षक और नेता बन गया था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नीलकंठ अपनी सहज बुद्धिमत्ता, सतर्कता और वीरता के बल पर जालीघर के सभी जीवों का स्वाभाविक संरक्षक और मुखिया बन गया था:
सामूहिक पहरेदारी: वह सुबह से शाम तक जालीघर का चक्कर लगाता रहता था। यदि कोई जीव किसी बात पर आपस में झगड़ता, तो वह बीच-बचाव करके उन्हें शांत कराता था।
अनुशासन और सुरक्षा: छोटे खरगोश, तोते और तीतर उसके विशाल छत्रछाया में सुरक्षित महसूस करते थे। वह अपने पंखों के नीचे छोटे खरगोशों को छिपाकर ममतामयी ऊष्मा देता था।
साँप से रक्षा: जब एक जहरीला साँप जालीघर में घुस आया, तो नीलकंठ ने अपने प्राण संकट में डालकर साँप को मार गिराया और खरगोश की जान बचाई, जिससे सभी जीवों की उसमें अटूट आस्था हो गई।
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जालीघर में अनुशासन व निगरानी रखने का वर्णन1 अंक
छोटे जीवों को पंखों में संरक्षण देने का भाव1 अंक
साँप से मुकाबले की वीरता का साक्ष्य1 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप के चंगुल से किस प्रकार बचाया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नीलकंठ द्वारा खरगोश के बच्चे की रक्षा करने का प्रसंग उसकी अद्वितीय वीरता और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रमाण है:
चीख सुनकर सतर्क होना: रात में जब साँप ने खरगोश के बच्चे को आधा निगल लिया, तो बच्चे के मुँह से केवल धीमी 'चीं-चीं' की करुण आवाज निकली। पेड़ की सबसे ऊँची डाली पर सो रहे नीलकंठ ने उस हल्की पुकार को पहचान लिया।
सटीक प्रहार: वह बिजली की तेजी से नीचे झपटा। उसने देखा कि साँप के फन के पास प्रहार करने से खरगोश का बच्चा भी दब सकता है, इसलिए उसने अत्यंत चतुराई से साँप के फन के ठीक पीछे अपनी तीखी चोंच से वार किया।
साँप का अंत: दर्द के मारे साँप की पकड़ ढीली हो गई और खरगोश का बच्चा मुँह से बाहर गिर पड़ा। इसके बाद नीलकंठ ने अपनी नुकीली चोंच से मार-मारकर साँप के टुकड़े कर दिए और पूरी रात खरगोश के बच्चे को अपने पंखों की गर्माहट में सुरक्षित रखा।
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हल्की चीख सुनकर सतर्कतापूर्वक नीचे झपटना1 अंक
फन के पीछे चोंच से सटीक प्रहार की रणनीति1 अंक
साँप को मारना व बच्चे को पंखों में सहेजना1 अंक
प्र. 3 (पाठ से)
कुब्जा के स्वभाव की क्या विशेषताएँ थीं और उसके आगमन से जालीघर का वातावरण कैसे अशांत हो गया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कुब्जा मोरनी के स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ और उसके दुष्प्रभाव निम्नलिखित थे:
ईर्ष्यालु और आक्रामक प्रकृति: कुब्जा किसी भी जीव से मेलजोल नहीं रखती थी। वह अत्यंत क्रोधी और ईर्ष्यालु थी। वह नीलकंठ के पास किसी दूसरे को, विशेषकर राधा को, देखना बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।
हिंसक आचरण: उसने अपनी चोंच से मारकर राधा की कलगी नोंच डाली, उसके पंख घायल कर दिए और राधा द्वारा आम के पेड़ की ओट में दिए गए अंडों को फोड़कर चारों ओर फैला दिया।
जालीघर की अशांति: उसके उपद्रवों के कारण जालीघर का शांत और सौहार्दपूर्ण वातावरण नष्ट हो गया। नीलकंठ अत्यंत व्यथित होकर दूर पेड़ों पर छिपने लगा और अंततः मानसिक तनाव में काल-कवलित हो गया।
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कुब्जा के ईर्ष्यालु व क्रोधी स्वभाव का निरूपण1 अंक
राधा के प्रति हिंसा व अंडों को फोड़ने की घटना1 अंक
नीलकंठ के मानसिक तनाव व वातावरण की अशांति1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
"नीलकंठ" शब्द दो पदों से मिलकर बना है—नील + कंठ (नीला है कंठ जिसका अर्थात् मोर / शिव)। यह बहुव्रीहि समास है। निम्नलिखित पदों के समास का नाम और विग्रह लिखिए: (क) मेघमय (ख) जालीघर
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
समास विग्रह और नाम:
(क) मेघमय = मेघ से युक्त / बादलों से भरा हुआ (तत्पुरुष समास)
(ख) जालीघर = जाली से बना घर / जालीदार घर (तत्पुरुष समास)
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दोनों शब्दों के सही विग्रह और समास भेद2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
नीलकंठ ने अपनी सतर्कता और साहस से खरगोश के बच्चे की जान साँप से कैसे बचाई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. रात के समय जालीघर में एक साँप घुस आया और उसने एक नन्हें खरगोश के बच्चे का पिछला आधा हिस्सा अपने मुंह में दबा लिया। खरगोश की दबी चीख केवल नीलकंठ ने सुनी।
2. नीलकंठ तुरंत पेड़ की ऊंची डाल से नीचे झपटा और उसने अपनी मजबूत चोंच से साँप के फन के पास इतना अचूक वार किया कि साँप ने खरगोश को छोड़ दिया।
3. इसके बाद नीलकंठ ने अपनी चोंच के निरंतर प्रहारों से साँप को मार गिराया और खरगोश के बच्चे को पूरी रात अपने पंखों की गर्माहट में सुरक्षित रखा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नीलकंठ के साहस और रक्षा भाव का रोमांचक विवरण3 अंक
भाषा की बात — विशेषण
नीलकंठ और कुब्जा के स्वभाव की तुलना करते हुए दो-दो विशेषण शब्द लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
• नीलकंठ के स्वभाव के विशेषण:दयालु, रक्षक, सौम्य, वीर
• कुब्जा के स्वभाव के विशेषण:ईर्ष्यालु, क्रोधी, कलहप्रिय
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दोनों पात्रों के स्वभाव का सटीक विशेषण निरूपण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Animal Sensitivity HOTS
महादेवी वर्मा ने "नीलकंठ" रेखाचित्र में दिखाया कि पशु-पक्षी भी मनुष्य की तरह प्रेम, स्वाभिमान, विरह और अवसाद का अनुभव करते हैं। आज के समय में पालतू पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय संवेदना और पशु-अधिकारों (Animal Rights) पर एक विचारशील टिप्पणी लिखिए।
पशु-संवेदना एवं अधिकारों पर विचार:
मूक प्राणियों की भावनात्मक दुनिया: नीलकंठ की मृत्यु यह साबित करती है कि पशु-पक्षी केवल खाने-पीने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे भी मानसिक पीड़ा, अवसाद और आत्मीय वियोग से पीड़ित होते हैं।
मनोरंजन का साधन न समझना: जानवरों को पिंजरों में बंद करना, सर्कस में प्रताड़ित करना या मात्र दिखावे के लिए पालना अनुचित है।
सहानुभूति और दायित्व: हमें उनके प्राकृतिक आवास और स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए। यदि हम किसी जीव को पालते हैं, तो उसके भोजन, सुरक्षा और मानसिक शांति की पूरी ज़िम्मेदारी मानवीय कर्तव्य है।
V16
पाठ 16: भोर और बरखा
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 16) — काव्य-पद — मीराबाई | यशोदा का अनुपम वात्सल्य, सावन की फुहार और श्रीकृष्ण-प्रेम
(पद 1)
जागो बंसीवारे ललना!
जागो मोरे प्यारे।
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे।
गोपी दधि मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे।
उठो लालजी! भोर भयो है, सुर-नर ठाढ़े द्वारे।
ग्वाल-बाल सब करत कोलाहल, जय-जय सबद उचारे।
माखन-रोटी हाथ महँ लीनी, गौअन के रखवारे।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरन आए को तारे॥
(पद 2)
बरसे बदरिया सावन की,
सावन की, मनभावन की।
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।
उमड़-घुमड़ चहुँदिसि से आयो, दामिनि दमके झर लावन की।
नान्हीं-नान्हीं बूँदन मेहा बरसै, सीतल पवन सोहावन की।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, आनन्द मंगल गावन की॥
— मीराबाई
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
मध्यकालीन कृष्ण-भक्ति काव्यधारा की अनन्य भक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित ये दो पद वात्सल्य और भक्ति रस के अनुपम उदाहरण हैं:
1. प्रथम पद (भोर का वात्सल्य): माता यशोदा अपने प्यारे नटखट पुत्र बाल-कृष्ण को भोर होने पर बड़े लाड़-प्यार से जगा रही हैं। वे कहती हैं—"हे मेरे बंसी बजाने वाले प्यारे लाल, अब जाग जाओ! रात बीत चुकी है और सुबह हो गई है। घर-घर के दरवाजे खुल गए हैं। गोपियाँ मथानी से दही बिलो रही हैं और उनके कंकणों की मधुर झंकार गूँज रही है। देवता और मनुष्य तुम्हारे दर्शन के लिए द्वार पर खड़े हैं। ग्वाल-बाल जय-जयकार करते हुए शोर मचा रहे हैं। तुम उठो और अपनी माखन-रोटी हाथ में लेकर गैया चराने जाओ।"
2. द्वितीय पद (बरखा और मिलन का उल्लास): सावन मास में बादलों की रिमझिम फुहारें बरस रही हैं। सावन का यह रूप मीरा के मन को अत्यंत भा रहा है क्योंकि इस सुहावने मौसम में उनके मन में अपने आराध्य प्रभु श्री कृष्ण के आगमन की मधुर भनक (सूचना) सुनाई दे रही है। चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़ कर बादल छा गए हैं, आकाश में बिजली चमक रही है और नन्हीं-नन्हीं बूँदों की झड़ी लग गई है। शीतल सुगंधित बयार बह रही है और मीरा का हृदय आनंद-मंगल गीत गाने के लिए उल्लासित हो उठा है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: प्रथम पद में माँ यशोदा का निश्छल वात्सल्य भाव तथा द्वितीय पद में भक्त का अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम एवं प्रकृति का भक्तिपरक उल्लास प्रकट हुआ है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
"जागो बंसीवारे ललना..." पद में यशोदा माँ बाल कृष्ण को जगाने के लिए कौन-कौन से तर्क देती हैं और सुबह होने के क्या-क्या संकेत बताती हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
माता यशोदा बाल कृष्ण को जगाने के लिए सुबह होने के निम्नलिखित सजीव और स्वाभाविक प्रमाण प्रस्तुत करती हैं:
घर-घर दरवाजे खुलना: रात समाप्त हो चुकी है और प्रभात होते ही सभी घरों के किवाड़ खुल गए हैं।
दही बिलोना: गोपियों ने दही मथना आरंभ कर दिया है और मथानी घुमाते समय उनके हाथों के कंकणों (चूड़ियों) की मधुर झनकार चारों ओर गूँज रही है।
देवताओं व मित्रों का आगमन: देवता और मनुष्य दर्शन हेतु द्वार पर प्रतीक्षा कर रहे हैं तथा ग्वाल-सखा जय-जयकार करते हुए तुम्हें गाय चराने के लिए बुला रहे हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रात बीतने व किवाड़ खुलने का उल्लेख1 अंक
दही मथने व कंकणों की झंकार का प्रमाण1 अंक
द्वार पर खड़े देवताओं व ग्वाल-बालों का वर्णन1 अंक
प्र. 2 (कविता से)
मीरा को सावन "मनभावन" क्यों लगने लगा?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मीराबाई को सावन का महीना अत्यंत मनभावन (मन को लुभाने वाला) इसलिए लगा क्योंकि:
प्रभु आगमन की भनक: सावन की रिमझिम फुहारों के बीच मीरा के मन में यह विश्वास जाग उठा कि उनके आराध्य प्रभु गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) पधारने वाले हैं।
प्राकृतिक रमणीयता: आकाश में उमड़ते-घुमड़ते मेघ, चमकती बिजली, नन्हीं-नन्हीं बूँदों की झड़ी और शीतल बयार ने विरहिणी मीरा के अंतर्मन को शांति और आनंद से भर दिया।
भक्ति का उल्लास: प्रियतम के मिलन की इस पावन आस ने मीरा के हृदय में आनंद-मंगल के गीत गाने की उमंग जगा दी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
श्रीकृष्ण के आगमन की सूचना/आभास1.5 अंक
सावन की प्राकृतिक रमणीयता व आनंद-मंगल का भाव1.5 अंक
प्र. 3 (कविता से)
"माखन-रोटी हाथ महँ लीनी, गौअन के रखवारे" पंक्ति में कृष्ण के किस बाल-रूप का वर्णन किया गया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
इस पंक्ति में श्रीकृष्ण के अत्यंत सरल, सहज और ग्रामीण गोपालक (ग्वाल-बाल) रूप का वात्सल्यपूर्ण चित्रण है। यशोदा माँ ने अपने नटखट कन्हैया के हाथ में नाश्ते के रूप में ताजे मक्खन से चुपड़ी रोटी दे दी है और वे अपने ग्वाल-मित्रों के साथ गायों की रक्षा करने और उन्हें चराने के लिए वन की ओर प्रस्थान करने को तैयार हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
गोपालक रूप का स्पष्टीकरण1 अंक
माखन-रोटी व गाय चराने के ग्रामीण प्रसंग का उल्लेख1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
मीरा के पदों में ब्रजभाषा के मधुर शब्दों का प्रयोग हुआ है। निम्नलिखित शब्दों के मानक खड़ी बोली रूप लिखिए: (क) रजनी (ख) भोर (ग) दधि (घ) सीतल
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
ब्रजभाषा शब्दों के मानक खड़ी बोली रूप:
(क) रजनी = रात / रात्रि
(ख) भोर = प्रभात / सवेरा / सुबह
(ग) दधि = दही
(घ) सीतल = शीतल / ठंडा
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चारों शब्दों के सही मानक रूप (0.5 अंक प्रत्येक)2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
मीराबाई के पदों में कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण किस रूप में प्रकट हुआ है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. प्रथम पद (भोर का दृश्य): यशोदा माता द्वारा बाल कृष्ण को जगाने का अत्यंत वात्सल्यपूर्ण चित्रण है, जहाँ मक्खन-रोटी लिए ग्वाल-बाल और देवता द्वार पर खड़े हैं।
2. द्वितीय पद (बरखा का उल्लास): सावन की रिमझिम फुहारों में मीरा का मन कृष्ण आगमन की आहट पाकर उमंग से भर उठता है और वे अपने प्रभु 'गिरधर नागर' के मंगल गीत गाती हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
वात्सल्य और भक्ति रस के पदों की व्याख्या3 अंक
भाषा की बात — अलंकार
'दामिनि दमके', 'बरसे बदरिया' में प्रयुक्त अलंकार पहचानकर उसका नाम लिखिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
यहाँ अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि 'दामिनि दमके' में 'द' वर्ण की तथा 'बरसे बदरिया' में 'ब' वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार हुई है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अनुप्रास अलंकार की सही पहचान और कारण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Devotional HOTS
मीराबाई के दोनों पदों में प्रकृति (भोर और वर्षा) के माध्यम से मानवीय भावनाओं को व्यक्त किया गया है। प्रथम पद में "वात्सल्य रस" और द्वितीय पद में "भक्ति/शृंगार रस" का सौंदर्य किस प्रकार प्रस्फुटित हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
काव्य-सौंदर्य एवं रस विवेचन:
प्रथम पद में वात्सल्य रस: माता यशोदा का अपने नन्हे पुत्र को दुलार से जगाना, दही मथने की आवाज और माखन-रोटी थमाना वात्सल्य रस का आलौकिक उदाहरण है। यहाँ माँ और संतान के बीच का पवित्रतम प्रेम झलकता है।
द्वितीय पद में भक्ति एवं शृंगार: सावन के बादलों का बरसना भक्त की विरह-वेदना को मिटाकर प्रियतम मिलन के सुख में बदल देता है। प्रकृति का उद्दीपन रूप मीरा की अनन्य निष्ठा और समर्पण को पराकाष्ठा पर पहुँचाता है।
V17
पाठ 17: वीर कुंवर सिंह
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 17) — जीवनी — विभांशु दिव्याल | 1857 के महासंग्राम के अजेय नायक, छापामार युद्ध और राष्ट्रीय चेतना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रस्तुत पाठ 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान और अदम्य सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की अद्वितीय वीरता, शौर्य और देशभक्ति का प्रामाणिक इतिहास प्रस्तुत करता है। कुंवर सिंह का जन्म 1777 ई. में बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर रियासत में हुआ था। उनके पिता राजा साहबजादा सिंह एक स्वाभिमानी और वीर पुरुष थे। जब अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध देश भर में विद्रोह की ज्वाला भड़की, तो 80 वर्ष की वृद्धावस्था में भी कुंवर सिंह ने युवाओं जैसी अपार ऊर्जा और साहस के साथ अंग्रेजी सेना के दाँत खट्टे कर दिए। 25 जुलाई 1857 को दानापुर की विद्रोही सैनिक टुकड़ी ने आरा पहुँचकर कुंवर सिंह को अपना सर्वोच्च सेनापति घोषित किया। उन्होंने अंग्रेजों से आरा को मुक्त कराया। वे छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) के कुशल विशेषज्ञ थे। जब वे रीवा, बांदा, मिर्जापुर, कानपुर और लखनऊ होते हुए आजमगढ़ पहुँचे, तो उन्होंने अंग्रेज कर्नल मिलमैन और डेंस की सेनाओं को बुरी तरह परास्त किया। एक बार गंगा पार करते समय अंग्रेज कैप्टन डगलस की गोली उनकी बाईं कलाई में लग गई। विष फैलने से रोकने के लिए इस वीर सेनानी ने अपनी तलवार से अपनी ही बायीं बाँह काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दी! 23 अप्रैल 1858 को उन्होंने अंग्रेजों को हराकर जगदीशपुर में स्वाधीनता का विजय ध्वज फहराया और इसके तीन दिन बाद 26 अप्रैल 1858 को यह महान अमर बलिदानी चिरनिद्रा में लीन हो गया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। अदम्य इच्छाशक्ति, सांप्रदायिक सौहार्द और त्याग ही सच्ची देशभक्ति के लक्षण हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
बाबू वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने हमें अत्यंत प्रेरित और प्रभावित किया:
अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति: 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने जिस पराक्रम के साथ आधुनिक हथियारों से लैस अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया, वह अद्वितीय है।
अद्भुत सैन्य रणनीति और छापामार युद्ध: वे जंगलों और पहाड़ियों का उपयोग कर अंग्रेजों को भ्रमित करने और अचानक हमला कर परास्त करने में निपुण थे।
सर्वोच्च बलिदान की भावना: गोली लगने पर अपनी कलाई को स्वयं तलवार से काटकर गंगा मैया को भेंट कर देना उनके आत्म-बलिदान और वीरता की पराकाष्ठा है।
सांप्रदायिक सद्भाव: उनके प्रशासन और सेना में हिंदू और मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं था; इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन उनके उच्च पदों पर आसीन विश्वासपात्र सेनापति थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
वृद्धावस्था में अदम्य पराक्रम का उल्लेख1 अंक
छापामार युद्ध व कलाई काटने के बलिदान का प्रसंग1 अंक
सांप्रदायिक सद्भाव व मानवीय पक्ष1 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
कुंवर सिंह को बचपन में किन कामों में मज़ा आता था और उनके पिता ने उनमें देशप्रेम की भावना कैसे जगाई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) बचपन के प्रिय कार्य:
कुंवर सिंह का मन पढ़ाई-लिखाई और किताबी ज्ञान में कम लगता था। उन्हें घुड़सवारी करने, तलवारबाजी सीखने, तीरंदाजी करने और कुश्ती लड़ने में बहुत आनंद आता था। इन साहसिक खेलों ने उनके शरीर को सुदृढ़ और मन को निर्भीक बना दिया।
(ख) पिता द्वारा देशप्रेम का बीजारोपण:
उनके पिता साहबजादा सिंह अत्यंत वीर, स्वाभिमानी और देशभक्त जमींदार थे। उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी कभी स्वीकार नहीं की। पिता के इस स्वाभिमानी चरित्र, अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध उनकी विद्रोही सोच और देशभक्ति के वातावरण ने बालक कुंवर सिंह के हृदय में मातृभूमि की स्वतंत्रता की अटूट लौ जला दी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
घुड़सवारी, तलवारबाजी व कुश्ती का उल्लेख1.5 अंक
पिता के स्वाभिमान व देशभक्तिपूर्ण संस्कारों का प्रभाव1.5 अंक
प्र. 3 (पाठ से)
कुंवर सिंह की सांप्रदायिक सद्भाव की सोच का क्या प्रमाण मिलता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कुंवर सिंह की सोच अत्यंत धर्मनिरपेक्ष और सांप्रदायिक सद्भाव से परिपूर्ण थी, जिसके प्रमुख प्रमाण निम्नलिखित हैं:
उनकी सेना में धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं था। उच्च पदों पर इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन जैसे मुस्लिम सेनानी नियुक्त थे।
उनके राज्य में हिंदुओं के त्योहार (होली, दिवाली) और मुसलमानों के त्योहार (ईद, मुहर्रम) एक साथ मिलकर मनाए जाते थे।
उन्होंने पाठशालाओं के साथ-साथ मकतबों का भी निर्माण कराया और दोनों समुदायों की भलाई के लिए कुएँ, जलाशय और सड़कें बनवाईं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
इब्राहिम खाँ व किफायत हुसैन का सैन्य नेतृत्व1 अंक
त्योहारों व मकतब-पाठशालाओं के साझी संस्कृति का प्रमाण1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए: (क) दाँत खट्टे करना (ख) वीरगति पाना
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) दाँत खट्टे करना (बुरी तरह पराजित करना): वाक्य: 1857 के संग्राम में वीर कुंवर सिंह ने आजमगढ़ के मैदान में अंग्रेजी सेना के दाँत खट्टे कर दिए।
(ख) वीरगति पाना (युद्धभूमि में लड़ते-लड़ते सम्मानपूर्वक बलिदान होना): वाक्य: मातृभूमि की रक्षा करते हुए अमर बलिदानी भगत सिंह और उनके साथी हँसते-हँसते वीरगति को प्राप्त हुए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दोनों मुहावरों के सही अर्थ और सटीक वाक्य प्रयोग2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ आपको सबसे अधिक प्रभावित करती हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ अत्यंत प्रेरणादायक हैं:
1. अदम्य साहस और वृद्धावस्था में शौर्य: 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने ब्रिटिश सेना के छक्के छुड़ा दिए और गंगा पार करते समय गोली लगने पर अपनी घायल बाँह स्वयं काटकर गंगा मैया को समर्पित कर दी।
2. सांप्रदायिक सद्भाव: उनकी सेना में हिंदू और मुस्लिम दोनों उच्च पदों पर थे। वे मंदिर और मस्जिद दोनों के निर्माण में समान सहयोग देते थे।
3. जन-कल्याण की भावना: उन्होंने निर्धनों के लिए कुएँ खुदवाए, तालाब बनवाए और सड़कें बनवाईं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शौर्य, धर्मनिरपेक्षता और समाज-सेवा का उल्लेख3 अंक
भाषा की बात — प्रत्यय
निम्नलिखित शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए: (i) स्वाधीनता (ii) धार्मिक
2 अंक (1 अंक प्रति शब्द)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) स्वाधीनता: स्वाधीन (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय) (ii) धार्मिक: धर्म (मूल शब्द) + इक (प्रत्यय)
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मूल शब्द और प्रत्यय का सही पृथक्करण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Patriotic Reflection
बाबू कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की उस उम्र में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का झंडा उठाया जब लोग अक्सर आराम और संन्यास की सोचते हैं। उनकी इस जिजीविषा और कर्तव्यबोध से आज की युवा पीढ़ी को क्या शिक्षा लेनी चाहिए?
युवा पीढ़ी के लिए प्रासंगिक शिक्षा:
आयु केवल एक संख्या है: कुंवर सिंह का जीवन सिखाता है कि राष्ट्र-सेवा, समाज सुधार और बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि मन का संकल्प और अदम्य उत्साह महत्वपूर्ण होता है।
कठिनाइयों से न भागना: जब वे घायल हुए, तब भी उन्होंने निराश होने के बजाय तुरंत निर्णय लिया और अपनी बाँह काटकर भी युद्ध जारी रखा। युवाओं को विपत्तियों में हताश होने के बजाय साहसपूर्वक समाधान खोजना चाहिए।
सामाजिक समरसता: धर्म और जाति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही किसी भी राष्ट्र को शक्तिशाली बना सकता है।
V18
पाठ 18: संघर्ष के कारण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया: धनराज
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 18) — साक्षात्कार — विनीता पांडेय | भारतीय हॉकी के चमकते सितारे का संघर्ष, स्वाभिमान और सादगी
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
सुप्रसिद्ध पत्रकार विनीता पांडेय द्वारा भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी एवं पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै के 35 वर्ष के होने पर लिया गया यह साक्षात्कार एक अत्यंत प्रेरक और यथार्थवादी दस्तावेज है। धनराज पिल्लै का बचपन महाराष्ट्र के पुणे में अत्यधिक गरीबी और अभावों के बीच बीता। उनके पास हॉकी स्टिक खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे; वे अपने बड़े भाइयों और साथियों की पुरानी व फेंकी हुई स्टिक से अभ्यास करते थे। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से जब वे 1985 में मणिपुर में जूनियर राष्ट्रीय हॉकी में चुने गए, तो उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साक्षात्कार में धनराज अत्यंत ईमानदारी से स्वीकार करते हैं कि बचपन की घोर गरीबी, असुरक्षा और कदम-कदम पर किए गए संघर्षों ने उन्हें थोड़ा 'तुनुकमिज़ाज' (जल्दी गुस्सा होने वाला) और भावुक बना दिया। वे दिल के साफ हैं और अपनी बात मुँह पर कह देते हैं। वे अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी माँ को देते हैं जिन्होंने उन्हें सदैव जमीन से जुड़े रहने और विनम्र रहने की सीख दी। 1999 में जब वे अपनी दूसरी पुरानी कार 'अरमाडा' लेकर चल रहे थे, तब एक पत्रकार ने लिखा था कि भारत के इतने बड़े खिलाड़ी के पास आज भी सेकंड हैंड कार है। वे गर्व से बताते हैं कि जब 2000 में वे तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन से राष्ट्रपति भवन में मिले, तो उन्हें अपनी सफलता और हॉकी पर अपार गर्व का अनुभव हुआ।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: घोर अभाव और गरीबी भी दृढ़ संकल्प और कठोर परिश्रम के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। मनुष्य को सफलता के शिखर पर भी अपनी जड़ों और सादगी को नहीं भूलना चाहिए।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (साक्षात्कार से)
साक्षात्कार पढ़कर धनराज पिल्लै की कौन-सी छवि आपके मन में उभरती है? उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
साक्षात्कार पढ़कर धनराज पिल्लै की एक अत्यंत संघर्षशील, स्वाभिमानी, संवेदनशील और निष्कपट व्यक्तित्व की छवि हमारे मन में उभरती है:
संघर्षशील और लगनशील: टूटी हुई स्टिक से अभ्यास करके अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी बनना उनकी अदम्य मेहनत का प्रमाण है।
स्पष्टवादी और निष्कपट: वे बनावटी नहीं हैं। जो उनके दिल में होता है, वही उनकी जुबान पर होता है। वे अपने गुस्से और तुनुकमिज़ाजी को छिपाने का ढोंग नहीं करते।
सादगी और पारिवारिक प्रेम: सफलता के शिखर पर पहुँचने के बावजूद वे अपनी माँ और भाइयों के प्रति पूर्ण समर्पित रहे और सदैव सादगीपूर्ण जीवन जिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कठोर परिश्रम व अभावों से उबरने का व्यक्तित्व1 अंक
स्पष्टवादिता व निष्कपट स्वभाव का उल्लेख1 अंक
सादगी व परिवार के प्रति निष्ठा1 अंक
प्र. 2 (साक्षात्कार से)
धनराज पिल्लै ने अपने तुनुकमिज़ाज (शीघ्र क्रोधित होने वाले) स्वभाव का क्या कारण बताया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
धनराज पिल्लै ने अपने तुनुकमिज़ाज होने के निम्नलिखित स्वाभाविक और मनोवैज्ञानिक कारण बताए:
बचपन का भयंकर अभाव और संघर्ष: उनका बचपन घोर आर्थिक तंगी और अनिश्चितता में बीता। हर छोटी-छोटी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ता था।
असुरक्षा की भावना: लगातार उपेक्षा और संघर्षों ने उनके भीतर एक गहरा असुरक्षा का भाव भर दिया था, जिससे वे जल्दी आहत हो जाते थे।
गलत बात बर्दाश्त न करना: वे अन्याय और पक्षपात कभी सहन नहीं कर पाते थे। जब कोई उनके साथ अनुचित व्यवहार करता, तो वे तुरंत उबल पड़ते थे, यद्यपि बाद में उन्हें इसका पछतावा भी होता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बचपन के अभावों व आर्थिक तंगी का प्रभाव1.5 अंक
असुरक्षा की भावना व अन्याय बर्दाश्त न करने का स्वभाव1.5 अंक
प्र. 3 (साक्षात्कार से)
"मेरी पहली कार एक सेकंड हैंड अरमाडा थी..." इस प्रसंग से उनके जीवन के यथार्थ का क्या पता चलता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
इस प्रसंग से यह कटु सत्य उजागर होता है कि भारत में क्रिकेट के अलावा अन्य पारंपरिक खेलों (जैसे हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी) के अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष खिलाड़ियों को भी उचित आर्थिक संबल और सम्मान नहीं मिलता था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के वर्षों बाद भी धनराज पिल्लै केवल एक सेकंड हैंड कार खरीद पाए थे। यह उनके संघर्ष, सादगी और सीमित संसाधनों में भी स्वाभिमान से जीने का प्रमाण है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
हॉकी खिलाड़ियों की आर्थिक वास्तविकताओं का उद्घाटन1 अंक
सादगी व स्वाभिमान का विश्लेषण1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
नीचे दिए गए शब्दों में से उपसर्ग और मूल शब्द अलग-अलग कीजिए: (क) असुरक्षित (ख) अपमानित (ग) परिवार
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
तीनों शब्दों के सही उपसर्ग और मूल शब्द2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
धनराज पिल्लै के जीवन से आज के युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
1. कठिन परिश्रम और लगन: टूटी हुई हॉकी स्टिक से अभ्यास करके विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी बनना यह सिखाता है कि साधनहीनता कभी प्रतिभा की रुकावट नहीं बन सकती।
2. सरलता और स्वाभिमान: अपार शोहरत पाने के बाद भी वे अपनी साधारण पृष्ठभूमि को नहीं भूले और मुंबई की लोकल ट्रेनों में सफर करने में कभी हीनभावना महसूस नहीं की।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
साधनहीनता से सफलता और सरलता की प्रेरणा3 अंक
भाषा की बात — शब्द संरचना
'तुनुकमिज़ाज' शब्द दो भाषाओं के मेल से बना है। इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए एक वाक्य बनाइए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
• अर्थ: बात-बात पर चिढ़ने या गुस्सा होने वाला स्वभाव (तुनुक = शीघ्र/क्षणभर में + मिज़ाज = स्वभाव)।
• वाक्य प्रयोग: अत्यधिक काम के तनाव के कारण रमेश आजकल बड़ा तुनुकमिज़ाज हो गया है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शब्द का सही अर्थ और व्याकरणिक वाक्य प्रयोग2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Sports & Inspiration HOTS
धनराज पिल्लै के जीवन से आज के उन युवाओं और बाल खिलाड़ियों को क्या प्रेरणा मिलती है जो खेल के आधुनिक संसाधनों (महंगे जूते, आधुनिक किट, विदेशी कोच) के अभाव में निराश होकर प्रयास छोड़ देते हैं?
प्रेरणा एवं जीवन-मूल्य:
प्रतिभा साधनों की मोहताज नहीं होती: धनराज पिल्लै ने सिद्ध किया कि फटी हुई जूतियों और पुरानी टूटी स्टिक से भी विश्वस्तरीय ड्रिबलिंग और गोल दागे जा सकते हैं। साधन केवल सहायक होते हैं, मुख्य शक्ति खिलाड़ी का अदम्य जुनून और समर्पण है।
धैर्य और निरंतर अभ्यास: प्रारंभिक असफलताओं और वर्षों तक राष्ट्रीय टीम की प्रतीक्षा करने के बाद भी उन्होंने कभी मैदान नहीं छोड़ा। कठिन परिश्रम का कोई विकल्प (शॉर्टकट) नहीं होता।
V19
पाठ 19: आश्रम का अनुमानित व्यय
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 19) — लेखा-जोखा — मोहनदास करमचंद गांधी | साबरमती आश्रम का प्रारंभिक बजट, स्वावलंबन और श्रम-संस्कृति
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा लिखित यह ऐतिहासिक दस्तावेज 'आश्रम का अनुमानित व्यय' उनके व्यावहारिक जीवन-दर्शन, सूक्ष्म वित्तीय नियोजन और स्वावलंबन के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को उजागर करता है। जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, तो उन्होंने मई 1915 में अहमदाबाद के निकट कोचरब में 'सत्याग्रह आश्रम' (साबरमती आश्रम) की स्थापना का संकल्प लिया। आश्रम शुरू करने से पूर्व उन्होंने आगामी एक वर्ष के संभावित खर्चों का अत्यंत बारीकी और वैज्ञानिक पद्धति से एक अनुमानित बजट तैयार किया। इस बजट में आश्रमवासियों की प्रारंभिक संख्या 40 और बाद में 50 मानी गई थी। गांधी जी ने भोजन खर्च (₹6000 वार्षिक), मकान और जमीन की आवश्यकता (लगभग 5 एकड़ जमीन और 3000 पुस्तकों का पुस्तकालय), रसोई के बर्तन, बढ़ईगीरी और मोची के औजारों की एक-एक सूची तैयार की। उन्होंने साफ लिखा कि आश्रम केवल धार्मिक या वैचारिक केंद्र नहीं होगा, बल्कि श्रम और आत्मनिर्भरता की कर्मशाला होगा जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपने हाथों से शारीरिक श्रम करेगा। उन्होंने अहमदाबाद के धनी नागरिकों से जमीन और प्रारंभिक व्यय वहन करने का अनुरोध किया, साथ ही स्पष्ट किया कि यदि अहमदाबाद केवल भवन निर्माण का खर्च दे, तो वे खाने का खर्च अन्य स्रोतों से जुटाने का प्रयास करेंगे।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: किसी भी महान राष्ट्र-निर्माण या सामाजिक कार्य के लिए उच्च आदर्शों के साथ-साथ व्यावहारिक नियोजन, मितव्ययिता और शारीरिक श्रम का सम्मान अनिवार्य है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (लेखा-जोखा से)
गांधी जी ने आश्रम के प्रारंभिक बजट में किन-किन प्रमुख मदों (खर्चों) को शामिल किया था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
गांधी जी ने आश्रम की स्थापना हेतु निम्नलिखित मुख्य मदों को अपने सूक्ष्म वित्तीय बजट में सम्मिलित किया था:
भोजन और राशन का खर्च: 50 व्यक्तियों के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपये मासिक की दर से 6000 रुपये वार्षिक का भोजन व्यय।
जमीन और भवन: खेती और बागवानी के लिए कम से कम 5 एकड़ जमीन, रसोईघर, पुस्तकालय (3000 पुस्तकों हेतु) और 50 व्यक्तियों के रहने योग्य मकान।
शारीरिक श्रम और हस्तशिल्प के औजार: बढ़ईगीरी के औजार (हथौड़े, बसूले, रंदे, आरी, छेनी आदि) और लोहार तथा खेती के बुनियादी उपकरण।
रसोईघर के बर्तन व बिस्तर: भोजन पकाने के बड़े पतीले, थालियाँ, कटोरियाँ और अतिथियों के ठहरने की बुनियादी व्यवस्था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
भोजन खर्च (₹6000 वार्षिक) का उल्लेख1 अंक
जमीन, भवन व पुस्तकालय की व्यवस्था1 अंक
श्रम के औजारों (बढ़ईगीरी, खेती) का विवरण1 अंक
प्र. 2 (लेखा-जोखा से)
गांधी जी के इस बजट विवरण से उनके चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
इस सूक्ष्म लेखा-जोखा से महात्मा गांधी के व्यक्तित्व की निम्नलिखित अनुपम विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं:
अद्भुत दूरदर्शिता और सूक्ष्म वित्तीय योजना: वे केवल हवाई बातें या कोरे आदर्शवादी नहीं थे, बल्कि एक-एक पैसे, बर्तन और हथौड़े की कीमत का यथार्थवादी हिसाब रखने वाले कुशल प्रबंधक थे।
शारीरिक श्रम की महत्ता (स्वावलंबन): उन्होंने औजारों की सूची को बजट में प्राथमिकता देकर यह सिद्ध किया कि आश्रम का प्रत्येक सदस्य बौद्धिक चिंतन के साथ-साथ हाथ से श्रम करेगा।
मितव्ययिता और ईमानदारी: जनता और दानदाताओं के धन का एक-एक पैसा पवित्रता और मितव्ययिता से खर्च हो, इसके प्रति वे अत्यंत सतर्क थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
व्यावहारिक वित्तीय प्रबंधन व दूरदर्शिता1.5 अंक
शारीरिक श्रम के प्रति सम्मान व मितव्ययिता1.5 अंक
प्र. 3 (लेखा-जोखा से)
आश्रम के लिए बढ़ईगीरी और मोची के औजार मँगवाने के पीछे गांधी जी का क्या उद्देश्य था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
गांधी जी आश्रमवासियों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर पूर्णतः आत्मनिर्भर और श्रमजीवी बनाना चाहते थे। वे चाहते थे कि आश्रम के लोग अपनी जरूरत के फर्नीचर, चरखे, जूते और खेती के औजार खुद बनाएँ और उनकी मरम्मत स्वयं करें। वे शारीरिक श्रम को हीन मानने की सामंती मानसिकता को तोड़कर श्रम की गरिमा (Dignity of Labour) स्थापित करना चाहते थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
आत्मनिर्भरता व स्वावलंबन का उद्देश्य1 अंक
श्रम की गरिमा स्थापित करने का विचार1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
पाठ में "अनुमानित" और "वार्षिक" शब्द आए हैं। इनमें क्रमशः "इत" और "इक" प्रत्यय लगे हैं। इन दोनों प्रत्ययों से बनने वाले दो-दो नए शब्द बनाइए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'इत' प्रत्यय से बने शब्द:
अनुमान + इत = अनुमानित
प्रमाण + इत = प्रमाणित
हर्ष + इत = हर्षित
(ख) 'इक' प्रत्यय से बने शब्द:
वर्ष + इक = वार्षिक
मास + इक = मासिक
दिन + इक = दैनिक
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'इत' प्रत्यय से 2 सही शब्द1 अंक
'इक' प्रत्यय से 2 सही शब्द1 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
गांधीजी द्वारा तैयार किए गए साबरमती आश्रम के बजट से उनकी दूरदर्शिता और मितव्ययिता का क्या प्रमाण मिलता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
गांधीजी द्वारा बनाए गए आश्रम के अनुमानित व्यय से उनकी सूक्ष्म दृष्टि और मितव्ययिता प्रकट होती है:
1. उन्होंने 40 से 50 लोगों के लिए रसोईघर के बर्तनों, खेती के औजारों (कुदाल, फावड़े) और बढ़ईगिरी के उपकरणों की पाई-पाई का सटीक हिसाब लगाया।
2. वे स्वावलंबन और शारीरिक श्रम को शिक्षा का अभिन्न अंग मानते थे, इसलिए उन्होंने पुस्तकों से अधिक जोर हाथ से काम करने वाले औजारों पर दिया ताकि आश्रम आत्मनिर्भर बन सके।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मितव्ययिता, सूक्ष्म नियोजन और स्वावलंबन का उल्लेख3 अंक
भाषा की बात — शब्दावली
निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय लिखिए: (i) बजट (ii) खर्च
2 अंक (1 अंक प्रति शब्द)
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(i) बजट:आय-व्ययक / अनुमानित व्यय (ii) खर्च:व्यय / लागत
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सटीक मानक हिंदी पर्याय2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Financial & Civic HOTS
आज हमारे समाज में बिना बजट बनाए अंधाधुंध खर्च करना और शारीरिक श्रम (जैसे झाड़ू लगाना, कपड़े धोना, बर्तन साफ करना) को हेय (छोटा) समझना एक आम प्रवृत्ति बन गई है। गांधी जी के "आश्रम का अनुमानित व्यय" से आज के परिवारों और विद्यार्थियों को क्या सबक मिलता है?
वित्तीय अनुशासन एवं श्रम-संस्कृति का सबक:
पारिवारिक बजट का महत्व: किसी भी परिवार की आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है कि आय और व्यय का पूर्व-निर्धारित बजट बनाया जाए ताकि अनावश्यक ऋण और फिजूलखर्ची से बचा जा सके।
श्रम की गरिमा: गांधी जी ने स्वयं अपने हाथों से आश्रम का शौचालय तक साफ किया। विद्यार्थियों को अपने कमरे की सफाई, जूते पॉलिश करना और घरेलू कार्यों में माता-पिता की मदद करने को अपना गौरव समझना चाहिए।
V20
पाठ 20: विप्लव-गायन
📖 वसंत भाग - 2 (पाठ 20) — कविता — बालकृष्ण शर्मा "नवीन" | रूढ़ियों का विध्वंस, क्रांतिकारी चेतना और नव-सृजन का आह्वान
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए,
एक हिलेरे इधर से आए,
एक हिलेरे उधर से आए,
प्राणों के लाले पड़ जाएँ,
त्राहि-त्राहि रव नभ में छाए,
नाश और सत्यानाशों का
धुँआधार साम्राज्य बन जाए,
पर, कूड़े-करकट की ढेरी
में अब आग लगा दी जाए।
कंठ रुका है महानाश का
मारक गीत रुद्ध होता है,
आग लगेगी क्षण में तल में,
क्षुभ्द युद्ध की स्थिति पैदा होती है।
गाँठ खुलेंगी सब कलियों की,
यह विप्लव का गान प्रलयंकर,
नष्ट करेगा सब जीर्ण-शीर्ण,
होगा फिर नूतन का सृजन।
— बालकृष्ण शर्मा "नवीन"
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
ओज और राष्ट्रीय नवजागरण के महान कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' द्वारा रचित कविता 'विप्लव-गायन' समाज में व्याप्त सदियों पुरानी सड़ी-गली रूढ़ियों, जड़ता, अंधविश्वासों और सामाजिक विषमता को समूल नष्ट करने वाला एक क्रांतिकारी आह्वान है। कवि अपनी वीणा से मधुर और कोमल प्रेम-गीत गाने से इनकार करते हुए कहते हैं—"हे कवि! अब प्रेम की मंद तान छोड़ो और कोई ऐसा प्रलयंकर गीत गाओ जिससे चारों ओर भारी उथल-पुथल मच जाए।" कवि का मानना है कि जब तक समाज में जमी हुई पुरानी रूढ़ियों, सामाजिक भेदभाव और जड़ता रूपी कूड़े-करकट के ढेर को क्रांति की अग्नि में जलाकर भस्म नहीं किया जाएगा, तब तक नए और समतामूलक समाज का निर्माण संभव नहीं है। विनाश के बिना नव-सृजन असंभव है। कवि का कंठ रुद्ध है क्योंकि उसके भीतर महाविनाश का मारक गीत भरा हुआ है जो फूटने के लिए बेचैन है। यह विप्लव गान समस्त जीर्ण-शीर्ण (पुराने) ढाँचों को ढहाकर एक सुंदर, स्वतंत्र और न्यायपूर्ण नए समाज की नींव रखेगा।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पुराने, मृतप्राय और शोषक सामाजिक बंधनों को तोड़े बिना नए और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव नहीं है। विनाश ही नव-सृजन की पहली सीढ़ी है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
"कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ / जिससे उथल-पुथल मच जाए..." पंक्ति के माध्यम से कवि समाज में क्या परिवर्तन लाना चाहता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
इस पंक्ति के माध्यम से कवि समाज में निम्नलिखित युगांतरकारी क्रांतिकारी परिवर्तन लाना चाहता है:
सामाजिक जड़ता और रूढ़ियों का अंत: कवि सदियों से चली आ रही अंधविश्वासी, भेदभावपूर्ण और प्रगति-विरोधी मान्यताओं को उखाड़ फेंकना चाहता है।
नव-चेतना का संचार: वह अपनी ओजस्वी कविता (तान) के द्वारा आलसी और सोए हुए समाज में क्रांति की चेतना जगाना चाहता है ताकि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों।
पुनर्निर्माण का मार्ग: कवि उथल-पुथल इसलिए चाहता है क्योंकि पुराने सड़े-गले ढाँचे के ध्वस्त हुए बिना एक नवीन, समतामूलक और स्वतंत्र समाज का निर्माण संभव नहीं है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रूढ़ियों व अंधविश्वासों के विनाश का संकल्प1.5 अंक
क्रांतिकारी चेतना व नव-सृजन की अनिवार्यता1.5 अंक
प्र. 2 (कविता से)
"कंठ रुका है महानाश का / मारक गीत रुद्ध होता है..." इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भावार्थ:
इन पंक्तियों में कवि अपनी आंतरिक बेचैनी और विद्रोही मनोदशा को प्रकट कर रहे हैं:
कवि के कंठ से सामान्य गीत नहीं, बल्कि क्रांति और महाविनाश का ऐसा मारक गीत फूटने वाला है जो अन्यायकारी व्यवस्था की नींव हिला देगा।
शासकों या समाज के रूढ़िवादी ठेकेदारों ने उस विप्लवकारी स्वर को दबाने का प्रयास किया है, जिससे कवि का कंठ रुँध गया है। परंतु यह रुकावट उस तूफान से पहले की शांति के समान है जो किसी भी क्षण प्रचंड विस्फोट के रूप में फूटकर क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित कर देगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मारक गीत और महानाश के प्रतीक का अर्थ1.5 अंक
दमन के विरुद्ध उग्र आंतरिक आक्रोश का विश्लेषण1.5 अंक
प्र. 3 (कविता से)
कविता के शीर्षक "विप्लव-गायन" की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
'विप्लव' का अर्थ है क्रांति, उथल-पुथल या भारी परिवर्तन और 'गायन' का अर्थ है काव्य-गान। पूरी कविता में कवि ने शांत रस के स्थान पर रौद्र और वीर रस से परिपूर्ण ओजस्वी भाषा में क्रांति का आह्वान किया है। यह कविता शोषितों में आत्म-सम्मान और रूढ़ियों को नष्ट करने का साहस भरती है। अतः इस रचना के लिए 'विप्लव-गायन' शीर्षक सर्वथा उपयुक्त और सटीक है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शीर्षक के अर्थ की व्याख्या1 अंक
काव्य के कथ्य और संदेश के साथ संगति1 अंक
प्र. 4 (भाषा की बात)
कविता में ओज गुण और तत्सम प्रधान शब्दावली का बाहुल्य है। कविता से चार तत्सम शब्द छाँटकर लिखिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता के चार प्रमुख तत्सम शब्द व वाक्य प्रयोग:
विप्लव (क्रांति / भारी उथल-पुथल) वाक्य: 1857 के प्रथम विप्लव ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दी थीं।
सृजन (निर्माण / रचना) वाक्य: विध्वंस के बाद ही एक सुंदर और नूतन समाज का सृजन संभव होता है।
जीर्ण-शीर्ण (पुराना और टूटा-फूटा) वाक्य: बाढ़ के कारण गाँव के कई जीर्ण-शीर्ण मकान धराशायी हो गए।
क्षुब्ध (अत्यंत बेचैन या क्रोधी) वाक्य: अन्यायपूर्ण नीतियों को देखकर जनता का मन क्षुब्ध हो उठा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चारों तत्सम शब्दों का सही चयन व सार्थक वाक्य2 अंक
पाठ से आगे — प्रश्न 1
कवि 'विप्लव-गायन' के माध्यम से समाज में क्या अमूल-चूल परिवर्तन लाना चाहता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' की कविता 'विप्लव-गायन' क्रांति और नवनिर्माण का शंखनाद है:
1. कवि ऐसी तान छेड़ना चाहता है जिससे रूढ़िवादिता, जड़ता, अंधविश्वास और सामाजिक विषमता की पुरानी दीवारें ध्वस्त हो जाएं।
2. विनाश के बिना नवीन और समतामूलक समाज का सृजन असंभव है, इसलिए कवि अपनी वीणा से क्रांति की चिनगारियाँ सुलगाकर नवयुग का आह्वान करता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रूढ़ियों का विनाश और नवनिर्माण के क्रांतिकारी विचार का विवेचन3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Youth Awakening HOTS
आज हमारे समाज में दहेज प्रथा, जातिवाद, लैंगिक असमानता और पर्यावरण विनाश जैसी अनेक कुरीतियाँ विद्यमान हैं। "विप्लव-गायन" कविता आज के युवाओं को इन कुरीतियों के विरुद्ध किस प्रकार वैचारिक क्रांति करने का संदेश देती है?
युवा क्रांति एवं समकालीन प्रासंगिकता:
मूक दर्शक न बनना: 'विप्लव-गायन' सिखाता है कि समाज की बुराइयों को चुपचाप सहना कायरता है। युवाओं को आगे आकर दहेज, जातिगत भेदभाव और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर विरोध करना चाहिए।
वैचारिक नव-जागरण: क्रांति का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि सकारात्मक विचारों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से रूढ़िवादी सोच को बदलना है।
सकारात्मक नव-सृजन: पुराने सड़े-गले बंधनों को तोड़कर समता, न्याय, नारी-सम्मान और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक आधुनिक भारत का निर्माण करना ही आज का सच्चा 'विप्लव-गायन' है।
M1
अध्याय 1: महाभारत कथा व आदि पर्व: देवव्रत और भीष्म प्रतिज्ञा
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 1) — शांतनु-गंगा प्रसंग, देवव्रत का जन्म, सत्यवती से विवाह हेतु भीष्म प्रतिज्ञा और अम्बा का प्रतिशोध
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
महाभारत कथा महर्षि पराशर के कीर्तिमान पुत्र वेदव्यास की अमर देन है। हस्तिनापुर के प्रतापी राजा शांतनु का विवाह गंगा से हुआ था। गंगा से उन्हें एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम देवव्रत रखा गया। देवव्रत ने वशिष्ठ मुनि से वेद-शास्त्र और परशुराम से धनुर्विद्या की शिक्षा प्राप्त की। वर्षों बाद शांतनु यमुना तट पर निषादराज (केवटराज) की रूपवती कन्या सत्यवती पर मोहित हो गए और उससे विवाह की इच्छा व्यक्त की। निषादराज ने शर्त रखी कि सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर के सिंहासन का उत्तराधिकारी बनेगा। शांतनु अपने सुयोग्य ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते थे, इसलिए वे मौन होकर राजमहल लौट आए और वियोग में सूखने लगे। जब देवव्रत को पिता की उदासी का रहस्य ज्ञात हुआ, तो वे स्वयं निषादराज के पास पहुँचे। उन्होंने पहले राज्य का अधिकार त्यागा। जब निषादराज ने शंका जताई कि भविष्य में देवव्रत की संतानें राज्य का दावा कर सकती हैं, तो देवव्रत ने हाथ में गंगाजल लेकर संसार की सबसे कठोर प्रतिज्ञा की—"मैं आजीवन अविवाहित और ब्रह्मचारी रहूँगा। मेरी कोई संतान नहीं होगी।" इस अलौकिक प्रतिज्ञा के कारण देवताओं ने पुष्पवृष्टि की और उनका नाम भीष्म (भयंकर प्रतिज्ञा करने वाला) पड़ा। आगे चलकर काशीराज की तीन कन्याओं (अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका) के स्वयंवर में भीष्म ने उन्हें विचित्रवीर्य हेतु हर लिया। अम्बा शाल्वराज से प्रेम करती थी, अतः भीष्म ने उसे मुक्त कर दिया। परंतु शाल्व और विचित्रवीर्य दोनों द्वारा त्यागे जाने पर अम्बा ने भीष्म को अपने विनाश का कारण मानकर परशुराम से न्याय माँगा और बाद में घोर तपस्या कर अगले जन्म में शिखंडी के रूप में जन्म लेकर भीष्म के अंत का कारण बनी।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पितृभक्ति, त्याग की पराकाष्ठा, अपने वचन का निर्वाह और प्रतिशोध की विनाशकारी ज्वाला।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
देवव्रत का नाम "भीष्म" क्यों पड़ा? उन्होंने निषादराज के सामने कौन-सी दो कठोर प्रतिज्ञाएँ की थीं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
देवव्रत का नाम 'भीष्म' उनकी असाधारण और कठोर प्रतिज्ञा के कारण पड़ा। संस्कृत में 'भीष्म' का अर्थ होता है—कठिन या भीषण संकल्प लेने वाला।
निषादराज के समक्ष दो प्रतिज्ञाएँ:
राजगद्दी का त्याग: उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे हस्तिनापुर के राजसिंहासन पर कभी नहीं बैठेंगे और सत्यवती का पुत्र ही राजा बनेगा।
आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत: जब निषादराज ने शंका की कि देवव्रत के बच्चे कल को राज्य का दावा कर सकते हैं, तो देवव्रत ने भीषण प्रतिज्ञा की कि वे जीवन भर विवाह नहीं करेंगे और अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'भीष्म' शब्द का अर्थ व कारण1 अंक
राजगद्दी त्यागने की पहली प्रतिज्ञा1 अंक
आजीवन ब्रह्मचर्य की दूसरी भीषण प्रतिज्ञा1 अंक
प्र. 2 (कथा से)
काशीराज की कन्या अम्बा भीष्म से बदला क्यों लेना चाहती थी? उसने अपना प्रतिशोध किस प्रकार पूरा किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अम्बा द्वारा भीष्म से बदला लेने के कारण और उसके प्रतिशोध का स्वरूप निम्नलिखित था:
त्याग और अपमान की पीड़ा: अम्बा मन ही मन राजा शाल्व को अपना पति मान चुकी थी। जब भीष्म ने उसे शाल्व के पास भेजा, तो शाल्व ने यह कहकर ठुकरा दिया कि भीष्म ने तुम्हें पराजित कर जीता है। विचित्रवीर्य ने भी दूसरी ओर मन लगाने वाली कन्या को अपनाने से इनकार कर दिया। इस प्रकार अम्बा का जीवन व्यर्थ हो गया और उसने इस त्रासदी का उत्तरदायी भीष्म को माना।
प्रतिशोध की तपस्या: उसने भीष्म के वध की प्रतिज्ञा की। परशुराम जी भी भीष्म को पराजित न कर सके। तब अम्बा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और वरदान पाकर अगले जन्म में राजा द्रुपद के घर शिखंडी के रूप में जन्म लिया। कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म को बाणों की शय्या पर सुलाकर अम्बा का प्रतिशोध पूरा किया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अम्बा के शाल्व और विचित्रवीर्य द्वारा त्यागे जाने की व्यथा1.5 अंक
शिखंडी रूप में जन्म व भीष्म के पतन का माध्यम बनना1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
राजा शांतनु सत्यवती से विवाह क्यों नहीं कर पा रहे थे? देवव्रत ने इस समस्या का समाधान कैसे निकाला?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
सत्यवती के पिता निषादराज की शर्त थी कि केवल सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर का भावी राजा बनेगा। राजा शांतनु अपने धर्मात्मा, वीर और ज्येष्ठ पुत्र देवव्रत के साथ ऐसा घोर अन्याय नहीं कर सकते थे, इसलिए वे मन मसोसकर रह गए। जब देवव्रत को यह बात पता चली, तो उन्होंने पितृभक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्वयं निषादराज के पास जाकर राज्य और विवाह दोनों का त्याग कर पिता का विवाह संपन्न कराया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
निषादराज की शर्त व शांतनु की धर्मसंकट की स्थिति1 अंक
देवव्रत द्वारा स्वयं जाकर त्याग करने का समाधान1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
महाराज शांतनु के उपरांत हस्तिनापुर के राज-सिंहासन का क्या क्रम रहा और भीष्म ने आजीवन अपनी प्रतिज्ञा का पालन कैसे किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
शांतनु और सत्यवती के विवाह के पश्चात चित्रांगद और विचित्रवीर्य दो पुत्र हुए। चित्रांगद के युद्ध में मारे जाने के बाद विचित्रवीर्य हस्तिनापुर के राजा बने।
भीष्म पितामह ने अपने पिता को दिए गए वचन और सत्यवती के समक्ष ली गई भीषण प्रतिज्ञा (आजीवन ब्रह्मचर्य और सिंहासन से विरक्ति) का अक्षरशः पालन किया। उन्होंने कभी राजमुकुट धारण नहीं किया, बल्कि एक निस्वार्थ संरक्षक के रूप में हस्तिनापुर के राज्य और कुल की रक्षा में अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सिंहासन का उत्तराधिकार क्रम एवं भीष्म की निष्ठा3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Character & Ethics HOTS
भीष्म की प्रतिज्ञा को एक ओर "सर्वोच्च पितृभक्ति" का प्रतीक माना जाता है, किंतु दूसरी ओर यही प्रतिज्ञा आगे चलकर महाभारत के महाविनाश और कुरुवंश के अधर्म (जैसे द्रौपदी चीरहरण के समय भीष्म का मौन) का कारण बनी। इस पर एक संतुलित नैतिक समीक्षा प्रस्तुत कीजिए।
नैतिक समीक्षा एवं विश्लेषण:
सकारात्मक पक्ष (पितृभक्ति): देवव्रत का त्याग संसार के इतिहास में अद्वितीय है। पिता के सुख के लिए यौवन, राज्य और परिवार के सुखों की बलि देना उच्च कोटि के चरित्र को दर्शाता है।
नकारात्मक पक्ष (हस्तिनापुर की बेबसी): भीष्म की यह प्रतिज्ञा हस्तिनापुर के लिए अभिशाप बन गई। वे सिंहासन के रक्षक बनकर बंध गए, जिससे वे जानते हुए भी कि दुर्योधन अधर्मी है, राजसिंहासन के आदेशों का उल्लंघन नहीं कर सके। भरी सभा में जब द्रौपदी का अपमान हुआ, तो उनकी प्रतिज्ञा ने उन्हें मौन रहने पर विवश कर दिया।
निष्कर्ष: यदि नियम या व्यक्तिगत प्रतिज्ञा राष्ट्र और मानवता के व्यापक धर्म की रक्षा में बाधक बन जाए, तो उसका त्याग कर देना ही सच्चा धर्म होता है।
M2
अध्याय 2: कुंती, विदुर और कर्ण का प्रादुर्भाव
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 2) — ऋषि दुर्वासा का वरदान, कर्ण की उत्पत्ति, पांडु-धृतराष्ट्र का काल और विदुर की नीतिमत्ता
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
शूरसेन के पुत्र कुंतीभोज की दत्तक पुत्री पृथा (कुंती) अत्यंत रूपवती और सुशील थीं। उन्होंने अपने पिता के अतिथि परम क्रोधी महर्षि दुर्वासा की एक वर्ष तक ऐसी निष्काम सेवा की कि प्रसन्न होकर ऋषि ने उन्हें एक दिव्य वशीकरण मंत्र दिया, जिसके द्वारा वे जिस भी देवता का आह्वान करेंगी, वह उन्हें अपनी जैसी तेजस्वी संतान प्रदान करेगा। कौतूहलवश कुंवारी कुंती ने सूर्यदेव का आह्वान कर दिया। सूर्यदेव के तेज से कुंती के गर्भ से जन्मजात सोने के कवच और कुंडल से युक्त एक दिव्य बालक उत्पन्न हुआ। लोकलाज के भय से कुंती ने नवजात शिशु को एक संदूक में रखकर गंगा में बहा दिया। वह संदूक हस्तिनापुर के सारथी अधिरथ और उनकी पत्नी राधा को मिला। उन्होंने प्रेमपूर्वक बालक का पालन-पोषण किया और उसका नाम 'राधेय' रखा, जो बाद में महादानी कर्ण कहलाया। इधर हस्तिनापुर में विचित्रवीर्य के दो पुत्र हुए—धृतराष्ट्र (जो जन्मांध थे) और पांडु (जो स्वस्थ थे, किंतु पांडु रोग से ग्रस्त थे)। धृतराष्ट्र के नेत्रहीन होने के कारण पांडु को राजा बनाया गया। दासी-पुत्र विदुर अपने धर्म, सत्य और अगाध ज्ञान के कारण हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री बने। पांडु का विवाह कुंती और माद्री से हुआ। एक शापवश पांडु राजपाट त्यागकर वन चले गए, जहाँ कुंती ने दुर्वासा के मंत्र से धर्मराज (युधिष्ठिर), वायुदेव (भीम) और इंद्र (अर्जुन) तथा माद्री ने अश्विनीकुमारों से नकुल और सहदेव को जन्म दिया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: भाग्य और कर्म का द्वंद्व, सामाजिक भेदभाव का दंश और विदुर की धर्मसम्मत नीति की महत्ता।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
कुंती ने अपने नवजात शिशु (कर्ण) को गंगा में क्यों बहा दिया था? उसका पालन-पोषण किसने किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) गंगा में बहाने का कारण:
कुंती ने कौतूहल और नादानी में दुर्वासा ऋषि के मंत्र की परीक्षा लेने के लिए सूर्यदेव का आह्वान किया था। तब वह अविवाहित (कन्या) थी। जब सूर्यदेव के प्रसाद से बालक का जन्म हुआ, तो कुंती समाज और कुल की मर्यादा, लोकलाज और बदनामी के भय से काँप उठी। इसलिए अत्यंत भारी मन से उसने नवजात शिशु को एक सुरक्षित मंजूषा (संदूक) में बंद करके गंगा नदी की धार में प्रवाहित कर दिया।
(ख) पालन-पोषण:
गंगा में बहता हुआ वह संदूक हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र के सारथी अधिरथ को मिला। अधिरथ और उनकी पत्नी राधा निःसंतान थे। उन्होंने उस तेजस्वी बालक को ईश्वर का वरदान मानकर बड़े लाड़-प्यार से पाला और उसका नाम 'राधेय' (कर्ण) रखा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अविवाहित अवस्था व लोकलाज का भय1.5 अंक
सारथी अधिरथ व राधा द्वारा पुत्रवत पालन1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
विदुर कौन थे और हस्तिनापुर के राजदरबार में उनका क्या स्थान था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
विदुर महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे, जिनका जन्म एक दासी के गर्भ से हुआ था। वे धर्मशास्त्र, राजनीति और कूटनीति के प्रकांड पंडित थे। उनके हृदय में लोभ या पक्षपात का लेश भी नहीं था। वे आजीवन सत्य और धर्म के पक्षधर रहे। राजा धृतराष्ट्र और पांडु दोनों उनका अत्यंत आदर करते थे और उन्हें हस्तिनापुर का महामंत्री (प्रधानमंत्री) नियुक्त किया गया था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विदुर का परिचय व जन्म प्रसंग1 अंक
धर्मपरायणता व हस्तिनापुर के महामंत्री पद की महत्ता1 अंक
प्र. 3 (कथा से)
पाँचों पांडवों के जन्म का क्या रहस्य था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
एक मृग (किंदम ऋषि) के शाप के कारण राजा पांडु संतानोत्पत्ति में असमर्थ थे। तब पांडु के अनुरोध पर कुंती ने महर्षि दुर्वासा द्वारा दिए गए वरदान का उपयोग किया:
कुंती ने धर्मराज का आह्वान कर सत्यवादी युधिष्ठिर को जन्म दिया।
पवनदेव (वायुदेव) के आह्वान से महाबली भीमसेन का जन्म हुआ।
इंद्रदेव के आह्वान से अद्वितीय धनुर्धर अर्जुन उत्पन्न हुए।
पांडु के कहने पर कुंती ने यह मंत्र छोटी रानी माद्री को सिखाया, जिसने अश्विनीकुमारों का आह्वान कर परम सुंदर जुड़वाँ पुत्रों—नकुल और सहदेव को जन्म दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ऋषि शाप व दुर्वासा मंत्र का संदर्भ1 अंक
कुंती द्वारा युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन का जन्म1 अंक
माद्री द्वारा नकुल और सहदेव का जन्म1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
कुंती ने अपने नवजात शिशु कर्ण को नदी में क्यों बहा दिया था और बाद में उसका पालन-पोषण किसने किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
ऋषि दुर्वासा के वरदान की परीक्षा लेने के लिए कुंवारी कुंती ने सूर्यदेव का आह्वान किया, जिसके फलस्वरूप कर्ण का जन्म दिव्य कवच और कुंडल के साथ हुआ। लोक-लाज और सामाजिक अपयश के भय से व्याकुल होकर कुंती ने नवजात शिशु को एक संदूक में रखकर गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया।
नदी में बहते हुए इस संदूक को हस्तिनापुर के सारथी अधिरथ ने देखा। अधिरथ और उनकी पत्नी राधा निस्संतान थे, इसलिए उन्होंने अत्यंत वात्सल्य और प्रेम से उस बालक का पालन-पोषण किया, जिसके कारण कर्ण को 'सूतपुत्र' और 'राधेय' भी कहा गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
लोकलाज के कारण विसर्जन और अधिरथ-राधा द्वारा पालन-पोषण3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Social Justice HOTS
महादानी और अपराजेय वीर होने के बावजूद कर्ण को जीवन भर "सूत-पुत्र" कहकर अपमानित किया गया। कर्ण के इस सामाजिक तिरस्कार ने उसके व्यक्तित्व और महाभारत के युद्ध की दिशा को कैसे प्रभावित किया?
सामाजिक न्याय एवं चरित्र विश्लेषण:
जन्म बनाम कर्म का संघर्ष: कर्ण कुंती का ज्येष्ठ पुत्र और सूर्यपुत्र था, किंतु समाज ने उसकी योग्यता और शौर्य को मान्यता देने के बजाय उसके पालन-पोषण वाले सारथी कुल (सूत जाति) के आधार पर उसका उपहास उड़ाया (जैसे रंगभूमि में कृपाचार्य द्वारा कुल पूछना)।
दुर्योधन के प्रति अंधी कृतज्ञता: जब पूरी सभा में कर्ण का अपमान हो रहा था, तब केवल दुर्योधन ने उसे गले लगाया और अंगदेश का राजा बनाकर मान दिया। इस उपकार के बोझ तले दबकर कर्ण जानते हुए भी कि दुर्योधन अधर्मी है, उसका साथ छोड़ने में असमर्थ रहा।
सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि: समाज के जातिवादी भेदभाव ने एक परम दानी और महान धनुर्धर को विद्रोही और अधर्म के पक्ष में खड़ा होने पर विवश कर दिया।
M3
अध्याय 3: आचार्य द्रोण और लाक्षागृह का षड्यंत्र
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 3) — एकलव्य की गुरुभक्ति, रंगभूमि की परीक्षा, वारणावत का लाक्षागृह और विदुर की कूटनीति
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
महर्षि भारद्वाज के पुत्र आचार्य द्रोण अस्त्र-शस्त्र विद्या के सर्वश्रेष्ठ आचार्य थे। वे पांचाल नरेश द्रुपद के बालसखा थे, परंतु द्रुपद द्वारा दरिद्रता का उपहास उड़ाने पर द्रोण प्रतिशोध का संकल्प लेकर हस्तिनापुर आए। भीष्म ने उन्हें कौरवों और पांडवों का गुरु नियुक्त किया। भील बालक एकलव्य द्रोण की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर स्वयं सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बना, परंतु अर्जुन को अद्वितीय बनाने के वचन के कारण द्रोण ने एकलव्य से उसका दाहिना अँगूठा गुरुदक्षिणा में माँग लिया। शिक्षा पूर्ण होने पर आयोजित रंगभूमि में अर्जुन के पराक्रम को कर्ण ने चुनौती दी। कृपाचार्य द्वारा जाति और कुल पूछे जाने पर दुर्योधन ने कर्ण को तुरंत अंगदेश का राजा बना दिया, जिससे दोनों में गहरी मित्रता हो गई। युधिष्ठिर की लोकप्रियता और युवराज पद से जलकर दुर्योधन, कर्ण और शकुनि ने पांडवों को समाप्त करने का क्रूर षड्यंत्र रचा। उन्होंने धृतराष्ट्र को विवश कर पांडवों को कुंती सहित वारणावत के शिव-उत्सव में भेजा। वहाँ दुर्योधन के गुप्तचर पुरोचन ने सन, लाख, मोम और घी से एक अत्यंत ज्वलनशील भवन लाक्षागृह (लाख का घर) बनाया, जिसमें पांडवों को जलाकर मारने की योजना थी। महामंत्री विदुर ने सांकेतिक म्लेच्छ भाषा में युधिष्ठिर को सचेत कर दिया। विदुर के भेजे एक कुशल खननकर्मी (सुरंग खोदने वाले) ने लाक्षागृह के नीचे एक गुप्त सुरंग बना दी। एक रात भीमसेन ने स्वयं लाक्षागृह में आग लगा दी जिसमें पुरोचन जलकर भस्म हो गया और पांडव गुप्त सुरंग के रास्ते वन में सकुशल निकल गए।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: दुष्टों का षड्यंत्र अंततः उन्हीं का विनाश करता है। धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा ईश्वर और विवेकशील मित्र सदैव करते हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
वारणावत में पांडवों को मारने के लिए दुर्योधन ने क्या षड्यंत्र रचा था? वह भवन किस सामग्री से बना था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) दुर्योधन का षड्यंत्र:
दुर्योधन ने पांडवों की लोकप्रियता और युधिष्ठिर के युवराज बनने से ईर्ष्या करके अपने मंत्री पुरोचन के साथ मिलकर यह योजना बनाई कि पांडवों को माता कुंती सहित वारणावत के मेले में भेजा जाए और वहाँ एक ऐसे भवन में ठहराया जाए जिसमें रात को चुपके से आग लगाकर उन्हें जीवित जला दिया जाए, ताकि किसी को संदेह भी न हो और सारा राजपाट कौरवों को मिल जाए।
(ख) भवन की सामग्री (लाक्षागृह):
यह भवन अत्यधिक ज्वलनशील (आग तुरंत पकड़ने वाली) सामग्रियों से बनाया गया था, जिसमें लाख, मोम, सन, राल, सूखी घास, घी और चर्बी का प्रयोग किया गया था ताकि आग लगते ही वह भयंकर लपटों में बदल जाए और कोई जीवित न बच सके।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
षड्यंत्र का उद्देश्य व वारणावत भेजने की योजना1.5 अंक
लाक्षागृह निर्माण की ज्वलनशील सामग्रियों का उल्लेख1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
विदुर ने पांडवों को लाक्षागृह के षड्यंत्र से कैसे बचाया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
महामंत्री विदुर ने अपनी दूरदर्शिता और कूटनीति से पांडवों के प्राणों की रक्षा निम्नलिखित प्रकार की:
सांकेतिक भाषा में चेतावनी: हस्तिनापुर से विदा होते समय विदुर ने युधिष्ठिर को म्लेच्छ (गुप्त कूट भाषा) में समझाया कि जो जंगल की आग से बचना जानता है, वही जीवित रहता है; आग केवल लकड़ी को ही नहीं जलाती, बल्कि बिल में रहने वाले चूहे सुरक्षित बच जाते हैं। युधिष्ठिर संकेत समझ गए।
सुरंग खोदने वाले कारीगर को भेजना: विदुर ने वारणावत में अपना एक अत्यंत विश्वासपात्र सुरुंग-विशेषज्ञ (खनक) भेजा। उसने लाक्षागृह के शयनकक्ष से जंगल की ओर जाने वाली एक गुप्त भूमिगत सुरंग बना दी।
जब भीम ने लाक्षागृह को आग लगाई, तो सभी पांडव माता कुंती सहित उसी गुप्त सुरंग से निकलकर सुरक्षित घने जंगलों में पहुँच गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
म्लेच्छ भाषा में गुप्त सांकेतिक चेतावनी1.5 अंक
सुरंग निर्माण व सुरक्षित पलायन की योजना1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
एकलव्य की गुरुभक्ति का संक्षेप में वर्णन कीजिए। द्रोणाचार्य ने उससे क्या गुरुदक्षिणा माँगी थी?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भील बालक एकलव्य धनुर्विद्या सीखने द्रोण के पास आया, परंतु सूत/निषाद होने के कारण द्रोण ने उसे शिष्य बनाने से मना कर दिया। एकलव्य ने निराश होने के बजाय वन में द्रोणाचार्य की मिट्टी की प्रतिमा बनाई और उसे ही साक्षात् गुरु मानकर प्रतिदिन अभ्यास किया। उसकी साधना इतनी प्रखर थी कि वह अर्जुन से भी तीव्र बाण चलाने लगा। जब द्रोण को यह पता चला, तो अर्जुन को दिए वचन (कि संसार में तुमसे बड़ा कोई धनुर्धर न होगा) की रक्षा हेतु द्रोण ने एकलव्य से उसके दाहिने हाथ का अँगूठा गुरुदक्षिणा में माँग लिया। एकलव्य ने बिना किसी संकोच या क्रोध के हँसते-हँसते अपना अँगूठा काटकर गुरु के चरणों में समर्पित कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिट्टी की प्रतिमा से अभ्यास व एकाग्रता1 अंक
दाहिने हाथ का अँगूठा दान देने का सर्वोच्च त्याग1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
लाक्षागृह के षड्यंत्र से पांडव और कुंती किस गुप्त योजना के द्वारा जीवित बाहर निकलने में सफल हुए?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
विदुर जी ने पहले ही गुप्त भाषा (म्लेच्छ भाषा) में युधिष्ठिर को लाक्षागृह के षड्यंत्र और आग लगाने की योजना से सावधान कर दिया था। विदुर द्वारा भेजे गए एक अत्यंत कुशल खनन-विशेषज्ञ (सुरंग खोदने वाले) ने लाक्षागृह के फर्श से लेकर पास के घने जंगल तक एक गुप्त सुरंग बना दी थी।
जब पुरोचन लाक्षागृह में आग लगाने ही वाला था, भीमसेन ने पहले ही भवन में आग लगा दी और वे सभी माता कुंती सहित गुप्त सुरंग के रास्ते सकुशल बाहर निकलकर घने वन में चले गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विदुर की चेतावनी और गुप्त सुरंग द्वारा पलायन3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Critical Thinking Question
द्रोणाचार्य द्वारा एकलव्य से अँगूठा माँगना न्यायसंगत था अथवा पक्षपातपूर्ण? आधुनिक शिक्षा और समानता के सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में अपने विचार स्पष्ट कीजिए।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में आलोचनात्मक मूल्यांकन:
पक्षपातपूर्ण कृत्य: आधुनिक लोकतांत्रिक और समतावादी दृष्टिकोण से द्रोणाचार्य का यह कृत्य सर्वथा अनुचित, अनैतिक और जातिगत पक्षपात से प्रेरित था। उन्होंने एक प्रतिभाशाली बालक की तपस्या का सम्मान करने के बजाय राजपुत्र अर्जुन के वर्चस्व को बनाए रखने के लिए एकलव्य की प्रतिभा को जानबूझकर पंगु बना दिया।
आधुनिक शिक्षा का पाठ: आज का शिक्षा तंत्र 'समान अवसर' (Equality of Opportunity) पर आधारित है। एक आदर्श शिक्षक का कर्तव्य प्रत्येक जिज्ञासु विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव (जाति, वर्ग, धन) के आगे बढ़ाना है, न कि किसी एक के पक्ष में दूसरे की प्रतिभा का दमन करना।
M4
अध्याय 4: द्रौपदी स्वयंवर और इंद्रप्रस्थ की स्थापना
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 4) — एकचक्रा नगरी, बकासुर वध, मत्स्यभेद, द्रौपदी का विवाह और खांडवप्रस्थ का कायाकल्प
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
लाक्षागृह से बचकर पांडव माता कुंती सहित एकचक्रा नगरी में एक निर्धन ब्राह्मण के घर छद्म वेश में रहने लगे। वहाँ जब उन्हें पता चला कि एक क्रूर राक्षस बकासुर प्रतिदिन गाँव से एक गाड़ी अन्न, दो भैंसे और एक मनुष्य को मारकर खा जाता है और आज उस ब्राह्मण के घर की बारी है, तो महाबली भीमसेन ने स्वयं जाकर बकासुर को मल्ल-युद्ध में मार गिराया और नगरी को भयमुक्त किया। इसके पश्चात पांडव पांचाल देश पहुँचे जहाँ राजा द्रुपद ने अपनी रूपवती कन्या द्रौपदी के विवाह हेतु भव्य स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर की शर्त अत्यंत कठिन थी—आकाश में घूमते हुए यंत्र पर टँगी मछली की आँख को नीचे तेल के कड़ाह में उसका प्रतिबिंब देखकर बाण से भेदना था। कर्ण, दुर्योधन, जरासंध, शल्य आदि सभी प्रतापी राजा इस परीक्षा में विफल हो गए। तब ब्राह्मणों की पंक्ति में बैठे अर्जुन ने उठकर धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और एक ही बाण में मत्स्यभेद कर दिया। द्रौपदी ने अर्जुन के गले में वरमाला डाल दी। जब पाँचों भाई द्रौपदी को लेकर कुटिया पहुँचे और माता कुंती से कहा—"माँ, देखो हम क्या लाए हैं!", तो कुंती ने बिना देखे कहा—"जो भी लाए हो, पाँचों भाई आपस में बाँटकर उपभोग करो।" माता की आज्ञा को सत्य सिद्ध करने हेतु द्रौपदी पाँचों पांडवों की पत्नी बनी। जब हस्तिनापुर में पांडवों के जीवित होने की सूचना मिली, तो भीष्म और विदुर की सलाह पर धृतराष्ट्र ने उन्हें आधा राज्य दिया। पांडवों को बंजर और वीरान खांडवप्रस्थ मिला, जिसे पांडवों ने श्रीकृष्ण और मय दानव की सहायता से स्वर्ग जैसा सुंदर इंद्रप्रस्थ बना दिया। युधिष्ठिर ने वहाँ राजसूय यज्ञ संपन्न किया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: कठिनाइयों में भी धैर्य न खोना, शक्ति का सदुपयोग कर दीन-दुखियों की रक्षा करना और बंजर भूमि को भी कर्म से स्वर्ग में बदल देना।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
द्रौपदी स्वयंवर की क्या शर्त थी और अर्जुन ने उस शर्त को किस प्रकार पूरा किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) स्वयंवर की कठिन शर्त:
राजा द्रुपद ने स्वयंवर मंडप के ऊपर आकाश में एक चक्कर काटता हुआ भारी चक्र (यंत्र) लगवाया था, जिस पर एक सोने की मछली टँगी थी। शर्त यह थी कि भारी लोहे के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर, नीचे रखे हुए तेल के कड़ाह में मछली की परछाईं (प्रतिबिंब) देखते हुए, ऊपर घूमती मछली की केवल आँख को बाण से भेदना था।
(ख) अर्जुन द्वारा लक्ष्यवेध:
जब संसार के सभी बड़े-बड़े राजा, यहाँ तक कि कर्ण और दुर्योधन भी विफल हो गए, तब ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन ने शांत चित्त से धनुष उठाया। उन्होंने भगवान शिव को नमन किया, सहजता से प्रत्यंचा चढ़ाई और नीचे तेल में परछाईं देखते हुए एक साथ पाँच बाण छोड़े, जिनमें से सटीक बाण ने घूमती मछली की आँख को भेद दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मत्स्यभेद व तेल के प्रतिबिंब की शर्त का विवरण1.5 अंक
अर्जुन द्वारा प्रत्यंचा चढ़ाना व लक्ष्यवेध की सफलता1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
पांडवों ने बंजर खांडवप्रस्थ को वैभवशाली "इंद्रप्रस्थ" में कैसे परिवर्तित किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
धृतराष्ट्र ने पांडवों को आधा राज्य देने के नाम पर राजधानी से दूर एक बीहड़, पथरीला और बंजर वन क्षेत्र खांडवप्रस्थ सौंपा था, परंतु पांडवों ने अपने पुरुषार्थ से उसे बदल दिया:
भगवान श्रीकृष्ण का मार्गदर्शन: श्रीकृष्ण और अर्जुन ने खांडव वन की सफाई की और नए नगर की रूपरेखा बनाई।
मय दानव की स्थापत्य कला: अग्निदेव से रक्षा पाने के कृतज्ञता स्वरूप महान शिल्पी मय दानव ने पांडवों के लिए एक अद्वितीय, अलौकिक और भव्य सभा-भवन (मय सभा) का निर्माण किया जहाँ जल में थल और थल में जल का अद्भुत भ्रम होता था।
अथक परिश्रम: पांडवों ने वहाँ सुंदर सड़कें, विशाल प्राचीर, उद्यान, जलाशय और व्यापारिक बाजार स्थापित किए, जिससे वह नगर इंद्र की अमरावती के समान 'इंद्रप्रस्थ' कहलाया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बंजर खांडवप्रस्थ मिलने की पृष्ठभूमि1 अंक
मय दानव द्वारा भव्य सभा-भवन का निर्माण1 अंक
पुरुषार्थ द्वारा इंद्रप्रस्थ की समृद्धि की स्थापना1 अंक
प्र. 3 (कथा से)
एकचक्रा नगरी में भीम ने बकासुर का वध क्यों और कैसे किया?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जिस निर्धन ब्राह्मण के घर पांडव ठहरे थे, उस पर बकासुर का भोजन बनने की विपत्ति आई थी। ब्राह्मण के उपकारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए माता कुंती के आदेश पर भीमसेन गाड़ी भरकर भोजन लेकर वन पहुँचे। वहाँ भीम सारा भोजन खुद ही खाने लगे। क्रोधित होकर बकासुर ने भीम पर हमला कर दिया। भीमसेन ने उसके साथ भीषण मल्ल-युद्ध किया और उसकी पीठ को अपने घुटने से तोड़कर उसका वध कर दिया, जिससे नगरवासी भयमुक्त हो गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ब्राह्मण के उपकार का बदला व कुंती का आदेश1 अंक
मल्ल-युद्ध में बकासुर वध का प्रसंग1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
द्रौपदी स्वयंवर के पश्चात हस्तिनापुर के विभाजन में पांडवों को कौन-सा क्षेत्र मिला और उन्होंने इंद्रप्रस्थ का निर्माण कैसे किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भीष्म पितामह और धृतराष्ट्र ने कलह शांत करने के लिए कुरु राज्य का विभाजन कर दिया। पांडवों को 'खांडवप्रस्थ' का ऊसर, बंजर और जंगली क्षेत्र दिया गया।
पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण और विश्वकर्मा की सहायता से खांडव वन के स्थान पर एक अत्यंत भव्य, वैभवशाली, अजेय और अलौकिक राजधानी 'इंद्रप्रस्थ' की स्थापना की, जिसकी शिल्पकला और मय सभा के सौंदर्य की ख्याति तीनों लोकों में फैल गई।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
खांडवप्रस्थ की प्राप्ति और भव्य इंद्रप्रस्थ का निर्माण3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Environmental & Hard Work HOTS
कौरवों ने पांडवों को नष्ट करने के उद्देश्य से बंजर और अनुपजाऊ "खांडवप्रस्थ" दिया था, किंतु पांडवों ने उसे वैभवशाली "इंद्रप्रस्थ" में बदल दिया। यह प्रसंग जीवन में विपरीत परिस्थितियों और सीमित संसाधनों से जूझने की क्या प्रेरणा देता है?
जीवन-मूल्य एवं प्रेरणा:
परिस्थितियों का रोना न रोना: पांडवों ने अन्यायपूर्ण बँटवारे पर विवाद या विलाप करने के बजाय जो मिला, उसी को अपने बाहुबल, पसीने और पुरुषार्थ से संवारने का संकल्प लिया।
सकारात्मक दृष्टिकोण: यदि मनुष्य के भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति, परस्पर एकता और सही मार्गदर्शन (जैसे पांडवों के पास श्रीकृष्ण थे) हो, तो वह बंजर और विषम परिस्थितियों को भी उर्वर और समृद्ध बना सकता है। असफलता परिस्थितियों में नहीं, हमारे संकल्प की दुर्बलता में होती है।
M5
अध्याय 5: द्यूतक्रीड़ा, द्रौपदी चीरहरण और बारह वर्ष का वनवास
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 5) — शकुनि के कपटी पासे, युधिष्ठिर की द्यूत-दुर्बलता, द्रौपदी का अपमान और प्रतिज्ञाओं का शंखनाद
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
इंद्रप्रस्थ के राजसूय यज्ञ के अलौकिक वैभव और मय सभा में हुए उपहास (जहाँ फर्श को जल समझकर दुर्योधन ने वस्त्र समेटे थे और द्रौपदी हँस पड़ी थी) से दुर्योधन ईर्ष्या की आग में जल उठा। उसके कुटिल मामा शकुनि ने युद्ध के स्थान पर छल से पांडवों का सर्वस्व छीनने की योजना बनाई। धृतराष्ट्र को विवश कर युधिष्ठिर को हस्तिनापुर में चौसर (द्यूत) खेलने का निमंत्रण भेजा गया। क्षत्रिय धर्म के नाम पर युधिष्ठिर ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया। शकुनि के पास जादुई पासे थे जो उसकी इच्छा अनुसार गिरते थे। खेल में युधिष्ठिर ने एक-एक करके अपने सारे धन, रत्न, रथ, हाथी-घोड़े, राज्य, अपने चारों भाई (नकुल, सहदेव, अर्जुन, भीम) और अंत में स्वयं को भी दाँव पर लगाकर हार दिया। जब कुछ न बचा, तो शकुनि के उकसाने पर विवेकहीन होकर युधिष्ठिर ने अपनी कुलवधू द्रौपदी को भी दाँव पर लगा दिया और हार गए। दुर्योधन के आदेश पर दुःशासन द्रौपदी को उसके अंतःपुर से रजस्वला अवस्था में एकवस्त्रा होने के बावजूद उसके बाल पकड़कर घसीटता हुआ भरी सभा में ले आया। द्रौपदी ने भीष्म, द्रोण और धृतराष्ट्र से न्याय की गुहार लगाई, परंतु सभासदों के सिर लज्जा से झुक गए और वे मौन रहे। केवल विदुर और विकर्ण ने इसका कड़ा विरोध किया। कर्ण के उकसाने पर जब दुःशासन ने द्रौपदी को निर्वस्त्र करने के लिए उसकी साड़ी खींचना आरंभ किया, तो असहाय द्रौपदी ने दोनों हाथ उठाकर भगवान श्रीकृष्ण का करुण आह्वान किया। द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अदृश्य रूप से अक्षय चीर (साड़ी) प्रदान की। दुःशासन साड़ी खींचते-खींचते थककर गिर पड़ा, पर वस्त्र का अंत न हुआ। भीम ने भरी सभा में प्रतिज्ञा की कि वे युद्ध में दुःशासन की छाती फाड़कर लहू पिएँगे और दुर्योधन की जंघा तोड़ेंगे। अंत में पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास (जिसमें पकड़े जाने पर पुनः 12 वर्ष का वनवास) भोगने का दंड मिला।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: जुआ (द्यूत) समस्त विनाश की जड़ है। जिस राजसभा में स्त्री के सम्मान की रक्षा नहीं होती, उसका समूल विनाश निश्चित है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
चौसर के खेल में युधिष्ठिर के हारने का मुख्य कारण क्या था? उन्होंने अंतिम दाँव में क्या गलती की?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) हारने का मुख्य कारण:
युधिष्ठिर को चौसर खेलने का शौक था, परंतु वे खेल में निपुण नहीं थे। दूसरी ओर, दुर्योधन की ओर से उसके कुटिल मामा शकुनि पासे फेंक रहे थे। शकुनि के पासे उसके वश में थे और वह मायावी छल-कपट में माहिर था। युधिष्ठिर अपनी सादगी और जुए की लत के कारण शकुनि की कपट-नीति को समझ न सके।
(ख) अंतिम दाँव की घोर भूल:
जब युधिष्ठिर अपना राज्य, धन, अपने चारों भाइयों और स्वयं को भी हार चुके थे, तो शकुनि के उकसाने पर उन्होंने अपनी अर्धांगिनी और पाँचों भाइयों की महारानी द्रौपदी को दाँव पर लगा दिया। यह उनकी सबसे घोर अनैतिक और विवेकहीन भूल थी, जिसने पूरे कुरुवंश के विनाश की नींव रख दी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शकुनि के कपटी पासे व युधिष्ठिर की अनुभवहीनता1.5 अंक
स्वयं दास बनने के बाद द्रौपदी को दाँव पर लगाने की भूल1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
भरी सभा में द्रौपदी की लाज किसने और किस प्रकार बचाई? उस समय भीमसेन ने क्या भीषण प्रतिज्ञा की?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) द्रौपदी की लाज की रक्षा:
जब भीष्म, द्रोण और धृतराष्ट्र जैसे महारथी मौन साधे रहे और दुःशासन भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण करने लगा, तो द्रौपदी ने अपने भौतिक बल और पतियों की आशा छोड़कर दोनों हाथ उठाकर दीनबंधु भगवान श्रीकृष्ण की शरण ली। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी ईश्वरीय कृपा से द्रौपदी के वस्त्र को अनंत (अक्षय) बना दिया। दुःशासन साड़ियों का ढेर लगाते-लगाते थककर पसीने से लथपथ होकर गिर पड़ा, किंतु द्रौपदी का वस्त्र समाप्त न हुआ।
(ख) भीमसेन की भीषण प्रतिज्ञा:
द्रौपदी के इस घोर अपमान से क्रोध में भरकर महाबली भीम ने गरजते हुए प्रतिज्ञा की—
वे युद्धभूमि में दुःशासन की छाती फाड़कर उसका गर्म रक्त पिएँगे।
वे अपनी गदा से दुर्योधन की उस जंघा (जांघ) को तोड़ डालेंगे जिसे उसने द्रौपदी को अपमानित करने के लिए दिखाया था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
श्रीकृष्ण की शरणागति व अक्षय चीर का चमत्कार1.5 अंक
भीम द्वारा दुःशासन का लहू पीने व दुर्योधन की जंघा तोड़ने की प्रतिज्ञा1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
द्यूतसभा में द्रौपदी ने सभासदों से कौन-सा गंभीर कानूनी और नैतिक प्रश्न पूछा था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
द्रौपदी ने सभासदों से यह तीखा धर्म-संकटपूर्ण प्रश्न पूछा था—"धर्मराज युधिष्ठिर ने पहले स्वयं को हारा था या मुझे? यदि वे स्वयं को हारकर दुर्योधन के दास बन चुके थे, तो जो व्यक्ति स्वयं पर अपना अधिकार खो चुका हो, उसे किसी दूसरे (अपनी पत्नी) को दाँव पर लगाने का नैतिक या वैधानिक अधिकार कैसे हो सकता है?" इस प्रश्न का उत्तर भीष्म पितामह भी नहीं दे सके।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
स्वयं को पहले हारने अथवा द्रौपदी को हारने का प्रश्न1 अंक
दास बन चुके व्यक्ति के अधिकारहीन होने का तर्क1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
द्यूतक्रीड़ा (चौसर) में शकुनि ने किस छल का सहारा लिया और पांडवों को क्या भयंकर परिणाम भुगतने पड़े?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
शकुनि के पास जादुई पासे थे जो उसकी इच्छानुसार अंक फेंकते थे। युधिष्ठिर क्षत्रिय धर्म के अनुसार खेल का निमंत्रण अस्वीकार नहीं कर सके और शकुनि के कपट-जाल में फंसते चले गए।
युधिष्ठिर ने अपना राज्य, धन, अपने चारों भाइयों, स्वयं को और अंत में महारानी द्रौपदी को भी दांव पर लगाकर हार दिया। इसके उपरांत भरी सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ और अंततः पांडवों को बारह वर्ष का कठोर वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास भुगतना पड़ा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शकुनि का कपट पासा और 12 वर्ष वनवास + 1 वर्ष अज्ञातवास का दंड3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
महाभारत की द्यूतसभा में पूज्य पितामह भीष्म, गुरु द्रोण और कुलवृद्ध धृतराष्ट्र का एक स्त्री के खुले अपमान पर मौन रहना क्या संदेश देता है? क्या सत्ता या व्यवस्था के नियमों की दुहाई देकर अन्याय के सामने चुप रहना क्षम्य हो सकता है?
नैतिक एवं सामाजिक विश्लेषण:
मौन रहना अपराध का समर्थन: अन्याय करने वाले से अधिक दोषी वह होता है जो अन्याय को रोकने में समर्थ होते हुए भी चुप रहता है। भीष्म और द्रोण का यह तथाकथित 'मौन' कुरुवंश के विनाश और महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा आध्यात्मिक कारण बना।
मानवता नियमों से ऊपर: कोई भी कानून, संविधान या राजाज्ञा उस समय व्यर्थ हो जाती है जब वह मानवीय गरिमा और स्त्री-सम्मान की रक्षा करने में असमर्थ हो। जब भी समाज में नैतिक संकट आए, व्यवस्था के नियमों की आड़ लेने के बजाय अंतरात्मा की आवाज सुनकर सत्य और न्याय का पक्ष लेना चाहिए।
M6
अध्याय 6: मत्स्य देश में अज्ञातवास और विराट का दरबार
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 6) — पांडवों के छद्म रूप, कीचक वध, कौरवों का गोग्रहण और उत्तरा-अभिमन्यु विवाह
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
बारह वर्ष का कठोर वनवास पूरा करने के बाद पांडवों के सामने तेरहवें वर्ष का अज्ञातवास सबसे बड़ी चुनौती थी। शर्त यह थी कि यदि इस एक वर्ष में किसी ने भी उन्हें पहचान लिया, तो उन्हें पुनः 12 वर्ष का वनवास भोगना पड़ेगा। पांडवों ने मत्स्य देश के राजा विराट के यहाँ छद्म वेश में शरण ली। पाँचों भाइयों और द्रौपदी ने अपने नाम और कार्य बदल लिए:
1. युधिष्ठिर 'कंक' नाम से राजा के चौसर खेलने वाले दरबारी मित्र बने।
2. भीमसेन 'वल्लभ' नाम से राजा के प्रधान रसोइए और पहलवान बने।
3. अर्जुन 'बृहन्नला' नाम से स्त्री वेश धारण कर राजकुमारी उत्तरा को नृत्य-संगीत सिखाने वाले शिक्षक बने।
4. नकुल 'ग्रंथिक' नाम से राजा के घोड़ों के रक्षक (अश्वपाल) बने।
5. सहदेव 'तंतिपाल' नाम से राजा की गायों के संरक्षक बने।
6. द्रौपदी 'सैरंध्री' नाम से महारानी सुदेष्णा की दासी (केश-सज्जाकार) बनी।
विराट के सेनापति और साले दुष्ट कीचक ने जब सैरंध्री पर बुरी दृष्टि डाली और उसे अपमानित किया, तो भीमसेन ने रात के अंधेरे में नाट्यशाला में कीचक को मल्ल-युद्ध में मार डाला। कीचक की मृत्यु से दुर्योधन को संदेह हुआ कि यह भीम का ही काम हो सकता है। कौरवों ने मत्स्य देश की गायों को लूटने के लिए त्रिगर्तराज सुशर्मा के साथ मिलकर आक्रमण (गोग्रहण) कर दिया। जब विराट नगर के सभी वीर दूसरी ओर फँस गए, तो राजकुमारी उत्तरा के भाई उत्तर के सारथी बनकर बृहन्नला (अर्जुन) शमी वृक्ष से अपने अस्त्र-शस्त्र लेकर रणभूमि में उतरे। अर्जुन ने अकेले ही भीष्म, द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य और दुर्योधन को सम्मोहन अस्त्र से मूर्छित कर परास्त किया और सारी गायें छुड़ा लीं। ठीक इसी दिन अज्ञातवास की अवधि भी पूरी हो गई। राजा विराट ने पांडवों का वास्तविक परिचय जानकर अपनी पुत्री उत्तरा का विवाह अर्जुन के वीर पुत्र अभिमन्यु से कर दिया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: विपत्ति में रूप और भूमिका बदलना पड़े तो भी कर्तव्यनिष्ठा न छोड़ना, नारी अस्मिता की रक्षा और धर्म की विजय।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
मत्स्य देश में अज्ञातवास के दौरान पाँचों पांडवों और द्रौपदी ने कौन-कौन से छद्म नाम और कार्य अपनाए थे? तालिका बनाकर लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अज्ञातवास के समय पांडवों और द्रौपदी द्वारा धारण किए गए छद्म नाम और उनके कार्य निम्नलिखित हैं:
पात्र
छद्म नाम
राजा विराट के यहाँ कार्य
1. युधिष्ठिर
कंक
राजा के मित्र व चौसर खेलने वाले ब्राह्मण
2. भीमसेन
वल्लभ
शाही रसोइया और पहलवान
3. अर्जुन
बृहन्नला
राजकुमारी उत्तरा को नृत्य-संगीत सिखाने वाला
4. नकुल
ग्रंथिक
अश्वशाला का अध्यक्ष / घोड़ों का रक्षक
5. सहदेव
तंतिपाल
गोशाला का अध्यक्ष / गायों का रक्षक
6. द्रौपदी
सैरंध्री
महारानी सुदेष्णा की केश-सज्जाकार दासी
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन के नाम व कार्य1.5 अंक
नकुल, सहदेव, द्रौपदी के नाम व कार्य1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
भीम ने कीचक का वध क्यों और किस प्रकार किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) वध का कारण:
राजा विराट का साला और सेनापति कीचक अत्यंत घमंडी और कामी था। उसने महारानी की दासी बनी द्रौपदी (सैरंध्री) पर बुरी नजर डाली। जब द्रौपदी ने इंकार किया, तो उसने भरी राजसभा में राजा विराट के सामने द्रौपदी को लात मारी। द्रौपदी के इस घोर अपमान का बदला लेने के लिए भीम ने उसका वध करने का संकल्प लिया।
(ख) वध का ढंग:
द्रौपदी की योजनानुसार उसने कीचक को रात के समय एकांत नाट्यशाला (नाचघर) में मिलने का झूठा संकेत दिया। वहाँ द्रौपदी के स्थान पर भीमसेन पहले से ही कंबल ओढ़कर लेटे थे। जैसे ही कीचक पहुँचा, भीम ने उसे दबोच लिया। दोनों के बीच घमासान मल्ल-युद्ध हुआ और भीम ने उसके अंगों को मरोड़कर उसे मांस का लोथड़ा बना दिया, जिससे किसी को यह न लगे कि कोई मनुष्य उसे मार सकता है (सबने समझा कि सैरंध्री के गंधर्व पतियों ने उसे मारा है)।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कीचक की कुदृष्टि व द्रौपदी के अपमान का प्रसंग1.5 अंक
नाट्यशाला में मल्ल-युद्ध द्वारा भीम का गुप्त वध1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
गोग्रहण के समय अर्जुन ने कौरव सेना को किस प्रकार पराजित किया?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब कौरव सेना विराट की गायों को घेरकर ले जा रही थी, तब अर्जुन ने बृहन्नला के रूप में राजकुमार उत्तर का सारथी बनकर युद्धभूमि में प्रवेश किया। शमी के पेड़ पर छिपाए अपने गांडीव धनुष को लेकर अर्जुन ने भीषण बाणवर्षा की। अंत में उन्होंने सम्मोहन अस्त्र का प्रयोग किया, जिससे भीष्म, द्रोण, कर्ण और दुर्योधन सहित समस्त कौरव सेना मूर्छित हो गई। अर्जुन ने उत्तर से सभी महारथियों के वस्त्र उतरवा लिए और गायों को मुक्त कराकर विराट नगर की रक्षा की।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
गांडीव धारण करना व सम्मोहन अस्त्र का प्रयोग1 अंक
कौरव सेना को पराजित कर गायों को मुक्त कराना1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
विराट नगर में अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने क्या नाम और रूप धारण किया था और उन्होंने कौरवों को कैसे पराजित किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने 'बृहन्नला' नाम धारण किया और स्त्री वेश में नर्तकी बनकर राजा विराट की राजकुमारी उत्तरा को नृत्य और संगीत सिखाने लगे।
जब अज्ञातवास की अवधि समाप्त होने के समय दुर्योधन और भीष्म आदि कौरवों ने विराट की गायों का हरण करने के लिए आक्रमण किया, तो अर्जुन ने अकेले गांडीव धनुष हाथ में लेकर सम्मोहन अस्त्र चलाकर पूरी कौरव सेना को मूर्छित कर दिया और गायों को मुक्त कराया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बृहन्नला रूप और उत्तर-कुरु युद्ध में विजय3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Strategy & Character HOTS
महाभारत में अज्ञातवास का प्रसंग यह सिद्ध करता है कि बड़े लक्ष्यों की सिद्धि के लिए कभी-कभी अपनी पहचान, अहंकार और राजसी सुखों को त्यागकर तुच्छ से तुच्छ कार्य (जैसे रसोइया या दासी बनना) भी धैर्यपूर्वक करना पड़ता है। आज के विद्यार्थियों के लिए इसका क्या नैतिक सबक है?
जीवन-मूल्य एवं व्यावहारिक सबक:
अहंकार का विसर्जन और कार्य की गरिमा: चक्रवर्ती सम्राट युधिष्ठिर का दरबारी बनना और परम धनुर्धर अर्जुन का नर्तक बनना यह सिखाता है कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। समय आने पर अपनी उच्च प्रतिष्ठा का अहंकार छोड़कर अनुकूलन (Adaptability) करना ही बुद्धिमानी है।
धैर्य और गोपनीयता का अनुशासन: पांडवों ने एक वर्ष तक अपमान के घूँट पिए, परंतु अपने वचन और अनुशासन से नहीं डिगे। विद्यार्थियों को भी अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए तात्कालिक कठिनाइयों, सुख-सुविधाओं के अभाव और आलोचनाओं को धैर्य से सहना चाहिए।
M7
अध्याय 7: शांति दूत श्री कृष्ण और युद्ध की घोषणा
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 7) — संजय का दूतकार्य, श्रीकृष्ण की शांति वार्ता, दुर्योधन का हठ और गीता का अमर उपदेश
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
अज्ञातवास की पूर्णता के बाद पांडवों ने उपप्लव्य नगर में अपनी छावनी बनाई और अपने हक का राज्य वापस माँगा। धृतराष्ट्र ने अपने सारथी संजय को शांति का संदेश लेकर भेजा, परंतु वे पांडवों को उनका राज्य लौटाने के लिए तैयार नहीं थे। तब सर्वसमर्थ होते हुए भी भीषण रक्तपात और कुल के विनाश को टालने हेतु भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पांडवों के शांति दूत बनकर हस्तिनापुर की राजसभा में पधारे। उन्होंने दुर्योधन और धृतराष्ट्र से विनम्र निवेदन किया कि यदि पांडवों को उनका पूरा राज्य नहीं दे सकते, तो उन्हें केवल पाँच गाँव (इंद्रप्रस्थ, तिलप्रस्थ, सोनीपत, पानीपत और बागपत) दे दिए जाएँ; पाँचों भाई उसी में संतुष्ट होकर युद्ध नहीं करेंगे। परंतु सत्ता के अहंकार और ईर्ष्या में अंधे दुर्योधन ने भीष्म, द्रोण और विदुर की सलाह ठुकराते हुए कुटिलता से कहा—"पांडवों को सुई की नोक के बराबर भूमि भी बिना युद्ध के नहीं मिलेगी!" इतना ही नहीं, अहंकारी दुर्योधन ने शांति दूत श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का दुस्साहस किया। तब श्रीकृष्ण ने हस्तिनापुर की भरी सभा में अपना विराट् रूप दिखाकर अधर्मियों को स्तब्ध कर दिया। शांति के सारे प्रयास विफल होने पर कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों पक्षों की विशाल सेनाएँ (कौरवों की 11 अक्षौहिणी और पांडवों की 7 अक्षौहिणी) आ डटीं। युद्ध के पहले दिन अपने ही बंधु-बांधवों, भीष्म पितामह और गुरु द्रोण को सामने देखकर अर्जुन मोह और विषाद से ग्रस्त हो गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें निष्काम कर्मयोग का अमर संदेश—श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: शांति की हर संभव कोशिश करना धर्म है, परंतु जब अधर्मी शांति का मार्ग बंद कर दे, तो अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाना परम कर्तव्य बन जाता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
भगवान श्रीकृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर क्यों गए थे? उन्होंने दुर्योधन से क्या न्यूनतम माँग रखी थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) हस्तिनापुर जाने का उद्देश्य:
भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि युद्ध होने पर करोड़ों निर्दोष सैनिकों, भारत के वीर क्षत्रियों और संपूर्ण कुरुवंश का भयंकर नरसंहार होगा। वे विश्व-शांति के पक्षधर थे और इतिहास को यह प्रमाण देना चाहते थे कि पांडवों ने युद्ध टालने का अंतिम क्षण तक हर संभव प्रयास किया था ताकि भविष्य में कोई पांडवों पर युद्ध थोपने का आरोप न लगा सके।
(ख) न्यूनतम माँग:
श्रीकृष्ण ने पांडवों के आधे राज्य के स्थान पर अत्यंत उदारता दिखाते हुए दुर्योधन से केवल पाँच गाँव देने की माँग की थी ताकि पाँचों भाई सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला सकें और रक्तपात टल जाए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नरसंहार रोकने व शांति का अंतिम अवसर देने का उद्देश्य1.5 अंक
केवल पाँच गाँव माँगने की न्यूनतम शर्त1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
श्रीकृष्ण की शांति वार्ता पर दुर्योधन ने क्या हठपूर्ण उत्तर दिया और उसने क्या दुःसाहस करने का प्रयास किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) दुर्योधन का हठपूर्ण उत्तर:
दुर्योधन ने भीष्म, द्रोण, विदुर और अपनी माता गांधारी के लाख समझाने पर भी श्रीकृष्ण की शांति वार्ता को ठुकरा दिया और अहंकार से भरकर कहा—"सुई की नोक जितनी भूमि भी मैं बिना युद्ध के पांडवों को नहीं दूँगा।"
(ख) दुर्योधन का दुःसाहस:
उसने मर्यादा और कूटनीति के समस्त नियमों को ताक पर रखकर शांति दूत के रूप में पधारे भगवान श्रीकृष्ण को बंदी बनाने (जंजीरों में जकड़ने) का मूर्खतापूर्ण षड्यंत्र रचा। इसके उत्तर में भगवान श्रीकृष्ण ने सभा में अपना दिव्य विराट् रूप प्रकट किया, जिससे सभी भयभीत और चकित रह गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सुई की नोक बराबर भूमि न देने का हठ1.5 अंक
शांति दूत को बंदी बनाने का दुःसाहस व विराट् रूप दर्शन1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध से पहले अर्जुन क्यों विषादग्रस्त (दुखी) हो गए थे? श्रीकृष्ण ने उन्हें क्या प्रेरणा दी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) अर्जुन का विषाद (मोह):
जब श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के मध्य अर्जुन का रथ खड़ा किया, तो अर्जुन ने सामने अपने सगे-संबंधियों, पूज्य पितामह भीष्म, धनुर्विद्या सिखाने वाले गुरु द्रोणाचार्य, भाइयों और मित्रों को देखा। यह देखकर उनके हाथ से गांडीव धनुष छूट गया और वे काँपते हुए बोले कि अपने ही बंधुओं को मारकर मिलने वाला यह रक्त-रंजित राज्य मुझे नहीं चाहिए।
(ख) श्रीकृष्ण की प्रेरणा (गीता का उपदेश):
श्रीकृष्ण ने अर्जुन के अज्ञान और कायरता को दूर करते हुए आत्मा की अमरता और 'निष्काम कर्मयोग' का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मा कभी मरती नहीं है; यह धर्मयुद्ध है और एक क्षत्रिय के नाते अन्याय और अधर्म के विरुद्ध लड़ना तुम्हारा परम धर्म है। फल की चिंता किए बिना केवल कर्तव्य पथ पर अडिग रहो।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
स्वजनों को सामने देखकर अर्जुन का मोहग्रस्त होना1.5 अंक
श्रीकृष्ण द्वारा निष्काम कर्मयोग व कर्तव्य पालन की सीख1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
श्री कृष्ण ने शांति दूत बनकर कौरव सभा में पांडवों की ओर से क्या न्यूनतम मांग रखी और दुर्योधन की क्या हठधर्मिता थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
महाविनाशकारी युद्ध को टालने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने शांति दूत बनकर कौरव राजसभा में प्रस्ताव रखा कि यदि संपूर्ण राज्य नहीं दिया जा सकता, तो पांडवों को केवल पांच गाँव दे दिए जाएं ताकि वे अपना जीवन यापन कर सकें और कुल का विनाश रुक जाए।
किंतु अहंकारी दुर्योधन ने यह कहकर प्रस्ताव ठुकरा दिया कि—"बिना युद्ध के मैं सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांडवों को नहीं दूंगा।" इस हठधर्मिता ने महाभारत युद्ध को अपरिहार्य बना दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पांच गाँव की मांग और दुर्योधन की हठधर्मिता3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Conflict Resolution HOTS
महाभारत में श्रीकृष्ण का शांति दूत बनकर जाना आधुनिक युग में राष्ट्रों के बीच होने वाले युद्धों (जैसे रूस-यूक्रेन या मध्य-पूर्व संकट) को टालने हेतु कूटनीतिक वार्ताओं (Diplomacy) की महत्ता को किस प्रकार रेखांकित करता है?
आधुनिक कूटनीति एवं संघर्ष समाधान का सबक:
युद्ध में किसी की विजय नहीं होती: युद्ध केवल विनाश, जान-माल की हानि और अनाथ बच्चों का रोना छोड़ जाता है। भले ही एक पक्ष जीत जाए, पर मानवता हमेशा हारती है।
संवाद का मार्ग खुला रखना: श्रीकृष्ण का प्रयास सिखाता है कि युद्ध से पहले कूटनीतिक समझौते (Compromise) के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। जब राष्ट्र अपने अहंकार को परे रखकर बातचीत करते हैं, तो बड़े से बड़े वैश्विक संकट का शांतिपूर्ण हल निकाला जा सकता है।
M8
अध्याय 8: कुरुक्षेत्र महासमर: भीष्म और द्रोण पर्व
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 8) — भीष्म का दस दिवसीय अजेय सेनापतित्व, शरशय्या, द्रोणाचार्य की व्यूहरचना और द्रोण वध
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कुरुक्षेत्र का अठारह दिवसीय महायुद्ध आरंभ हुआ। कौरव सेना के प्रथम प्रधान सेनापति पितामह भीष्म बने। भीष्म ने दस दिनों तक युद्ध का संचालन किया और पांडव सेना में भीषण हाहाकार मचा दिया। प्रतिदिन हजारों वीर मारे जा रहे थे। जब श्रीकृष्ण ने देखा कि भीष्म को पराजित किए बिना विजय असंभव है, तो वे स्वयं सुदर्शन चक्र लेकर भीष्म को मारने दौड़े, परंतु अर्जुन ने उन्हें अपनी प्रतिज्ञा की याद दिलाई। अंततः दसवें दिन पांडव स्वयं भीष्म के पास जाकर उनके वध का उपाय पूछते हैं। भीष्म ने रहस्य बताया कि वे किसी स्त्री या नपुंसक पर अस्त्र नहीं उठाएँगे। अर्जुन ने शिखंडी को अपने रथ के आगे खड़ा किया। शिखंडी को देखकर भीष्म ने धनुष रख दिया और शिखंडी की ओट से अर्जुन ने पितामह पर तीक्ष्ण बाणों की ऐसी वर्षा की कि उनका सारा शरीर बिंध गया। भीष्म रथ से नीचे गिरे, परंतु उनका शरीर भूमि को नहीं छू सका; वे अपने ही बाणों की शरशय्या पर लेट गए। सूर्य के उत्तरायण होने तक उन्होंने प्राण न त्यागने का निश्चय किया। इसके बाद आचार्य द्रोण सेनापति बने। द्रोण ने पाँच दिनों तक भयंकर पराक्रम दिखाया। पंद्रहवें दिन द्रोण के संहार को रोकने हेतु युधिष्ठिर ने एक रणनीति के तहत 'अश्वत्थामा हतोहतः' (अश्वत्थामा मारा गया—नरो वा कुंजरो वा अर्थात् मनुष्य या हाथी) की घोषणा की, क्योंकि भीम ने वास्तव में अश्वत्थामा नाम के हाथी को मारा था। अपने इकलौते पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर द्रोणाचार्य ने शस्त्र त्यागकर समाधि ले ली और द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न ने तलवार से उनका मस्तक काटकर द्रोण का अंत कर दिया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: अधर्म के पक्ष में खड़े होने पर पितामह और पूज्य गुरु भी दंड और पतन के भागी बनते हैं। सत्य की रक्षा हेतु कभी-कभी रणनीतिक उपाय आवश्यक होते हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
अर्जुन ने भीष्म पितामह को किस प्रकार पराजित किया और भीष्म शरशय्या पर क्यों सोए?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) भीष्म के पतन की रणनीति:
पितामह भीष्म को इच्छा-मृत्यु का वरदान था और वे अजेय थे। उन्होंने स्वयं बताया था कि वे किसी ऐसे व्यक्ति पर बाण नहीं चलाएँगे जो कभी स्त्री रहा हो। इसलिए दसवें दिन अर्जुन ने शिखंडी (जो पूर्व जन्म में अम्बा थी) को अपने रथ के आगे खड़ा कर दिया। शिखंडी को देखकर भीष्म ने अपने अस्त्र नीचे रख दिए। शिखंडी के पीछे से अर्जुन ने पितामह पर अनगिनत तीक्ष्ण बाण बरसाए।
(ख) शरशय्या पर शयन:
भीष्म के संपूर्ण शरीर में इतने बाण बिंध चुके थे कि जब वे रथ से गिरे, तो उनका शरीर जमीन पर नहीं गिरा, बल्कि बाणों की नोकों पर ही टिक गया। यही बाणों की सेज 'शरशय्या' कहलाई। भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण (मकर संक्रांति) होने की प्रतीक्षा में इसी शरशय्या पर 58 दिनों तक अपने प्राण रोक कर रखे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शिखंडी को आगे रखने की रणनीति व भीष्म का अस्त्र त्याग1.5 अंक
बाणों की नोक पर टिकने व उत्तरायण की प्रतीक्षा का वर्णन1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
आचार्य द्रोण का वध किस प्रकार हुआ? इसमें युधिष्ठिर की क्या भूमिका थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) युधिष्ठिर की भूमिका:
आचार्य द्रोण जब तक हाथ में धनुष लिए थे, तब तक उन्हें त्रिलोक में कोई परास्त नहीं कर सकता था। श्रीकृष्ण ने योजना बनाई कि यदि द्रोण को उनके प्राणप्रिय पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु की सूचना मिले, तभी वे शस्त्र त्यागेंगे। भीम ने मालवराज के 'अश्वत्थामा' नामक हाथी को मार डाला। इसके बाद सत्यवादी युधिष्ठिर ने द्रोण के पूछने पर ऊँचे स्वर में कहा—"अश्वत्थामा मारा गया", और बहुत धीमे स्वर में जोड़ा—"नरो वा कुंजरो वा" (मनुष्य या हाथी)। शंख की ध्वनि से द्रोण केवल पहला वाक्य ही सुन सके।
(ख) द्रोण का अंत:
पुत्र-शोक में विह्वल होकर आचार्य द्रोण ने अपने अस्त्र-शस्त्र फेंक दिए और रथ पर ध्यानमग्न होकर बैठ गए। उसी समय पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने आगे बढ़कर तलवार से द्रोणाचार्य का सिर धड़ से अलग कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अश्वत्थामा नामक हाथी के वध की पृष्ठभूमि1 अंक
युधिष्ठिर द्वारा "अश्वत्थामा हतोहतः" की घोषणा1 अंक
द्रोण का शस्त्र त्याग व धृष्टद्युम्न द्वारा वध1 अंक
प्र. 3 (कथा से)
शरशय्या पर लेटे पितामह भीष्म के लिए अर्जुन ने पीने के पानी का क्या प्रबंध किया था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह को तीव्र प्यास लगी, तो दुर्योधन शीतल जल के घड़े ले आया, परंतु भीष्म ने उसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने अर्जुन की ओर देखा। अर्जुन ने तुरंत गांडीव पर पर्जन्य अस्त्र चढ़ाकर भीष्म के सिरहाने के पास धरती में बाण मारा। धरती के पाताल को भेदते हुए वहाँ से पवित्र गंगाजल की एक शीतल फुहार निकली, जो सीधे पितामह के मुख में गिरी और उनकी प्यास शांत हुई।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दुर्योधन के जल को अस्वीकार करना0.5 अंक
अर्जुन द्वारा धरती में बाण मारकर गंगाजल निकालने का चमत्कार1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
भीष्म पितामह शरशय्या पर गिरने के बाद भी अपने प्राणों को तब तक क्यों रोके रहे जब तक सूर्य उत्तरायण न हो गया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पिता शांतनु से भीष्म को 'इच्छा-मृत्यु' का वरदान प्राप्त था, जिसके अनुसार वे अपनी इच्छा के बिना नहीं मर सकते थे। जब अर्जुन के तीरों से वे आच्छादित होकर भूमि पर गिरे, तब सूर्य दक्षिणायन में था।
शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण में देह त्यागने वाले पुण्य आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने तक 58 दिनों तक तीरों की शय्या पर पड़े रहकर योग-साधना से अपने प्राणों को रोके रखा और युधिष्ठिर को राजधर्म का अमर उपदेश दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
इच्छा मृत्यु का वरदान और सूर्य के उत्तरायण होने का शास्त्रीय महत्व3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Ethics & Duty HOTS
महाभारत के सबसे सत्यवादी पात्र युधिष्ठिर को भी द्रोण वध हेतु "अश्वत्थामा हतोहतः: नरो वा कुंजरो वा" जैसी अर्ध-सत्य युक्ति का सहारा लेना पड़ा। क्या किसी बड़े धर्म या न्याय की रक्षा के लिए अर्ध-सत्य या कूटनीति का प्रयोग उचित है? अपने विचार लिखिए।
नैतिक एवं दार्शनिक मीमांसा:
सूक्ष्म धर्म का सिद्धांत: सामान्य परिस्थिति में सत्य बोलना धर्म है, परंतु जब सामने अधर्म और विनाशकारी शक्ति (कौरव पक्ष) खड़ी हो और सत्य की रक्षा असंभव दिखने लगे, तो बृहत्तर लोक-कल्याण (Greater Good) के लिए की गई कूटनीति अधर्म नहीं कहलाती।
परिणाम की कीमत: यदि द्रोण जीवित रहते, तो पांडवों की पराजय निश्चित थी और सत्ता अधर्मी दुर्योधन के हाथ में चली जाती। तथापि, इस अर्ध-सत्य के कारण सत्यवादी युधिष्ठिर के रथ के पहिए, जो सदा जमीन से चार अंगुल ऊपर चलते थे, जमीन को छूने लगे। इसका अर्थ है कि विवशता में बोले गए असत्य का भी आध्यात्मिक प्रभाव भुगतना ही पड़ता है।
M9
अध्याय 9: चक्रव्यूह: अभिमन्यु और जयद्रथ वध
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 9) — चक्रव्यूह भेदन, सोलह वर्षीय अभिमन्यु का अदम्य शौर्य, अधर्मपूर्वक वध और जयद्रथ संहार
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कुरुक्षेत्र युद्ध के तेरहवें दिन आचार्य द्रोण ने युधिष्ठिर को बंदी बनाने हेतु एक अभेद्य चक्रव्यूह का निर्माण किया। उस समय अर्जुन को त्रिगर्त सेना (संशप्तक) युद्धभूमि से बहुत दूर ले गई थी। पांडव सेना में चक्रव्यूह भेदने का रहस्य केवल अर्जुन, प्रद्युम्न और श्रीकृष्ण जानते थे। तभी अर्जुन और सुभद्रा के सोलह वर्षीय वीर पुत्र अभिमन्यु ने आगे आकर कहा कि उसने अपनी माँ के गर्भ में चक्रव्यूह में प्रवेश करना सुना था, यद्यपि बाहर निकलने की विद्या वह नहीं जानता। युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव ने उसके पीछे-पीछे चलने का वचन दिया। नन्हे अभिमन्यु ने बिजली की तेजी से बाण चलाकर चक्रव्यूह के पहले द्वार को तोड़ दिया। परंतु सिंधुराज जयद्रथ को शिवजी का वरदान था कि वह अर्जुन को छोड़कर चारों पांडवों को एक दिन के लिए रोक सकता है। जयद्रथ ने व्यूह का द्वार बंद कर पांडवों को बाहर ही रोक दिया। व्यूह के भीतर अकेला बालक अभिमन्यु फँस गया। उस 16 वर्षीय किशोर ने अकेले ही दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध कर दिया तथा कर्ण, शल्य, कृपाचार्य, दुःशासन और द्रोण की संयुक्त सेनाओं के छक्के छुड़ा दिए। जब कोई भी वीर उसे सीधे युद्ध में परास्त न कर सका, तो दुर्योधन के कहने पर युद्ध के समस्त नियमों को ताक पर रखकर सात महारथियों ने एक साथ उस निहत्थे बालक को घेर लिया। कर्ण ने पीछे से उसके धनुष की प्रत्यंचा काट दी, द्रोण ने रथ तोड़ दिया, कृपाचार्य ने घोड़े मार दिए। निहत्थे अभिमन्यु ने रथ का पहिया उठाकर युद्ध किया, परंतु अंत में दुःशासन के पुत्र ने गदा से सिर पर प्रहार कर उस अमर बाल-वीर की हत्या कर दी। शाम को जब अर्जुन लौटे, तो पुत्र के शव को देखकर हाहाकार मच गया। अर्जुन ने भीषण प्रतिज्ञा की कि "यदि कल सूर्यास्त से पहले मैंने जयद्रथ का वध नहीं किया, तो मैं स्वयं चिता में जलकर आत्मदाह कर लूँगा।" चौदहवें दिन कौरवों ने जयद्रथ को सेना के सबसे पिछले भाग में छिपा दिया। जब सूर्यास्त होने लगा, तो श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से सूर्य को बादलों की ओट में छिपाकर सूर्यास्त का भ्रम पैदा कर दिया। जयद्रथ हँसता हुआ बाहर आ गया। तभी श्रीकृष्ण के संकेत पर सूर्य पुनः चमक उठा और अर्जुन ने पाशुपतास्त्र से जयद्रथ का मस्तक काटकर सीधे उसके पिता की गोद में गिरा दिया। उसी रात घटोत्कच ने अपने मायावी युद्ध से हाहाकार मचाया, जिससे घबराकर कर्ण को अपना अमोघ 'एकाघ्नी बाण' (जो उसने अर्जुन के लिए रखा था) घटोत्कच पर चलाना पड़ा।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: अन्याय और अधर्म के सामने अकेला वीर भी अमर हो जाता है। छल से किया गया वध प्रतिशोध की महाज्वाला बन जाता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
चक्रव्यूह में अभिमन्यु के अकेले पड़ जाने का क्या कारण था और सात महारथियों ने मिलकर उसका वध किस प्रकार किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) अभिमन्यु के अकेले पड़ने का कारण:
अभिमन्यु चक्रव्यूह को तोड़कर भीतर घुस गया। उसके पीछे युधिष्ठिर और भीम आदि पांडव आ रहे थे, परंतु सिंधुराज जयद्रथ को भगवान शिव का वरदान प्राप्त था। उसने व्यूह के मुख पर अकेले ही पांडव सेना को रोक दिया, जिससे अभिमन्यु अंदर अकेला रह गया और पांडव उसकी सहायता के लिए नहीं पहुँच सके।
(ख) अधर्मपूर्वक वध:
अभिमन्यु ने अकेले ही कौरवों के अनगिनत वीरों को मार गिराया। जब उसे सामने से हराना असंभव हो गया, तो सात महारथियों (द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, शकुनि, दुर्योधन और दुःशासन-पुत्र) ने एक साथ मिलकर युद्ध के नियमों का उल्लंघन किया। कर्ण ने पीछे से उसका धनुष काट दिया, रथ के घोड़े और सारथी मार दिए गए। जब वह रथ का पहिया लेकर लड़ा, तो वह भी तोड़ दिया गया और अंत में दुःशासन के पुत्र ने निहत्थे अभिमन्यु के सिर पर गदा मारकर उसका वध कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
जयद्रथ द्वारा व्यूह का द्वार बंद करने का प्रसंग1.5 अंक
सात महारथियों द्वारा निहत्थे बालक पर संयुक्त अधर्मपूर्ण हमला1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
पुत्र अभिमन्यु के वध के बाद अर्जुन ने क्या भीषण प्रतिज्ञा की और उन्होंने जयद्रथ का वध कैसे किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) अर्जुन की प्रतिज्ञा:
अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि यदि वे अगले दिन सूर्यास्त से पूर्व अभिमन्यु के वध के मुख्य कारण जयद्रथ का वध नहीं कर पाए, तो वे स्वयं अग्नि समाधि लेकर अपने प्राण त्याग देंगे।
(ख) जयद्रथ का संहार:
कौरवों ने जयद्रथ को बचाने के लिए विशाल व्यूह बनाकर सबसे पीछे छिपा दिया। जब दिन ढलने लगा और जयद्रथ नहीं मिला, तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया से सूर्य को बादलों की ओट में छिपाकर अंधकार (सूर्यास्त का भ्रम) उत्पन्न कर दिया। जयद्रथ अर्जुन को चिता में जलते देखने के लिए हँसता हुआ बाहर आ गया। तभी श्रीकृष्ण ने सूर्य को प्रकट कर दिया और अर्जुन ने गांडीव से दिव्य अस्त्र चलाकर जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सूर्यास्त पूर्व जयद्रथ वध अन्यथा आत्मदाह की प्रतिज्ञा1.5 अंक
श्रीकृष्ण की माया द्वारा सूर्यास्त का भ्रम व सटीक लक्ष्यवेध1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
घटोत्कच के बलिदान से पांडवों को क्या रणनीतिक लाभ हुआ?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
भीम के असुर पुत्र घटोत्कच ने चौदहवें दिन की रात्रि में ऐसा भीषण मायावी युद्ध लड़ा कि पूरी कौरव सेना भागने लगी। दुर्योधन के प्राण संकट में देखकर कर्ण विवश हो गया और उसे देवराज इंद्र द्वारा दी गई अपनी एकमात्र अचूक 'एकाघ्नी शक्ति' (अमोघ बाण) घटोत्कच पर चलानी पड़ी। घटोत्कच वीरगति को प्राप्त हुआ, परंतु उसने अर्जुन के प्राण बचा लिए, क्योंकि कर्ण ने वह अस्त्र विशेष रूप से अर्जुन के वध के लिए सँभाल कर रखा था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रात्रि में घटोत्कच का भीषण पराक्रम1 अंक
कर्ण की अमोघ शक्ति का व्यर्थ होना व अर्जुन की रक्षा1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
चक्रव्यूह में अभिमन्यु के वध के समय कौरव महारथियों ने युद्ध के किन नियमों का खुला उल्लंघन किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
युद्ध के स्थापित नियमों के अनुसार रथवान केवल रथवान से और एक योद्धा केवल एक ही योद्धा से द्वंद्वयुद्ध कर सकता था, तथा निहत्थे या टूटे रथ वाले पर वार करना वर्जित था।
किंतु चक्रव्यूह में जब 16 वर्षीय वीर बालक अभिमन्यु का रथ टूट गया और उसकी तलवार कट गई, तो द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य, दुर्योधन, अश्वत्थामा और दुःशासन सहित सात महारथियों ने एक साथ मिलकर उस अकेले निहत्थे बालक को चारों तरफ से घेरकर अधर्मपूर्वक उसका वध कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
एक योद्धा पर सात महारथियों का अधर्म प्रहार3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Courage & Heroism HOTS
महाभारत के पूरे युद्ध में 16 वर्षीय अभिमन्यु का शौर्य सबसे अधिक प्रेरणादायी माना जाता है। विषम परिस्थितियों में जब पूरा संसार आपके विरुद्ध खड़ा हो, तब अभिमन्यु के चरित्र से आज के विद्यार्थियों को क्या शिक्षा मिलती है?
चरित्रगत प्रेरणा एवं जीवन-मूल्य:
आत्मविश्वास और निर्भीकता: अभिमन्यु जानता था कि वह व्यूह से बाहर निकलने की विद्या नहीं जानता, फिर भी उसने कर्तव्य और राष्ट्र-रक्षा के लिए कदम पीछे नहीं खींचे। चुनौतियाँ कितनी भी विकराल हों, साहसी व्यक्ति कभी पीठ नहीं दिखाता।
अंतिम सांस तक संघर्ष: जब धनुष कट गया, रथ टूट गया, तो उसने रथ का पहिया उठाकर सात महारथियों को ललकारा। यह जीवन का सबसे बड़ा संदेश है कि परिस्थितियाँ भले ही हमारे प्रतिकूल हों, हमें अंतिम क्षण तक स्वाभिमान और पराक्रम से लड़ना चाहिए।
M10
अध्याय 10: कर्ण वध, दुर्योधन का अंत और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक
🏹 बाल महाभारत कथा (अध्याय 10) — कर्ण-शल्य प्रसंग, कर्ण वध, द्वैपायन सरोवर में गदा युद्ध, अश्वत्थामा का प्रतिशोध और धर्म की स्थापना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
द्रोण के पतन के बाद कर्ण कौरव सेना का प्रधान सेनापति बना और मद्रराज शल्य उसके सारथी बने। सत्रहवें दिन कर्ण और अर्जुन के बीच संसार का सबसे भयंकर और निर्णायक द्वंद्व युद्ध हुआ। दोनों महारथियों ने एक-दूसरे के बाणों को काटते हुए अलौकिक पराक्रम दिखाया। तभी कर्ण के रथ का बायाँ पहिया धरती में धँस गया। यह वही क्षण था जब परशुराम जी का शाप (कि मृत्यु के समय तुम अपनी विद्या भूल जाओगे) और एक ब्राह्मण का शाप फलीभूत हुआ। कर्ण रथ से उतरकर पहिया निकालने लगा और उसने अर्जुन से धर्मयुद्ध के नियमों के तहत पहिया निकलने तक बाण न चलाने की याचना की। तब भगवान श्रीकृष्ण ने भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण और अभिमन्यु के निहत्थे वध की याद दिलाते हुए पूछा—"कर्ण! जब सात महारथियों ने अकेले बालक को मारा था, तब तुम्हारा धर्म कहाँ गया था?" श्रीकृष्ण के संकेत पर अर्जुन ने 'अंजलि' बाण से कर्ण का मस्तक काटकर उसका अंत कर दिया। अठारहवें दिन शल्य के मारे जाने के बाद समस्त कौरव सेना नष्ट हो गई। अकेला बचा दुर्योधन भय और ग्लानि से द्वैपायन सरोवर के जल में जाकर छिप गया। पांडवों के ललकारने पर वह बाहर निकला और भीमसेन तथा दुर्योधन के बीच भीषण गदा युद्ध हुआ। दुर्योधन का ऊपरी शरीर वज्र का था। जब भीम उसे हरा न सके, तो श्रीकृष्ण ने अपनी जांघ थपथपाकर भीम को उसकी पुरानी प्रतिज्ञा याद दिलाई। भीम ने गदा से दुर्योधन की दोनों जंघाएँ तोड़ दीं और वह तड़पता हुआ गिर पड़ा। रात में घायल दुर्योधन से सेनापति पद पाकर अश्वत्थामा ने कृपाचार्य और कृतवर्मा के साथ पांडव शिविर पर सोते हुए वीरों (धृष्टद्युम्न और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों) का कायरतापूर्ण वध कर दिया। अर्जुन ने अश्वत्थामा का पीछा कर उसे परास्त किया और उसके माथे की मणि निकाल ली। अठारह दिन का महायुद्ध समाप्त हुआ। केवल पाँच पांडव, श्रीकृष्ण और सात्यकि जीवित बचे। युधिष्ठिर का हस्तिनापुर के सम्राट के रूप में भव्य राज्याभिषेक हुआ। शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह से राजधर्म, दानधर्म और मोक्षधर्म का अमर ज्ञान प्राप्त करने के बाद पांडवों ने न्यायपूर्ण धर्मराज्य की स्थापना की।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: अधर्म, अहंकार और अन्याय का अंत अत्यंत दुखद और अवश्यंभावी होता है। विजय अंततः सत्य और धर्म की ही होती है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
कर्ण-अर्जुन के अंतिम युद्ध का वर्णन कीजिए। कर्ण के रथ का पहिया धँसने पर श्रीकृष्ण ने उसे क्या उत्तर दिया था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) निर्णायक द्वंद्व युद्ध:
सत्रहवें दिन कर्ण और अर्जुन के बीच भीषण बाण-युद्ध हुआ। दोनों एक-दूसरे पर भारी पड़ रहे थे। तभी अचानक कर्ण के रथ का बायाँ पहिया जमीन में धँस गया। शापवश कर्ण ब्रह्मास्त्र चलाने का मंत्र भी भूल गया। जब कर्ण रथ का पहिया निकालने के लिए नीचे उतरा, तो उसने अर्जुन से धर्मयुद्ध की मर्यादा की दुहाई देते हुए रुकने को कहा।
(ख) श्रीकृष्ण का तीखा उत्तर:
श्रीकृष्ण ने गरजते हुए कहा—"कर्ण! आज तुम्हें धर्म की याद आ रही है? जब भरी सभा में एकवस्त्रा द्रौपदी को घसीटा गया था और तुमने उसे वैश्या कहा था, तब तुम्हारा धर्म कहाँ गया था? जब लाक्षागृह में पांडवों को जलाने का षड्यंत्र रचा था, तब धर्म कहाँ था? और जब सात महारथियों ने मिलकर निहत्थे बालक अभिमन्यु को घेरकर मारा था, तब तुम्हारा धर्म कहाँ सो रहा था?" श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने अंजलि बाण से कर्ण का वध कर दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
रथ का पहिया धँसने व कर्ण द्वारा धर्म की दुहाई1.5 अंक
श्रीकृष्ण द्वारा द्रौपदी व अभिमन्यु के अधर्म की याद दिलाना व वध1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
भीम और दुर्योधन के गदा युद्ध का क्या परिणाम निकला? भीम ने दुर्योधन का वध किस प्रकार किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) गदा युद्ध की पृष्ठभूमि:
दुर्योधन द्वैपायन सरोवर में छिपा था। युधिष्ठिर की ललकार पर वह गदा लेकर बाहर आया। भीम और दुर्योधन दोनों ही बलराम के शिष्य थे और गदा युद्ध में अत्यंत प्रवीण थे। गांधारी के दृष्टिपात के कारण दुर्योधन का ऊपरी शरीर वज्र के समान कठोर हो गया था, जिससे भीम के प्रहार उस पर निष्फल हो रहे थे।
(ख) वध का ढंग:
जब गदा युद्ध लंबा खिंचने लगा, तो श्रीकृष्ण ने भीम को संकेत करते हुए अपनी जांघ थपथपाई। भीम को द्यूतसभा में ली गई अपनी प्रतिज्ञा याद आ गई। उन्होंने गदा युद्ध के पारंपरिक नियम (कमर के नीचे न मारना) को तोड़कर पूरी शक्ति से दुर्योधन की दोनों जांघों पर गदा का घातक प्रहार कर दिया। दुर्योधन की जंघाएँ टूट गईं और वह लहूलुहान होकर भूमि पर गिर पड़ा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
द्वैपायन सरोवर से निकलना व वज्र देह का प्रसंग1.5 अंक
श्रीकृष्ण के संकेत पर जंघा तोड़ने की प्रतिज्ञा पूरी करना1.5 अंक
प्र. 3 (कथा से)
महाभारत के युद्ध की समाप्ति पर कितने महारथी जीवित बचे थे और युधिष्ठिर ने शासन कैसे संभाला?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अठारह दिन के महायुद्ध के पश्चात पांडव पक्ष से केवल सात महारथी (पाँचों पांडव, भगवान श्रीकृष्ण और सात्यकि) तथा कौरव पक्ष से केवल तीन महारथी (अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा) ही जीवित बचे थे। समस्त कुल के विनाश के बाद युधिष्ठिर का हस्तिनापुर के सम्राट के रूप में राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने शरशय्या पर लेटे पितामह भीष्म से राजधर्म का ज्ञान प्राप्त कर सत्य, न्याय और प्रजा-कल्याण के साथ धर्मराज्य की स्थापना की।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
जीवित बचे महारथियों की सटीक संख्या1 अंक
युधिष्ठिर का राज्याभिषेक व भीष्म से राजधर्म की शिक्षा1 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
महाभारत के महाविनाशकारी युद्ध के पश्चात युधिष्ठिर के मन में उत्पन्न वैराग्य और शोक को महर्षि व्यास और भीष्म ने कैसे शांत किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
युद्ध में अपने भाइयों, गुरुजनों, पुत्रों और लाखों सैनिकों की मृत्यु देखकर युधिष्ठिर का हृदय अत्यंत व्यथित हो गया और वे राजपाट त्यागकर वन में संन्यास लेने का विचार करने लगे।
महर्षि वेदव्यास और शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने उन्हें समझाया कि एक राजा का सर्वोच्च धर्म 'राजधर्म' और प्रजा का पालन है। क्षत्रिय के लिए धर्मयुद्ध में कर्तव्य का पालन करना पाप नहीं, पुण्य है। उन्होंने शोक त्यागकर न्याय और जनकल्याणकारी शासन स्थापित करने का उपदेश देकर उनके मन की ग्लानि दूर की।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
युधिष्ठिर का शोक और भीष्म-व्यास द्वारा राजधर्म का बोध3 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Philosophical HOTS
महाभारत का महायुद्ध अंततः हमें क्या शाश्वत संदेश देता है? क्या दुर्योधन का अहंकार और युधिष्ठिर की विजय केवल एक पौराणिक कथा है अथवा मानव मन के भीतर चलने वाले "सद्गुण और दुर्गुण" का शाश्वत संग्राम है?
दार्शनिक एवं आध्यात्मिक समीक्षा:
मनुष्य का अंतःकरण ही कुरुक्षेत्र है: महाभारत केवल भूमि के टुकड़े के लिए लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध नहीं है, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के हृदय में चलने वाला काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या (कौरव) और सत्य, धर्म, विवेक, संयम (पांडव) का निरंतर चलने वाला द्वंद्व है।
अधर्म का सर्वनाश: दुर्योधन के पास 11 अक्षौहिणी सेना, भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महारथी थे, परंतु अधर्म के कारण उसका पतन हुआ। पांडवों के पास केवल 7 अक्षौहिणी सेना थी, परंतु उनके साथ धर्म और भगवान श्रीकृष्ण थे। "यतो धर्मस्ततो जयः"—जहाँ धर्म है, विजय निश्चित रूप से वहीं होती है।
D1
पाठ 1: चिड़िया और चुरुंगुन
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 1) — कविता — हरिवंश राय बच्चन | नन्हे पक्षी की जिज्ञासा, दुनिया को समझने का कौतूहल और माँ का मार्गदर्शन
छोड़ घोंसला बाहर आया,
देखीं डालैं, देखे पात,
और सुनी जो पत्ते हिल-मिल
करते हैं आपस में बात।
माँ, क्या मुझको उड़ना आया?
'नहीं चुरुंगुन, बैठ न समाया।'
डाल से डाली पर पहुँचा,
देखी कलियाँ, देखे फूल,
ऊपर उठकर फुनगी जानी,
नीचे झुककर जाना मूल।
माँ, क्या मुझको उड़ना आया?
'नहीं चुरुंगुन, बैठ न समाया।'
कच्चे-पक्के फल पहचाने,
खाए और गिराए काट,
खाने-गाने के सब साथी,
देख रहे हैं मेरी बाट।
माँ, क्या मुझको उड़ना आया?
'नहीं चुरुंगुन, बैठ न समाया।'
उस तरु से अब इस तरु पर आता,
जाता हूँ धरती की ओर,
दाना कोई कहीं पड़ा हो,
चुन लाता हूँ ठोक-ठकोर।
माँ, क्या मुझको उड़ना आया?
'नहीं चुरुंगुन, बैठ न समाया।'
मैं नीले अज्ञात गगन की
सुनता हूँ अनिवार्य पुकार,
कोई अंदर से कहता है,
उड़ जा, उड़ता जा पर मार।
'हाँ, चुरुंगुन, अब आया,
तू आज उड़ने में समाया।'
— हरिवंश राय बच्चन
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित यह बाल कविता 'चिड़िया और चुरुंगुन' एक नन्हे पक्षी (चुरुंगुन) के विकास, उसके बाल-सुलभ कौतूहल और उसकी माँ के बीच के स्नेहमयी संवाद को दर्शाती है। चुरुंगुन जैसे-जैसे बड़ा होता है, वह घोंसले से बाहर निकलकर पेड़ की डालियों, पत्तों, फूलों, कलियों और फलों को देखता है। हर नई गतिविधि के बाद वह उत्साहपूर्वक अपनी माँ से पूछता है—"माँ, क्या मुझको उड़ना आ गया?" माँ हर बार मुस्कुराकर समझाती है कि अभी तू केवल फुदकना सीखा है, उड़ने में पूरी तरह समर्थ नहीं हुआ है। अंत में जब चुरुंगुन के भीतर से नीले अनंत आकाश की अदम्य पुकार सुनाई देती है और वह बिना किसी भय के खुले आकाश में अपने पंख फड़फड़ाने को आतुर होता है, तब माँ गर्व से कहती है—"हाँ मेरे चुरुंगुन! अब सचमुच तुझे उड़ना आ गया है।"
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: ज्ञान और कौशल का विकास क्रमिक होता है। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की पूर्ण परिपक्वता ही सच्ची स्वतंत्रता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
चुरुंगुन अपने उड़ने के बारे में बार-बार अपनी माँ से क्यों पूछता है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
चुरुंगुन बार-बार अपनी माँ से उड़ने के बारे में इसलिए पूछता है क्योंकि:
बाल-सुलभ उत्सुकता: वह जैसे ही कोई नया काम करता है (जैसे पत्तों को देखना, डाल पर फुदकना या दाना चुगना), उसे लगता है कि उसने उड़ना सीख लिया है।
माँ की स्वीकृति की चाह: वह अपनी माँ से शाबाशी और प्रमाण पत्र चाहता है कि वह अब बड़ा और आत्मनिर्भर हो चुका है।
खुले आकाश में उड़ने की तीव्र अभिलाषा: उसका मन नीले आकाश में दूर तक उड़ने के लिए बेचैन है, इसलिए वह माँ की अनुमति की प्रतीक्षा करता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बाल-सुलभ कौतूहल व उत्साह का उल्लेख1.5 अंक
माँ की स्वीकृति व स्वच्छंद उड़ने की चाह1.5 अंक
प्र. 2 (कविता से)
माँ ने अंत में चुरुंगुन से कब और क्यों कहा कि "हाँ, अब तुझे उड़ना आ गया"?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
माँ ने अंत में तब कहा जब चुरुंगुन ने बताया कि अब उसे नीले अज्ञात आकाश की अदम्य पुकार सुनाई दे रही है और उसके भीतर की अंतरात्मा कह रही है कि 'उड़ जा, उड़ता जा पर मार'। माँ समझ गई कि अब चुरुंगुन के भीतर का डर समाप्त हो चुका है, उसके पंखों में शक्ति आ गई है और उसके भीतर स्वतंत्र उड़ान भरने का आत्मविश्वास पूरी तरह जाग चुका है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नीले आकाश की आंतरिक पुकार का संदर्भ1.5 अंक
आत्मविश्वास व पूर्ण परिपक्वता का विश्लेषण1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
कविता 'चिड़िया और चुरुंगुन' में माँ चुरुंगुन को बार-बार क्या समझाती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
माँ चुरुंगुन को समझाती है कि घोंसले से बाहर निकलकर पेड़ की फुनगियों, पत्तों और कलियों को देख लेना ही पूरी दुनिया नहीं है। अभी उसके पंखों में वह शक्ति और अनुभव नहीं आया है कि वह आकाश की अनंत ऊंचाइयों में निर्भय होकर उड़ सके। माँ उसे धैर्य रखने और सही समय की प्रतीक्षा करने की सलाह देती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
माँ की सीख और अपरिपक्वता का उल्लेख2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
'तू भरमाय' का क्या अर्थ है? माँ ने ऐसा क्यों कहा?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
'तू भरमाय' का अर्थ है 'तू भ्रम में है' या 'तू गलत समझ रहा है'। माँ ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि चुरुंगुन थोड़ी दूर फुदककर ही यह मान बैठता था कि उसने पूरी दुनिया देख ली है और वह पूर्ण रूप से उड़ना सीख चुका है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अर्थ और माँ के कथन का कारण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Growth & Mentorship HOTS
चुरुंगुन की माँ की तरह हमारे माता-पिता और शिक्षक भी हमें कई कार्यों को करने से तब तक रोकते हैं जब तक कि हम पूरी तरह परिपक्व न हो जाएँ। इस कविता से हमें अपने बड़ों के अनुशासन के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाना चाहिए?
जीवन-मूल्य एवं परिप्रेक्ष्य:
अधीरा न होना: आधी-अधूरी तैयारी से बड़ा कदम उठाना जोखिम भरा हो सकता है (जैसे अधूरा उड़ा पक्षी जमीन पर गिरकर घायल हो सकता है)।
मार्गदर्शन का सम्मान: बड़ों की रोक-टोक हमारे विकास को रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमें सुरक्षित और पूर्ण रूप से सक्षम बनाने के लिए होती है। हमें उनके अनुभव पर विश्वास करना चाहिए।
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पाठ 2: सबसे सुंदर लड़की
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 2) — कहानी — विष्णु प्रभाकर | बाह्य रूप बनाम आंतरिक सौंदर्य, त्याग और निस्वार्थ प्रेम
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
गांधीवादी साहित्यकार विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित यह कहानी 'सबसे सुंदर लड़की' सच्चे सौंदर्य की परिभाषा को स्थापित करती है। समुद्र तट पर स्थित एक बस्ती में हर्ष नाम का एक कलाकार लड़का रेत के सुंदर-सुंदर घरौंदे और खिलौने बनाता था। उस बस्ती में मंजू नाम की एक अत्यंत रूपवती, गोरी और सजी-धजी अमीर लड़की रहती थी जिसे सभी बहुत सुंदर मानते थे। उसी बस्ती में कनक नाम की एक निर्धन मछुआरे की सांवली लड़की भी रहती थी, जिसके कपड़े मैले-कुचैले थे परंतु उसका हृदय अत्यंत दयालु और परोपकारी था। एक दिन समुद्र में खेलते समय मंजू का पैर फिसल गया और वह समुद्र की भयंकर लहरों में बहने लगी। मंजू को डूबता देखकर सब चिल्लाने लगे, परंतु किसी में आगे बढ़ने का साहस नहीं हुआ। तभी निडर कनक ने अपनी जान की बाजी लगाकर उफनती लहरों में छलांग लगा दी और अथक प्रयास करके डूबती हुई मंजू को सुरक्षित बाहर खींच लाई। इस साहसिक घटना के बाद सभी की आँखें खुल गईं। हर्ष ने रेत से बनाई गई 'सबसे सुंदर लड़की' की मूर्ति का ताज कनक के सिर पर रख दिया। सबने स्वीकार किया कि रूप-रंग से नहीं, बल्कि कर्म और त्याग से ही कोई व्यक्ति 'सबसे सुंदर' होता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: सच्चा सौंदर्य बाह्य रूप-रंग और कपड़ों में नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता, करुणा और निस्वार्थ सेवा में होता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
हर्ष ने कनक को ही "सबसे सुंदर लड़की" का ताज क्यों पहनाया? मंजू और कनक में क्या अंतर था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
हर्ष ने कनक को सबसे सुंदर लड़की माना क्योंकि कनक ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना समुद्र की तूफानी लहरों में कूदकर मंजू की जान बचाई थी।
मंजू और कनक में अंतर:
मंजू: वह केवल रूप-रंग से गोरी, सुंदर और सुंदर वस्त्र पहनने वाली लड़की थी, परंतु उसके भीतर त्याग या दूसरों के काम आने का गुण नहीं था।
कनक: वह सांवली और निर्धन थी, परंतु उसका अंतर्मन साहस, दया, परोपकार और त्याग के दिव्य गुणों से जगमगा रहा था। सच्चा सौंदर्य कर्म का होता है, देह का नहीं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कनक द्वारा जान बचाने के साहस का उल्लेख1.5 अंक
बाह्य रूप (मंजू) बनाम आंतरिक सौंदर्य (कनक) का तुलनात्मक अंतर1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 3
मंजरी को अपने रूप-रंग पर घमंड क्यों था और वह अन्य सहेलियों से कैसा व्यवहार करती थी?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मंजरी बहुत सुंदर और गोरी थी, जिसके कारण उसके मन में अहंकार आ गया था। वह अपनी सांवली और साधारण सहेलियों (जैसे नयना) को हेय दृष्टि से देखती थी और उनके साथ खेलने में अपनी हेठी समझती थी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सुंदरता का घमंड और सहेलियों के प्रति उपेक्षा2 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
कहानी 'सबसे सुंदर लड़की' से हमें सच्ची सुंदरता के विषय में क्या सीख मिलती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
सच्ची सुंदरता केवल बाहरी रूप-रंग या गोरी त्वचा में नहीं, बल्कि व्यक्ति के दयालु हृदय, त्याग, परोपकार और सेवा भावना में होती है। संकट के समय दूसरों की सहायता करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में सबसे सुंदर होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
आंतरिक गुणों और परोपकार को सच्ची सुंदरता बताना2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Moral Education HOTS
आज के समाज में बाह्य सौंदर्य और सौंदर्य प्रसाधनों (Cosmetics) को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है। "सबसे सुंदर लड़की" कहानी हमारे इस दृष्टिकोण को किस प्रकार बदलती है?
नैतिक दृष्टिकोण:
शारीरिक सुंदरता नश्वर और बाहरी आवरण मात्र है; वृद्धावस्था या बीमारी में यह नष्ट हो जाती है।
सच्चा और स्थायी सौंदर्य मनुष्य का चरित्र, उसकी वाणी की मिठास, परोपकार और विपत्ति में दूसरों की सहायता करने की क्षमता है। कनक की तरह आंतरिक रूप से सुंदर व्यक्ति ही समाज में वास्तविक आदर पाता है।
D3
पाठ 3: मैं हूँ रोबोट
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 3) — विज्ञान निबंध — राजीव गर्ग | यांत्रिक मानव (Robot) की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और सीमाएँ
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
विज्ञान लेखक राजीव गर्ग द्वारा रचित यह निबंध 'मैं हूँ रोबोट' आत्मकथात्मक शैली में रोबोट (यांत्रिक मानव) के स्वरूप, उसके निर्माण और आधुनिक युग में उसकी उपयोगिता का रोचक परिचय देता है। रोबोट बताता है कि वह हाड़-मांस का नहीं, बल्कि लोहा, इस्पात और प्लास्टिक से बना एक स्वचालित यंत्र है। उसका मस्तिष्क एक शक्तिशाली कंप्यूटर है, उसकी आँखें कैमरा और फोटोइलेक्ट्रिक सेल हैं, उसके कान माइक्रोफोन हैं और उसकी नसें बिजली के तार हैं। रोबोट कभी थकता नहीं, उसे भूख-प्यास नहीं लगती, वह बिना रुके चौबीसों घंटे कारखानों में भारी वजन उठाने, गाड़ियाँ जोड़ने, वेल्डिंग करने और गहरे समुद्र या अंतरिक्ष के खतरनाक वातावरण में काम कर सकता है। जहाँ जहरीली गैसें या अत्यधिक तापमान हो, वहाँ रोबोट आसानी से काम करता है। परंतु रोबोट यह भी स्पष्ट करता है कि वह मनुष्य का स्थान कभी नहीं ले सकता, क्योंकि उसके पास अपनी कोई स्वतंत्र सोचने की शक्ति, भावनाएँ और संवेदनाएँ नहीं हैं। वह केवल मनुष्य द्वारा दिए गए प्रोग्राम (निर्देशों) का ही पालन करता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: विज्ञान और तकनीक मानव जीवन को सरल बनाने के साधन हैं। रोबोट कितना भी कुशल हो, मनुष्य की संवेदनशीलता और विवेक सदैव सर्वोपरि रहेगा।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
रोबोट के विभिन्न अंग किस प्रकार मनुष्य के अंगों के समान कार्य करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रोबोट की आंतरिक संरचना मनुष्य के शारीरिक अंगों से निम्नलिखित रूप से मेल खाती है:
मस्तिष्क = कंप्यूटर: मनुष्य के दिमाग की तरह कंप्यूटर रोबोट को सोचने, गणना करने और आदेश देने का कार्य करता है।
आँखें = कैमरे / फोटो सेल: वह कैमरों की सहायता से सामने की वस्तुओं, दूरी और बाधाओं को देखता है।
कान = माइक्रोफोन: वह माइक्रोफोन द्वारा ध्वनि और मानवीय आवाजों को सुनता है।
मांसपेशियाँ व नसें = मोटरें व बिजली के तार: बिजली के तारों से ऊर्जा प्रवाहित होती है और छोटी-बड़ी मोटरों से उसके हाथ-पैर गति करते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मस्तिष्क (कंप्यूटर) व आँख (कैमरा) का साम्य1.5 अंक
कान (माइक्रोफोन) व नसों (तारों) का साम्य1.5 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
रोबोट किन-किन क्षेत्रों में मनुष्य से अधिक कुशलता से कार्य कर सकता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रोबोट निम्नलिखित विषम और जोखिम भरे क्षेत्रों में मनुष्य से कहीं बेहतर कार्य करता है:
कारखानों में बिना थके और बिना गलती किए 24 घंटे लगातार भारी वजन उठाना और वेल्डिंग करना।
खतरनाक खानों (जहाँ जहरीली गैसें हों), अत्यधिक गहरे समुद्र और अंतरिक्ष के भीषण विकिरण में शोध कार्य करना।
अत्यंत सूक्ष्म शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और बम निरोधक कार्यों में बिना घबराए काम करना।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
थकान-रहित निरंतर कार्य व कारखानों का उल्लेख1 अंक
खतरनाक खानों, अंतरिक्ष व बम निरोधक उपयोग1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
रोबोट का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया है और यह किस ऊर्जा से चलता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रोबोट का निर्माण मनुष्य के श्रमसाध्य, जोखिम भरे और अत्यधिक थकाऊ कार्यों को तीव्र गति एवं त्रुटिहीन शुद्धता से करने के लिए किया गया है। यह मुख्यतः विद्युत ऊर्जा अथवा उच्च क्षमता वाली बैटरियों से संचालित होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
उद्देश्य एवं ऊर्जा स्रोत का सही विवरण2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
रोबोट और मनुष्य के मस्तिष्क में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रोबोट के पास सोचने-समझने, संवेदना या भावनाओं का अभाव होता है; वह केवल कंप्यूटर में फीड किए गए प्रोग्राम के अनुसार ही कार्य कर सकता है। इसके विपरीत, मनुष्य के पास स्वतंत्र बुद्धि, विवेक, संवेदना और नवीन निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता होती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
संवेदना और स्वतंत्र निर्णय क्षमता का अंतर2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based AI & Future Tech HOTS
आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के तेजी से विकास के कारण कई लोग यह चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि रोबोट इंसानों की नौकरियाँ छीन लेंगे। इस संदर्भ में मनुष्य और रोबोट के बीच के बुनियादी अंतर पर अपने विचार लिखिए।
विश्लेषण एवं मानवीय सर्वोच्चता:
संवेदना और नैतिकता का अभाव: रोबोट डेटा और एल्गोरिदम पर काम करता है; उसके पास दया, प्रेम, सहानुभूति और नैतिक विवेक नहीं होता। वह किसी संकट में मानवीय निर्णय नहीं ले सकता।
रचनात्मकता: रोबोट केवल वही कर सकता है जो उसे सिखाया गया है। मौलिक कला, साहित्य, दर्शन और नवाचार केवल मानव मस्तिष्क की उपज हैं। अतः रोबोट मनुष्य का सहायक हो सकता है, उसका विकल्प नहीं।
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पाठ 4: गुब्बारे पर चीता
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 4) — कहानी — मुंशी प्रेमचंद | बाल कौतूहल, सर्कस का रोमांच और अनपेक्षित संकट
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित यह रोचक कहानी 'गुब्बारे पर चीता' सर्कस देखने की बाल-सुलभ ललक और अप्रत्याशित संकट से उपजे हास्य-रोमांच का चित्रण करती है। शहर में एक बड़ा सर्कस आया था। बलदेव अपने साथियों के साथ सर्कस देखने जाने के लिए बहुत उत्सुक था। हेडमास्टर साहब की सख्त मनाही के बावजूद बलदेव एक रुपया जेब में डालकर चुपके से सर्कस के तंबू में जा पहुँचा। वहाँ विज्ञापन में शेर, भालू और चीते के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, परंतु असल में जानवर बहुत कमजोर, सुस्त और दयनीय दिख रहे थे। बलदेव जानवरों को देखकर निराश हो रहा था कि तभी सर्कस में गैस से उड़ने वाले एक विशाल गुब्बारे का प्रदर्शन शुरू हुआ। बलदेव गुब्बारे को देखने पास चला गया। उसी समय पिंजरे से छूटकर एक खूँखार चीता भीड़ की ओर झपटा। भगदड़ मच गई। चीता भागते हुए सीधे गुब्बारे की टोकरी में कूद गया और डर के मारे बलदेव भी उसी गुब्बारे की रस्सी पकड़कर ऊपर चढ़ गया। संयोगवश गुब्बारे की रस्सी खुल गई और गुब्बारा चीते और बलदेव को लेकर तेजी से आकाश में उड़ने लगा। हवा में चीता भी ऊँचाई और हवा के दबाव से सहम गया और बलदेव को नुकसान पहुँचाने के बजाय खुद अपनी जान बचाने के लिए काँपने लगा। जब गुब्बारा समुद्र की ओर जाने लगा, तो बलदेव ने साहस जुटाकर गुब्बारे की वाल्व (गैस की नली) खींची जिससे गुब्बारा नीचे उतरने लगा। नीचे आते ही चीता डरकर पानी में कूद पड़ा और वहीं डूब गया, जबकि बलदेव तैरकर सकुशल किनारे आ गया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: साहस, प्रत्युत्पन्नमतित्व (तुरंत निर्णय लेना) और शांत चित्त से विषम से विषम संकट का सामना करना।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
हेडमास्टर साहब की मनाही के बावजूद बलदेव सर्कस देखने क्यों गया था? वहाँ पहुँचकर उसे क्या निराशा हुई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) सर्कस जाने का कारण:
बलदेव के मन में सर्कस के जंगली जानवरों, करतबों और विशेषकर उस गुब्बारे को देखने की तीव्र बाल-सुलभ उत्सुकता थी जिसके बारे में शहर भर में पर्चे बँटे थे। वह अपनी जिज्ञासा को रोक न सका और एक रुपया लेकर चोरी-छिपे सर्कस देखने चला गया।
(ख) निराशा का कारण:
इश्तिहार (विज्ञापन) में जिन जानवरों को अत्यंत भयंकर और विचित्र बताया गया था, वे असलियत में बहुत कमजोर, मरे-मरे से और सुस्त थे। शेर को देखकर लगता था कि वह महीनों से भूखा है और भालू का हाल देखकर बलदेव को हँसी आ रही थी। उसे लगा कि उसके पैसे व्यर्थ चले गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सर्कस के प्रति तीव्र कौतूहल का उल्लेख1.5 अंक
जानवरों की दयनीय दशा देखकर निराशा का वर्णन1.5 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
हवा में उड़ते गुब्बारे में चीते और बलदेव की स्थिति का वर्णन कीजिए। बलदेव ने अपनी जान कैसे बचाई?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) हवा में दोनों की स्थिति:
गुब्बारा जैसे-जैसे ऊपर उठता गया, चीते की सारी हेकड़ी और खूँखारपन गायब हो गया। अत्यधिक ऊँचाई और ठंडी हवा के भय से चीता दुबककर टोकरी के कोने में बैठ गया और थर-थर काँपने लगा। उसने बलदेव पर हमला करने का साहस ही नहीं किया। दोनों मौत के भय से एक ही टोकरी में शांत खड़े थे।
(ख) बलदेव द्वारा प्राण-रक्षा:
बलदेव ने घबराने के बजाय अपनी बुद्धि से काम लिया। उसने याद किया कि गुब्बारे से गैस निकालने पर वह नीचे उतरता है। उसने गुब्बारे की गैस नली का वाल्व खोल दिया। जब गुब्बारा जमीन के पास आया, तो चीता डरकर नदी में कूद गया और मर गया, तथा बलदेव पानी में छलांग लगाकर तैरते हुए सकुशल किनारे पहुँच गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ऊँचाई पर चीते के भयभीत होने का दृश्य1.5 अंक
वाल्व खोलकर गुब्बारा उतारने व तैरकर बचने की चतुराई1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
सर्कस का गुब्बारा उड़ते-उड़ते कहाँ पहुँच गया और बलदेव के सामने क्या संकट आ खड़ा हुआ?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
सर्कस का गुब्बारा हवा के तेज बहाव के साथ आसमान में बहुत ऊँचाई पर बादलों की ओर उड़ने लगा। बलदेव के सामने यह संकट था कि वह गुब्बारे की टोकरी में एक हिंसक चीते के साथ अकेला फंसा हुआ था और नीचे गिरने का जानलेवा खतरा था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
गुब्बारे की उड़ान और चीते के साथ खतरे का वर्णन2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
चीते ने गुब्बारे से नीचे छलांग क्यों लगाई और उसका क्या परिणाम हुआ?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
ऊँचाई पर ठंड और हवा के दबाव के कारण चीता अत्यधिक भयभीत और घबरा गया। घबराहट में उसने नीचे जमीन की ओर छलांग लगा दी, किंतु अत्यधिक ऊंचाई से गिरने के कारण वह एक चट्टान से टकराकर वहीं मर गया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चीते का भय और उसकी मृत्यु का परिणाम2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Presence of Mind HOTS
यदि बलदेव गुब्बारे में चीते को देखकर डर के मारे होश खो बैठता, तो उसका क्या हश्र होता? इस कहानी से हमें अप्रत्याशित संकट के समय "उपस्थिति बुद्धि" (Presence of Mind) के महत्व पर क्या सीख मिलती है?
संकट प्रबंधन एवं मानसिक स्थिरता:
यदि बलदेव घबराकर चिल्लाता या हाथ-पाँव फेंकता, तो चीता डरकर आत्मरक्षा में उस पर झपट पड़ता और दोनों नीचे गिरकर मर जाते।
यह कहानी सिखाती है कि चाहे संकट कितना भी बड़ा हो (जैसे आसमान में चीते के साथ फँस जाना), धैर्य और शांत चित्त ही जीवन की रक्षा कर सकता है। बुद्धि का सही समय पर उपयोग ही मनुष्य को हर विपत्ति से उबारता है।
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पाठ 5: थोड़ी धरती पाऊँ
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 5) — कविता — सर्वेश्वर दयाल सक्सेना | पर्यावरण संरक्षण, हरियाली की पुकार और सीमेंट के जंगलों का दर्द
बहुत दिनों से सोच रहा था
थोड़ी धरती पाऊँ,
उस धरती में बाग-बगीचा
जो हो सके लगाऊँ।
खिले फूल-फल, चिड़ियाँ बोलें,
प्यारी खुशबू डोले,
ताजी हवा जलाशय में अपना
हर अंग भिगो ले।
लेकिन एक इंच धरती भी
कहीं नहीं मिल पाई,
एक पेड़ भी नहीं कहीं जो
अपनी कहूँ भलाई।
हो सकता है पास तुम्हारे
अपनी कुछ धरती हो,
फूल-फलों से लदे बगीचे
और अपनी परती हो।
तो विनती है यही, कभी मत
उस उपवन को कटने देना,
चिड़ियों को रोते मत छोड़ो,
पेड़ों को मत लुटने देना।
सभ्यता दरिंदा बनकर आज
पेड़ों को काट रही है,
जहर फेफड़ों में भर-भरकर
हम सबको बाँट रही है।
— सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित यह कविता 'थोड़ी धरती पाऊँ' तीव्र होते कंक्रीट के शहरीकरण, वृक्षों के अंधाधुंध कटान और घटती हरियाली पर एक अत्यंत संवेदनशील चिंता व्यक्त करती है। कवि बहुत दिनों से यह अभिलाषा संजोए हैं कि काश उनके पास थोड़ी सी खुली जमीन (धरती) होती, जहाँ वे पेड़-पौधे लगाते, फूलों की सुगंध बिखरती, चिड़ियाँ चहचहातीं और शीतल बयार बहती। परंतु आज के आधुनिक शहरों में एक इंच खाली जमीन मिलना भी दुर्लभ हो गया है। इसलिए कवि उन सभी लोगों से हाथ जोड़कर भावुक प्रार्थना करते हैं जिनके पास थोड़ी सी भी जमीन, बगीचा या आंगन है—कि वे कभी भी अपने पेड़ों को न काटें, चिड़ियों के घोंसलों को न उजाड़ें। आज की तथाकथित भौतिकवादी 'सभ्यता' एक दरिंदा (राक्षस) बनकर हरे-भरे वनों को काट रही है और बदले में हमारे फेफड़ों में जहरीला धुआँ और प्रदूषण भर रही है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पर्यावरण संरक्षण आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वृक्षों और पक्षियों की रक्षा करना ही मानव जाति के अस्तित्व की रक्षा करना है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
कवि धरती पाकर उसमें क्या-क्या करना चाहता था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवि थोड़ी सी धरती पाकर उसमें निम्नलिखित कार्य करना चाहता था:
सुंदर फल-फूलों से लदा हुआ एक हरा-भरा बाग-बगीचा लगाना चाहता था।
चाहता था कि वहाँ चिड़ियाँ आकर चहचहाएँ, फूलों की सुगंध फैले और एक छोटा जलाशय हो जिसकी सतह पर ताजी हवा अठखेलियाँ करे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बाग-बगीचा व फल-फूल लगाने की इच्छा1 अंक
चिड़ियों के चहचहाने व जलाशय के वातावरण का उल्लेख1 अंक
प्र. 2 (कविता से)
कवि ने आज की सभ्यता को "दरिंदा" क्यों कहा है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवि ने आधुनिक सभ्यता को 'दरिंदा' (हिंसक जंगली जानवर) कहा है क्योंकि:
अंधाधुंध वनों की कटाई: यह तथाकथित विकसित सभ्यता इमारतों, सड़कों और कारखानों के नाम पर निर्दयतापूर्वक सदियों पुराने हरे-भरे पेड़ों और वनों का कत्ल कर रही है।
जीव-जंतुओं के घरों का विनाश: पेड़ों को काटकर बेजुबान पक्षियों के आशियाने छीने जा रहे हैं।
प्रदूषण का जहर बाँटना: हरियाली नष्ट करके यह सभ्यता हमारे फेफड़ों में जहरीला धुआँ, कार्बन और बीमारियाँ बाँट रही है, जो आत्मघाती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पेड़ों व वनों के निर्दयी कटान का कारण1.5 अंक
प्रदूषण व पारिस्थितिक विनाश के दुष्परिणाम1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 'थोड़ी धरती पाऊँ' कविता में मनुष्य से पेड़ों को न काटने की अपील क्यों कर रहे हैं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवि अपील करते हैं कि पेड़-पौधे ही पर्यावरण को शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वर्षा लाते हैं और पशु-पक्षियों को आश्रय देते हैं। यदि हम पेड़ों को काट देंगे, तो हमारी धरती बंजर हो जाएगी और चारों ओर जहरीला धुआँ और बीमारियाँ फैल जाएंगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पर्यावरण संतुलन और पेड़ों के महत्व का तर्क2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
कविता में बच्चों और पेड़ों के बीच क्या समानता बताई गई है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता में बताया गया है कि बच्चे और पेड़ दोनों ही संसार में खुशहाली, मासूमियत और हरियाली के प्रतीक हैं। जिस घर में बच्चे हंसते-खेलते हैं और आँगन में हरे-भरे पेड़ लहलहाते हैं, वहीं सच्चा स्वर्ग और जीवन का उल्लास होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बच्चे और पेड़ की समानता का स्पष्टीकरण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Environmental HOTS
कवि की यह पंक्तियाँ— "सभ्यता दरिंदा बनकर आज पेड़ों को काट रही है / जहर फेफड़ों में भर-भरकर हम सबको बाँट रही है"— आज दिल्ली-एनसीआर और अन्य महानगरों में बढ़ते एयर पॉल्यूशन (AQI संकट) पर कितनी सटीक बैठती हैं? समाधान सुझाइए।
समकालीन प्रासंगिकता एवं समाधान:
वर्तमान संकट: आज महानगरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400-500 के पार पहुँचकर 'गंभीर' श्रेणी में रहता है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग दमा व फेफड़ों के रोगों से घिर रहे हैं। कवि की भविष्यवाणी आज यथार्थ बन चुकी है।
व्यावहारिक समाधान:
प्रत्येक नागरिक अपने जन्मदिवस पर कम से कम एक स्थायी छायादार वृक्ष (जैसे पीपल, नीम, बरगद) अवश्य लगाए और उसकी देखभाल करे।
शहरी क्षेत्रों में छतों पर बागवानी (Terrace Gardening) और मियावाकी पद्धति से सघन शहरी वनों का निर्माण किया जाए।
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पाठ 6: गारो
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 6) — लोककथा — मेघालय की गारो जनजाति | जापा जलपा और सुकपा बोंगिपा का नेतृत्व और असम-मेघालय का प्रवास
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रस्तुत पाठ पूर्वोत्तर भारत के खूबसूरत पर्वतीय राज्य मेघालय में निवास करने वाली गारो जनजाति की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी लोककथा है। गारो समुदाय के लोग प्रकृति-प्रेमी, परिश्रमी और शांतिप्रिय होते हैं। प्राचीन काल में गारो लोग तिब्बत की घाटियों में रहते थे, जहाँ भीषण सर्दी और भोजन के घोर अभाव के कारण उनका जीवन अत्यंत कष्टमय था। उस कठिन समय में उनके दो महापुरुष—जापा जलपा और सुकपा बोंगिपा—सामने आए। वे अत्यंत बुद्धिमान, साहसी और दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने अपनी पूरी जाति को एक बेहतर और उपजाऊ भूमि की खोज में ले जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। सदियों की इस दुर्गम और विषम यात्रा में गारो लोगों ने घने जंगलों, बर्फीले पहाड़ों, खूँखार जानवरों और भयंकर नदियों को पार किया। वे असम के कामरूप और गोलपारा होते हुए अंततः मेघालय की सुरम्य गारो पहाड़ियों में पहुँचे। वहाँ की हरी-भरी उपजाऊ भूमि, कलकल बहते झरने और शांत वातावरण उन्हें इतना भाया कि वे वहीं हमेशा के लिए बस गए। आज भी गारो समाज अपने इन दोनों पूर्वज महापुरुषों को बड़े आदर और कृतज्ञता के साथ याद करता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: सामूहिक एकता, कुशल नेतृत्व और संघर्ष से ही जातियाँ और समाज नई दिशा और संपन्नता प्राप्त करते हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कथा से)
गारो लोगों को अपना मूल निवास स्थान (तिब्बत) क्यों छोड़ना पड़ा था? उनके किन दो महापुरुषों ने उनका नेतृत्व किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) मूल स्थान छोड़ने का कारण:
प्राचीन काल में गारो लोग तिब्बत की विषम और पथरीली घाटियों में रहते थे। वहाँ भयंकर कड़ाके की सर्दी पड़ती थी, जमीन बंजर थी और भोजन तथा आजीविका के साधनों का घोर अभाव था। भूख, ठंड और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनका जीवन निरंतर संकट में था, इसलिए वे एक उपजाऊ, शांत और सुरक्षित भूमि की तलाश में निकले।
(ख) दो महापुरुषों का नेतृत्व:
गारो जाति के इस कठिन ऐतिहासिक प्रवास का कुशल नेतृत्व उनके दो परम बुद्धिमान और तेजस्वी नेताओं—जापा जलपा और सुकपा बोंगिपा ने किया था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कड़ाके की ठंड व भोजन के अभाव का उल्लेख1.5 अंक
जापा जलपा और सुकपा बोंगिपा के नाम व नेतृत्व1.5 अंक
प्र. 2 (कथा से)
गारो लोग अंततः किस क्षेत्र में जाकर बसे और वहाँ का वातावरण उन्हें क्यों पसंद आया?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
गारो लोग एक लंबी और कष्टकारी यात्रा के बाद पूर्वोत्तर भारत के मेघालय राज्य की गारो पहाड़ियों में जाकर बसे। वहाँ का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत मनमोहक था। भूमि हरी-भरी और खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ थी, स्वच्छ जल के प्रचुर स्रोत (नदियाँ और झरने) थे तथा मौसम न तो बहुत अधिक ठंडा था और न गर्म। यह स्थान उनके शांतिप्रिय जीवन के लिए सर्वथा उपयुक्त था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मेघालय की गारो पहाड़ियों का उल्लेख1 अंक
उपजाऊ भूमि, जल व अनुकूल मौसम का वर्णन1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
गारो जनजाति के लोग तिब्बत की घाटियों से असम और मेघालय की पहाड़ियों तक कैसे पहुँचे?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
तिब्बत में भोजन और पानी की भीषण कमी हो जाने के कारण गारो लोगों ने अपने पराक्रमी नेताओं (जापा जलपा और सुकपा बोंगपा) के नेतृत्व में एक दुर्गम यात्रा शुरू की। वे घने जंगलों, नदियों और बर्फीले पहाड़ों को पार करते हुए अंततः असम और मेघालय की उपजाऊ गारो पहाड़ियों में जा बसे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
प्रवास के कारण और नेताओं के नेतृत्व का उल्लेख2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
गारो लोग आज भी अपने पूर्वजों जापा जलपा और सुकपा बोंगपा को श्रद्धा से क्यों याद करते हैं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
गारो लोग उन्हें इसलिए याद करते हैं क्योंकि उन्होंने संकट के समय पूरी जनजाति को एकजुट रखा, उन्हें जंगली जानवरों और शत्रुओं से बचाया तथा एक सुरक्षित और समृद्धशाली आवास स्थल की खोज करके समाज को नया जीवन दिया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पूर्वजों के त्याग और नेतृत्व का सम्मान2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Cultural Diversity HOTS
भारत विभिन्न जनजातियों और संस्कृतियों का एक सुंदर गुलदस्ता है। गारो लोककथा के माध्यम से हमें पूर्वोत्तर भारत की जनजातियों के संघर्ष, प्रकृति-प्रेम और समृद्ध विरासत के बारे में क्या नई दृष्टि मिलती है?
सांस्कृतिक दृष्टिकोण एवं राष्ट्रीय एकता:
प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व: गारो लोग वनों, पर्वतों और जलस्रोतों को देवता मानकर उनका संरक्षण करते हैं। उनका जीवन प्रकृति के दोहन पर नहीं, बल्कि उसके साथ संतुलन पर आधारित है।
सामूहिक जीवन और लोकतंत्र: गारो समाज में मातृसत्तात्मक परिवार प्रणाली और सामूहिक निर्णय लेने की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपरा है, जो हमें विविधता का सम्मान करने की सीख देती है।
D7
पाठ 7: पुस्तकें जो अमर हैं
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 7) — निबंध — मनोज दास | ज्ञान का संरक्षण, पुस्तकों का इतिहास और विचारों की अमरता
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रख्यात लेखक मनोज दास द्वारा लिखित यह विचारोत्तेजक निबंध 'पुस्तकें जो अमर हैं' पुस्तकों के उद्भव, उनके अस्तित्व के संघर्ष और ज्ञान की अमर शक्ति का उद्घाटन करता है। प्राचीन काल में जब कागज और छापाखाना नहीं था, तब मनुष्य ने ज्ञान को बचाने के लिए मिट्टी की पट्टियों (सुमेरिया और बेबीलोन), भोजपत्रों, ताड़पत्रों और चर्मपत्रों (जानवरों की खाल) पर लिखना शुरू किया। इतिहास गवाह है कि कई आततायी और क्रूर शासकों ने पुस्तकों को नष्ट करने की कोशिश की। चीन के पहले सम्राट शी हुआंग ती ने अपने राज्य की सभी पुरानी पुस्तकें जलवा दीं और उन्हें छिपाने वाले विद्वानों को जीवित दफना दिया ताकि इतिहास उसके समय से शुरू माना जाए। मिस्र के विश्वप्रसिद्ध सिकंदरिया (Alexandria) के विशाल पुस्तकालय को जला दिया गया जहाँ महीनों तक ज्ञान के ग्रंथ धू-धू कर जलते रहे। भारत के नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को भी बख्तियार खिलजी ने आग के हवाले कर दिया। परंतु पुस्तकें और उनमें समाहित सत्य और मानवीय विचार कभी नहीं मरे। पुस्तकें नष्ट हो सकती हैं, परंतु विचार अमर होते हैं। जब भी कोई समाज उठता है, वे विचार नए रूपों में पुनः प्रकट हो जाते हैं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: अग्नि, तलवार और सत्ता ज्ञान के अमर प्रकाश को कभी बुझा नहीं सकती। पुस्तकें मानव चेतना की सबसे बड़ी निधि हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (निबंध से)
कागज के आविष्कार से पहले प्राचीन काल में पुस्तकें किस-किस सामग्री पर लिखी जाती थीं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कागज के आविष्कार से पूर्व विभिन्न सभ्यताओं में निम्नलिखित सामग्रियों पर ग्रंथ लिखे जाते थे:
मिट्टी की तख्तियाँ (पट्टियाँ): मेसोपोटामिया, सुमेरिया और बेबीलोन में गीली मिट्टी पर कीलाक्षर लिपि में लिखकर उन्हें आग में पकाया जाता था।
भोजपत्र और ताड़पत्र: भारत में भोजवृक्ष की छाल (भोजपत्र) और ताड़ के पत्तों को सुखाकर स्याही से लिखा जाता था।
चर्मपत्र (Parchment): पश्चिमी देशों में भेड़-बकरियों की विशेष रूप से तैयार की गई पतली खाल पर लिखा जाता था।
पेपाइरस: मिस्र में नील नदी के किनारे उगने वाले सरकंडे (पेपाइरस) के पौधों से बने कागज जैसे पत्रों पर लिखा जाता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिट्टी की तख्तियों व भोजपत्र-ताड़पत्र का उल्लेख1 अंक
चर्मपत्र व पेपाइरस का उल्लेख1 अंक
प्र. 2 (निबंध से)
चीन के सम्राट शी हुआंग ती ने पुस्तकों को जलाने का क्रूर आदेश क्यों दिया था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
चीन का सम्राट शी हुआंग ती अत्यंत अहंकारी और निरंकुश था। वह चाहता था कि चीन का इतिहास केवल उसी के शासनकाल से गिना जाए और लोग उससे पहले के सम्राटों, दार्शनिकों (जैसे कन्फ्यूशियस) और उनकी गौरवशाली परंपराओं को पूरी तरह भूल जाएँ। अपने इस विकृत अहंकार और जनता को अज्ञानी बनाए रखने के लिए उसने देश की सभी प्राचीन पुस्तकों को आग में झोंकने का आदेश दिया था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
इतिहास को स्वयं से शुरू कराने का अहंकार1 अंक
पुरानी परंपराओं व विचारों को मिटाने का उद्देश्य1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
प्राचीन काल में जब छापेखाने (प्रिंटिंग प्रेस) नहीं थे, तब पुस्तकों को किस प्रकार तैयार और संरक्षित किया जाता था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
प्राचीन काल में भोजपत्रों, ताड़पत्रों और चर्मपत्रों पर विद्वान हाथों से सुंदर अक्षरों में पुस्तकें (पांडुलिपियाँ) लिखते थे। इन पांडुलिपियों को कीड़े-मकौड़ों और सीलन से बचाने के लिए विशेष प्रकार की औषधियों का लेप लगाकर लाल रेशमी कपड़ों में बांधकर सुरक्षित रखा जाता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ताड़पत्र/भोजपत्र पर हस्तलेखन और संरक्षण की विधि2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों का क्या महत्व था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
नालंदा और तक्षशिला के विशाल पुस्तकालय (जैसे नालंदा का 'धर्मगंज') विश्वभर के ज्ञान के प्रमुख केंद्र थे। यहाँ खगोल, गणित, आयुर्वेद, दर्शन और साहित्य की अमूल्य पांडुलिपियाँ संगृहीत थीं, जिनका अध्ययन करने चीन, तिब्बत और मध्य एशिया से हजारों विद्वान आते थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
विश्व ज्ञान केंद्र और अमूल्य पांडुलिपियों का भंडार2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Intellectual Freedom HOTS
कहा जाता है कि "आप किसी पुस्तक को जला सकते हैं, लेकिन उसमें लिखे विचारों को नहीं मार सकते।" सिकंदरिया, नालंदा और शी हुआंग ती की घटनाओं के आलोक में इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
विचारों की अमरता का विश्लेषण:
भौतिक बनाम आध्यात्मिक अस्तित्व: कागज, स्याही और चमड़ा भौतिक वस्तुएँ हैं जिन्हें आग जला सकती है, परंतु उनमें निहित ज्ञान, दर्शन, करुणा और सत्य मानव की चेतना का हिस्सा बन जाते हैं।
पुनर्जन्म: नालंदा और सिकंदरिया के जलने के बावजूद भारतीय उपनिषद, गणित, बौद्ध दर्शन और यूनानी विज्ञान मौखिक परंपरा (स्मृति) और अन्य देशों में अनुवादों के जरिए जीवित रहे और आज भी संसार को आलोकित कर रहे हैं। सत्य और ज्ञान अविनाशी हैं।
D8
पाठ 8: काबुलीवाला
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 8) — कहानी — रवींद्रनाथ ठाकुर | वात्सल्य की सार्वभौमिकता, सरहद पार का पिता-पुत्री प्रेम और मानवीय संवेदना
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित यह अमर कहानी 'काबुलीवाला' एक सुदूर अफगानिस्तान से आए मेवे बेचने वाले पठान रहमत और कोलकाता की एक चंचल पाँच वर्षीय नन्हीं बालिका मिनी के बीच के पवित्र और भावुक वात्सल्य संबंध का चित्रण करती है। मिनी दिनभर बातें करने वाली नटखट बच्ची थी। काबुलीवाला जब गली में बादाम-पिस्ता बेचने आता, तो मिनी पहले उसकी लंबी कद-काठी और झोले से डरती थी कि कहीं वह बच्चों को झोले में न भर ले। परंतु रहमत के प्यार और किशमिश-बादाम के उपहारों ने मिनी का डर दूर कर दिया और दोनों में गहरी मित्रता हो गई। वास्तव में रहमत अपने देश काबुल में अपनी छोटी बेटी को छोड़ आया था और वह मिनी में अपनी ही बेटी का अक्स देखता था। एक दिन उधारी के विवाद में एक व्यक्ति से झगड़ा हो जाने पर रहमत से छुरा चल गया और उसे कई वर्षों की जेल हो गई। वर्षों बाद जिस दिन वह जेल से छूटकर आया, वह सीधे मिनी से मिलने पहुँचा। संयोग से उसी दिन मिनी का विवाह था। मिनी दुल्हन के लाल जोड़े में सजी थी और अब वह बड़ी और लजीली हो चुकी थी। रहमत ने अपनी जेब से एक मैला-कुचैला कागज निकाला जिस पर उसकी अपनी नन्हीं बेटी के हाथ का नन्हा सा पंजा छपा हुआ था। मिनी के पिता (लेखक) ने देखा कि एक संपन्न बंगाली पिता और सुदूर काबुल के एक गरीब मेवे वाले पिता के हृदय में अपनी संतानों के प्रति एक जैसा ही अथाह वात्सल्य धड़क रहा है। लेखक ने अपनी बेटी के विवाह के खर्च में कटौती करके रहमत को पैसे दिए ताकि वह अपने देश जाकर अपनी बेटी से मिल सके।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पिता का वात्सल्य देश, भाषा, धर्म और संपन्नता की सीमाओं से परे एक सार्वभौमिक मानवीय सत्य है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कहानी से)
काबुलीवाला (रहमत) नन्हीं मिनी से इतना स्नेह क्यों करता था? उसके कुर्ते की जेब में कौन-सा अमूल्य कागज था?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) मिनी से स्नेह का कारण:
रहमत अपने वतन काबुल में अपनी एक नन्हीं बेटी को छोड़ आया था। मिनी की उम्र, उसकी मासूम बातें और हँसी बिल्कुल उसकी अपनी बेटी जैसी थीं। मिनी को बादाम-किशमिश खिलाते हुए और उसकी बातें सुनते हुए रहमत को ऐसा लगता था मानो वह अपनी ही बेटी के साथ खेल रहा हो। मिनी उसके अकेलेपन और वियोग के घाव पर मरहम लगाती थी।
(ख) जेब का अमूल्य कागज:
रहमत की जेब में एक अत्यंत पुराना, मुड़ा-तुड़ा और मैला कागज था, जिस पर कोई चित्र नहीं था, बल्कि कालिख से पुता हुआ उसकी अपनी नन्हीं बेटी के छोटे से हाथ का पंजा (छाप) अंकित था। यह कागज उसके लिए संसार की सबसे बड़ी अमूल्य निधि थी जिसे वह अपने सीने से लगाकर रखता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अपनी दूरस्थ बेटी की स्मृति व वात्सल्य का कारण1.5 अंक
बेटी के हाथ के पंजे की छाप वाले कागज का मार्मिक वर्णन1.5 अंक
प्र. 2 (कहानी से)
मिनी के पिता ने विवाह के उत्सव के खर्च में कटौती करके रहमत की सहायता क्यों की?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिनी के पिता ने विवाह के उत्सव (जैसे रोशनी और बाजे) के खर्च में कटौती करके रहमत को सौ रुपये का नोट दिया क्योंकि:
पितृत्व की साझी अनुभूति: जब लेखक ने रहमत के हाथ में उसकी बेटी के हाथ की छाप देखी, तो उन्हें लगा कि रहमत कोई विदेशी या अजनबी नहीं, बल्कि उन्हीं की तरह एक विवश और स्नेही पिता है जिसकी आँखें अपनी बेटी को देखने के लिए तरस रही हैं।
सच्चा मांगलिक कार्य: लेखक ने अनुभव किया कि विवाह में आडंबरपूर्ण रोशनी करने से कहीं अधिक पवित्र और मांगलिक कार्य एक बिछड़े हुए गरीब पिता को उसकी बेटी से मिलाने में सहायता करना है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दो पिताओं के समान हृदय की पहचान1.5 अंक
दिखावे की जगह मानवीय संवेदना को प्राथमिकता1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
रहमत (काबुलीवाला) मिनी को मेवे और बादाम क्यों भेंट किया करता था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
रहमत की अपने वतन अफगानिस्तान में मिनी की ही उम्र की एक छोटी बेटी थी, जिसकी याद उसे बहुत सताती थी। वह मिनी की चंचल बातों और हंसी में अपनी उसी बेटी की छवि देखता था, इसलिए वह वात्सल्य भाव से उसे पिस्ता-बादाम भेंट करता था।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
काबुलीवाले का पिता-सुलभ वात्सल्य और बेटी की याद2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
जेल से छूटने के बाद जब काबुलीवाला मिनी के घर पहुँचा, तो उसने वहाँ क्या दृश्य देखा?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
उसने देखा कि मिनी अब बड़ी हो चुकी थी और उस दिन उसका विवाह था। वह लाल रेशमी साड़ी और गहनों से सजी हुई एक लजीली दुल्हन बनी बैठी थी। यह देखकर काबुलीवाला स्तब्ध रह गया कि समय कितनी तेजी से बीत गया और उसकी अपनी बेटी भी इतनी ही बड़ी हो गई होगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिनी का विवाह और काबुलीवाले की भावुकता2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Universal Human Values HOTS
रवींद्रनाथ ठाकुर की कहानी "काबुलीवाला" यह सिद्ध करती है कि प्रेम और वात्सल्य की कोई राष्ट्रीयता या धर्म नहीं होता। आज के वैश्वीकृत युग में विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर यह कहानी क्या प्रभाव डालती है?
सार्वभौमिक मानवीय दृष्टिकोण:
रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रहों का अंत: शुरुआत में मिनी की माँ रहमत के पठान होने और उसके बड़े थैले को देखकर शक करती थी कि वह बच्चों को चुराता है। परंतु अंत में यह साबित हुआ कि बाहरी वेशभूषा और राष्ट्रीयता के पीछे एक अत्यंत पवित्र और कोमल मानवीय हृदय धड़कता है।
वसुधैव कुटुंबकम्: यह कहानी हमें सिखाती है कि सीमाओं, भाषाओं और धर्मों से ऊपर उठकर मनुष्यता का रिश्ता ही सबसे बड़ा सत्य है। एक पिता का दर्द और एक बच्चे की हँसी पूरी दुनिया में एक समान होती है।
D9
पाठ 9: विश्वेश्वरैया
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 9) — जीवनी — महान भारत रत्न अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया | समयबद्धता, राष्ट्र-निर्माण और कर्मयोग
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह प्रेरक जीवनी आधुनिक भारत के महानतम अभियंता (Engineer), नीति-निर्माता और 'भारत रत्न' से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (15 सितंबर 1861 – 14 अप्रैल 1962) के अनुकरणीय जीवन और राष्ट्र-निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर आधारित है। विश्वेश्वरैया का जन्म कर्नाटक के मुद्दनाहल्ली गाँव में हुआ था। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने पर उन्होंने घोर गरीबी में ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा पूरी की और पूना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने भारत में जल प्रबंधन, सिंचाई और बाँध निर्माण में युगांतरकारी कार्य किए। उन्होंने खड़कवासला बाँध में स्वचालित बाढ़-रोधी जल-कपाट (Automatic Sluice Gates) का आविष्कार किया, जिसे उन्होंने पेटेंट न कराकर राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने कावेरी नदी पर एशिया के तत्कालीन सबसे बड़े कृष्णराज सागर बाँध का निर्माण किया जिससे मैसूर हरा-भरा हो गया और वृंदावन गार्डन बना। मैसूर के दीवान रहते हुए उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय, भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, बैंक ऑफ मैसूर और कई तकनीकी संस्थानों की स्थापना की। वे समय की पाबंदी, पूर्ण ईमानदारी और सादगी के सजीव प्रतीक थे। 101 वर्ष की दीर्घायु तक वे सक्रिय रहे। उनके जन्मदिवस (15 सितंबर) को पूरे भारत में 'अभियंता दिवस' (Engineers' Day) के रूप में मनाया जाता है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: कठोर परिश्रम, ईमानदारी, समय की पाबंदी और तकनीकी ज्ञान का उपयोग केवल धनार्जन के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति के लिए करना चाहिए।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (जीवनी से)
विश्वेश्वरैया के जन्मदिवस (15 सितंबर) को भारत में किस रूप में मनाया जाता है और उनके प्रमुख तकनीकी योगदान क्या हैं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) अभियंता दिवस (Engineers' Day):
डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिवस (15 सितंबर) को पूरे देश में उनके महान इंजीनियरिंग कौशल और राष्ट्र-निर्माण के सम्मान में 'अभियंता दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
(ख) प्रमुख तकनीकी योगदान:
स्वचालित फाटकों का आविष्कार: उन्होंने बाँधों में बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने वाले 'ऑटोमैटिक गेट्स' का आविष्कार किया जिसे खड़कवासला और तिगरा बाँधों में लगाया गया।
कृष्णराज सागर बाँध: कावेरी नदी पर उस समय के भारत के सबसे विशाल बाँध और उसके साथ सुंदर 'वृंदावन गार्डन' का निर्माण करवाया।
हैदराबाद को बाढ़ से मुक्ति: मूसी नदी की विनाशकारी बाढ़ से हैदराबाद नगर को बचाने के लिए आधुनिक जल निकासी और सुरक्षा प्रणाली की रूपरेखा बनाई।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
15 सितंबर (अभियंता दिवस) का उल्लेख1 अंक
स्वचालित फाटकों व कृष्णराज सागर बाँध का विवरण1 अंक
हैदराबाद जल प्रबंधन व अन्य योगदान1 अंक
प्र. 2 (जीवनी से)
विश्वेश्वरैया के चारित्रिक गुणों (जैसे समय की पाबंदी और ईमानदारी) पर प्रकाश डालिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
विश्वेश्वरैया समय की पाबंदी और कर्तव्यनिष्ठा के अद्वितीय प्रतीक थे। वे अपने प्रत्येक कार्य के लिए एक निश्चित समय तय करते थे और कभी एक मिनट भी विलंब नहीं करते थे। उनकी ईमानदारी इतनी कठोर थी कि वे सरकारी काम के लिए सरकारी मोमबत्ती/पेन का उपयोग करते थे और व्यक्तिगत पत्र लिखने के लिए अपनी निजी मोमबत्ती जलाते थे। 100 वर्ष की आयु में भी वे बिना किसी सहारे के सीधे तनकर चलते थे और कार्य करते थे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
समय की कठोर पाबंदी का उदाहरण1 अंक
व्यक्तिगत बनाम सरकारी संसाधनों के उपयोग की ईमानदारी1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
सर एम. विश्वेश्वरैया को 'आधुनिक भारत के महान शिल्पी' क्यों कहा जाता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
विश्वेश्वरैया एक अद्वितीय सिविल इंजीनियर और योजनाकार थे। उन्होंने मैसूर में कृष्णराज सागर बाँध, स्वचालित जल कपाट (ऑटोमैटिक स्लुइस गेट्स), भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स तथा कई विश्वविद्यालयों और बैंकों की स्थापना करके भारत के औद्योगिक और कृषि विकास की मजबूत नींव रखी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
इंजीनियरिंग और राष्ट्र निर्माण में प्रमुख योगदान2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
विश्वेश्वरैया के जीवन से हमें समय-निष्ठा (पंक्चुअलिटी) और कर्तव्य-परायणता की क्या सीख मिलती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
वे अपने प्रत्येक कार्य को निश्चित समय पर पूरी निष्ठा से करते थे। 100 वर्ष की आयु में भी वे सक्रिय रहे और एक मिनट का भी अपव्यय नहीं किया। वे सरकारी और व्यक्तिगत काम के लिए अलग-अलग मोमबत्तियों का उपयोग करते थे, जो उनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
समय-निष्ठा और ईमानदारी का जीवन संदेश2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Professional Ethics HOTS
विश्वेश्वरैया ने अपने बनाए "स्वचालित जल-कपाट" (Automatic Gates) का पेटेंट अपने नाम न कराकर उसे राष्ट्र को निःशुल्क समर्पित कर दिया ताकि देश की नदियाँ और किसान लाभान्वित हो सकें। आज के व्यावसायिक युग में यह प्रसंग युवा इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को क्या प्रेरणा देता है?
व्यावसायिक नैतिकता एवं राष्ट्र-समर्पण:
ज्ञान का लोक-कल्याणकारी उपयोग: विश्वेश्वरैया यदि चाहते तो पेटेंट की रॉयल्टी से अकूत व्यक्तिगत संपत्ति कमा सकते थे, परंतु उन्होंने अपने ज्ञान और आविष्कार को जन-कल्याण और राष्ट्र-विकास का साधन माना।
राष्ट्र-प्रथम की भावना: आज के युवाओं को यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी बौद्धिक क्षमता और तकनीकी कौशल का प्रयोग केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारी पैकेज कमाने तक सीमित न रखकर देश की बुनियादी समस्याओं (जैसे जल संकट, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा) के समाधान हेतु करना चाहिए।
D10
पाठ 10: हम धरती के लाल
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 10) — कविता — शील | किसान और मजदूर का श्रम, धरती की उर्वरता और समता का गीत
देश हमारा, धरती अपनी,
हम धरती के लाल।
नया संसार बसाएँगे,
नया इंसान बनाएँगे।
सौ-सौ स्वर्ग उतर आएँगे
सूरज सोना बरसाएगा,
हम पसीने से सींचेंगे
धरती पर सोना उगेगा।
हम न किसी से डरने वाले,
हम न किसी के आगे झुकने वाले।
हम श्रम की जय-जयकार करेंगे,
हाथों से तकदीर गढ़ेंगे।
— शील
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कवि शील द्वारा रचित यह प्रेरणादायी कविता 'हम धरती के लाल' भारत के मेहनतकश किसानों और श्रमजीवियों के स्वाभिमान, उनकी श्रम-शक्ति और एक नए समतामूलक संसार के निर्माण के संकल्प का जयघोष करती है। कवि कहते हैं कि यह देश हमारा है और यह पावन धरती हमारी अपनी माता है। हम इस धरती के सच्चे सपूत (लाल) हैं। हम अपने कठिन शारीरिक परिश्रम और पसीने से इस धरती को सींचकर अन्न रूपी सोना उपजाएँगे। हम किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएँगे और न ही किसी शोषक के आगे झुकेंगे। हम अपने ही हाथों से अपने देश का नया भविष्य गढ़ेंगे और श्रम की प्रतिष्ठा स्थापित करेंगे।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: श्रम ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। किसान और मजदूर ही देश के सच्चे भाग्य-विधाता हैं।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
कवि ने "धरती के लाल" किसे कहा है और वे धरती पर सोना कैसे उगाएँगे?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'धरती के लाल' का तात्पर्य:
कवि ने 'धरती के लाल' देश के परिश्रमी किसानों, मजदूरों और श्रमजीवियों को कहा है, जो दिन-रात धूप, सर्दी और बरसात की परवाह किए बिना खेतों और कारखानों में पसीना बहाते हैं।
(ख) सोना उगाने का उपाय:
वे किसी चमत्कार या जादू से नहीं, बल्कि अपने कठोर परिश्रम और पसीने से धरती को सींचकर, हल चलाकर और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लहलहाती हुई फसलों (अन्न रूपी सोने) का उत्पादन करेंगे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
किसानों व श्रमजीवियों का सही उल्लेख1.5 अंक
पसीने व परिश्रम द्वारा अन्न रूपी सोना उगाने का स्पष्टीकरण1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 3
कविता 'हम धरती के लाल' में देश के विकास का श्रेय किन्हें दिया गया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कविता में देश के विकास और प्रगति का सच्चा श्रेय देश के कर्मठ किसानों, मजदूरों, कारीगरों और नवयुवकों को दिया गया है, जो खेतों और कारखानों में अपना पसीना बहाकर देश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
किसान और मजदूर को विकास का आधार बताना2 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
'नया विहान लाएँगे' पंक्ति से कवि का क्या तात्पर्य है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
'नया विहान लाएँगे' का अर्थ है देश में अज्ञानता, गरीबी, असमानता और आलस्य के अंधकार को मिटाकर खुशहाली, न्याय, शिक्षा और वैज्ञानिक प्रगति का एक नया सवेरा स्थापित करेंगे।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नवजागरण और प्रगति का नया सवेरा स्पष्ट करना2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Dignity of Labour HOTS
आज के तकनीकी और सेवा-क्षेत्र (IT/Service Sector) के युग में कृषि और शारीरिक श्रम के प्रति युवाओं का आकर्षण कम हो रहा है। "हम धरती के लाल" कविता के आलोक में खाद्य सुरक्षा और श्रम की महत्ता पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
खाद्य सुरक्षा एवं श्रम की महत्ता:
मूल आवश्यकता अन्न है: तकनीक और कंप्यूटर हमारे जीवन को सुगम बना सकते हैं, परंतु भूख मिटाने के लिए भोजन केवल किसान के पसीने से ही पैदा होता है। कृषि ही मानव अस्तित्व का मूल आधार है।
श्रम का सम्मान: समाज को किसानों और मजदूरों को हीन दृष्टि से देखने के बजाय उन्हें सर्वोच्च सम्मान और उनकी उपज का उचित मूल्य देना चाहिए।
D11
पाठ 11: पोंगल
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 11) — सांस्कृतिक निबंध | तमिलनाडु का पावन कृषि पर्व, सूर्योपासना और पशु-प्रेम
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह सांस्कृतिक निबंध दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के सबसे प्रमुख, भव्य और पावन चार दिवसीय कृषि उत्सव 'पोंगल' (Pongal) का विस्तृत और सजीव वर्णन प्रस्तुत करता है। यह पर्व प्रतिवर्ष मध्य जनवरी (मकर संक्रांति के समय) में नई धान की फसल कटने की खुशी में मनाया जाता है। तमिल में 'पोंगल' का अर्थ होता है—'उबलना' या 'उफनना'। यह त्योहार चार दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है:
1. पहला दिन (भोगी पोंगल): यह वर्षा के देवता इंद्र के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। इस दिन घर की पुरानी और अनुपयोगी वस्तुओं को अलाव (आग) में जलाकर स्वच्छता और नई शुरुआत की जाती है।
2. दूसरा दिन (सूर्य पोंगल): यह मुख्य पोंगल है। इस दिन नए मिट्टी के मटके में दूध, गुड़ और नया चावल डालकर खुले आँगन में पकाया जाता है। जब दूध उबलकर बाहर गिरता है, तो सभी खुशी से 'पोंगल-ओ-पोंगल' का उद्घोष करते हैं। यह खीर सबसे पहले सूर्यदेव को अर्पित की जाती है।
3. तीसरा दिन (मट्टू पोंगल): यह दिन खेती में किसानों के सच्चे साथी पशुओं (बैलों और गायों) को समर्पित है। बैलों के सींगों को रंगा जाता है, उन्हें नहलाकर मालाएँ पहनाई जाती हैं और पोंगल खिलाया जाता है। इसी दिन तमिलनाडु का प्रसिद्ध पारंपरिक खेल 'जल्लीकट्टू' (सांडों को वश में करने का खेल) आयोजित होता है।
4. चौथा दिन (काणुम पोंगल): इस दिन परिवार के सभी सदस्य मित्रों, सगे-संबंधियों से मिलने जाते हैं, हल्दी के पत्तों पर भोजन रखते हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: प्रकृति, सूर्य, वर्षा और कृषि में सहयोगी मूक पशुओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन ही भारतीय संस्कृति की महानता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (निबंध से)
पोंगल पर्व कितने दिनों तक मनाया जाता है? प्रत्येक दिन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
4 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पोंगल पर्व चार दिनों तक अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है:
भोगी पोंगल (पहला दिन): इंद्रदेव की पूजा की जाती है और पुरानी वस्तुओं को जलाकर घर की शुद्धि की जाती है।
सूर्य पोंगल (दूसरा दिन - मुख्य पर्व): नए चावल, दूध और गुड़ का 'पोंगल' बनाकर सूर्यदेव को भोग लगाया जाता है तथा 'पोंगल-ओ-पोंगल' का उद्घोष किया जाता है।
मट्टू पोंगल (तीसरा दिन): हल जोतने वाले बैलों और गायों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है तथा पारंपरिक जल्लीकट्टू खेल होता है।
काणुम पोंगल (चौथा दिन): पारिवारिक मिलन, रिश्तेदारों के घर जाने और बड़ों का आशीर्वाद लेने का दिन होता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
चारों दिनों के नाम व विशिष्ट पूजा/आयोजन (1 अंक प्रत्येक दिन)4 अंक
प्र. 2 (निबंध से)
पोंगल का शाब्दिक अर्थ क्या है और "पोंगल-ओ-पोंगल" का नारा कब और क्यों लगाया जाता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
'पोंगल' तमिल भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है—'उबलना' या 'ऊपर उठना'। सूर्य पोंगल के दिन जब नए चावल और दूध से भरी हांडी उबलकर चूल्हे से बाहर गिरने लगती है, तो यह माना जाता है कि घर में सुख, समृद्धि और संपन्नता का प्रवाह इसी प्रकार उफनता रहेगा। इस शुभ क्षण पर सभी परिवारजन तालियाँ बजाकर शंखनाद करते हुए 'पोंगल-ओ-पोंगल' का आनंदमयी जयघोष करते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'उबलना' का शाब्दिक अर्थ1 अंक
दूध उबलने पर समृद्धि के प्रतीक के रूप में नारे का कारण1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
पोंगल का त्योहार तमिलनाडु में किस उपलक्ष्य में मनाया जाता है और इसके चार दिन कौन-से हैं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पोंगल नई फसल (धान और गन्ने) के कटने की खुशी और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। इसके चार दिन हैं: 1. भोगी पोंगल, 2. सूर्य पोंगल (मुख्य पोंगल), 3. मट्टू पोंगल (पशुओं का पर्व), और 4. कान्नुम पोंगल।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
फसल उत्सव और चारों दिनों के नाम2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
मट्टू पोंगल के दिन बैलों और गायों की विशेष रूप से पूजा क्यों की जाती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
बैल और गाय कृषि कार्य में किसान के सबसे बड़े सहयोगी और जीवनदाता होते हैं। वे खेतों की जुताई करते हैं और दूध देते हैं। इसलिए किसान उनके सींगों को रंगते हैं, गले में घंटियाँ बांधते हैं और उनकी पूजा करके उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
पशुओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का भाव2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Cultural Unity HOTS
पोंगल का त्योहार उत्तर भारत के "मकर संक्रांति", पंजाब के "लोहड़ी" और असम के "माघ बिहू" से किस प्रकार साम्य (समानता) रखता है? यह भारत की किस राष्ट्रीय विशेषता को दर्शाता है?
विविधता में एकता का दर्शन:
फसल कटाई का साझा उल्लास: चारों त्योहार मध्य जनवरी में सूर्य के उत्तरायण होने और नई धान/गेहूँ की फसल घर आने की खुशी में मनाए जाते हैं। सभी में अग्नि, सूर्य और नए अन्न (गुड़, तिल, चावल) की पूजा होती है।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत: नाम और भाषाएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन किसान के दिल की धड़कन, प्रकृति के प्रति आभार और उत्सव की मूल भावना पूरे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक समान है। यह भारत की 'विविधता में अटूट सांस्कृतिक एकता' का सजीव प्रमाण है।
D12
पाठ 12: शहीद झलकारीबाई
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 12) — ऐतिहासिक एकांकी | महारानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल वीरांगना, असीम स्वामिभक्ति और बलिदान
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह ऐतिहासिक एकांकी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की अमर दलित वीरांगना झलकारीबाई की अनुपम वीरता, स्वामिभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को समर्पित है। झलकारीबाई का चेहरा-मोहरा, कद-काठी और हाव-भाव झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई से आश्चर्यजनक रूप से मिलता-जुलता था। वह रानी की महिला सेना 'दुर्गा दल' की सेनापति थी और तीरंदाजी, घुड़सवारी व तोप चलाने में अत्यंत निपुण थी। जब 1858 में अंग्रेज जनरल ह्यूरोज की विशाल सेना ने झाँसी के किले को चारों ओर से घेर लिया और गद्दार दूल्हाजू ने ओरछा दरवाजा खोल दिया, तो झाँसी के पतन का खतरा पैदा हो गया। उस विषम घड़ी में झलकारीबाई ने रानी लक्ष्मीबाई के प्राणों और झाँसी के भविष्य को बचाने की ऐतिहासिक योजना बनाई। उसने रानी से प्रार्थना की कि वे अपने नन्हे दत्तक पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बाँधकर सुरक्षित कालपी निकल जाएँ। झलकारीबाई ने स्वयं रानी लक्ष्मीबाई की राजसी वेशभूषा और मुकुट धारण किया और घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजों की मुख्य छावनी पर भीषण प्रहार कर दिया। अंग्रेज जनरल ह्यूरोज और उसकी सेना भ्रमित हो गई कि यही असली रानी लक्ष्मीबाई हैं। उन्होंने झलकारीबाई को घेरकर बंदी बना लिया। इस दौरान असली रानी लक्ष्मीबाई सुरक्षित किले से बाहर निकल गईं। जब तक अंग्रेजों को झलकारीबाई की वास्तविक पहचान का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बंदी बनाए जाने पर भी इस निर्भीक वीरांगना ने सीना तानकर कहा—"तुम मुझे फाँसी दे सकते हो, परंतु झाँसी की स्वतंत्रता की ज्वाला को कभी नहीं बुझा सकते!"
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: स्वामिभक्ति, देशप्रेम और सर्वोच्च बलिदान किसी वर्ग या जाति की सीमा में नहीं बँधते। झलकारीबाई का त्याग इतिहास में अमर है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (एकांकी से)
झलकारीबाई ने रानी लक्ष्मीबाई के प्राणों की रक्षा करने के लिए क्या अद्भुत योजना बनाई थी?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
झलकारीबाई की योजना अत्यंत साहसिक, चतुर और आत्म-बलिदानी थी:
शारीरिक समानता का लाभ: झलकारीबाई का चेहरा और कद-काठी हूबहू रानी लक्ष्मीबाई जैसी थी।
रानी का वेश धारण करना: उसने रानी लक्ष्मीबाई के राजसी वस्त्र, पगड़ी और तलवार धारण की ताकि अंग्रेज भ्रमित हो जाएँ।
अंग्रेजों का ध्यान भटकाना: उसने रानी को पीछे के रास्ते से सुरक्षित कालपी जाने का मार्ग प्रशस्त किया और स्वयं रानी बनकर अंग्रेजों के मुख्य मोर्चे पर हमला बोल दिया। अंग्रेज समझ बैठे कि उन्होंने असली रानी को घेर लिया है, जिससे रानी लक्ष्मीबाई सकुशल बच निकलीं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
शारीरिक समानता का उल्लेख1 अंक
रानी के वस्त्र धारण कर मुख्य मोर्चे पर प्रहार की योजना1 अंक
रानी को सुरक्षित निकालने में सफलता का निष्कर्ष1 अंक
प्र. 2 (एकांकी से)
अंग्रेज जनरल ह्यूरोज के सामने पकड़े जाने पर झलकारीबाई ने क्या निर्भीक उत्तर दिया था?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब जनरल ह्यूरोज को पता चला कि यह असली रानी नहीं बल्कि उनकी हमशक्ल झलकारीबाई है, तो वह स्तब्ध रह गया। उसने क्रोध में पूछा कि तुम जानती हो कि इसका दंड क्या होगा? झलकारीबाई ने निडरता से हँसते हुए कहा—"मुझे मृत्यु या फाँसी का कोई भय नहीं है। मेरा उद्देश्य पूरा हो चुका है, मेरी रानी सुरक्षित निकल चुकी हैं। तुम मुझे मार सकते हो, पर भारत की आजादी की लड़ाई को नहीं रोक सकते!" उसकी वीरता देखकर अंग्रेज अफसर भी नतमस्तक हो गए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
फाँसी के भय से मुक्त निर्भीक उत्तर1 अंक
रानी की सुरक्षा पर गर्व व देशभक्ति का भाव1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
झलकारीबाई कौन थीं और उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साथ क्या भूमिका निभाई?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
झलकारीबाई झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना (दुर्गा दल) की एक अत्यंत वीर सेनापति थीं। उनका चेहरा और कद-काठी रानी लक्ष्मीबाई से बिल्कुल मिलती-जुलती थी, जिसका उपयोग उन्होंने युद्ध में अंग्रेजों को भ्रमित करने के लिए किया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
झलकारीबाई का परिचय और दुर्गा दल में स्थान2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
झलकारीबाई ने अंग्रेजों को भ्रम में डालकर रानी लक्ष्मीबाई को किले से कैसे सुरक्षित निकाला?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
जब अंग्रेज सेना ने झांसी के किले को चारों तरफ से घेर लिया, तो झलकारीबाई ने रानी की वेशभूषा धारण की और स्वयं को 'झांसी की रानी' बताकर अंग्रेजों के मुख्य मोर्चे पर भयंकर युद्ध शुरू कर दिया। अंग्रेज जनरल उन्हें असली रानी समझकर उलझा रहा, जबकि असली रानी लक्ष्मीबाई किले से सुरक्षित बाहर निकल गईं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
आत्मबलिदान और रानी को सुरक्षित निकालने की रणनीति2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Historical Justice HOTS
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में झलकारीबाई जैसी कई गुमनाम वीरांगनाओं और योद्धाओं ने सर्वोच्च बलिदान दिया, परंतु लंबे समय तक इतिहास की मुख्यधारा की पुस्तकों में उन्हें उचित स्थान नहीं मिला। इस संदर्भ में वंचित वर्गों के स्वतंत्रता सेनानियों के पुनर्मूल्यांकन पर अपने विचार लिखिए।
ऐतिहासिक पुनर्मूल्यांकन एवं सामाजिक न्याय:
इतिहास का लोकतंत्रीकरण: भारत की आजादी की लड़ाई केवल राजा-रानियों ने नहीं लड़ी थी, बल्कि उसमें दलित, पिछड़े, आदिवासी और सामान्य किसानों-मजदूरों का भी बराबर का रक्त बहा था। झलकारीबाई (कोरी समाज) इसका अमर प्रतीक हैं।
राष्ट्रीय गौरव का विस्तार: ऐसी वीरांगनाओं के योगदान को पाठ्यक्रमों, स्मारकों और नाटकों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह जान सकें कि भारत का स्वाधीनता संग्राम सामाजिक समरसता और सामूहिक बलिदान की महान गाथा था।
D13
पाठ 13: नृत्यांगना सुधा चंद्रन
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 13) — प्रेरक आत्मकथा | कृत्रिम पाँव से भरतनाट्यम का कीर्तिमान, अदम्य जिजीविषा और संकल्प की विजय
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह अत्यंत प्रेरणादायी पाठ प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं अभिनेत्री सुधा चंद्रन के जीवन के उस अकल्पनीय संघर्ष को उजागर करता है, जिसने सिद्ध कर दिया कि शारीरिक अक्षमता मनुष्य के संकल्प से बड़ी कभी नहीं हो सकती। सुधा चंद्रन का जन्म केरल के एक कला-प्रेमी परिवार में हुआ था। उन्होंने मात्र तीन वर्ष की आयु से भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया था। मई 1981 में, जब वे मात्र 16 वर्ष की थीं, तमिलनाडु में एक भीषण बस दुर्घटना में उनके दाहिने पैर में गंभीर चोट आ गई। डॉक्टरों की लापरवाही से पैर में गैंग्रीन (सड़न) फैल गया और उनकी जान बचाने के लिए घुटने के नीचे से उनका दाहिना पैर काटना पड़ा। एक नृत्यांगना के लिए पैर का कटना जीवन के अंत के समान था। सभी ने मान लिया कि सुधा का जीवन अब व्हीलचेयर तक सीमित रहेगा। परंतु सुधा ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रसिद्ध डॉक्टर पी. के. सेठी (जयपुर फुट के आविष्कारक) से संपर्क किया और 'जयपुर फुट' (कृत्रिम पाँव) लगवाया। कृत्रिम पाँव से नाचना अत्यंत दर्दनाक था; पैर से खून रिसता था, ताल पर पैर पटकने पर असहनीय टीस उठती थी। परंतु सुधा ने अपने गुरु और माता-पिता के संबल से दिन-रात कड़ा अभ्यास किया। 28 जनवरी 1984 को मुंबई में उन्होंने कृत्रिम पाँव के साथ अपना ऐतिहासिक सार्वजनिक नृत्य प्रदर्शन किया। पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। उनकी इस अदम्य विजय पर 'मयूरी' और 'नाचे मयूरी' जैसी प्रसिद्ध फिल्में भी बनीं।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: असफलता या शारीरिक दिव्यांगता कभी भाग्य का अंतिम फैसला नहीं हो सकती। अदम्य इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (पाठ से)
दुर्घटना के बाद सुधा चंद्रन का दायाँ पैर क्यों काटना पड़ा? इस विपत्ति ने उनके जीवन को कैसे प्रभावित किया?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) पैर काटने का कारण:
मई 1981 में बस दुर्घटना में सुधा के दाहिने पैर में गहरा घाव हो गया था। स्थानीय अस्पताल में प्लास्टर बाँधते समय असावधानीवश संक्रमण हो गया। पैर में भयंकर 'गैंग्रीन' (ऊतकों का सड़ जाना) फैल गया। यदि पैर न काटा जाता तो जहर पूरे शरीर में फैलकर उनकी जान ले लेता, इसलिए डॉक्टरों को घुटने के नीचे से उनका पैर काटना पड़ा।
(ख) जीवन पर प्रभाव:
एक उभरती हुई प्रतिभावान भरतनाट्यम नृत्यांगना के लिए पैर खो देना उसके पूरे कला-जीवन और सपनों की हत्या जैसा था। समाज और रिश्तेदारों को लगा कि वे अब जीवन भर एक लाचार दिव्यांग बनकर रह जाएँगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दुर्घटना व गैंग्रीन संक्रमण के कारण पैर काटने का प्रसंग1.5 अंक
नृत्य जीवन के समाप्त होने की मानसिक त्रासदी का उल्लेख1.5 अंक
प्र. 2 (पाठ से)
सुधा चंद्रन ने कृत्रिम पाँव (जयपुर फुट) के सहारे दोबारा नृत्य मंच पर वापसी कैसे की?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
सुधा चंद्रन की वापसी संसार के इतिहास में अदम्य इच्छाशक्ति का अद्भुत उदाहरण है:
जयपुर फुट लगवाना: उन्होंने डॉ. पी. के. सेठी से विशेष रूप से नृत्य के लिए अनुकूलित रबड़ और एल्युमिनियम का कृत्रिम पैर तैयार करवाया।
कठोर और दर्दनाक अभ्यास: जब वे घुँघरू बाँधकर पैर पटकती थीं, तो कटे हुए पैर के सिरे से खून बहने लगता था और हड्डियों में भयंकर दर्द होता था। परंतु उन्होंने दर्द की परवाह किए बिना अपनी साधना जारी रखी।
ऐतिहासिक मंच प्रदर्शन: 28 जनवरी 1984 को उन्होंने मुंबई में खचाखच भरे हॉल में दो घंटे का शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर संसार को स्तब्ध कर दिया और साबित किया कि हौसले के आगे कोई बाधा नहीं टिक सकती।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
जयपुर फुट का निर्माण व डॉ. सेठी का सहयोग1 अंक
खून रिसने व असहनीय दर्द के बावजूद निरंतर अभ्यास1 अंक
ऐतिहासिक मंच प्रदर्शन व सफलता1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
सुधा चंद्रन के जीवन में कौन-सी भयानक दुर्घटना घटी और उन्होंने उसका सामना कैसे किया?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
16 वर्ष की आयु में एक बस दुर्घटना में सुधा चंद्रन का दाहिना पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। संक्रमण फैलने के कारण डॉक्टरों को उनका दायाँ पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। सुधा ने इस अपार आघात के आगे घुटने नहीं टेके और 'जयपुर फुट' (कृत्रिम पैर) लगाकर पुनः नृत्य का कठोर अभ्यास शुरू किया।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
दुर्घटना, पैर कटना और कृत्रिम पैर से पुनः अभ्यास2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
सुधा चंद्रन की सफलता से दिव्यांग व्यक्तियों और समाज को क्या संदेश मिलता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि शारीरिक अक्षमता कभी भी प्रतिभा की सीमा नहीं हो सकती। यदि मनुष्य में अटूट इच्छाशक्ति, लगन और आत्मविश्वास हो, तो वह कठिन से कठिन बाधाओं को पार करके सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच सकता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास का प्रेरणादायक संदेश2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Resilience & Motivation HOTS
सुधा चंद्रन का एक प्रसिद्ध कथन है— "जिंदगी में कोई भी असफलता अंतिम नहीं होती, जब तक आप खुद हार न मान लें।" आज के विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव, असफलता या किसी आघात से उबरने के लिए उनके जीवन से क्या मार्गदर्शन मिलता है?
सहनशीलता (Resilience) एवं प्रेरणादायक दृष्टिकोण:
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत: वास्तविक दिव्यांगता शरीर में नहीं, बल्कि हमारे कमजोर विचारों और निराशा में होती है। यदि मन में दृढ़ विश्वास हो, तो कोई भी शारीरिक या मानसिक आघात हमारे सपनों को रोक नहीं सकता।
संकट को अवसर में बदलना: सुधा चंद्रन ने रोने या भाग्य को कोसने में समय व्यर्थ नहीं किया, बल्कि वैज्ञानिक उपायों (जयपुर फुट) और कठोर परिश्रम से अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। विद्यार्थियों को असफलताओं से डरने के बजाय उनसे सीखकर दुगुने उत्साह से आगे बढ़ना चाहिए।
D14
पाठ 14: पानी और धूप
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 14) — कविता — सुभद्रा कुमारी चौहान | बाल मनोविज्ञान, धूप-छाँव की अठखेलियाँ और माँ-बेटे का स्नेह
अभी-अभी थी धूप, बरसने
लगा कहाँ से यह पानी?
किसने फोड़ घड़े बादल के
की है इतनी शैतानी?
सूरज ने क्यों बंद कर लिया
अपने घर का दरवाजा?
उसकी माँ ने भी क्या उसको
बुला लिया कहकर 'आ जा'?
जोर-जोर से गरज रहे हैं
बादल हैं किसके काका?
किसको डाँट रहे हैं, किसने
कहना नहीं सुना माँ का?
— सुभद्रा कुमारी चौहान
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
राष्ट्रीय चेतना और बाल साहित्य की अमर कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह नटखट और चंचल कविता 'पानी और धूप' एक नन्हे बालक की आँखों से मौसम के अचानक बदलने और बादलों के गरजने का अद्भुत बाल-सुलभ चित्रण करती है। बालक देखता है कि अभी एक क्षण पहले तेज धूप खिली थी, और अचानक मूसलाधार बारिश होने लगी। बालक अपनी माँ से मासूमियत भरे प्रश्न पूछता है—"माँ! आसमान में बादलों के घड़े फोड़कर यह शैतानी किसने कर डाली? क्या सूरज की माँ ने भी उसे अपने घर के भीतर बुलाकर किवाड़ बंद कर लिए हैं, जैसे तुम मुझे बुला लेती हो? और यह जो बादल जोर-जोर से गरज रहे हैं, वे किसके काका हैं? वे किसे डाँट रहे हैं, जिसने शायद अपनी माँ का कहना नहीं माना होगा?"
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: बाल-मन की असीम कल्पनाशीलता, प्रकृति की घटनाओं को अपने पारिवारिक परिवेश से जोड़कर देखना और माँ-संतान का शाश्वत प्रेम।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
बच्चे ने अचानक वर्षा होने पर क्या-क्या कल्पनाएँ कीं?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
अचानक धूप के बीच पानी बरसने पर बालक ने निम्नलिखित मासूम और सुंदर कल्पनाएँ कीं:
किसी नटखट बच्चे ने आसमान में बादलों के पानी से भरे बड़े-बड़े मटके (घड़े) फोड़कर शैतानी कर दी है।
सूरज की माँ ने भी उसे धूप में बाहर खेलने से मना करके घर के अंदर बुला लिया है और दरवाजा बंद कर दिया है।
आकाश में गरजते हुए बादल किसी के गुस्से वाले 'काका' हैं, जो किसी ऐसे बच्चे को जोर-जोर से डाँट रहे हैं जिसने अपनी माँ की बात नहीं मानी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बादल के घड़े फोड़ने की कल्पना1 अंक
सूरज की माँ द्वारा दरवाजा बंद करने का भाव1 अंक
बादल रूपी काका द्वारा डाँटने की कल्पना1 अंक
अभ्यास प्रश्न 3
कविता 'पानी और धूप' में धूप और बारिश के एक साथ होने पर बच्चे के मन में क्या कल्पना उठती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
धूप और अचानक बारिश को एक साथ देखकर बच्चे को लगता है कि आकाश में बादलों के बीच कोई शरारत चल रही है या फिर किसी ने पानी से भरा बड़ा घड़ा फोड़ दिया है अथवा आसमान में सूरज और बादलों की अनोखी शादी हो रही है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
बाल-सुलभ कल्पनाशीलता का सुंदर वर्णन2 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने इस कविता में प्रकृति के किस रूप का चित्रण किया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवयित्री ने बाल-मनोविज्ञान के चश्मे से प्रकृति के अत्यंत चंचल, जीवंत और कौतूहलपूर्ण रूप का चित्रण किया है, जहाँ धूप और पानी का मिलन बच्चे के हृदय में विस्मय और आनंद का संचार करता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
प्रकृति के चंचल और कौतूहलपूर्ण रूप का निरूपण2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Child Imagination HOTS
बच्चा बादलों की गड़गड़ाहट और बारिश को अपने घर-परिवार के रिश्तों (माँ, काका, डाँट, दरवाजा बंद करना) से जोड़कर देखता है। यह बाल मनोविज्ञान की किस विशेषता को उजागर करता है?
बाल मनोविज्ञान का विश्लेषण:
आत्म-केंद्रीयता एवं आत्मीयता (Ego-centrism): बच्चे बाहरी दुनिया और प्रकृति की जटिल वैज्ञानिक घटनाओं को भी अपने जाने-पहचाने घरेलू अनुभवों और रिश्तों के चश्मे से ही समझते हैं।
प्रकृति में सजीवता: बच्चों के लिए बादल, सूरज और तारे निर्जीव नहीं हैं, बल्कि उनके जैसे ही खेलते-कूदते, शरारत करते और अपनी माँ से डाँट खाने वाले सजीव मित्र हैं।
D15
पाठ 15: गीत
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 15) — कविता — केदारनाथ अग्रवाल | प्रकृति का अप्रतिम सौंदर्य, हरी-भरी धरती और जीवन की उमंग
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
प्रगतिशील युग के प्रमुख कवि केदारनाथ अग्रवाल द्वारा रचित यह कविता 'गीत' ग्रामीण प्रकृति के निश्छल, माटी की सौंधी महक और लहलहाते खेतों के उल्लास को संगीतमय शब्दों में पिरोती है। कवि प्रकृति के उन्मुक्त सौंदर्य को देखकर आनंद-विभोर हो उठते हैं। हवा के झोंकों से जब सरसों के पीले फूल झूमते हैं, तो ऐसा लगता है मानो धरती ने पीली चुनरी ओढ़ रखी हो। चिड़ियों की मधुर चहचहाहट, नदी की कलकल ध्वनि और वनों की हरीतिमा मिलकर जीवन का एक सुंदर राग अलाप रही हैं। यह कविता मनुष्य को अपनी कृत्रिम बनावट को छोड़कर प्रकृति के सान्निध्य में आकर जीवन के सच्चे उल्लास और शांति को अनुभव करने का निमंत्रण देती है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: प्रकृति सौंदर्य का अनूठा स्रोत है। माटी से जुड़कर ही मनुष्य का जीवन सच्चा, सुंदर और उल्लासमय बन सकता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (कविता से)
कवि केदारनाथ अग्रवाल ने प्रकृति के किन-किन रूपों का सुंदर चित्रण इस गीत में किया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवि ने ग्रामीण अंचल की लहलहाती फसलों, सरसों के पीले फूलों के सौंदर्य, सुबह की ताजी सुगंधित बयार, नदियों की बहती जलधारा और पक्षियों के कलरव का अत्यंत स्वाभाविक और चित्रात्मक वर्णन किया है। प्रकृति का यह रूप मनुष्य के मन के सारे संताप हरकर उसमें नवजीवन का उल्लास भर देता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
फसलों, सरसों के फूलों व बयार का उल्लेख1 अंक
नदी व पक्षियों के कलरव से उत्पन्न मानसिक शांति का भाव1 अंक
अभ्यास प्रश्न 3
कविता 'गीत' में कवि जीवन की तुलना किससे करता है और क्यों?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कवि जीवन की तुलना एक निरंतर प्रवाहित होने वाली सरिता (नदी) और उल्लासमय गीत से करता है। जिस प्रकार नदी चट्टानों और बाधाओं को चीरती हुई आगे बढ़ती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी कठिनाइयों में मुस्कुराते हुए जीवन पथ पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
नदी और गीत से जीवन की तुलना का तर्क2 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
'कर्म ही जीवन का सच्चा संगीत है'—इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
आलस्य और निराशा जीवन को नीरस बना देते हैं, जबकि लक्ष्य के प्रति किया गया निस्वार्थ कर्म मनुष्य के जीवन में उत्साह, सार्थकता और आत्म-संतोष का संगीत भर देता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
कर्म की सार्थकता और आत्म-संतोष का भाव2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Nature Appreciation HOTS
आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन और बंद कमरों में व्यतीत करती है। "गीत" कविता हमें प्रकृति से प्रत्यक्ष जुड़ने का क्या संदेश देती है?
प्रकृति से जुड़ाव का संदेश:
डिजिटल उपकरणों की आभासी दुनिया (Virtual World) हमें तनाव, एकाकीपन और अवसाद की ओर धकेलती है।
पेड़ों की छाया, ताजी हवा और खुले खेतों में समय बिताने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव पल भर में विलीन हो जाता है। प्रकृति सबसे बड़ी प्राकृतिक चिकित्सक (Healer) है।
D16
पाठ 16: मिट्टी की मूर्तियाँ
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 16) — शिल्पकला निबंध | भारतीय मृण्मूर्तिकला (Terracotta), लोक संस्कृति और कुम्हारों का श्रम
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह ज्ञानवर्धक निबंध भारत की सदियों पुरानी समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा 'मृण्मूर्तिकला' (टेराकोटा - Terracotta) और मिट्टी के खिलौने व मूर्तियाँ बनाने वाले ग्रामीण कुम्हारों (प्रजापतियों) के कला-कौशल पर प्रकाश डालता है। सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा और मोहनजोदड़ो) से लेकर आज तक मिट्टी की मूर्तियाँ भारतीय संस्कृति की आत्मा रही हैं। हड़प्पा से मिली 'मातृदेवी' की मिट्टी की मूर्ति और खिलौना बैलगाड़ी इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी यह कला हजारों वर्ष पुरानी है। लेखक बताते हैं कि मिट्टी की मूर्ति बनाना एक अत्यंत धैर्यपूर्ण और वैज्ञानिक प्रक्रिया है—चिकनी मिट्टी को छानना, कूटकर गूँथना, चाक पर आकार देना, साँचे में ढालना, धूप में सुखाना और फिर आंवा (भट्ठी) में विशेष तापमान पर पकाना। पकने के बाद उस पर प्राकृतिक रंगों से आँखें, वस्त्र और आभूषण चित्रित किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल का 'बांकुरा घोड़ा', गोरखपुर की टेराकोटा कला और तमिलनाडु के विशाल मिट्टी के रक्षक देव (अय्यनार घोड़े) विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। परंतु आज प्लास्टिक और चीनी मिट्टी (प्लास्टिक/पीओपी) के सस्ते रासायनिक खिलौनों के आने से इस पर्यावरण-अनुकूल पारंपरिक कला और इसके कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: पारंपरिक लोककलाएँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा हेतु मिट्टी के हस्तशिल्प को बढ़ावा देना आवश्यक है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (निबंध से)
मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने की चरणबद्ध प्रक्रिया क्या है? संक्षेप में लिखिए।
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिट्टी की मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ बनाने के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
मिट्टी की तैयारी: नदी या तालाब की महीन चिकनी मिट्टी लाई जाती है, उसे सुखाकर कूटा जाता है और छानकर कंकड़-पत्थर अलग किए जाते हैं। फिर पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूँथा जाता है।
आकार देना व ढलाई: गूँथी हुई मिट्टी को चाक पर अथवा लकड़ी और मिट्टी के साँचों (Moulds) में दबाकर मूर्तियों का रूप दिया जाता है तथा हाथों से बारीक नक्काशी की जाती है।
सुखाना व पकाना: मूर्तियों को पहले छाया में और फिर धूप में सुखाया जाता है। सूखने के बाद उन्हें 'आंवा' (देसी भट्ठी) में उपलों और भूसे की आग में लाल होने तक पकाया जाता है।
रंग-रोगन: पकने के बाद उन पर प्राकृतिक या चमकीले रंगों से श्रृंगार और रेखांकन किया जाता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिट्टी छानने व गूँथने का पहला चरण1 अंक
साँचे में ढालने व आंवा में पकाने का दूसरा चरण1 अंक
सुखाने व रंग-रोगन का तीसरा चरण1 अंक
प्र. 2 (निबंध से)
प्लास्टिक और प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों की तुलना में मिट्टी की मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए श्रेष्ठ क्यों हैं?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
मिट्टी की मूर्तियाँ 100% जैव-अपघटनीय (Biodegradable) होती हैं। जब त्योहारों (जैसे गणेश उत्सव या दुर्गा पूजा) के बाद इन्हें जल में विसर्जित किया जाता है, तो ये पुनः प्राकृतिक मिट्टी में घुलकर विलीन हो जाती हैं और जल को प्रदूषित नहीं करतीं। इसके विपरीत, पीओपी (POP) और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियाँ वर्षों तक पानी में नहीं गलतीं और नदियों व जलाशयों के जल को विषैला बनाकर जलीय जीवों की मृत्यु का कारण बनती हैं।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिट्टी के पर्यावरण-अनुकूल व घुलनशील होने का तर्क1 अंक
POP व रासायनिक रंगों के प्रदूषण का दुष्प्रभाव1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने की कला (टेराकोटा) भारतीय लोक संस्कृति में क्यों महत्वपूर्ण है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
टेराकोटा हमारी प्राचीनतम लोक कलाओं में से एक है जो सिंधु घाटी सभ्यता से चली आ रही है। यह ग्रामीण शिल्पकारों की कल्पनाशीलता, प्रकृति-प्रेम और धार्मिक आस्था को सजीव रूप प्रदान करती है तथा पर्यावरण के अनुकूल होती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ऐतिहासिक महत्व और पर्यावरण-अनुकूल लोककला2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
कुम्हार मिट्टी को गूंथने से लेकर पकाने तक किन-किन चरणों से गुजरता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
कुम्हार सबसे पहले बारीक चिकनी मिट्टी छानता है, उसे पानी में भिगोकर पैरों और हाथों से गूंथता है। फिर चाक पर आकार देकर धूप में सुखाता है और अंत में भट्टी (आँवे) में उच्च तापमान पर पकाकर मजबूत और आकर्षक बनाता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
मिट्टी तैयार करने, चाक पर गढ़ने और पकाने की प्रक्रिया2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Vocal for Local HOTS
दीपावली और अन्य त्योहारों पर चीनी प्लास्टिक की लड़ियों और खिलौनों के बजाय स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये और मूर्तियाँ खरीदना "आत्मनिर्भर भारत" और पर्यावरण संरक्षण को कैसे सुदृढ़ करता है?
'लोकल फॉर वोकल' एवं आर्थिक-पर्यावरणीय परिप्रेक्ष्य:
पारंपरिक कारीगरों का आर्थिक संबल: जब हम मिट्टी के दीये और बर्तन खरीदते हैं, तो हमारा पैसा सीधे उस गरीब कुम्हार के घर पहुँचता है जो महीनों से हाड़-तोड़ मेहनत कर रहा होता है। इससे उनकी कला जीवित रहती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
शून्य कचरा (Zero Waste): मिट्टी के दीये पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते, जबकि प्लास्टिक का कचरा सदियों तक पृथ्वी पर रहकर मृदा और वायु प्रदूषण बढ़ाता है। मिट्टी अपनाकर हम अपनी संस्कृति और प्रकृति दोनों की रक्षा करते हैं।
D17
पाठ 17: मौत का पहाड़
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 17) — रोमांचक यात्रा वृत्तांत | दुर्गम बर्फीली चोटियों का आरोहण, साहस और जीवन-मृत्यु का संघर्ष
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
यह रोमांचक यात्रा वृत्तांत पर्वतारोहियों द्वारा हिमालय की एक अत्यंत खतरनाक, खड़ी और फिसलन भरी बर्फीली चोटी को फतह करने के अदम्य साहस और जीवन-मृत्यु के संघर्ष का दिल दहला देने वाला दस्तावेज है। इस पर्वत को स्थानीय लोग 'मौत का पहाड़' कहते थे क्योंकि वहाँ अचानक आने वाले बर्फीले तूफान (Blizzards), जानलेवा दरारें (Crevasses) और ऑक्सीजन की भयंकर कमी के कारण कई पर्वतारोही अपनी जान गँवा चुके थे। लेखक और उनके साथी दल ने रस्सी, कुल्हाड़ी (आइस एक्स) और ऑक्सीजन सिलेंडरों के साथ इस दुर्गम अभियान की शुरुआत की। रास्ते में एक स्थान पर बर्फ की एक विशाल शिला खिसक गई और लेखक के एक साथी का पैर फिसल गया। वह सीधे गहरी खाई में लटक गया। दल के सदस्यों ने परस्पर अटूट विश्वास और सूझबूझ से रस्सियों को कसकर पकड़ा और अथक प्रयास से अपने साथी को सुरक्षित ऊपर खींच लिया। शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान और जमती हुई हड्डियों के बीच जब यह साहसी दल अंततः चोटी के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचा और वहाँ तिरंगा फहराया, तो उनकी सारी थकान और भय अवर्णनीय गर्व और आत्मिक विजय के आनंद में बदल गया।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: साहस, टीम भावना (परस्पर विश्वास) और निरंतर प्रयास से मनुष्य प्रकृति की सबसे विकराल चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त कर सकता है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (यात्रा वृत्तांत से)
उस पर्वत को "मौत का पहाड़" क्यों कहा जाता था? पर्वतारोहियों को किन-किन भयंकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) 'मौत का पहाड़' कहे जाने का कारण:
उस पर्वत की चढ़ाई लगभग 90 डिग्री की सीधी खड़ी ढलान वाली थी। वहाँ अप्रत्याशित रूप से भयानक बर्फीले तूफान आते थे, बर्फ की अदृश्य गहरी दरारें (क्रेवास) थीं और अब तक वहाँ जाने वाले कई अनुभवी पर्वतारोही जिंदा वापस नहीं लौटे थे।
(ख) प्रमुख कठिनाइयाँ:
शून्य से बहुत नीचे (-30°C) का तापमान जिससे हाथ-पैर सुन्न हो जाते थे और फ्रॉस्टबाइट का खतरा था।
ऊँचाई पर हवा का दबाव कम होने से साँस लेने में भयंकर कठिनाई और ऑक्सीजन की कमी।
कदम-कदम पर बर्फ की चट्टानों का खिसकना (हिमस्खलन) और खाई में गिरने का निरंतर भय।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
'मौत का पहाड़' नामकरण का कारण1.5 अंक
तापमान, ऑक्सीजन व हिमस्खलन की कठिनाइयों का उल्लेख1.5 अंक
अभ्यास प्रश्न 3
पहाड़ पर चढ़ते समय पर्वतारोहियों को किन-किन मुख्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
पर्वतारोहियों को ऑक्सीजन की कमी, अत्यंत कम तापमान और बर्फीली हवाएं, गहरी खाइयाँ, हिमस्खलन (एवलांच) तथा खड़ी, फिसलन भरी चट्टानों जैसी जानलेवा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
ऑक्सीजन, ठंड और हिमस्खलन की प्रमुख चुनौतियाँ2 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
पाठ 'मौत का पहाड़' हमें संकट के समय किस प्रकार का व्यवहार करने की सीख देता है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
यह पाठ हमें सिखाता है कि संकट के समय घबराना नहीं चाहिए। धैर्य, पारस्परिक सहयोग, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता से सबसे विकट और खतरनाक परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
धैर्य, सहयोग और त्वरित निर्णय की सीख2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Teamwork & Grit HOTS
पर्वतारोहण में एक पर्वतारोही की जान दूसरे पर्वतारोही की रस्सी और सतर्कता पर निर्भर होती है। इस वृत्तांत के आधार पर सिद्ध कीजिए कि किसी भी बड़े और जोखिम भरे मिशन में "टीम भावना" (Teamwork) का क्या महत्व होता है।
टीम भावना एवं परस्पर विश्वास का महत्व:
पारस्परिक निर्भरता: जब एक साथी खाई में लटका, तो बाकी साथियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे ऊपर खींचा। पर्वतारोहण सिखाता है कि सफलता व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक होती है।
अहंकार का त्याग: एक छोटी सी लापरवाही पूरे दल की मौत का कारण बन सकती है। कठिन लक्ष्यों को साधने के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ को भूलकर एक-दूसरे का संबल बनना ही सच्ची विजय की कुंजी है।
D18
पाठ 18: हम होंगे कामयाब एक दिन
📜 दूर्वा भाग - 2 (पाठ 18) — प्रेरक गीत — गिरिजा कुमार माथुर | अगाध आत्मविश्वास, विश्व-शांति, निर्भयता और उज्ज्वल भविष्य की आशा
होंगे कामयाब, होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हो, हो, मन में है विश्वास,
पूरा है विश्वास,
हम होंगे कामयाब एक दिन॥
होगी शांति चारों ओर,
होगी शांति चारों ओर,
होगी शांति चारों ओर एक दिन।
हो, हो, मन में है विश्वास,
पूरा है विश्वास,
होगी शांति चारों ओर एक दिन॥
हम चलेंगे साथ-साथ,
डाल हाथों में हाथ,
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।
हो, हो, मन में है विश्वास,
पूरा है विश्वास,
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन॥
नहीं डर किसी का आज,
नहीं डर किसी का आज,
नहीं डर किसी का आज के दिन।
हो, हो, मन में है विश्वास,
पूरा है विश्वास,
नहीं डर किसी का आज के दिन॥
— गिरिजा कुमार माथुर (मूल अंग्रेजी गीत "We Shall Overcome" का भावानुवाद)
पाठ का सार एवं केंद्रीय भाव (Summary & Core Themes)
कवि गिरिजा कुमार माथुर द्वारा प्रसिद्ध अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के अमर गीत 'We Shall Overcome' का यह हिंदी रूपांतरण 'हम होंगे कामयाब एक दिन' संसार के सबसे लोकप्रिय, ओजस्वी और ऊर्जावान गीतों में से एक है। यह गीत मनुष्य के अंतर्मन में आशा, अटूट आत्मविश्वास और एकता का संचार करता है। गीतकार कहते हैं कि हमारे रास्ते में चाहे जितनी भी बाधाएँ, असफलताएँ, असमानता या अंधेरा क्यों न हो, हमारे मन में यह दृढ़ विश्वास है कि एक दिन हम अवश्य सफल और विजयी होंगे। चारों ओर युद्ध और नफरत के स्थान पर शांति का साम्राज्य होगा। हम सभी मानव जाति बिना किसी जाति, धर्म या रंग के भेदभाव के हाथों में हाथ डालकर कदम से कदम मिलाकर साथ चलेंगे। जब सत्य और न्याय हमारे साथ हैं, तो आज हमें किसी भी सत्ता, अन्याय या भय से डरने की आवश्यकता नहीं है। यह गीत सकारात्मकता और सामूहिक विजय की अमर ध्वनि है।
🎯 केंद्रीय भाव व जीवन-मूल्य: अटूट आत्मविश्वास, एकता, निर्भयता और आशावादी दृष्टिकोण से मानव जाति हर संकट पर विजय पाकर एक सुंदर और शांतिमय संसार का निर्माण कर सकती है।
✍️ पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न-उत्तर एवं भाषा की बात (व्याकरण)
प्र. 1 (गीत से)
"मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास / हम होंगे कामयाब एक दिन"—कवि को किस बात का दृढ़ विश्वास है और यह विश्वास क्यों आवश्यक है?
3 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
(क) विश्वास का विषय:
कवि को यह अटूट और अटल विश्वास है कि मनुष्य का संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। एक दिन समाज से शोषण, अज्ञानता, अशांति और भय का अंधकार मिटेगा और हम निश्चित रूप से सफलता, विश्व-शांति और समानता के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।
(ख) विश्वास की आवश्यकता:
जीवन में आशा और विश्वास ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। यदि मन में संदेह या निराशा आ जाए, तो मनुष्य प्रयास करना छोड़ देता है। 'आत्मविश्वास' ही वह आंतरिक शक्ति है जो कठिन से कठिन मार्ग पर भी हमें अडिग बनाए रखती है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
सफलता, शांति व समता प्राप्ति के विश्वास का उल्लेख1.5 अंक
निराशा दूर करने व संघर्ष जारी रखने हेतु विश्वास की अनिवार्यता1.5 अंक
प्र. 2 (गीत से)
"हाथों में हाथ डालकर साथ-साथ चलने" से कवि का क्या तात्पर्य है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
'हाथों में हाथ डालकर चलने' से कवि का तात्पर्य पारस्परिक एकता, सामाजिक समरसता और बंधुत्व (भाईचारे) से है। जब समाज के सभी नागरिक धर्म, जाति, भाषा और ऊँच-नीच के भेदभाव को भुलाकर एकजुट होकर किसी राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो संसार की कोई भी शक्ति उन्हें पराजित नहीं कर सकती। एकता ही विजय का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
एकता, भाईचारे व भेदभाव मिटाने का भाव1 अंक
सामूहिक शक्ति से लक्ष्य प्राप्ति का निष्कर्ष1 अंक
अभ्यास प्रश्न 4
'हम होंगे कामयाब एक दिन' गीत में 'मन में है विश्वास' पंक्ति से क्या प्रेरणा मिलती है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
यह पंक्ति मनुष्य के भीतर अटूट आत्मबल और आशावादिता का संचार करती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि हमारे मन में अपने उद्देश्य के प्रति सच्चा विश्वास है तो सफलता अवश्य मिलेगी।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
अटूट आत्मबल और आशावादिता का निरूपण2 अंक
अभ्यास प्रश्न 5
गीत में 'हम चलेंगे साथ-साथ' द्वारा समाज को क्या संदेश दिया गया है?
2 अंक
💡 सम्पूर्ण आदर्श उत्तर (Model Solution)
यह पंक्ति सामाजिक समरसता, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश देती है। जब समाज के सभी वर्ग जाति, धर्म और भेद-भाव भुलाकर हाथ में हाथ डालकर एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी एक सशक्त और शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण होगा।
📋 CBSE अंक विभाजन (Step-by-Step Marking Scheme 2026-27)
एकता, बंधुत्व और शांति का वैश्विक संदेश2 अंक
💡 योग्यता-आधारित प्रश्न एवं मूल्यपरक विश्लेषण (CBSE Competency-Based / HOTS 2026-27)Applied Hindi
Competency-Based Positive Mindset HOTS
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, युद्धों और महामारियों के वैश्विक संकटों से जूझ रही है, "हम होंगे कामयाब एक दिन" गीत निराशा के घने बादलों में आशा की किरण कैसे जगाता है?
वैश्विक आशावाद एवं सकारात्मक मानसिकता:
सकारात्मक ऊर्जा का मंत्र: यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मानव जाति की अदम्य जिजीविषा का सामूहिक गान है। यह याद दिलाता है कि इतिहास में मनुष्य ने प्लेग, विश्वयुद्धों और प्राकृतिक आपदाओं पर सदैव अपनी सामूहिक इच्छाशक्ति और विज्ञान से विजय पाई है।
भय पर विजय: 'नहीं डर किसी का आज' पंक्ति हमें सिखाती है कि घबराने के बजाय संकट का एकजुट होकर सामना करना चाहिए। जब तक हमारे भीतर उम्मीद और एकता जीवित है, तब तक भविष्य हमेशा उज्ज्वल और सुरक्षित रहेगा।