Chapter 9 of 18
Chapter 9: प्रकृति पर्व – फूलदेई
उत्तराखंड का लोक पर्व, बसंत का स्वागत, बुरांश के फूल, बाल उमंग और सांस्कृतिक विरासत | CBSE Session 2026–27
Core Pedagogical Competencies & Concepts
- फूलदेई: उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं का पावन लोकपर्व, जो चैत्र मास की संक्रांति पर मनाया जाता है।
- बालकों का उल्लास: बच्चे टोकरियों में बुरांश, सरसों और बासिंग के जंगली फूल चुनकर लाते हैं।
- दहली पूजन: 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार' लोकगीत गाते हुए हर घर की देहरी पर फूल सजाना।
- बदले में बड़ों से गुड़, चावल और आशीर्वाद (उपहार) प्राप्त करना।
All Textbook Exercises & In-Text Tasks (16 Questions)
100% Complete Ingestion
Q1
सांस्कृतिक बोध • बातचीत के लिए
फूलदेई त्योहार भारत के किस राज्य में मनाया जाता है? इस त्योहार में बच्चे क्या-क्या करते हैं?
[3 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
उत्तर:
1. राज्य: फूलदेई त्योहार उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों (गढ़वाल और कुमाऊं) में बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है।
2. बच्चों की गतिविधियाँ: बच्चे सुबह-सवेरे उठकर जंगलों और खेतों से बुरांश, सरसों, आडू और बासिंग के रंग-बिरंगे फूल चुनकर लाते हैं और गाँव के हर घर की देहरी पर सजाते हैं। वे मंगल गीत गाते हैं और गृहस्वामिनी उन्हें गुड़, चावल तथा पैसे भेंट करती है।
1. राज्य: फूलदेई त्योहार उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों (गढ़वाल और कुमाऊं) में बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है।
2. बच्चों की गतिविधियाँ: बच्चे सुबह-सवेरे उठकर जंगलों और खेतों से बुरांश, सरसों, आडू और बासिंग के रंग-बिरंगे फूल चुनकर लाते हैं और गाँव के हर घर की देहरी पर सजाते हैं। वे मंगल गीत गाते हैं और गृहस्वामिनी उन्हें गुड़, चावल तथा पैसे भेंट करती है।
CBSE Step-by-Step Marking Scheme
उत्तराखंड राज्य का सही उल्लेख
1.0 M
फूल चुनना, देहरी सजाना और मंगल गीत गाने का विवरण
2.0 M
Q2
लोकगीत का अर्थ • भाषा ज्ञान
'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार' — इस लोकगीत की पंक्ति का क्या अर्थ है?
[3 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
अर्थ:
• फूलदेई: देहरी पर खिले हुए फूलों जैसी सुंदरता बनी रहे।
• छम्मा देई: हे ईश्वर! हम सभी को क्षमा और सुख-शांति प्रदान करें।
• दैणी द्वार: यह द्वार (घर) सदा सबके लिए मंगलकारी और शुभ हो।
• भर भकार: आपके घर के अन्न के भंडार (अनाज की कोठियाँ) सदा भरे रहें।
• फूलदेई: देहरी पर खिले हुए फूलों जैसी सुंदरता बनी रहे।
• छम्मा देई: हे ईश्वर! हम सभी को क्षमा और सुख-शांति प्रदान करें।
• दैणी द्वार: यह द्वार (घर) सदा सबके लिए मंगलकारी और शुभ हो।
• भर भकार: आपके घर के अन्न के भंडार (अनाज की कोठियाँ) सदा भरे रहें।
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पंक्ति के चारों खंडों का सही व सुंदर भावार्थ
3.0 M
Q3
लोक संस्कृति • प्रकृति पर्व फूलदेई
उत्तराखंड के लोकपर्व 'फूलदेई' के बारे में तीन मुख्य बातें लिखिए।
[3 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
फूलदेई पर्व की विशेषताएं:
1. वसंत ऋतु का स्वागत: यह पर्व चैत्र मास की संक्रांति को वसंत ऋतु और नए फूलों के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।
2. बच्चों का उल्लास: छोटे बच्चे सुबह-सुबह जंगलों से बुरांश, प्योंली और आड़ू के ताजे फूल चुनकर लाते हैं और गाँव के प्रत्येक घर की देहरी (दरवाजे) पर सजाते हैं।
3. आशीर्वाद व उपहार: बच्चे 'फूलदेई, छम्मा देई' गाकर सबकी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और घर की गृहणियाँ बच्चों को गुड़, चावल और उपहार देती हैं।
1. वसंत ऋतु का स्वागत: यह पर्व चैत्र मास की संक्रांति को वसंत ऋतु और नए फूलों के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।
2. बच्चों का उल्लास: छोटे बच्चे सुबह-सुबह जंगलों से बुरांश, प्योंली और आड़ू के ताजे फूल चुनकर लाते हैं और गाँव के प्रत्येक घर की देहरी (दरवाजे) पर सजाते हैं।
3. आशीर्वाद व उपहार: बच्चे 'फूलदेई, छम्मा देई' गाकर सबकी सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और घर की गृहणियाँ बच्चों को गुड़, चावल और उपहार देती हैं।
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वसंत ऋतु, बच्चों द्वारा देहरी पर फूल सजाने और लोकगीत का उल्लेख
3.0 अंक
Q4
वसंत ऋतु के फूल • प्रकृति ज्ञान
वसंत ऋतु में खिलने वाले किन्हीं तीन सुंदर फूलों के नाम लिखिए।
[3 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
वसंत के प्रमुख फूल:
1. बुरांश (लाल पहाड़ी फूल)
2. प्योंली (पीला जंगली फूल)
3. गेंदा व सरसों के पीले फूल
1. बुरांश (लाल पहाड़ी फूल)
2. प्योंली (पीला जंगली फूल)
3. गेंदा व सरसों के पीले फूल
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तीन प्राकृतिक वसंत कालीन फूलों के नाम
3.0 अंक
Q5
लोकगीत की समझ • 'फूलदेई, छम्मा देई'
फूलदेई के लोकगीत की पंक्तियों का क्या भावार्थ है?
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
भावार्थ:
• इस लोकगीत में बच्चे ईश्वर और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सभी घरों की देहरी (चौखट) सदा अन्न और धन से भरी रहे, घर में सुख-शांति आए और सभी लोग निरोगी रहें।
• इस लोकगीत में बच्चे ईश्वर और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सभी घरों की देहरी (चौखट) सदा अन्न और धन से भरी रहे, घर में सुख-शांति आए और सभी लोग निरोगी रहें।
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सुख, समृद्धि और अन्न-धन की मंगलकामना का भाव स्पष्ट करना
2.0 अंक
Q6
पर्यावरण के प्रति आभार
प्रकृति पर्व हमें प्रकृति के प्रति किस प्रकार कृतज्ञ होना सिखाते हैं?
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
नैतिक व सांस्कृतिक संदेश:
• प्रकृति पर्व हमें याद दिलाते हैं कि नदियाँ, पर्वत, पेड़-पौधे और फूल हमारे सच्चे मित्र हैं। हमें बिना सोचे-समझे पेड़ों को नहीं काटना चाहिए, बल्कि प्रकृति का आभार मानते हुए उनका संरक्षण करना चाहिए।
• प्रकृति पर्व हमें याद दिलाते हैं कि नदियाँ, पर्वत, पेड़-पौधे और फूल हमारे सच्चे मित्र हैं। हमें बिना सोचे-समझे पेड़ों को नहीं काटना चाहिए, बल्कि प्रकृति का आभार मानते हुए उनका संरक्षण करना चाहिए।
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प्रकृति संरक्षण और कृतज्ञता का सुंदर विचार
2.0 अंक
Q7
कविता से • मुख्य भाव
पाठ 9 ('प्रकृति पर्व – फूलदेई') में कवि ने प्रकृति और आस-पास के परिवेश से हमें क्या सीखने की प्रेरणा दी है?
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
उत्तर:
इस पाठ के माध्यम से कवि हमें सिखाते हैं कि प्रकृति का प्रत्येक जीव और तत्व हमें निस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई करना, निरंतर कर्मशील रहना और सदा मुस्कराते हुए जीवन जीना सिखाता है।
इस पाठ के माध्यम से कवि हमें सिखाते हैं कि प्रकृति का प्रत्येक जीव और तत्व हमें निस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई करना, निरंतर कर्मशील रहना और सदा मुस्कराते हुए जीवन जीना सिखाता है।
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प्रकृति से सीखने का संदेश
1 अंक
निस्वार्थ सेवा और कर्मठता
1 अंक
Q8
बातचीत के लिए • मौखिक अभिव्यक्ति
'प्रकृति पर्व – फूलदेई' को पढ़कर आपके मन में क्या विचार आते हैं? अपने शब्दों में दो पंक्तियों में बताइए।
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
उत्तर:
यह पाठ हमें सिखाता है कि हमें अपने आस-पास के सभी जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के प्रति दया और प्रेम का भाव रखना चाहिए। मिलकर काम करने से कोई भी कठिन कार्य आसान हो जाता है।
यह पाठ हमें सिखाता है कि हमें अपने आस-पास के सभी जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के प्रति दया और प्रेम का भाव रखना चाहिए। मिलकर काम करने से कोई भी कठिन कार्य आसान हो जाता है।
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मौखिक अभिव्यक्ति व विचार
2 अंक
Q9
सोचो और लिखो • विचार मंथन
यदि आपको 'प्रकृति पर्व – फूलदेई' के मुख्य पात्र से मिलने का अवसर मिले, तो आप उससे कौन-सा प्रश्न पूछना चाहेंगे और क्यों?
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
उत्तर:
मैं उनसे पूछूँगा कि कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते समय वे हमेशा धैर्य और आत्मविश्वास कैसे बनाए रखते हैं, ताकि मैं भी अपने जीवन में वैसा ही धैर्य सीख सकूँ।
मैं उनसे पूछूँगा कि कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते समय वे हमेशा धैर्य और आत्मविश्वास कैसे बनाए रखते हैं, ताकि मैं भी अपने जीवन में वैसा ही धैर्य सीख सकूँ।
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उचित प्रश्न व कारण
2 अंक
Q10
भाषा की बात • विलोम शब्द
दिए गए शब्दों के विलोम (उलटे अर्थ वाले) शब्द लिखिए:
(क) मित्र
(ख) दिन
(ग) सरल
(घ) सच्चा।
[2 Marks]
(क) मित्र
(ख) दिन
(ग) सरल
(घ) सच्चा।
✅ Step-by-Step Solution & Working
विलोम शब्द:
• (क) मित्र — शत्रु
• (ख) दिन — रात
• (ग) सरल — कठिन
• (घ) सच्चा — झूठा।
• (क) मित्र — शत्रु
• (ख) दिन — रात
• (ग) सरल — कठिन
• (घ) सच्चा — झूठा।
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शत्रु, रात, कठिन, झूठा
2 अंक
Q11
भाषा की बात • पर्यायवाची शब्द
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द लिखिए:
(क) पेड़
(ख) पानी
(ग) हवा।
[3 Marks]
(क) पेड़
(ख) पानी
(ग) हवा।
✅ Step-by-Step Solution & Working
पर्यायवाची शब्द:
• (क) पेड़ — वृक्ष, तरु
• (ख) पानी — जल, नीर
• (ग) हवा — पवन, वायु।
• (क) पेड़ — वृक्ष, तरु
• (ख) पानी — जल, नीर
• (ग) हवा — पवन, वायु।
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वृक्ष/तरु
1 अंक
जल/नीर
1 अंक
पवन/वायु
1 अंक
Q12
भाषा की बात • तुकबंदी (समान लय वाले शब्द)
कविता से मिलते-जुलते लय वाले (तुकांत) शब्द खोजकर लिखिए:
(क) गाता
(ख) पानी
(ग) डाली।
[3 Marks]
(क) गाता
(ख) पानी
(ग) डाली।
✅ Step-by-Step Solution & Working
तुकांत शब्द:
• (क) गाता — भाता, पाता, जाता
• (ख) पानी — रानी, नानी, कहानी
• (ग) डाली — माली, ताली, लाली।
• (क) गाता — भाता, पाता, जाता
• (ख) पानी — रानी, नानी, कहानी
• (ग) डाली — माली, ताली, लाली।
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गाता-भाता
1 अंक
पानी-रानी
1 अंक
डाली-माली
1 अंक
Q13
शब्दों का खेल • संज्ञा शब्द छाँटना
दिए गए वाक्य में से नाम वाले शब्द (संज्ञा) छाँटकर लिखिए: 'रोहन और मीना बगीचे में मीठे आम खा रहे हैं।'
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
संज्ञा शब्द (नाम वाले शब्द):
1. रोहन (व्यक्ति का नाम)
2. मीना (व्यक्ति का नाम)
3. बगीचे (स्थान का नाम)
4. आम (वस्तु/फल का नाम)।
1. रोहन (व्यक्ति का नाम)
2. मीना (व्यक्ति का नाम)
3. बगीचे (स्थान का नाम)
4. आम (वस्तु/फल का नाम)।
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रोहन, मीना, बगीचा, आम सही पहचाना
2 अंक
Q14
खोजें और जानें • पर्यावरण और परिवेश
अपने घर या विद्यालय के आस-पास पाए जाने वाले दो पक्षियों या पेड़ों के नाम और उनकी कोई एक विशेषता लिखिए।
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
अवलोकन:
1. नीम का पेड़: इसकी पत्तियाँ कड़वी होती हैं लेकिन हवा को शुद्ध करती हैं और दवाइयों के काम आती हैं।
2. गौरैया (चिड़िया): यह छोटी, फुर्तीली चिड़िया है जो तिनके जुटाकर पेड़ों और रोशनदान में घोंसला बनाती है।
1. नीम का पेड़: इसकी पत्तियाँ कड़वी होती हैं लेकिन हवा को शुद्ध करती हैं और दवाइयों के काम आती हैं।
2. गौरैया (चिड़िया): यह छोटी, फुर्तीली चिड़िया है जो तिनके जुटाकर पेड़ों और रोशनदान में घोंसला बनाती है।
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दो पक्षियों/पेड़ों के नाम व विशेषता
2 अंक
Q15
वाक्य रचना • सही क्रम में लिखना
शब्दों को सही क्रम में रखकर सार्थक वाक्य बनाइए: 'है / गाती / कोयल / मीठी / तान'
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
सही वाक्य:
कोयल मीठी तान गाती है।
कोयल मीठी तान गाती है।
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सार्थक वाक्य रचना व पूर्णविराम
2 अंक
Q16
मूल्यपरक प्रश्न • जीवन मूल्य
पाठ 'प्रकृति पर्व – फूलदेई' से हमें अपने जीवन में कौन-सा अच्छा गुण अपनाने की सीख मिलती है?
[2 Marks]
✅ Step-by-Step Solution & Working
जीवन मूल्य:
इस पाठ से हमें सदा सच बोलने, बड़ों का आदर करने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा मिलती है।
इस पाठ से हमें सदा सच बोलने, बड़ों का आदर करने और पर्यावरण की रक्षा करने की प्रेरणा मिलती है।
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सद्गुण व नैतिक सीख
2 अंक
🌟 NEP 2020 Competency-Based Case Study
लोक संस्कृति और पर्यावरण का नाता
भारत के अधिकांश पारंपरिक त्योहार (जैसे फूलदेई, पोंगल, बैसाखी, ओणम) प्रकृति, फसलों और ऋतुओं से जुड़े हैं।
Analytical Task: प्रकृति आधारित त्योहार हमें आधुनिक प्लास्टिक व प्रदूषण भरी जीवनशैली से दूर कर पर्यावरण की रक्षा करना कैसे सिखाते हैं?
Evaluation & Model Answer:
1. ये पर्व हमें सिखाते हैं कि हमारा जीवन मिट्टी, नदियों, पेड़ों और फसलों पर निर्भर है, इसलिए उनका सम्मान करना चाहिए।
2. प्राकृतिक फूलों और पत्तियों से सजे ये त्योहार प्लास्टिक कचरे को रोकते हैं और नई पीढ़ी को प्रकृति प्रेमी बनाते हैं।
2. प्राकृतिक फूलों और पत्तियों से सजे ये त्योहार प्लास्टिक कचरे को रोकते हैं और नई पीढ़ी को प्रकृति प्रेमी बनाते हैं।
Rubric: 1.5M प्रकृति पर मानव निर्भरता की सीख + 1.5M पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का महत्व।